लोक आस्था और सनातन संस्कृति के महानतम लोकपर्व छठ पूजा का पावन अवसर पूर्वांचल, बिहार, झारखंड और संपूर्ण भारतवर्ष में परम पवित्रता, नियम और अपार श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। लोकगायक खेसारी लाल यादव द्वारा गाए गए छठ गीत लोकमानस में अगाध भक्ति रस और उत्सव की उमंग का संचार करते हैं। छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य और छठी मैया के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की एक प्राचीन वैदिक एवं सांस्कृतिक परंपरा है। इन छठ गीतों के माध्यम से व्रती एवं श्रद्धालु छठी मैया की कृपा, संतान सुख, आरोग्य तथा परिवार की समृद्धि की मंगल कामना करते हैं। डीजे एवं भक्ति संगीत के आधुनिक रूपों ने इन पारंपरिक गीतों को युवा पीढ़ी के बीच भी अत्यंत लोकप्रिय बना दिया है, जिससे लोक संस्कृति का निरंतर प्रवाह बना हुआ है।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Chhath Geet Lyrics
मुखड़ा:
उगिहें सूरज देव अरघ के बेरिया, ए छठी मैया...
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए!
बहंगी लचकत जाए...
होइहें बलम जी कहार, बहंगी घाटे पहुंचाए!
उगिहें सूरज देव अरघ के बेरिया, ए छठी मैया...
अंतरा 1:
केली फल फरले घवद से, ओह पर सुगा मेड़राए...
सुगा के मारबो धनुष से, सुगा गिरे मुरझाए!
अदित देव के पूजा में, शुद्ध भोजन बने जाए...
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए!
अंतरा 2:
पटना के घाटे पर नारियल, ठेकुआ के दउरा सजाए...
सांस रोक के बरत करेलीं, छठी माई के ध्यान लगाए!
दीहीं समरती हे छठी माई, अरघ देवे के बेरिया आए...
उगिहें सूरज देव अरघ के बेरिया, ए छठी मैया...
अंतरा 3:
सबकर गोदिनिया भरिहा हे माई, दीहा अरोगिया काया...
खेसारी करेला विनती तोहार, अपरंपार तोहार माया!
सकल जगत पर बरसे किरपा, जय-जय छठी माई गाए...
उगिहें सूरज देव अरघ के बेरिया, ए छठी मैया!
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह छठ गीत लोक भावना और प्रत्यक्ष देवता सूर्य देव एवं छठी मैया (देवसेना) की अगाध भक्ति में डूबा हुआ है। गीत का प्रत्येक अंतरा छठ पूजा की सात्विकता, कठोर नियम और अटूट विश्वास को अभिव्यक्त करता है:
- मुखड़ा का भावार्थ: व्रती महिलाएं छठी मैया से प्रार्थना करती हैं कि हे मां, भगवान सूर्य देव के अर्घ्य का समय आ गया है, वे अपने दिव्य स्वरूप में उदित हों। कच्चे बांस की सुसज्जित बहंगी (पूजा की सामग्री ले जाने वाला साधन) भार से लचक रही है। पतिदेव स्वयं कहार बनकर उस पावन बहंगी को नदी या तालाब के घाट तक पहुंचा रहे हैं। इसमें परिवार के सह-योग और भक्ति भाव का सुंदर चित्रण है।
- प्रथम अंतरा का भावार्थ: केले के फल घौद (गुच्छे) में पके हैं और उन पर सुगा (तोता) मंडरा रहा है। छठ पूजा में परम शुद्धता का नियम है; यदि तोता फल को जूठा कर देगा तो वह पूजा के योग्य नहीं रहेगा। इसलिए व्रती कहती है कि पवित्रता रक्षा हेतु तोते को उड़ाया जाता है। आदित्य (सूर्य) देव की पूजा के लिए अत्यंत शुद्ध एवं सात्विक प्रसाद तैयार किया जा रहा है।
- द्वितीय अंतरा का भावार्थ: पवित्र गंगा घाट (जैसे पटना के प्रसिद्ध घाट) पर नारियल, गेहूं के आटे और गुड़ से बना शुद्ध 'ठेकुआ' तथा विभिन्न प्रकार के कंद-मूल फल सूप और दउरा में सजाए गए हैं। व्रती निर्जल और निराहार रहकर छठ माता का ध्यान लगाती हैं और भगवान सूर्य को संध्या एवं प्रात:कालीन अर्घ्य देने हेतु सामर्थ्य एवं कृपा की याचना करती हैं।
