"छम छम नाचे देखो वीर हनुमना" सनातन धर्म में श्री हनुमान जी की भक्ति और उनके अनन्य राम-प्रेम को अभिव्यक्त करने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय और ऊर्जावान भजन है। यह भजन हनुमान जी के उस दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है, जिसमें वे अपने आराध्य प्रभु श्री रामचंद्र जी के संकीर्तन में लीन होकर पैरों में घुंघरू बांधकर आनंदपूर्वक नृत्य कर रहे हैं। हनुमान जी को संकटमोचन, बल, बुद्धि और विद्या के दाता के रूप में पूजा जाता है, परंतु उनका सबसे प्रिय और शाश्वत स्वरूप 'रामभक्त' का है। इस भजन में दास्य भाव और सख्य भाव की पराकाष्ठा देखने को मिलती है, जहां एक परम शक्तिशाली देव अपने प्रभु के नाम पर मग्न होकर नाच रहे हैं। इस पावन भजन का गायन विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, सुंदरकांड पाठ और श्री राम कथा के अवसरों पर किया जाता है। यह भजन भक्तों के हृदय में भक्ति, समर्पण और आनंद का संचार करता है और उन्हें प्रभु चरणों में लीन होने की प्रेरणा देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ छम छम नाचे देखो वीर हनुमना ॥
भकत बड़े बलवान तुम्ही हो,
सालासर हनुमान तुम्ही हो।
आया हूँ मैं दर पे, तुझको आज पुकारा,
पावों में घुंघरू बाँध के नाचे, मेरा बजरंग प्यारा॥
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना,
कहेते है लोग इसे राम का दीवाना॥
पाँवो मे घुंगूरू बाँध के नाचे,
रामजी का नाम इन्हे बड़ा प्यारा लागे।
राम ने भी देखो इसे खूब पहचाना,
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना॥
जहाँ जहाँ कीर्तन होता श्री राम का,
लगता है पहेरा वहाँ वीर हनुमान का।
राम के चरण मे है इनका टिकना,
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना॥
नाच नाच प्रभु श्री राम को रिझवे,
'बनवारी' रात दिन नाचता ही जाए।
भक्तो मे भक्त बड़ा, दुनिया ने माना,
छम छम नाचे देखो वीर हनुमना॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन श्री हनुमान जी की निश्छल और अनन्य भक्ति का सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है। भजन का मुख्य भाव यह है कि हनुमान जी के लिए प्रभु श्री राम के नाम का संकीर्तन ही सर्वोपरि आनंद है। जब भी कहीं भगवान श्री राम का नाम लिया जाता है या उनका कीर्तन होता है, हनुमान जी वहां अदृश्य या प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होकर आनंद में मग्न हो जाते हैं और अपने पैरों में घुंघरू बांधकर नृत्य करने लगते हैं।
भजन की शुरुआत में भक्त हनुमान जी की महिमा गाते हुए कहता है कि हे सालासर हनुमान! आप भक्तों में सबसे बलवान हैं। मैं आपके द्वार पर आया हूँ और आपको पुकार रहा हूँ। आप अपने पैरों में घुंघरू बांधकर नृत्य कर रहे हैं। लोग आपको श्री राम का दीवाना कहते हैं, क्योंकि आपकी हर सांस में, आपके रोम-रोम में केवल राम नाम ही बसा है। प्रभु श्री राम ने भी आपकी इस निस्वार्थ भक्ति को भली-भांति पहचाना है और आपको अपने हृदय से लगाया है।
भजन का यह भी गहरा संदेश है कि जहाँ भी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का संकीर्तन होता है, वहाँ वीर हनुमान जी का पहरा लग जाता है। वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। हनुमान जी का एकमात्र आश्रय प्रभु श्री राम के चरण कमल हैं। वे दिन-रात नाच-नाचकर अपने प्रभु को रिझाते हैं। संपूर्ण संसार इस बात को स्वीकार करता है कि हनुमान जी से बड़ा कोई भक्त इस ब्रह्मांड में नहीं हुआ है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से विशिष्ट और अत्यंत प्रिय बनाती हैं:
- राम-नाम की महिमा: यह भजन सिद्ध करता है कि हनुमान जी की शक्ति का मुख्य स्रोत राम-नाम का निरंतर जप और संकीर्तन है।
- भक्ति का नृत्य स्वरूप: सनातन परंपरा में नृत्य को ईश्वर की आराधना का एक परम साधन माना गया है। हनुमान जी का नृत्य उनके परम आनंद (सच्चिदानंद) की स्थिति को दर्शाता है।
- सालासर बालाजी का संदर्भ: भजन में 'सालासर हनुमान' का उल्लेख है, जो राजस्थान के प्रसिद्ध सालासर बालाजी धाम के प्रति भक्तों की अगाध श्रद्धा को प्रदर्शित करता है।
- सुरक्षा का भाव: भजन की यह पंक्ति "जहाँ जहाँ कीर्तन होता श्री राम का, लगता है पहेरा वहाँ वीर हनुमान का" भक्तों को मानसिक शांति और सुरक्षा का अनुभव कराती है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन का गायन अत्यंत सरल और लयबद्ध है, जिससे कोई भी भक्त आसानी से इसके साथ जुड़ सकता है। इसे गाने और सुनने की सर्वोत्तम विधि निम्नलिखित है:
- सर्वोत्तम दिन: मंगलवार और शनिवार हनुमान जी की आराधना के लिए विशेष माने गए हैं। इन दिनों इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
- विशेष अवसर: हनुमान जयंती, रामनवमी, सुंदरकांड पाठ की समाप्ति पर, या किसी भी धार्मिक संकीर्तन के दौरान इस भजन को गाया जाता है।
- गायन की विधि: इस भजन को गाते समय हाथ से ताली बजाकर या मंजीरे, ढोलक और झांझ के साथ सामूहिक रूप से गाना चाहिए। इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- मानसिक स्थिति: भजन गाते समय मन में हनुमान जी के प्रति पूर्ण समर्पण और श्री राम के प्रति आदर का भाव होना चाहिए।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी को चिरंजीवी माना गया है, अर्थात वे आज भी इस पृथ्वी पर सशरीर उपस्थित हैं। इस भजन में उनके साथ-साथ उनके आराध्य प्रभु श्री राम का भी निरंतर गुणगान किया गया है।
इस भजन के रचयिता के रूप में 'बनवारी' जी का नाम आता है, जिन्होंने अपनी सरल और सुबोध काव्य शैली के माध्यम से हनुमान जी की अनन्य भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया है। हनुमान जी की भक्ति परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास जी का स्थान सर्वोपरि है, जिन्होंने श्री हनुमान चालीसा की रचना की थी। यह भजन भी उसी समृद्ध रामभक्ति परंपरा का एक आधुनिक और मधुर हिस्सा है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन की पृष्ठभूमि लोक-भक्ति और संकीर्तन परंपरा से जुड़ी है। भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में होने वाले जागरण, चौकी और संकीर्तन में इस भजन को अनिवार्य रूप से गाया जाता है। हनुमान जी के पैरों में घुंघरू बांधकर नाचने का प्रसंग कई पौराणिक कथाओं और लोक कथाओं में मिलता है, जहां वे प्रभु राम के राज्याभिषेक या उनके आगमन की खुशी में सुध-बुध खोकर नाचने लगते हैं। इसी पावन प्रसंग को आधार बनाकर इस भजन की रचना की गई है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुगम और बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें राजस्थानी और ब्रजभाषा का भी हल्का प्रभाव देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली गेय (गाने योग्य) है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'दीवाना', 'रिझावे', 'बजरंग प्यारा' सीधे भक्तों के हृदय को छूते हैं। भजन में अनुप्रास और पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है, जैसे 'छम छम' और 'नाच नाच', जो भजन की लय और गति को बढ़ाते हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल मनोरंजन या सामान्य गायन के लिए नहीं है, बल्कि यह हमें गहरे आध्यात्मिक संदेश और जीवन की महत्वपूर्ण सीख देता है:
- अहंकार का त्याग: हनुमान जी अतुलित बल के स्वामी हैं, फिर भी वे अपने प्रभु के सामने पूरी तरह से निरहंकार होकर नृत्य करते हैं। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर के सामने हमेशा विनम्र रहना चाहिए।
- पूर्ण शरणागति: हनुमान जी का जीवन दर्शाता है कि जब हम स्वयं को ईश्वर को समर्पित कर देते हैं, तो हमारी रक्षा का दायित्व स्वयं ईश्वर का हो जाता है।
- सेवा भाव: हनुमान जी ने कभी भी अपने लिए कुछ नहीं मांगा। उनकी सेवा निष्काम थी। हमें भी अपने कर्तव्यों का पालन बिना किसी फल की इच्छा के करना चाहिए।
- सकारात्मकता और आनंद: भक्ति में रोना या दुखी होना ही नहीं, बल्कि आनंदित होकर नाचना और उत्सव मनाना भी शामिल है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| वीर हनुमना | बहादुर हनुमान जी | साहस और शक्ति के प्रतीक |
| सालासर | राजस्थान का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल | बालाजी महाराज का पावन धाम |
| दीवाना | प्रेम में मग्न या पागल | प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम |
| रिझावे | प्रसन्न करना | भक्ति के माध्यम से भगवान को खुश करना |
| पहेरा | सुरक्षा चक्र या पहरेदारी | भक्तों की संकटों से रक्षा करना |
| बजरंग | वज्रांग (वज्र के समान शरीर वाले) | असीम बल और पराक्रम के स्वामी |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"भकत बड़े बलवान तुम्ही हो, सालासर हनुमान तुम्ही हो।"
