bhakti gana bhojpuri mein मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जल बीच खड़ा होइब पवन सिंह के भोजपुरी छठ गीत

पढ़ें जल बीच खड़ा होइब पवन सिंह के भोजपुरी छठ गीत का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

जल बीच खड़ा होइब: पवन सिंह का पावन छठ गीत और भक्ति की पराकाष्ठा

छठ महापर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति, लोक-आस्था, शुचिता और प्रकृति के प्रति अगाध कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे पवित्र महाअनुष्ठान है। उत्तर भारत विशेषकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की माटी से उपजा यह लोकपर्व सूर्योपासना का अद्वितीय उत्सव है। इसी लोक-आस्था को स्वर और संगीत के माध्यम से जीवंत करने वाले भोजपुरी सिनेमा के पावरस्टार पवन सिंह का पावन छठ गीत "जल बीच खड़ा होइब" आज के समय में हर छठ घाट की पहचान बन चुका है। यह गीत उस अत्यंत कठिन तपस्या, संयम और समर्पण को दर्शाता है जो एक व्रती महिला कठिन निर्जला उपवास के दौरान छठी मइया और भगवान भास्कर (सूर्य देव) की आराधना में करती है। इस भजन में निहित विरह, विनय, और अगाध विश्वास का त्रिवेणी संगम साधक के मन को सीधे दिव्य ऊर्जा से भर देता है। इस लेख में हम इसी अमर गीत के संपूर्ण बोल, इसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, लोक-सांस्कृतिक महत्व और जीवन पर इसके पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

जल बीच खड़ा होइब, अरघिया देब हम तोहरा के,
हे छठी मइया, हे दीनानाथ...

कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए,
बहंगी घाटा पहुंचाए द, छठी मइया हो...
जल बीच खड़ा होइब, अरघिया देब हम तोहरा के...

(स्थायी टेक / मूकड़ा)
पवन सिंह के ओजस्वी और भावपूर्ण स्वर में सजे इस अमर गीत की हर एक पंक्ति में व्रती के अटूट संकल्प और छठी मइया के प्रति समर्पण की पराकाष्ठा झलकती है।

नारियल और ईख के डलिया सजा के, घाट पर हम आईब,
अंधियारी रतिया में, दीप हम जलाईब...
भोरही के बेरिया में दर्शन पाईब,
सूरज देव के मनाइब, अरघिया देब हम तोहरा के...

(अंतरा - १)
कुल-परिवार के सुख-शांति खातिर, व्रत हम कइले बानी,
तोहरे महिमा के मइया, गावत सगरी कहानी...
अंखिया में आसू लेके, दरस के प्यासी बानी,
सुन लऽ पुकार मइया, अब तs डेराई बानी...
जल बीच खड़ा होइब, अरघिया देब हम तोहरा के...

(अंतरा - २)
दीनानाथ के अरघ दिए जब, जल में उतरब हम,
मोह-माया के बंधन तजि के, ध्यान धराब हम...
पवन कहे सुनऽ छठी मइया, पूरा कई दs अरमान,
चरणन में धइल बाटे, हमरे परान...
जल बीच खड़ा होइब, अरघिया देब हम तोहरा के...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

"जल बीच खड़ा होइब, अरघिया देब हम तोहरा के" गीत का भावार्थ अत्यंत गहरा, मार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। छठ महापर्व के दौरान व्रती महिलाएं और पुरुष नदी या तालाब के ठंडे जल में घंटों खड़े होकर अचल श्रद्धा के साथ अराध्य देव सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह साधारण शारीरिक श्रम नहीं, बल्कि भौतिक शरीर की सीमाओं से परे जाकर आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की साधना है।

गीत की प्रारंभिक पंक्तियों में व्रती का यह संकल्प दिखाई देता है कि वह कमर तक पानी में खड़े होकर बिना किसी विचलित भाव के छठी मइया और सूर्य देव को संध्या और प्रातकालीन अर्घ्य देगी। "कांच ही बांस के बहंगिया" बांस के उन पवित्र सूप और बहंगी का प्रतीक है जिसे अशुद्धता से दूर रखकर अत्यंत शुद्धता के साथ फल-फूल, ठेकुआ और कंदमूल से सजाया जाता है। यह प्रकृति के सबसे अनगढ़ और पर्यावरण-अनुकूल उपादानों के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है।

अंतरा भाग में व्रती अपनी मनोकामना, परिवार की मंगलकामना और छठी मइया के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन करती है। वह कहती है कि हे मइया! मैंने अपने कुल और संतान की रक्षा के लिए यह कठिन व्रत रखा है। घोर अंधकार में जब पूरा संसार सोया होता है, तब एक व्रती दीप जलाकर घाट के मार्ग को रोशन करती है और भोर के पहले ही ठंडे जल में प्रवेश कर जाती है। यह गीत मनुष्य के भीतर छिपे अहंकार के विसर्जन और पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। ऐसे अन्य सुंदर भजनों के लिए आप हमारे भोजपुरी भक्ति गानों के संग्रह को देख सकते हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मूल आत्मा 'कठिन तपस्या और मातृवत प्रेम' पर आधारित है। छठ पर्व में कोई पुरोहित या कर्मकांडी ब्राह्मण अनिवार्य नहीं होता; यह सीधे भक्त और भगवान के बीच का व्यक्तिगत और आत्मीय संवाद है। पवन सिंह की आवाज में जो ठेठ भोजपुरी मिठास और रुआंसा कर देने वाला करुण रस है, वह सुनने वाले की आँखों में श्रद्धा के आँसू ले आता है।

  • प्रकृति प्रेम एवं कृतज्ञता: उगते और डूबते दोनों सूर्यों को अर्घ्य देना इस बात का प्रमाण है कि सनातन संस्कृति में जीवन के हर पड़ाव (उत्थान और पतन) का सम्मान किया जाता है।
  • स्त्री शक्ति और सहनशीलता: यह गीत उन माताओं और बहनों की सहनशक्ति को नमन करता है जो 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर जल में घंटों खड़ी रहती हैं।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: महानगरों में रहने वाले प्रवासियों को उनकी जड़ों और माटी से जोड़े रखने में ऐसे लोकगीतों की भूमिका अद्वितीय है।

गीत की जानकारी | Song Information

विशेषता विवरण
गीत का नाम जल बीच खड़ा होइब (Jal Beech Khada Hoeeb)
गायक / स्वर पवन सिंह (Power Star Pawan Singh)
संगीतकार लोक संगीत परंपरा / आधुनिक संगीत संयोजक
विधा भोजपुरी छठ गीत / लोक भक्ति गान
भाषा भोजपुरी (हिन्दी भावार्थ सहित)
मुख्य विषय सूर्य उपासना, छठी मइया की महिमा, छठ व्रत की कठिन तपस्या

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी लोक संगीत को वैश्विक मंच दिलाने में पावरस्टार पवन सिंह का योगदान ऐतिहासिक रहा है। जब वे छठ महापर्व पर कोई गीत गाते हैं, तो उनकी आवाज में एक खास प्रकार की सजल पुकार और लोक-संस्कृति की खुशबू होती है। पारंपरिक धुनों को आधुनिक संगीत के साथ इस प्रकार पिरोया जाता है कि युवा पीढ़ी भी अपनी संस्कृति से जुड़ी रहे। इस गीत के माध्यम से लोकगीतों की उस समृद्ध परंपरा को संरक्षित किया गया है जो पीढ़ियों से मौखिक रूप से चली आ रही थी। भगवान सूर्य की महिमा के बारे में अधिक जानने के लिए आप सूर्य देव स्तोत्र एवं उपासना विधि का अध्ययन कर सकते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) सांस्कृतिक प्रसंग (Context)
अरघिया (Arghiya) अर्घ्य / जल अर्पित करना सूर्य देव को जल और दूध का अर्घ्य देना।
बहंगी (Bahangi) बांस से बना कंधार / तराजू नुमा भार छठ पूजा की सामग्री ढोने का पारंपरिक पवित्र साधन।
घाट (Ghat) नदी या तालाब का किनारा जहाँ पर छठ पूजा का मुख्य अनुष्ठान संपन्न होता है।
भोरही के बेरिया (Bhorahi ke Beriya) भोर का समय / सूर्योदय का वक्त प्रातःकाल सूर्य को अर्घ्य देने का पावन मुहूर्त।
दीनानाथ (Deenanath) भगवान सूर्य / गरीबों के नाथ सूर्य भगवान का एक लोकप्रिय संबोधन।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व एकमात्र ऐसा पर्व है जहाँ डूबते हुए सूर्य की भी उतनी ही वंदना की जाती है जितनी उगते हुए सूर्य की। यह भारतीय दर्शन के उस सार्वभौमिक सत्य को रेखांकित करता है कि जो उदय हुआ है उसका अस्त होना निश्चित है, और जो अस्त हुआ है उसका पुनः उदय होना भी तय है।

"जल बीच खड़ा होइब" गीत इसी दार्शनिक पृष्ठभूमि पर आधारित है। जल, जो प्यूरिटी (शुद्धता) और जीवन का प्रतीक है, के मध्य खड़े होकर व्रती अपनी समस्त भौतिक आसक्तियों का त्याग करती है। यह गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि का एक मार्ग है। लोक-संस्कृति में इस प्रकार के गीत व्रतियों को कठिन उपवास के दौरान मानसिक संबल और ऊर्जा प्रदान करते हैं। आप छठ पूजा की संपूर्ण विधि एवं नियम के बारे में भी विस्तार से पढ़ सकते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहना: जीवन में कितनी भी बाधाएँ आएँ, अपने संकल्प (जैसे व्रती का जल में खड़ा होना) से पीछे नहीं हटना चाहिए।
  • कृतज्ञता का भाव: प्रकृति (सूर्य, जल, वायु, अन्न) के बिना जीवन की कल्पना असंभव है, अतः उनके प्रति हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए।
  • परिवार और समाज के प्रति समर्पण: अपनों की सुख-शांति और कल्याण के लिए स्वार्थ का त्याग करना ही सच्चा मानवीय धर्म है।
  • शुचिता और अनुशासन: जीवन में अनुशासन और मानसिक-शारीरिक पवित्रता ही सबसे बड़ी साधना है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी यानी छठ महापर्व के चार दिनों (नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य) के दौरान घर-घर, गलियों, और विशेषकर नदी के घाटों पर गूंजता है। इसके अलावा, जब भी कोई व्यक्ति अपनी जड़ों से जुड़ना चाहता है या लोक संगीत की मिठास का आनंद लेना चाहता है, वह इस भजन को सुन सकता है। यह गीत प्रवासी भारतीयों और देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए बिहार-झारखंड की यादों को ताजा करने का एक बड़ा जरिया है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

पैरामीटर विवरण
गीत शीर्षक जल बीच खड़ा होइब (Jal Beech Khada Hoeeb)
मुख्य गायक पवन सिंह
पर्व / उत्सव छठ महापर्व (सूर्य उपासना)
भाषा एवं शैली भोजपुरी लोकगीत / भक्ति संगीत
मुख्य संदेश कठिन तपस्या, सूर्य देव की आराधना और पारिवारिक कल्याण
प्लेटफॉर्म भक्तिकुल (Bhaktilok.in)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध छठ गीत के गायक भोजपुरी सिनेमा के लोकप्रिय पावरस्टार पवन सिंह हैं, जिनके ओजस्वी और भावपूर्ण स्वर ने इसे लोक-आस्था का अमर गीत बना दिया है।

यह गीत सनातन संस्कृति के महाव्रत 'छठ महापर्व' से संबंधित है, जिसमें भगवान सूर्य और छठी मइया की उपासना की जाती है।

जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देना शारीरिक और मानसिक तपस्या का प्रतीक है। यह जल तत्व और सूर्य ऊर्जा के संयोजन से साधक की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।

इसका अर्थ कच्चे या प्राकृतिक बांस से बनी हुई बहंगी (दौउरी/सूप) से है, जिसमें छठ पूजा के पवित्र प्रसाद, फल और दीप सजाकर घाट पर ले जाए जाते हैं।

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक और चैत्र छठ के दिनों में, घाटों पर जाते समय, अथवा घर में पूजा की तैयारियों के दौरान अत्यंत श्रद्धा के साथ सुना जाता है।

छठी मइया को सूर्य देव की बहन या प्रकृति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, जो संतानों की लंबी आयु, स्वास्थ्य और परिवार की समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

हाँ, पवन सिंह के ओजस्वी गायन और पारंपरिक लोक शैली के मिश्रण के कारण यह गीत हर वर्ष छठ पर्व के दौरान यूट्यूब और अन्य संगीत मंचों पर करोड़ों बार सुना जाता है।

आप ऐसे ही प्रामाणिक और सुंदर भोजपुरी भक्ति गीतों, कथाओं और व्रतों के लिए हमारे पोर्टल Bhaktilok.in पर नियमित विजिट कर सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख लोक-संस्कृति, भोजपुरी संगीत परंपरा और सनातन धर्म के महापर्व छठ की महत्ता को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को संगीत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पक्षों से अवगत कराना है। सभी बोल और उनके अर्थ पारंपरिक लोक-साहित्य और उपलब्ध स्रोतों के आधार पर संकलित किए गए हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी लोकगायन एवं छठ गीत संग्रह
  • सूर्य उपासना और छठ महापर्व से जुड़ी सांस्कृतिक अध्ययन पुस्तकें
  • लोक-आस्था और जनसाहित्य के विविध आयाम

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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