- तृतीय अंतरा का भावार्थ: अंत में भक्त छठी मैया से प्रार्थना करता है कि हे मां! सभी माताओं की गोद (झोली) संतान सुख से भर दो, सभी को आरोग्य (रोगमुक्त) काया प्रदान करो। आपका नाम और आपकी माया अपरंपार है। संपूर्ण जगत् पर अपनी कृपा बनाए रखें, पूरा संसार आपकी जय-जयकार कर रहा है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
छठ पर्व के गीतों की मूल भावना अत्यंत पावन, प्राकृतिक और निष्काम भक्ति पर आधारित है। यह गीत मुख्य रूप से निम्नलिखित भावनाओं को उजागर करता है:
1. प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण: छठ पूजा एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें किसी मूर्ति की नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले सूर्य देव और जल-प्रकृति की पूजा की जाती है। गीत में बांस, कंद-मूल, नारियल और फल का वर्णन पर्यावरण-प्रेम को दर्शाता है।
2. पारिवारिक समरसता: बहंगी उठाने में पति, दउरा सजाने में महिलाएं और घाट की सफाई में पूरा समाज एक साथ जुड़ता है। यह गीत सामाजिक एवं पारिवारिक एकता का संदेश देता है।
3. परम शुद्धता एवं नियम: छठ व्रत में शुद्धता का स्थान सर्वोपरि है। गीत में 'सुगा' के माध्यम से झूठेपन से बचाव और पूर्ण पवित्रता बनाए रखने का स्पष्ट संदेश दिया गया है।
गीत की जानकारी | Song Information
| विवरण का प्रकार | गीत संबंधी जानकारी |
|---|---|
| गीत का शीर्षक | न्यू भक्ति छठ पूजा के गाना (DJ रीमिक्स) |
| मुख्य गायक | खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) |
| संगीत शैली | भोजपुरी लोक संगीत एवं भक्ति DJ रीमिक्स |
| मुख्य विषय | छठ पूजा, सूर्य अर्घ्य एवं छठी मैया की स्तुति |
| संबंधित मुख्य पर्व | कार्तिक छठ महापर्व (सूर्योपासना) |
| भाषा / बोली | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| मुख्य वाद्य/प्रभाव | ढोल, शहनाई, पारंपरिक झांझ एवं आधुनिक DJ बीट्स |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
भोजपुरी लोक संगीत परंपरा में खेसारी लाल यादव का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके छठ गीत पूर्वांचल और बिहार के गांव-गांव में बेहद चाव से सुने जाते हैं। इस गीत में पारंपरिक छठ गीतों की आत्मा को बनाए रखते हुए आधुनिक संगीत एवं डीजे रीमिक्स का ऐसा सम्मिश्रण किया गया है, जो बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी को भक्ति रस में सराबोर कर देता है। गीत के शब्द पारंपरिक लोक गीतों की तर्ज पर रचे गए हैं, जो सदियों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी गाए जाते रहे हैं।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| भोजपुरी शब्द | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ एवं आध्यात्मिक प्रयोग |
|---|---|---|
| अरघ (Arghya) | अर्घ्य / जल एवं दूध अर्पित करना | उगते और डूबते सूर्य को दिया जाने वाला पावन जल |
| बेरिया (Beriya) | समय / वेला | पूजा अथवा अर्घ्य अर्पित करने का शुभ समय |
| बहंगिया (Bahangiya) | कांच के बांस का ढांचा / बहंगी | पूजा सामग्री को घाट तक ले जाने वाला बांस का साधन |
| दउरा (Daura) | बांस की बनी बड़ी टोकरी | जिसमें ठेकुआ, फल और अर्घ्य की सामग्री रखी जाती है |
| सुगा (Suga) | तोता (पक्षी) | प्रसाद की शुद्धता और पक्षियों से बचाव का प्रतीक |
| गोदिनिया (Godiniya) | गोद / झोली | संतान प्राप्ति एवं परिवार की खुशहाली की याचना |
| ठेकुआ (Thekua) | गेहूं के आटे व गुड़ का महाप्रसाद | छठ पूजा का सबसे मुख्य और पवित्र प्रसाद |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ पर्व और इसके लोक गीतों का आध्यात्मिक आधार अत्यंत गहरा है। पौराणिक एवं शास्त्रीय संदर्भों के अनुसार:
1. षष्ठी देवी (छठी मैया) का स्वरूप: ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, प्रकृति देवी के छठे अंश से प्रकट हुई देवी को 'देवसेना' या 'षष्ठी देवी' कहा जाता है। वे बच्चों की रक्षा करने वाली और संतान देने वाली अधिष्ठात्री देवी हैं।
2. सूर्य उपासना का महत्व: भगवान सूर्य प्रत्यक्ष ब्रह्म हैं। सूर्य देव मंत्र एवं गायत्री मंत्र के समान ही छठ के लोक गीत सूर्य देव की ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन शक्ति की उपासना का सरल लोक-माध्यम हैं।
3. अस्तगामी और उदीयमान सूर्य की पूजा: संसार केवल उगते हुए सूर्य को प्रणाम करता है, परंतु छठ पर्व की महानता यह है कि इसमें पहले ढलते हुए (अस्तगामी) सूर्य को और अगले दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह जीवन के उतार-चढ़ाव में समभाव रखने का महान दार्शनिक संदेश है।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- आत्म-अनुशासन और संयम: छठ व्रत 36 घंटे का निर्जला व्रत होता है। यह मनुष्य को मन, वचन और कर्म की पवित्रता सिखाता है।
- समानता का संदेश: छठ घाट पर जाति, वर्ग या अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता। राजा और रंक सब एक साथ नदी के तट पर खड़े होकर सूर्य देव को प्रणाम करते हैं।
- सामूहिक सद्भाव: घाटों की सफाई, दउरा उठाना और अर्घ्य देना पूरे समाज को एक सूत्र में पिरोता है।
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: जल, वायु, सूर्य प्रकाश और धरती माता के प्रति धन्यवाद प्रकट करने का यह सबसे बड़ा पर्व है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यद्यपि यह गीत कार्तिक मास में आने वाले चार दिवसीय छठ महापर्व (नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य, और उषा अर्घ्य) के दौरान संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बनाता है, परंतु निम्नलिखित अवसरों पर भी इसे भक्तिभाव से सुना जाता है:
1. चैती छठ पर्व: चैत्र मास में आने वाले चैती छठ पर्व के दौरान।
2. कार्तिक छठ महापर्व: दीपावली के तुरंत बाद आने वाली छठ पूजा के दिनों में घाटों, घरों और पूजा पंडालों में।
3. गोवर्धन पूजा कथा एवं कार्तिक उत्सव: कार्तिक शुक्ल पक्ष के पावन दिनों में प्रभात फेरी एवं भक्ति संध्या के अवसर पर।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| गीत का प्रकार | छठ पूजा भक्ति गीत / लोकगीत DJ रीमिक्स |
| अधिष्ठात्री देवी/देवता | छठी मैया (षष्ठी देवी) एवं भगवान सूर्य देव |
| मुख्य भाषा | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| सांस्कृतिक क्षेत्र | बिहार, उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल), झारखंड व संपूर्ण भारत |
| मुख्य संदेश | संतान सुरक्षा, पारिवारिक आरोग्य, शुद्धता और प्रकृति पूजा |
| पाठ/गायन का समय | छठ पर्व, कार्तिक मास एवं प्रातः/संध्या अर्घ्य के समय |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Khesari Lal Ka New Bhakti Chhath Puja Gana किस पर्व से संबंधित है?
यह गीत सनातन परंपरा के महान लोकपर्व 'छठ पूजा' (सूर्योपासना एवं छठी मैया व्रत) से संबंधित है, जो कार्तिक और चैत्र मास में मनाया जाता है।
छठ पूजा में 'बहंगी' और 'दउरा' का क्या महत्व है?
'बहंगी' और 'दउरा' कच्चे बांस से बनाए जाते हैं। इनमें पूजा का पवित्र प्रसाद (ठेकुआ, कंद-मूल, फल, नारियल) रखकर जलस्रोत/घाट तक ले जाया जाता है। बांस को शुद्धता और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
छठ गीत में 'सुगा' (तोते) का उल्लेख क्यों आता है?
छठ पूजा में महाप्रसाद की परम शुद्धता अनिवार्य है। गीत में तोते का उल्लेख यह बताने के लिए किया जाता है कि प्रसाद के फलों को कोई पक्षी जूठा न करे, ताकि सूर्य देव को केवल शत-प्रतिशत शुद्ध नैवेद्य ही अर्पित किया जाए।
छठ पूजा में किन मुख्य देवताओं की पूजा की जाती है?
छठ पूजा में प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य (आदित्य देव) और उनकी बहन/शक्ति छठी मैया (देवसेना / षष्ठी देवी) की मुख्य रूप से पूजा की जाती है।
छठ पर्व कितने दिनों तक चलता है?
छठ पर्व कुल चार दिनों तक चलता है: पहला दिन 'नहाय-खाय', दूसरा दिन 'खरना' (रसियाव-रोटी), तीसरा दिन 'संध्या अर्घ्य' (अस्तगामी सूर्य को) और चौथा दिन 'उषा अर्घ्य' (उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर पारण)।
क्या इस छठ गीत को सामान्य दिनों में भी सुना जा सकता है?
हां, छठ गीत का श्रवण मन को शांति, पवित्रता और ऊर्जा प्रदान करता है। हालांकि कार्तिक मास और छठ पर्व के दौरान इसका श्रवण विशेष फलदायी और वातावरण को भक्तिमय बनाने वाला होता है।
छठ पूजा का मुख्य प्रसाद क्या है?
छठ पूजा का सबसे प्रमुख और पवित्र महाप्रसाद 'ठेकुआ' है, जो गेहूं के आटे, शुद्ध देसी घी और गुड़ या चीनी से बनाया जाता है। इसके अलावा केला, नारियल, सुथनी, अदरक का पौधा और कंद-मूल अर्पित किए जाते हैं।
छठ पूजा में डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का क्या रहस्य है?
डूबते सूर्य को अर्घ्य देना इस बात का प्रतीक है कि जीवन में अस्त (कठिनाई/वृद्धावस्था) भी उतना ही वंदनीय है जितना कि उदय। यह कृतज्ञता और समभाव का संदेश देता है।
खेसारी लाल यादव के छठ गीतों की क्या विशेषता है?
खेसारी लाल यादव के छठ गीतों में पारंपरिक लोक धुनों का मधुर पुट होता है। आधुनिक रीमिक्स और डीजे बीट्स के साथ मिलकर यह युवा पीढ़ी को अपनी मूल संस्कृति और भक्ति से जोड़े रखता है।
छठ व्रत से श्रद्धालुओं को क्या फल प्राप्त होता है?
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से छठ व्रत करने से संतान सुख, आरोग्य काया (त्वचा व नेत्र रोगों से मुक्ति), परिवार में समृद्धि और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। आप हमारी वेबसाइट पर छठ पूजा व्रत कथा भी पढ़ सकते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत वैदिक ग्रंथों, ब्रह्मवैवर्त पुराण, पूर्वांचल की पारंपरिक लोक कथाओं और छठ पर्व की प्रामाणिक परंपराओं के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें छठ गीत की काव्यात्मक व्याख्या, शब्दार्थ और भक्ति-भावना का पूर्ण ध्यान रखा गया है ताकि पाठकों को प्रामाणिक एवं ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त हो सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- ब्रह्मवैवर्त पुराण (प्रकृति खंड - षष्ठी देवी उपाख्यान)
- श्रीमद्भागवत पुराण (सूर्य उपासना एवं आदित्य हृदय स्तोत्र संदर्भ)
- बिहार एवं पूर्वांचल की पारंपरिक छठ व्रत लोक परंपराएं एवं गीति साहित्य
- सनातन पंचांग एवं धार्मिक ग्रंथ
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