यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है" श्री हनुमान जी के प्रति अनन्य प्रेम, अटूट विश्वास और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है। भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है। भक्त जब जीवन की कठिनाइयों से घिर जाता है, तब वह पवनपुत्र हनुमान को पुकारता है, जो संकटमोचन हैं और अपने भक्तों के दुःख हरते हैं। यह भजन उसी भावना का सजीव चित्रण है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है
आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है,
तेरे बिना प्रभु मेरा कौन सहारा है।
आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है।।
संकट में हूँ मैं प्रभु दौड़े चले आओ,
बेड़ा मेरा पार लगाओ,
तेरे चरणों में मैंने शीश झुकाया है,
आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है।।
तुम हो पवन के पुत्र बलवान,
तुम हो राम के प्रिय भगवान,
तुमने ही तो संकट मेरे सारे मिटाए हैं,
आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है।।
जय जय जय हनुमान, जय जय जय हनुमान,
जय जय जय हनुमान, जय जय जय हनुमान।
तेरी महिमा अपरंपार, तू है भक्तों का आधार,
तेरे गुण गाता हूँ मैं, तुझे पुकारता हूँ मैं,
आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है।।
राम नाम की महिमा न्यारी,
तुम हो सेवक राम दुलारे,
मेरे मन की सारी पीड़ा हर लो,
आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है।।
मैं हूँ तेरा भक्त पुकारूँ,
दुःख से मुझे उबारो,
तेरे सिवा नहीं कोई मेरा,
आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है।।
जय हनुमान जय हनुमान,
जय हनुमान जय हनुमान।
आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है।।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त की आत्मा की पुकार है। "आजाओ बजरंगी अब तेरा सहारा है" का अर्थ है कि हे बजरंगबली! अब मेरे पास तुम्हारे सिवा कोई सहारा नहीं है, तुम मेरे जीवन में प्रकट होओ और मेरी रक्षा करो। भक्त अपनी असमर्थता और विवशता को स्वीकार करते हुए प्रभु को पुकारता है। यह पूर्ण शरणागति का भाव है, जहाँ भक्त स्वयं को निर्बल मानकर भगवान को सर्वशक्तिमान स्वीकार करता है।
दूसरे अंतरे में भक्त कहता है कि संकट में हूँ प्रभु दौड़े चले आओ, बेड़ा मेरा पार लगाओ। यह संसार सागर रूपी भवसागर से पार उतरने की प्रार्थना है। भक्त जानता है कि हनुमान जी संकटमोचन हैं, वे अपने भक्तों के कष्टों को दूर करने में समर्थ हैं। तेरे चरणों में मैंने शीश झुकाया है - यह विनम्रता और समर्पण का प्रतीक है। जब भक्त अपना अहंकार त्यागकर प्रभु के चरणों में शीश झुकाता है, तो उसका जीवन धन्य हो जाता है।
तीसरे अंतरे में हनुमान जी की महिमा का गुणगान है। वे पवन के पुत्र हैं, बलवान हैं, राम के प्रिय भगवान हैं। उन्होंने भक्त के सारे संकट मिटाए हैं। यह भक्त की कृतज्ञता का भाव है। भक्त अपने पूर्वजन्मों और इस जन्म के अनुभवों से जानता है कि हनुमान जी ने उसकी रक्षा की है। इसलिए वह बार-बार उन्हें पुकारता है।
"जय जय जय हनुमान" का उद्घोष भक्ति का उत्सव है। यह नाम संकीर्तन का सर्वोच्च रूप है। भक्त कहता है कि तेरी महिमा अपरंपार है, तू भक्तों का आधार है। तेरे गुण गाता हूँ मैं, तुझे पुकारता हूँ मैं। यह भजन का मुख्य भाव है - निरंतर स्मरण और कीर्तन।
चौथे अंतरे में राम नाम की महिमा बताई गई है। हनुमान जी राम के सेवक हैं और राम उनके आराध्य हैं। भक्त हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि मेरे मन की सारी पीड़ा हर लो। यह मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक पीड़ा से मुक्ति की प्रार्थना है।
