Durga Bhajan Lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Navaratri best status

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प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

NAVARATRI SPECIALS 2020


नवरात्रि, (संस्कृत: "नौ रातें") पूर्ण शरद नवरात्रि में; नवरात्रि में भी नवरात्रि की धूम रही; हिंदू धर्म में, दैवीय स्त्रियों के सम्मान में आयोजित प्रमुख त्योहार, जिसे दुर्गा पूजा भी कहा जाता है। बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है


अश्विन, या अश्विन (ग्रेगोरियन कैलेंडर में, आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर) के दौरान नवरात्रि 9 दिनों से अधिक होती है। यह अक्सर दशहरा (जिसे विजयदशमी भी कहा जाता है) 10 वें दिन मनाया जाता है।
भारत के कुछ हिस्सों में, दशहरे को त्योहार का एक केंद्र बिंदु माना जाता है,
यह त्यौहार नौ दिनों तक चलता है |  दशवें दिन मूर्ति (माता दुर्गा की विदाई ) विसर्जन के रूप  मनाया  जाता है | 





जिससे यह प्रभावी रूप से 9. के बजाय 10 दिनों का हो जाता है। इसके अलावा, नवरात्रि चंद्र कैलेंडर पर निर्भर करती है, कुछ वर्षों में इसे 8 दिनों के लिए मनाया जा सकता है,

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।


Happy Navratri Wishes

माता रानी वरदान ना देना हमे !!
बस थोडा सा प्यार देना हमे !!
तेरे चरणों में बीते ये जीवन सारा !!
एक बस यही आशीर्वाद देना हमे !!
                                                        ------ जय माता दी 



दशहरे के साथ 9 वीं। चार समान त्योहार हैं, जिन्हें नवरात्रि भी कहा जाता है, जो वर्ष के विभिन्न चरणों में आयोजित किए जाते हैं; हालाँकि, शरद ऋतु के शुरुआती त्योहार, जिसे शरद नवरात्रि भी कहा जाता है, सबसे महत्वपूर्ण है।




Happy Navratri Wishes

माता का जब पर्व है आता;
ढेरों खुशियां साथ है लाता;
इस बार माँ आपको वो सबकुछ दे;
जो कुछ आपका दिल है चाहता।
नवरात्रि की शुभ कामनायें!
                                      ------ जय माता दी 

                                                         ------ Jai Mata Di





 मां दुर्गा, मां अंबे, मां जगदंबे,
मां भवानी, मां शीतला, मां वैष्णो, मां चंडी,
माता रानी मेरी और आपकी मनोकामना पूरी करें
शुभ नवरात्रि




Happy Navratri Wishes


सारा जहां है जिसकी शरण में,
नमन है उस मां के चरण में,
हम हैं उस मां के चरणों की धूल,
आओ मिलकर मां को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल
शुभ नवरात्रि




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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Navaratri best status | navaratri image | navaratri | navaratri 2025 | navaratri rangoli" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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