Papmochani Ekadashi Vrat Katha बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

Bansidhar Choudhary Ka Navratri Song - तोरा चरन मै आके झुकलवा - Tora Charan Mai Ake Jhukalawa

पढ़ें Bansidhar Choudhary Ka Navratri Song - तोरा चरन मै आके झुकलवा - Tora Charan Mai Ake Jhukalawa का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि

मैथिली और अंगिका लोक संगीत के सुप्रसिद्ध गायक बंसीधर चौधरी द्वारा स्वरबद्ध और रचित "तोरा चरन मै आके झुकलवा" (Tora Charan Mai Ake Jhukalawa) एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी नवरात्रि भजन है। यह गीत माँ दुर्गा के प्रति अनन्य समर्पण, शरणागति और भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाता है। लोक धुन पर आधारित यह भजन श्रोताओं के हृदय में सीधे उतर जाता है और उन्हें माँ के चरणों में लीन होने के लिए प्रेरित करता है। सनातन धर्म में शरणागति को मोक्ष और दुखों से मुक्ति का सबसे सुगम मार्ग माना गया है। इस भजन के माध्यम से एक व्याकुल भक्त अपनी सांसारिक पीड़ाओं, मोह-माया के बंधनों और कलयुग के अंधकार से मुक्ति पाने के लिए माँ जगदम्बा की शरण में आता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर इस भजन का श्रवण और कीर्तन साधकों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और असीम संतोष प्रदान करता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

तोरा चरन मै आके झुकलवा - भजन लिरिक्स


(मुखड़ा)
तोरा चरन मै आके झुकलवा, मैया तोरा चरन मै आके झुकलवा
सब दुःख दूर भेलवा, मैया सब दुःख दूर भेलवा
तोरा चरन मै आके झुकलवा...

(अंतरा 1)
संसार के मोह-माया में, हम त भटकल रहली
अंधियारा जीवन में, हम त भटकल रहली
अब तोरा ज्योति से, मनवा के भरलवा
तोरा चरन मै आके झुकलवा...

(अंतरा 2)
कलयुग के भीड़ में, हम त अकेल रहली
बिना सहारा के, हम त अकेल रहली
अब तोरा ममता के, आंचल में पललवा
तोरा चरन मै आके झुकलवा...

(अंतरा 3)
मैया तोरे द्वारे पे, आस लगाई के अइली
झोली पसार के, तोरे द्वारे अइली
अब तोरा दया से, जीवन संवरलवा
तोरा चरन मै आके झुकलवा, मैया तोरा चरन मै आके झुकलवा
सब दुःख दूर भेलवा, मैया सब दुःख दूर भेलवा...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह भजन शरणागति रस से ओत-प्रोत है। इसके प्रत्येक अंतरे में भक्त की आंतरिक स्थिति और माँ की असीम कृपा का सुंदर चित्रण किया गया है:

मुखड़े का भावार्थ

भक्त कहता है कि हे मैया! जब से मैं आपके पावन चरणों में आकर झुका हूँ, जब से मैंने आपके चरणों में आत्मसमर्पण किया है, तब से मेरे जीवन के सारे कष्ट, दुःख और संताप दूर हो गए हैं। आपके चरणों का स्पर्श पाते ही मन को वह परम शांति मिली है जिसकी खोज में मैं युगों से भटक रहा था।

प्रथम अंतरे का भावार्थ

भक्त अपनी पूर्व स्थिति को स्वीकार करते हुए कहता है कि हे माँ! मैं इस संसार की माया, मोह, लोभ और वासनाओं के जाल में फंसा हुआ था। मेरा जीवन अज्ञानता के अंधकार से घिरा हुआ था और मैं दिशाहीन होकर भटक रहा था। लेकिन जब आपकी कृपा की दिव्य ज्योति मेरे जीवन में चमकी, तो मेरा संपूर्ण मन आलोकित हो गया। अब मेरे मन का अंधकार दूर हो चुका है और वह आपकी भक्ति के प्रकाश से भर गया है।

द्वितीय अंतरे का भावार्थ

कलयुग के इस कोलाहल और स्वार्थी संसार में भक्त स्वयं को अत्यंत अकेला और असहाय महसूस कर रहा था। वह कहता है कि इस भीड़ में मेरा कोई सच्चा सहारा नहीं था। लेकिन जब मैंने आपको पुकारा, तो आपने मुझे अपनी ममतामयी गोद में समेट लिया। अब मैं आपके आंचल की शीतल छाया में सुरक्षित महसूस कर रहा हूँ और मेरा पालन-पोषण आपकी दिव्य ममता के साए में हो रहा है।

तृतीय अंतरे का भावार्थ

अंतिम अंतरे में भक्त पूर्ण विश्वास के साथ माँ के द्वार पर याचना करता है। वह कहता है कि हे माँ! मैं अपनी खाली झोली लेकर, मन में अटूट विश्वास और आशा संजोए आपके द्वार पर आया हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपकी दया दृष्टि मात्र से मेरा यह साधारण और संघर्षपूर्ण जीवन संवर जाएगा। आपकी कृपा से मेरे जीवन का कल्याण निश्चित है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस भजन की मुख्य भावना "शरणागति" (Surrender) और "वात्सल्य रस" (Maternal Love) है। हिंदू दर्शन में भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण को ही दुखों से मुक्ति का अंतिम साधन माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में भी भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं - "सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज" (सभी धर्मों को छोड़कर मेरी शरण में आ जाओ)। यह भजन इसी दार्शनिक सत्य को लोक भाषा में प्रस्तुत करता है।

यह गीत हमें संदेश देता है कि संसार की भौतिक वस्तुएं, धन, और संबंध क्षणभंगुर हैं। कलयुग के इस कठिन समय में केवल ईश्वर (माँ दुर्गा) की भक्ति ही एकमात्र शाश्वत सत्य है। जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर ईश्वर के चरणों में नतमस्तक होता है, तभी उसे वास्तविक सुख और शांति की प्राप्ति होती है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Information)
गीत का नाम (Song Name) तोरा चरन मै आके झुकलवा (Tora Charan Mai Ake Jhukalawa)
गायक (Singer) बंसीधर चौधरी (Bansidhar Choudhary)
गीतकार (Lyricist) पारंपरिक एवं बंसीधर चौधरी
संगीत (Music) लोक धुन (Folk Melody)
भाषा (Language) मैथिली / अंगिका (बिहार का लोक संगीत)
श्रेणी (Category) Latest Bhakti Song, देवी भजन, नवरात्रि विशेष

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

बंसीधर चौधरी बिहार के लोक संगीत क्षेत्र के एक अत्यंत लोकप्रिय और प्रतिष्ठित कलाकार हैं। वे अपनी अनूठी गायन शैली और ठेठ देहाती व पारंपरिक धुनों के लिए जाने जाते हैं। उनके गीतों में मिट्टी की सोंधी महक और आम जनमानस की भावनाएं स्पष्ट रूप से झलकती हैं। इस नवरात्रि गीत में उन्होंने अपनी आवाज के माध्यम से भक्ति और करुणा का ऐसा समां बांधा है जो हर भक्त के हृदय को छू लेता है। संगीत संयोजन में पारंपरिक वाद्यों जैसे ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम का उत्कृष्ट प्रयोग किया गया है, जो इसे और अधिक कर्णप्रिय बनाता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) संदर्भ (Context)
झुकलवा झुकना या नतमस्तक होना माँ के चरणों में समर्पण करना
भेलवा हो गया दुखों का समाप्त हो जाना
भटकल रहली भटक रहा था संसार की मोह-माया में दिशाहीन होना
मनवा हृदय या मन आंतरिक चेतना
भरलवा भर गया ज्ञान और भक्ति से परिपूर्ण होना
पललवा पोषित होना या पलना माँ के आंचल की सुरक्षा में रहना
संवरलवा सुधर गया या सुंदर हो गया जीवन का कल्याण होना

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्रों में लोक भजनों का सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है। नवरात्रि के समय इन क्षेत्रों में देवी पंडालों और घरों में पारंपरिक लोक गीतों की गूंज सुनाई देती है। "तोरा चरन मै आके झुकलवा" केवल एक मनोरंजक गीत नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक साधना का हिस्सा है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, यह भजन साधक को अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करता है। जब हम गाते हैं कि "संसार के मोह-माया में हम भटकल रहली", तो यह हमें वैराग्य की ओर ले जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि सांसारिक सुख अस्थाई हैं और वास्तविक आनंद केवल भगवद-भक्ति में ही निहित है। नवरात्रि के नौ दिनों में जब साधक उपवास रखते हैं और इस प्रकार के भजनों का गायन करते हैं, तो उनकी चेतना का स्तर ऊंचा उठता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

    अहंकार का त्याग: चरणों में झुकना अहंकार की समाप्ति का प्रतीक है। जब तक मनुष्य का अहंकार जीवित है, तब तक वह ईश्वर की वास्तविक कृपा का अनुभव नहीं कर सकता। धैर्य और विश्वास: कलयुग की कठिनाइयों में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास बनाए रखना ही जीवन को पार लगाने का मार्ग है। सच्चा आश्रय: संसार में कोई भी व्यक्ति या वस्तु स्थाई सहारा नहीं दे सकती। केवल आदि शक्ति माँ दुर्गा ही जीव की सच्ची रक्षक हैं। कृतज्ञता का भाव: जब भक्त कहता है कि "अब तोरा दया से जीवन संवरलवा", तो यह ईश्वर के प्रति कृतज्ञता (Gratitude) व्यक्त करने की सीख देता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि माँ दुर्गा की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन को सुनने और गाने के विशेष अवसर निम्नलिखित हैं:

    शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: इन नौ दिनों में सुबह और संध्या आरती के समय इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है। मंगलवार और शुक्रवार: ये दिन देवी साधना के लिए विशेष माने जाते हैं। इन दिनों में इस भजन के श्रवण से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पारिवारिक सत्संग एवं कीर्तन: पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए आयोजित कीर्तनों में इस लोक भजन को गाकर सामूहिक भक्ति का आनंद लिया जा सकता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु (Key Point) संक्षिप्त विवरण (Quick Detail)
भजन का नाम तोरा चरन मै आके झुकलवा
मुख्य विषय माँ दुर्गा की शरणागति और महिमा
मुख्य रस भक्ति रस, करुणा रस, वात्सल्य रस
गायन शैली मैथिली लोक संगीत (Folk Style)
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, देवी जागरण
संबंधित मंत्र लक्ष्मी गायत्री मंत्र, सर्वमंगल मांगल्ये श्लोक

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय नवरात्रि भजन के मुख्य गायक बंसीधर चौधरी हैं, जो अपने सुरीले और पारंपरिक लोक गीतों के लिए जाने जाते हैं।

यह भजन मुख्य रूप से मैथिली और अंगिका (बिहार की क्षेत्रीय लोक भाषाएं) के मिश्रण में गाया गया है, जो इसे एक मधुर और मिट्टी से जुड़ाव वाला स्वरूप प्रदान करता है।

इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण आत्मसमर्पण (शरणागति) है। जब कोई भक्त अपने अहंकार को त्यागकर माँ दुर्गा के चरणों में शरण लेता है, तो उसके जीवन के सभी कष्ट और अंधकार दूर हो जाते हैं।

यद्यपि यह एक विशेष नवरात्रि गीत है, लेकिन माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए इसे किसी भी मंगलवार, शुक्रवार या दैनिक पूजा के समय सुना और गाया जा सकता है।

भजन के अनुसार, माँ दुर्गा की दिव्य ज्योति (ज्ञान का प्रकाश) ही मनुष्य को संसार की मोह-माया और अज्ञानता के अंधकार से मुक्त करा सकती है।

इस भजन के साथ माँ लक्ष्मी और दुर्गा की प्रसन्नता के लिए लक्ष्मी गायत्री मंत्र या गायत्री मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।

इसकी सरल शब्दावली, हृदय को छू लेने वाली पारंपरिक धुन और बंसीधर चौधरी की भावपूर्ण आवाज ही इसकी अपार लोकप्रियता का मुख्य कारण है। यह सीधे आम लोगों की भावनाओं से जुड़ता है।

इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण दीनता, श्रद्धा, और माँ के प्रति एक अबोध बालक जैसी निष्कपट भावना रखनी चाहिए, जिससे माँ की कृपा का अनुभव शीघ्र हो सके।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी विशेषज्ञ टीम ने बंसीधर चौधरी के इस सुप्रसिद्ध लोक भजन "तोरा चरन मै आके झुकलवा" के मूल भावों, लोक संस्कृति में इसके महत्व और इसके दार्शनिक पहलुओं का गहन विश्लेषण करके इसे तैयार किया है। इस भजन की भाषा भले ही क्षेत्रीय है, परंतु इसका आध्यात्मिक संदेश सार्वभौमिक है। यह सामग्री सनातन धर्म की शरणागति परंपरा और लोक संगीत के अद्भुत समन्वय को रेखांकित करती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

    श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - देवी शरणागति एवं स्तुति प्रसंग। बिहार की लोक संगीत परंपरा एवं क्षेत्रीय भजन संग्रह। बंसीधर चौधरी के आधिकारिक संगीत एलबम और प्रस्तुतियां।

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन और इसका आध्यात्मिक विश्लेषण पसंद आया हो, तो आप हमारी वेबसाइट पर निम्नलिखित लेख और भजन भी पढ़ सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!