Matarani Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के

पढ़ें झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सनातन धर्म की पावन परंपरा में भगवती आदिशक्ति जगदम्बा की आराधना का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। "झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के" एक ऐसा ही परम भावुक, करुणा से ओतप्रोत और शरणागति की पराकाष्ठा को दर्शाता हुआ अत्यंत लोकप्रिय भजन है। यह भजन मुख्य रूप से दिल्ली के प्रसिद्ध ऐतिहासिक 'झंडेवालान देवी मंदिर' की अधिष्ठात्री देवी माँ झंडेवाली को समर्पित है। इस भजन में भक्त स्वयं को अत्यंत दीन, हीन और असहाय (गरीब) मानते हुए जगज्जननी के चरणों में पूर्ण आत्मसमर्पण करता है। भक्ति रस के 'विनय भाव' और 'करुण रस' से परिपूर्ण यह गीत साधक के अहंकार को विगलित कर उसके अंतःकरण में विशुद्ध प्रेम का संचार करता है। नवरात्रि के पावन पर्व, साप्ताहिक मंगलवार, शुक्रवार अथवा किसी भी पारिवारिक मंगल कार्य के अवसर पर इस भजन का गायन और श्रवण भक्तों को अलौकिक शांति और माँ की असीम अनुकंपा प्रदान करने वाला माना गया है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के ॥

मुखड़ा:
झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के,
अपने ही चरणों का चेरा मान के।
झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के...

अंतरा १:
तेरे सिवा मैया मेरा कोई न सहारा है,
मझधार में नैया है और दूर किनारा है।
पार लगा दे मेरी नैया आन के,
झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के...

अंतरा २:
खाली न गया कोई तेरे दरबार से,
झोली भर लाते हैं सब तेरे प्यार से।
मेरी भी झोली भर दे दयावान के,
झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के...

अंतरा ३:
दुखियों के दुखों को पल में मिटाती हो,
बिगड़ी हुई किस्मत को पल में बनाती हो।
सुन लो पुकार मेरी विनती मान के,
झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के...

अंतरा ४:
चरणों में तेरे मैया शीश झुकाता हूँ,
सुबह और शाम तेरे ही गुण गाता हूँ।
रख लो शरण में अपनी बच्चा जान के,
झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह पावन भजन जीवात्मा द्वारा परमात्मा (माँ शक्ति) के प्रति की गई करुण पुकार है। इसका विस्तृत भावार्थ निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

दीनता और शरणागति का भाव: भजन की शुरुआत में ही भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि हे झंडेवाली मैया! मुझे संसार की दृष्टि से निर्धन, असहाय और दीन समझकर अपनी शरण में रख लीजिए। यहाँ 'गरीब' शब्द केवल भौतिक धन की कमी को नहीं दर्शाता, बल्कि यह आध्यात्मिक दरिद्रता और अहंकारशून्यता का प्रतीक है। भक्त स्वयं को माँ के चरणों का 'चेरा' यानी सेवक या दास स्वीकार करता है।

संसार रूपी भवसागर से मुक्ति की कामना: पहले अंतरे में भक्त सांसारिक जीवन की विषमताओं की तुलना एक अशांत मझधार से करता है। वह कहता है कि इस विशाल संसार रूपी सागर में मेरी जीवन-नैया डगमगा रही है और मुझे दूर-दूर तक कोई किनारा दिखाई नहीं दे रहा है। हे माँ! आपके अतिरिक्त मेरा इस संसार में कोई रक्षक नहीं है। आप स्वयं आकर मेरी इस नैया को पार लगाइए।

माँ की असीम उदारता का गान: दूसरे और तीसरे अंतरे में भक्त माँ के परोपकारी और दयालु स्वरूप की महिमा गाता है। माँ का दरबार ऐसा पावन स्थल है जहाँ से कोई भी याचक कभी खाली हाथ नहीं लौटता। जो भी भक्त सच्चे मन से माँ के द्वार पर आता है, माँ उसकी झोली को अपने वात्सल्य और सुख-समृद्धि से भर देती हैं। भक्त माँ से अपनी झोली भी भरने की याचना करता है और विश्वास प्रकट करता है कि माँ उसकी बिगड़ी हुई किस्मत को पल भर में संवार देंगी।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह साधना मार्ग का एक महत्वपूर्ण सोपान है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • अहंकार का विसर्जन: जब भक्त स्वयं को 'गरीब' और माँ को सर्वशक्तिमान स्वीकार करता है, तो उसके भीतर का सूक्ष्म अहंकार समाप्त हो जाता है। अध्यात्म में अहंकार का नाश ही ईश्वर प्राप्ति का प्रथम द्वार है।
  • वात्सल्य और करुणा का समन्वय: यह भजन माँ दुर्गा के ममतामयी रूप को उजागर करता है। माँ अपने बच्चों के अपराधों को क्षमा कर उन्हें अपनी गोद में स्थान देती हैं।
  • मानसिक शांति का प्रदाता: इस भजन के नियमित श्रवण और कीर्तन से मन की व्याकुलता दूर होती है और साधक को आंतरिक संतोष की अनुभूति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवद् संकीर्तन के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं होता, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण की एक पारंपरिक विधि है जो इसके प्रभाव को बहुगुणित कर देती है:

सर्वोत्तम समय: इस भजन का गायन विशेष रूप से संध्या काल की आरती के समय अथवा प्रातः काल की पूजा के उपरांत किया जाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रों के दौरान इस भजन का सामूहिक कीर्तन मंदिरों और घरों में विशेष रूप से किया जाता है।

गायन की विधि: भजन गाते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। माँ की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित कर, धूप-दीप दिखाकर पूर्ण श्रद्धा और करुण भाव से इस भजन का गायन करना चाहिए। गायन के समय वाद्य यंत्रों जैसे मंजीरा, ढोलक या हरमोनियम का प्रयोग भाव को और अधिक सघन बनाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा के 'झंडेवाली' स्वरूप को समर्पित है। दिल्ली के करोल बाग के समीप स्थित झंडेवालान मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और सिद्ध पीठ है। मान्यता है कि यहाँ माँ आदि शक्ति की पूजा झंडेवाली माँ के रूप में की जाती है क्योंकि यहाँ मंदिर की स्थापना के समय एक विशाल ध्वज (झंडा) लगाया गया था, जो दूर-दूर से भक्तों को आकर्षित करता था। इस भजन की रचना लोक-परंपरा के संतों और भक्तों द्वारा की गई है, जिन्होंने माँ के इस ममतामयी स्वरूप का साक्षात अनुभव किया था।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की पृष्ठभूमि दिल्ली के ऐतिहासिक झंडेवालान मंदिर से गहराई से जुड़ी हुई है। शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान इस क्षेत्र में घने वन हुआ करते थे। मान्यता है कि एक स्थानीय भक्त 'बद्री भगत' को स्वप्न में माँ ने दर्शन दिए और भूमि में दबी अपनी प्रतिमा के बारे में बताया। खुदाई के उपरांत वहाँ से माँ की भव्य मूर्ति प्राप्त हुई और वहाँ एक मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर के शिखर पर फहराते हुए विशाल ध्वज के कारण माँ को 'झंडेवाली माँ' कहा जाने लगा। इसी पावन पृष्ठभूमि में भक्तों ने माँ की स्तुति में इस अत्यंत सरल और मर्मस्पर्शी भजन की रचना की।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें पंजाबी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली 'गीतिका' और 'पद' शैली के अंतर्गत आती है।

भजन में प्रयुक्त रूपक अलंकार जैसे "मझधार में नैया" सांसारिक कठिनाइयों को अत्यंत सजीव रूप में प्रस्तुत करते हैं। इसकी लय और ताल इतनी सुगम है कि कोई भी सामान्य व्यक्ति इसे आसानी से कंठस्थ कर गा सकता है। यही कारण है कि यह भजन लोकमानस में अत्यंत गहराई से रचा-बसा हुआ है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य और आध्यात्मिक सीख प्रदान करता है:

