radha bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मुझे कुछ तो बता प्यारे कारण रुसवाई का लिरिक्स(Mujhe Ye To Bata Pyare Karan Ruswayi Ka Lyrics in Hindi)

श्री कृष्ण भक्ति भजन 'मुझे कुछ तो बता प्यारे कारण रुसवाई का' का संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ और भावार्थ पढ़ें। भक्तिपूर्ण हृदय से प्रभु का स्मरण करें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

मुझे कुछ तो बता प्यारे कारण रुसवाई का लिरिक्स
मुश्किल है सहन करना यह दर्द जुदाई का
मुझे कुछ तो बता प्यारे कारण रुसवाई का
मुश्किल है सहन करना यह दर्द जुदाई का
मुझे कुछ तो बता प्यारे कारण रुसवाई का
झुटे तेरे वादों पे ऐतबार किया हमने ,
तेरी कृपा को सुनकर ही अरे प्यार किया हमने
कन्हैया , कृपा की ना होती जो आदत तुम्हारी,
तो सुन्ही ही रहती अदालत तुम्हारी
ना हम होते मुलजिम ना तुम होते हकीम
ना घर घर में इबादत तुम्हारी ।
गरीबों की दुनिया है आबाद तुमसे ,
गरीबों से है बादशाहत तुम्हारी ।
तुम्हारी ही उल्फत के दृगबिंदू है ये,
तुम्हे सोपते है अमानत तुम्हारी
झुटे तेरे वादों पे ऐतबार किया हमने ,
तेरी कृपा को सुनकर ही अरे प्यार किया हमने।
क्या यही सिला मिलता इस प्रीत लगाई का,
क्या यही सिला मिलता इस प्रीत लगाई का,
मुझे कुछ तो बता प्यारे कारण रुसवाई का ।
अगर नज़र में अवगुण थे तो क्यों अपनाया था,
यह प्रीत ना निभ सकती पहले न बताया था ।
ए कन्हैया , सब कुछ लेके परीक्षा है लेते,
अब कोनसी राह चले संसारी,
अरे ऐसा मोहक जाल बिछाए ,
भैया थक कर रह गई बुद्धि बेचारी।
सोच समझ के सौदा कीजिए,
यह नन्द का लाल बड़ा व्यापारी ।
अगर नज़र में अवगुण थे तो क्यों अपनाया था,
यह प्रीत ना निभ सकती पहले न बताया था ।
मौका तो दिया होता मेरे मीत सफाई का,
मुझे कुछ तो बता पयारे कारण रुसवाई का
तुम सा कोई मिल जाता ,
तो धूंड लिए होते ,
क्यों प्यार तुम्हे करते,
क्यों तेरे लिए रोते ।
कज ते घर बाहर व्यथा हम क्यों
अगर मोहन तेरा इशारा ना होता,
रहते हम भी भव सागर में अगर पहले किसी को उबारा ना होता ।
इस प्रेम के पंथ में
सर देकर भी छूटकारा ना होता ।
हम रोते ही क्यों बिलखाकर के,
अगर तू मन प्राण हमारा ना होता,
तुझसे मैं क्या कहूं , तेरे सामने मेरा हाल है,
तेरी इक नजर की बात है
मेरा ज़िन्दगी का सवाल है।
तुम सा कोई मिल जाता ,
तो धूंड लिए होते ,
उसको अपना लेते क्यों तेरे लिए रोते,
क्यों प्यार तुम्हे करते,
क्यों तेरे लिए रोते।
मुख मोड़ के क्यों बैठे ,
क्या मान खुदाई का,
मुझे तो बता प्यारे
कारण रुसवाई का।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "मुझे कुछ तो बता प्यारे कारण रुसवाई का लिरिक्स(Mujhe Ye To Bata Pyare Karan Ruswayi Ka Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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