"हे दुःख भंजन मारुती नंदन सुन लो मेरी पुकार" सनातन धर्म में श्री हनुमान जी की आराधना के लिए गाया जाने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय, भावपूर्ण और सिद्ध भजन है। यह भजन संकटमोचन हनुमान जी के प्रति पूर्ण शरणागति, करुणा और अनन्य भक्ति भाव को प्रदर्शित करता है। जब भी कोई भक्त जीवन के कठिन संघर्षों, मानसिक अशांति या संकटों से घिर जाता है, तब इस भजन का गायन और श्रवण उसके अंतर्मन में असीम ऊर्जा, साहस और शांति का संचार करता है। इस भजन में हनुमान जी को 'दुःख भंजन' यानी दुखों का नाश करने वाला और 'मारुती नंदन' यानी पवनपुत्र कहकर पुकारा गया है। यह भजन मुख्य रूप से विनय और समर्पण के भाव (दास्य भाव) पर आधारित है, जो गोस्वामी तुलसीदास जी की भक्ति परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती और सुंदरकांड के पाठ के समय इस भजन का गायन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ हे दुःख भंजन मारुती नंदन ॥
स्थायी (मुखड़ा):
हे दुःख भंजन मारुती नंदन सुन लो मेरी पुकार।
पवन सुत विनती बारम्बार॥
हे दुःख भंजन मारुती नंदन सुन लो मेरी पुकार।
पवन सुत विनती बारम्बार॥
अंतरा १:
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, दुखियों के तुम भाग्य विधाता।
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, दुखियों के तुम भाग्य विधाता।
शरण पड़े की लाज बचाओ, संकट मोचन नाम तिहारो।
हे दुःख भंजन मारुती नंदन सुन लो मेरी पुकार।
पवन सुत विनती बारम्बार॥
अंतरा २:
तुम बल बुद्धि के सागर हो, भक्तों के तुम हितकारी हो।
तुम बल बुद्धि के सागर हो, भक्तों के तुम हितकारी हो।
राम नाम का सुमिरन करके, भव सागर से पार उतारो।
हे दुःख भंजन मारुती नंदन सुन लो मेरी पुकार।
पवन सुत विनती बारम्बार॥
अंतरा ३:
अंजनी पुत्र महा बलदायी, संतन के तुम सदा सहाई।
अंजनी पुत्र महा बलदायी, संतन के तुम सदा सहाई।
हाथ जोड़कर अरज करत हूँ, कर दो मेरा बेड़ा पार।
हे दुःख भंजन मारुती नंदन सुन लो मेरी पुकार।
पवन सुत विनती बारम्बार॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह पावन भजन "हे दुःख भंजन मारुती नंदन" साधक के हृदय में हनुमान जी के प्रति अटूट विश्वास जगाता है। इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य संसार के दुखों और कष्टों से थक जाता है, तो भगवान की शरण ही एकमात्र ऐसा आश्रय है जहाँ उसे पूर्ण सुरक्षा और शांति मिलती है।
भजन के प्रथम भाग में भक्त हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि हे दुखों को दूर करने वाले मारुती नंदन! आप मेरी पुकार सुन लीजिए। मैं आपसे बार-बार विनती कर रहा हूँ। यहाँ 'बारम्बार' शब्द भक्त की व्याकुलता और हनुमान जी के प्रति उसकी अनन्य निष्ठा को दर्शाता है।
द्वितीय भाग में भक्त हनुमान जी की महिमा का गान करता है कि आप अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं। आप दीन-दुखियों के भाग्य को बदलने वाले हैं। जो भी आपकी शरण में आता है, आप उसकी लाज रखते हैं और उसके संकटों को हर लेते हैं, इसीलिए आपका नाम 'संकटमोचन' है।
तृतीय भाग में हनुमान जी के ज्ञान और भक्ति की चर्चा है। वे केवल शारीरिक रूप से ही बलवान नहीं हैं, बल्कि वे बल और बुद्धि के सागर हैं। वे अपने आराध्य प्रभु श्री राम के नाम का निरंतर स्मरण करते हैं और अपने भक्तों को भी इस संसार रूपी भवसागर से पार उतारने की सामर्थ्य रखते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे प्रत्येक सनातनी के हृदय के अत्यंत निकट बनाती हैं:
- दुःख निवारण शक्ति: इस भजन का मुख्य स्वर कष्टों की निवृत्ति है। हनुमान जी को कलयुग का जाग्रत देवता माना गया है, जो अपने भक्तों के पुकारते ही उनके संकट दूर करने दौड़े चले आते हैं।
- दास्य भाव की पराकाष्ठा: भजन में भक्त स्वयं को अत्यंत दीन मानकर हनुमान जी के चरणों में पूर्णतः समर्पित कर देता है। यह समर्पण ही अहंकार को नष्ट करता है।
- राम भक्ति का संदेश: भजन में स्पष्ट किया गया है कि हनुमान जी की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग 'राम नाम' का सुमिरन है। जो राम का नाम लेता है, हनुमान जी उसके सहायक स्वतः बन जाते हैं।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस भजन के नियमित श्रवण से घर और मन की नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और सकारात्मकता का प्रवाह होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि प्रभु की भक्ति के लिए कोई भी समय वर्जित नहीं है, परंतु शास्त्रों और लोक परंपरा के अनुसार इस भजन के गायन की एक विशेष विधि और समय है:
- सर्वोत्तम दिन: मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष माना गया है। इन दिनों इस भजन का पाठ अवश्य करना चाहिए।