अंतिम अंतरे में भक्त अपनी दीनता प्रकट करता है - मैं हूँ तेरा भक्त पुकारूँ, दुःख से मुझे उबारो। तेरे सिवा नहीं कोई मेरा। यह भाव ही भक्ति का सार है। जब भक्त को यह अनुभव हो जाता है कि प्रभु के अतिरिक्त कोई नहीं है, तो वह मुक्ति का अधिकारी हो जाता है।
यह भजन भक्ति, शरणागति, विनम्रता, कृतज्ञता और आत्मसमर्पण का संपूर्ण दर्शन प्रस्तुत करता है। यह साधक को अहंकार से मुक्त कर प्रभु चरणों में लीन कर देता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन श्री हनुमान जी को समर्पित है, जो संकटमोचन, बलिदानी, रामदूत और भक्तवत्सल हैं। हनुमान जी की कथा रामायण, महाभारत और विभिन्न पुराणों में वर्णित है। वे शिव के अंशावतार माने जाते हैं और उन्हें चिरंजीवी कहा गया है। हनुमान जी की उपासना कलयुग में विशेष फलदायी मानी गई है।
इस भजन की मुख्य विशेषताएं हैं - सरल भाषा, मधुर भाव, गहन शरणागति, बार-बार दोहराया जाने वाला मुखड़ा, और हनुमान जी के गुणों का कीर्तन। यह भजन भक्त को भावनात्मक रूप से जोड़ता है और उसके भीतर आत्मविश्वास जगाता है।
शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी का नाम स्मरण करने से भय, रोग, शोक, दुःख और संकट दूर होते हैं। यह भजन उन भक्तों के लिए विशेष है जो जीवन में अकेलेपन, असहायता और निराशा का अनुभव कर रहे हैं। यह भजन सुनने और गाने से मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
यह भजन मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, राम नवमी, दीपावली और किसी भी शुभ अवसर पर गाया जाता है। अनेक भक्त इसे दैनिक साधना का हिस्सा बनाते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को गाने और सुनने का कोई कठोर नियम नहीं है, क्योंकि भक्ति में भाव ही प्रधान है। फिर भी शास्त्रीय परंपरा के अनुसार कुछ शुभ समय और विधियाँ हैं:
- समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (4 से 6 बजे), सायंकाल आरती के समय, मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से।
- स्थान: पूजा स्थल, मंदिर, तुलसी के पौधे के समीप, या किसी भी शुद्ध और शांत स्थान पर।
- विधि: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाएं। लाल फूल, सिंदूर, चमेली का तेल, बूंदी का प्रसाद अर्पित करें। फिर हाथ जोड़कर भजन गाएं।
- माला: हनुमान चालीसा या "ॐ हं हनुमते रुद्रात्मने हुं फट्" मंत्र का जाप करें।
- भाव: गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, प्रेम और समर्पण का भाव रखें। स्वर की अपेक्षा भाव महत्वपूर्ण है।
भजन के बाद हनुमान चालीसा का पाठ और आरती अवश्य करें। इससे साधना पूर्ण होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति परंपरा, शास्त्रीय संदर्भों और लोक भजन परंपरा के आधार पर संकलित किया गया है। भजन के बोल पारंपरिक रूप से प्रचलित हैं और इन्हें यथावत प्रस्तुत किया गया है। भावार्थ और महत्व की व्याख्या सनातन धर्म के भक्ति सिद्धांतों, रामायण, और हनुमान उपासना परंपरा पर आधारित है।
सामग्री को प्रामाणिकता, सरलता और भक्ति भाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे भजन को श्रद्धा और समर्पण के साथ गाएं और अपने जीवन में हनुमान जी के गुणों - सेवा, भक्ति, बल और ब्रह्मचर्य - को अपनाने का प्रयास करें।
संदर्भ: श्रीमद्भगवद्गीता, वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास कृत रामचरितमानस, और हनुमान उपासना परंपरा के ग्रंथ।
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