हे सालासर धाम में विराजमान हनुमान जी! आप सभी भक्तों में सबसे अधिक बलशाली और सामर्थ्यवान हैं। आपकी कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
"आया हूँ मैं दर पे, तुझको आज पुकारा, पावो में घुंघरू बाँध के नाचे, मेरा बजरंग प्यारा।"
मैं आपकी शरण में आया हूँ और सच्चे मन से आपको पुकार रहा हूँ। मेरे प्यारे बजरंगबली अपने भक्तों की पुकार सुनकर आनंदित होकर पैरों में घुंघरू बांधकर नाच रहे हैं।
"छम छम नाचे देखो वीर हनुमना, कहेते है लोग इसे राम का दीवाना।"
देखो, वीर हनुमान जी छम-छम करके नाच रहे हैं। सारा संसार उन्हें श्री राम का दीवाना कहता है, क्योंकि वे राम-नाम के रस में पूरी तरह डूबे हुए हैं।
"पाँवो मे घुंगूरू बाँध के नाचे, रामजी का नाम इन्हे बड़ा प्यारा लागे।"
वे अपने पैरों में घुंघरू बांधकर नृत्य कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने आराध्य प्रभु श्री राम का नाम अत्यंत प्रिय लगता है। राम-नाम सुनते ही उनका हृदय आनंद से भर जाता है।
"राम ने भी देखो इसे खूब पहचाना, छम छम नाचे देखो वीर हनुमना।"
भगवान श्री राम ने भी हनुमान जी की इस निस्वार्थ और पावन भक्ति को भली-भांति समझा है और उन्हें अपने सबसे प्रिय भक्त का स्थान दिया है।
"जहाँ जहाँ कीर्तन होता श्री राम का, लगता है पहेरा वहाँ वीर हनुमान का।"
संसार में जहाँ कहीं भी प्रभु श्री राम का संकीर्तन या कथा होती है, वहाँ हनुमान जी अदृश्य रूप से उपस्थित होकर भक्तों की रक्षा के लिए पहरा देते हैं।
"राम के चरण मे है इनका टिकना, छम छम नाचे देखो वीर हनुमना।"
हनुमान जी का एकमात्र ठिकाना और आश्रय प्रभु श्री राम के चरण कमल हैं। वे सदैव अपने प्रभु के चरणों की सेवा में लीन रहते हैं।
"नाच नाच प्रभु श्री राम को रिझवे, 'बनवारी' रात दिन नाचता ही जाए।"
वे निरंतर नृत्य करके अपने प्रभु श्री राम को प्रसन्न करते हैं। कवि बनवारी कहते हैं कि हनुमान जी दिन-रात इसी भक्ति भाव में मग्न होकर नाचते रहते हैं।
"भक्तो मे भक्त बड़ा, दुनिया ने माना, छम छम नाचे देखो वीर हनुमना।"
पूरी दुनिया ने इस सत्य को स्वीकार किया है कि हनुमान जी से बड़ा और श्रेष्ठ भक्त इस संसार में कोई दूसरा नहीं है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
हनुमान जी की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों और श्लोकों का संपुट लगाने से साधना और भी प्रभावशाली हो जाती है:
"मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥"
अर्थ: जो मन के समान तीव्र गति वाले हैं, पवन देव के समान वेगवान हैं, जिन्होंने अपनी इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में सबसे श्रेष्ठ हैं, उन पवनपुत्र, वानर सेना के नायक और श्री राम के दूत हनुमान जी की मैं शरण लेता हूँ।
"अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥"
अर्थ: अतुलनीय बल के धाम, सोने के पर्वत (सुमेरु) के समान कांतियुक्त शरीर वाले, दैत्यरूपी वन को भस्म करने के लिए अग्नि स्वरूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, समस्त गुणों के निधान, वानरों के स्वामी और श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त पवनपुत्र हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूँ।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | छम छम नाचे देखो वीर हनुमना |
| आराध्य देव | श्री हनुमान जी (सालासर बालाजी) एवं प्रभु श्री राम |
| लेखक / कवि | पारंपरिक / बनवारी जी |
| मुख्य भाषा | हिंदी (सरल खड़ी बोली) |
| भक्ति का भाव | दास्य भाव, सख्य भाव, और परम आनंद (दीवानगी) |
| गायन का उत्तम समय | प्रातःकाल एवं संध्या आरती के समय |
| विशेष फल | भय से मुक्ति, मानसिक शांति, और राम-भक्ति की प्राप्ति |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और भावार्थ को विभिन्न प्रामाणिक स्रोतों, संकीर्तन मंडलियों की परंपराओं और शास्त्रीय ग्रंथों के आलोक में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक हनुमान जी की महिमा और उनके पावन भजन का शुद्ध एवं अर्थपूर्ण स्वरूप पहुँचाना है, ताकि वे अपनी दैनिक साधना में इसका लाभ उठा सकें।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण - सुंदरकांड प्रसंग
- श्रीरामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास
- सालासर बालाजी मंदिर ट्रस्ट की पारंपरिक संकीर्तन पुस्तिकाएं
- सनातन धर्म की मौखिक भजन एवं कीर्तन परंपरा
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