- समय: प्रातःकाल सूर्योदय के समय या संध्याकाल में आरती के पूर्व इस भजन को गाना अत्यंत मंगलकारी होता है।
- विधि:
- सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सम्मुख घी या चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
- उन्हें लाल पुष्प, सिंदूर और बूंदी का प्रसाद अर्पित करें।
- पूर्ण एकाग्रता और शांत मन से हाथ जोड़कर इस भजन का सस्वर गायन करें।
- भजन पूर्ण होने के बाद श्री हनुमान चालीसा का पाठ करना सोने पर सुहागा माना जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन रुद्र अवतार, पवनपुत्र श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी महाराज भगवान श्री राम के परम भक्त, असीम बल के स्वामी, और ज्ञानियों में अग्रगण्य हैं। वे अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं, जो आज भी पृथ्वी पर सशरीर उपस्थित रहकर धर्म की रक्षा और भक्तों का कल्याण कर रहे हैं।
इस भजन की शैली और भाव गोस्वामी तुलसीदास जी की रचनाओं जैसे संकटमोचन हनुमान अष्टक और बजरंग बाण से अत्यधिक प्रेरित है। तुलसीदास जी ने कलयुग में हनुमान जी की उपासना को सबसे सुलभ और प्रभावी बताया है। यह भजन उसी समृद्ध संत परंपरा की देन है जो जन-जन के कंठ में बसी हुई है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन पारंपरिक रूप से भारतीय लोक मानस और भक्ति संगीत का हिस्सा रहा है। इसकी रचना के पीछे कोई एक विशिष्ट ऐतिहासिक घटना तो प्रमाणित नहीं है, परंतु यह मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के दौरान विकसित हुई लोक-भजन शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस भजन को विभिन्न प्रसिद्ध गायकों ने अपनी मधुर आवाज देकर वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया है। इसकी सरल शब्दावली और कर्णप्रिय धुन के कारण यह बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी को आसानी से याद हो जाता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल और सुबोध खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर सम्मिश्रण देखने को मिलता है।
- काव्य रूप: यह एक गेय पद (गीत) है जिसे सुगमता से गाया जा सकता है।
- अलंकार: इसमें अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है (जैसे: 'मारुती नंदन', 'विनती बारम्बार')।
- रस: मुख्य रूप से इसमें 'भक्ति रस' और 'करुण रस' का प्रवाह है, जो साधक के हृदय को द्रवित कर देता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण सूत्र भी सिखाता है:
- अहंकार का त्याग: जब हम कहते हैं "हाथ जोड़कर अरज करत हूँ", तो हम अपने अहंकार को विसर्जित कर रहे होते हैं। जीवन में प्रगति के लिए विनम्रता अनिवार्य है।
- कर्म के साथ प्रार्थना: हनुमान जी बल और बुद्धि दोनों के प्रतीक हैं। यह हमें सिखाता है कि जीवन के संघर्षों में हमें अपनी बुद्धि और शक्ति का पूरा उपयोग करना चाहिए और साथ ही ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए।
- निस्वार्थ सेवा: हनुमान जी ने जीवनभर निष्काम भाव से प्रभु श्री राम की सेवा की। हमें भी अपने कर्तव्यों का पालन बिना किसी फल की आस के करना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| दुःख भंजन | दुखों का नाश करने वाले | हनुमान जी जो भक्तों के सभी भौतिक और आध्यात्मिक कष्टों को हर लेते हैं। |
| मारुती नंदन | पवन देव के पुत्र | हनुमान जी का एक नाम जो उनकी दिव्य उत्पत्ति को दर्शाता है। |
| अष्ट सिद्धि | आठ प्रकार की अलौकिक शक्तियां | अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व। |
| नव निधि | नौ प्रकार के दिव्य खजाने | पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील और खर्व। |
| भव सागर | संसार रूपी समुद्र | जन्म और मृत्यु का चक्र जिससे पार पाना ही मोक्ष है। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
१. "हे दुःख भंजन मारुती नंदन सुन लो मेरी पुकार। पवन सुत विनती बारम्बार॥"
हे पवनपुत्र, हे दुखों का अंत करने वाले मारुति नंदन! आप मेरी करुण पुकार सुन लीजिए। मैं आपके चरणों में बार-बार शीश झुकाकर प्रार्थना कर रहा हूँ कि मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।
२. "अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, दुखियों के तुम भाग्य विधाता।"
माता सीता के आशीर्वाद से आप आठों सिद्धियों और नौ निधियों को प्रदान करने की सामर्थ्य रखते हैं। आप इस संसार के समस्त निर्धनों और दुखियों के सोए हुए भाग्य को जगाने वाले विधाता हैं।
३. "शरण पड़े की लाज बचाओ, संकट मोचन नाम तिहारो।"
