भक्ति और लोक संस्कृति के महाकुंभ महापर्व छठ पूजा (Chhath Puja) के पावन अवसर पर भोजपुरी संगीत जगत के लोकप्रिय गायक खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) का नया और बेहद लोकप्रिय छठ गीत 'उखीया ले आवे खातिर केकरा के भेजी' (Ukhiya Liwawe Kekara Ke Bheji) लोक स्तर पर गहरी आस्था और पारिवारिक जिम्मेदारियों का एक अनूठा और सुंदर चित्रण प्रस्तुत करता है। लोकगीतों की इस समृद्ध परंपरा में लोक आस्था के महापर्व छठ की महिमा, सूर्य उपासना के कठोर नियमों और व्रती महिलाओं के मन की भावनाओं को अत्यंत सजीवता से उकेरा गया है। यह गीत न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह पूर्वांचल और बिहार की लोक संस्कृति, घर-परिवार के पारंपरिक रिश्तों और लोकपर्व की व्यस्तताओं का एक जीवंत दस्तावेज है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भोजपुरी छठ गीत के संपूर्ण बोल, इसका अर्थ, गीत की पृष्ठभूमि, लोक संस्कृति में इसका महत्व और छठ पूजा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
Khesari Lal Yadav का New Chhath Song | Ukhiya Liwawe Kekara Ke Bheji | Bhojpuri Chhath Video 2020
उखीया ले आवे खातिर केकरा के भेजी ||
~ असो छठ में ना राजा जी अईनी तनिको नाही ठीक कईनी असो छठ में ना राजा जी अईनी तनिको नाही ठीक कईनी
तऽ सुनी साँच हूँ में बानी राउआ लेजी लेजी राजा करेजा बोली
उखीया ले आवे खातिर केकरा के भेजी राजा करेजा बोली
उखीया ले आवे खातिर केकरा के भेजी
घरवा में बानी आमा जी पुरनिया अम्मा जी पुरनिया
इहा के भेजेब तऽ कही का दुनिया कही का दुनिया
घरवा में बानी अम्मा जी पुरनिया इहा के भेजेब तऽ कही का दुनिया
तऽ राउवा पुजा में देखवनी ना तेजी तेजी राजा करेजा बोली
उखीया ले आवे खातिर केकरा के भेजी राजा करेजा बोली
उखीया ले आवे खातिर केकरा के भेजी
सईया खेसारी बड़ी बरता खीस यादव राज बाटे राउवे ले बीस
हाँ हाँ सईया खेसारी बड़ी बरता खीस यादव राज बाटे राउवे ले बीस
हार गईनी हम कऽ के ओ जी ए जी राजा करेजा बोली
उखीया ले आवे खातिर केकरा के भेजी राजा करेजा बोली
उखीया ले आवे खातिर केकरा के भेजी
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह लोकगीत एक व्रती गृहिणी और उसके परदेश में या काम में व्यस्त पति के बीच के प्रेमपूर्ण संवाद और छठ महापर्व की व्यस्तताओं को व्यक्त करता है। छठ पूजा में ईख (उख/गन्ना) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है, जिसके बिना अर्घ्य की टोकरी या दउरा अधूरा माना जाता है। गीत के भावार्थ के अनुसार:
व्रती पत्नी अपने पति से शिकायत भरे स्वर में कहती है कि इस बार छठ पर्व आ गया है लेकिन आप समय पर घर नहीं आए और न ही व्यवस्था में कोई तेजी दिखाई। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री, विशेषकर ईख (गन्ना) लाने के लिए किसे भेजा जाए? घर में बुजुर्ग अम्माजी (सास) हैं, उन्हें बाजार भेजना या काम के लिए कहना उचित नहीं होगा, और समाज या दुनिया क्या कहेगी? इसलिए पत्नी अपने पति से आग्रह करती है कि वे अपनी व्यस्तता और सारे गिले-शिकवे छोड़कर पूजा की व्यवस्था में तेजी लाएं और स्वयं ईख की व्यवस्था करें। इसमें भोजपुरी समाज की घरेलू मिठास, पति-पत्नी का सहज प्रेम और लोकपर्व के प्रति अटूट निष्ठा साफ झलकती है। छठ पूजा और लोक संगीत से जुड़ी ऐसी ही अन्य सुंदर प्रस्तुतियों के लिए आप लोकप्रिय भोजपुरी भक्ति गानों के संग्रह को देख सकते हैं।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत की मूल भावना लोक संस्कृति, त्याग, समर्पण और पारिवारिक दायित्वों से जुड़ी है। छठ पूजा केवल एक व्रत नहीं बल्कि अनुशासन और सामूहिक सहभागिता का उत्सव है। गीत में यह संदेश दिया गया है कि कठिन से कठिन व्रतों में भी जब परिवार का हर सदस्य अपनी भूमिका निभाता है, तभी पर्व की पूर्णता संभव होती है। इसमें ग्रामीण जीवन की सहजता, रिश्तों की खट्टा-मीठी नोकझोंक और भगवान सूर्य एवं छठी मईया के प्रति अगाध श्रद्धा का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। पूजा-पाठ के दौरान आने वाली छोटी-छोटी घरेलू समस्याओं को संगीत के माध्यम से सहज रूप में प्रस्तुत करना ही भोजपुरी लोकगीतों की सबसे बड़ी विशेषता है।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम | उखीया ले आवे खातिर केकरा के भेजी (Ukhiya Liwawe Kekara Ke Bheji) |
|---|---|
| गायक कलाकार | खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) |
| शैली | भोजपुरी छठ गीत / लोकगीत (Bhojpuri Chhath Song) |
| रिलीज वर्ष | 2020 |
| भाषा | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| मुख्य विषय | छठ पूजा की तैयारियां, ईख (गन्ना) का महत्व और पारिवारिक संवाद |
| संबंधित परंपरा | लोक आस्था का महापर्व छठ (Chhath Mahaparv) |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
खेसारी लाल यादव भोजपुरी सिनेमा और संगीत जगत के शीर्ष कलाकारों में गिने जाते हैं। उनकी आवाज में ठेठ भोजपुरी माटी की खुशबू और लोक संवेदना कूट-कूट कर भरी होती है। जब वे छठ गीत गाते हैं, तो उनकी गायकी में एक तरफ जहाँ ठेठ गंवई मिजाज होता है, वहीं दूसरी तरफ छठी मईया के प्रति समर्पण का भाव भी साफ झलकता है। उनके गाए हुए अनेक छठ गीत जैसे खेसारी लाल के प्रसिद्ध छठ गीत आज भी बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के घर-घर में छठ के दिनों में गूंजते हैं। इस गीत में भी उन्होंने एक साधारण गृहस्थ परिवार की वेदना और उल्लास को अपनी ऊर्जावान और भावुक आवाज से जीवंत कर दिया है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| उखीया | ईख / गन्ना | छठ पूजा में अर्घ्य के समय उपयोग होने वाला मुख्य फल/सामग्री |
| असो | इस वर्ष / इस बार | वर्तमान वर्ष के छठ पर्व के संदर्भ में |
| लेजी लेजी | सुस्त या विलंब करने वाला | काम में तेजी न दिखाने पर प्रेम से कही गई बात |
| अम्मा जी पुरनिया | घर की बुजुर्ग सास / वृद्ध माता | परिवार की सम्मानित बुजुर्ग महिला |
| बरता खीस | बहुत अधिक गुस्सा होना या नाराज होना | पति की सुस्ती पर पत्नी का भावुक होना |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ पर्व सूर्य षष्ठी व्रत है, जो प्रकृति, सूर्य देव और छठी मईया की आराधना को समर्पित है। इस पर्व में शुद्धता, नियम और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। गन्ने का मंडप बनाकर उसमें भगवान सूर्य को अर्घ्य देना इस पूजा का केंद्रीय अनुष्ठान है। यह गीत केवल मनोरंजन नहीं बल्कि उस सांस्कृतिक परिवेश का हिस्सा है जहाँ पर्व के बहाने घर के सभी सदस्य एकजुट होते हैं और आपसी प्रेम और तकरार के बीच उत्सव को संपन्न करते हैं। छठी मईया के इन गीतों के माध्यम से हमारी प्राचीन संस्कृति, लोक भाषा और परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रहती हैं। छठ पर्व के संपूर्ण विधि-विधान और इसके ऐतिहासिक महत्व को समझने के लिए आप छठ पूजा व्रत एवं अनुष्ठान विधि का विस्तृत लेख पढ़ सकते हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
यह लोकगीत हमें सिखाता है कि जीवन की भागदौड़ और व्यस्तताओं के बीच भी पारिवारिक रिश्तों और सांस्कृतिक पर्वों के लिए समय निकालना आवश्यक है। पर्व-त्योहार हमारे जीवन में उल्लास और अपनापन लेकर आते हैं। आपसी छोटी-मोटी नोकझोंक और संवाद के माध्यम से परिवार के रिश्ते और अधिक मजबूत होते हैं। इसके साथ ही, यह गीत हमें अपनी लोक संस्कृति, भाषा और परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है.
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले महापर्व छठ के दौरान यानी नहाय-खाय से लेकर उद्यमी सूर्य को अर्घ्य देने तक के चार दिनों में खूब सुना जाता है। जब महिलाएं घाट पर जाने की तैयारी करती हैं, दउरा सजाती हैं या घर पर पकवान (जैसे ठेकुआ) बनाती हैं, तब ऐसे पारंपरिक लोकगीत घरों के परिवेश को पूरी तरह भक्तिमय और सांस्कृतिक बना देते हैं।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| गीत शीर्षक | Ukhiya Liwawe Kekara Ke Bheji |
|---|---|
| गायक | खेसारी लाल यादव |
| संगीत शैली | भोजपुरी लोकगीत / छठ गीत |
| प्रमुख विषय | पारिवारिक प्रेम, छठ पूजा की तैयारी |
| क्षेत्रीय प्रभाव | बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस मार्गदर्शिका को लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत, और छठ पूजा के सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रामाणिक जानकारियों के साथ संकलित किया गया है ताकि पाठकों को गीत के अर्थ और उसकी पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी मिल सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- भोजपुरी लोक संस्कृति और संगीत परंपरा के अध्ययन ग्रंथ
- लोक आस्था के महापर्व छठ से जुड़े पारंपरिक अनुष्ठान और गीत संग्रह
- सार्वजनिक रूप से उपलब्ध संगीत एवं मीडिया आर्काइव
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