  1. पूर्ण शरणागति (Surrender): जीवन की समस्त चिंताओं और कठिनाइयों को ईश्वर के चरणों में सौंप देना ही सच्ची शांति का मार्ग है।
  2. समता का भाव: माँ के दरबार में अमीर-गरीब, राजा-रंक का कोई भेद नहीं होता। वहाँ केवल भक्ति और श्रद्धा की ही महत्ता है।
  3. धैर्य और विश्वास: विपरीत परिस्थितियों में भी यह विश्वास बनाए रखना कि माँ हमारी नैया को पार लगा देंगी, हमें मानसिक संबल प्रदान करता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
चेरा सेवक, दास या शिष्य अहंकार का त्याग कर ईश्वर का दास बनना।
मझधार नदी या सागर के बीच की धारा सांसारिक कठिनाइयों और द्वंद्वों का प्रतीक।
नैया नाव मनुष्य का जीवन रूपी शरीर।
गरीब दीन, असहाय, निर्धन आध्यात्मिक रूप से स्वयं को शून्य मानना।
दयावान करुणा की सागर, दयालु माँ भगवती का ममतामयी स्वरूप।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के, अपने ही चरणों का चेरा मान के।"
हे माँ! मैं इस संसार में अत्यंत असहाय और दीन हूँ। मुझे अपना ही सेवक मानकर अपने पावन चरणों में स्थान दे दीजिए।

"तेरे सिवा मैया मेरा कोई न सहारा है, मझधार में नैया है और दूर किनारा है।"
इस भौतिक जगत में आपके अतिरिक्त मेरा कोई रक्षक नहीं है। मेरी जीवन रूपी नाव दुखों के सागर के बीच फंसी है और मुक्ति का किनारा बहुत दूर है।

"पार लगा दे मेरी नैया आन के, झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के..."
हे कृपालु माँ! आप स्वयं आकर मेरी इस डगमगाती नाव को सुरक्षित किनारे पर लगा दीजिए और मेरा उद्धार कीजिए।

"खाली न गया कोई तेरे दरबार से, झोली भर लाते हैं सब तेरे प्यार से।"
आपके पावन दरबार की यह महिमा है कि वहाँ से कोई भी याचक निराश नहीं लौटता। सभी भक्त आपकी असीम कृपा और प्रेम से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के कीर्तन के पूर्व या पश्चात माँ दुर्गा के निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

॥ नवार्ण मंत्र ॥

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

अर्थ: हे महासरस्वती, महालक्ष्मी, महाकाली स्वरूपिणी माँ चामुंडा! आपको नमस्कार है। मुझे ज्ञान, ऐश्वर्य और शक्ति प्रदान करें।

इसके अतिरिक्त देवी महात्म्य का यह श्लोक भी अत्यंत प्रासंगिक है:

॥ शरणागति प्रार्थना श्लोक ॥

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण बिंदु महत्वपूर्ण जानकारी
भजन का नाम झंडेवाली माँ रखले गरीब जान के
समर्पित देवी माँ दुर्गा (झंडेवाली माता, दिल्ली)
भक्ति का भाव विनय भाव, करुणा, पूर्ण शरणागति
मुख्य भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, मंगलवार, शुक्रवार, देवी चौकी, जागरण
संबंधित स्तोत्र/आरती अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती, श्री दुर्गा चालीसा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा के 'झंडेवाली' स्वरूप को समर्पित है, जिनका प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर दिल्ली के करोल बाग (झंडेवालान) में स्थित है।

यहाँ 'गरीब' शब्द केवल भौतिक निर्धनता का सूचक नहीं है, बल्कि यह भक्त के आध्यात्मिक विनीत भाव, निरहंकारिता और पूर्ण आत्मसमर्पण को दर्शाता है।

इस भजन को प्रातः काल या संध्या काल की आरती के समय गाना सर्वोत्तम माना जाता है। नवरात्रि के दिनों में इसका गायन विशेष फलदायी होता है।

यह मंदिर शाहजहाँ के काल का माना जाता है, जहाँ बद्री भगत नामक भक्त को स्वप्न में देवी माँ के दर्शन हुए थे और खुदाई के दौरान माँ की मूर्ति प्राप्त हुई थी।

हाँ, इस भजन का दैनिक पाठ या श्रवण करने से मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास और समर्पण रखने से जीवन के बड़े से बड़े संकट (मझधार) को आसानी से पार किया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और इसके आध्यात्मिक विश्लेषण को सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों, लोक-परंपराओं और झंडेवालान मंदिर के ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और प्रामाणिक भक्ति रस की सामग्री पहुँचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - देवी महिमा प्रसंग
  • श्री दुर्गा सप्तशती - शरणागति प्रार्थना अध्याय
  • दिल्ली के ऐतिहासिक सिद्धपीठ - स्थानीय लोक इतिहास एवं मंदिर संदर्भ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 06 Oct 2026

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