जो भी प्राणी आपकी शरण में आ जाता है, आप उसकी मान-प्रतिष्ठा की रक्षा करते हैं। आपका नाम ही 'संकटमोचन' है, जो सभी प्रकार की विपत्तियों को पल भर में दूर कर देता है।
४. "तुम बल बुद्धि के सागर हो, भक्तों के तुम हितकारी हो।"
आप अतुलित बल के स्वामी और परम बुद्धिमान हैं। आप अपने भक्तों का सदैव कल्याण करने वाले और उनका हित चाहने वाले कृपालु देव हैं।
५. "राम नाम का सुमिरन करके, भव सागर से पार उतारो।"
आप स्वयं निरंतर राम नाम का जप करते रहते हैं। हे प्रभु! मुझे भी राम नाम की ऐसी महिमा प्रदान करें कि मैं इस कठिन संसार रूपी सागर से सहज ही पार हो जाऊँ।
६. "अंजनी पुत्र महा बलदायी, संतन के तुम सदा सहाई।"
माता अंजनी के तेजस्वी पुत्र, आप अत्यंत बलशाली हैं। आप सज्जनों, संतों और भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं और उनके सहायक बनते हैं।
७. "हाथ जोड़कर अरज करत हूँ, कर दो मेरा बेड़ा पार।"
मैं अत्यंत दीन भाव से दोनों हाथ जोड़कर आपसे यही प्रार्थना करता हूँ कि मेरे जीवन की नैया को पार लगा दीजिए और मुझे मोक्ष का मार्ग दिखाइए।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ हनुमान जी के निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का जाप करने से भजन का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:
"मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥"
अर्थ: जिनकी मन के समान गति और वायु के समान वेग है, जो परम जितेंद्रिय और बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, उन पवनपुत्र, वानरयूथपति, श्री रामदूत हनुमान जी की शरण में मैं जाता हूँ।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | हे दुःख भंजन मारुती नंदन |
| आराध्य देव | श्री हनुमान जी महाराज |
| मुख्य विषय | संकट निवारण, शरणागति, राम भक्ति |
| भक्ति का भाव | दास्य भाव, विनय भाव |
| भाषा | सरल हिंदी (खड़ी बोली) |
| उपयुक्त अवसर | मंगलवार पूजा, शनिवार पूजा, हनुमान जयंती, सुंदरकांड पाठ |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"हे दुःख भंजन मारुती नंदन" भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस भजन का मुख्य उद्देश्य हनुमान जी से अपने कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करना और उनके प्रति पूर्ण समर्पण व्यक्त करना है। यह मानसिक शांति और सुरक्षा की भावना प्रदान करता है।
इस भजन का पाठ कब करना चाहिए?
इस भजन का पाठ प्रतिदिन सुबह या शाम को किया जा सकता है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
क्या इस भजन को बच्चे भी गा सकते हैं?
हाँ, इस भजन की भाषा अत्यंत सरल और धुन बहुत ही मधुर है। बच्चों को यह भजन सिखाने से उनमें अच्छे संस्कार, साहस और एकाग्रता का विकास होता है।
'अष्ट सिद्धि और नव निधि' का क्या अर्थ है?
ये हनुमान जी को प्राप्त आठ अलौकिक शक्तियां (सिद्धियां) और नौ प्रकार के दिव्य खजाने (निधियां) हैं, जिन्हें वे अपने सच्चे भक्तों को प्रदान कर सकते हैं।
क्या इस भजन के पाठ से भय दूर होता है?
हाँ, हनुमान जी को संकटमोचन कहा गया है। इस भजन के श्रद्धापूर्वक पाठ से हर प्रकार का अनजाना भय, नकारात्मकता और मानसिक तनाव दूर हो जाता है।
इस भजन को गाते समय किस दिशा की ओर मुख करना चाहिए?
पूजा करते समय या भजन गाते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना सर्वोत्तम माना जाता है।
क्या हनुमान जी की पूजा में सिंदूर चढ़ाना जरूरी है?
हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। यदि संभव हो तो पूजा के समय उन्हें चमेली के तेल में मिलाकर सिंदूर अर्पित करें, इससे वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
इस भजन के साथ और कौन से पाठ किए जा सकते हैं?
इस भजन के साथ आप श्री हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ भी कर सकते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "हे दुःख भंजन मारुती नंदन" भजन के आध्यात्मिक, साहित्यिक और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। हमारी संपादकीय टीम ने सनातन धर्म के ग्रंथों और पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर इस सामग्री को तैयार किया है। यह भजन कलयुग में हनुमान जी की उपासना का एक अत्यंत सरल और प्रभावी माध्यम है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री - भक्तीलोक टीम द्वारा समीक्षित और संवर्धित।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण - सुंदरकांड प्रसंग
- श्रीरामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास
- पारंपरिक हनुमान भजन संग्रह एवं लोक संगीत परंपरा
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें