श्री गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ
भावार्थ: हे भगवान गणेश! आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष रूप से ब्रह्म तत्व हैं। आप ही केवल सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता …
सनातन धर्म के समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, ध्यान श्लोक, 108 जप नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का संपूर्ण प्रामाणिक संकलन।
अपनी अभीष्ट साधना एवं आवश्यकतानुसार अभीष्ट मंत्र श्रेणी का चयन करें।
शुद्ध उच्चारण, विनियोग, बीज एवं हिंदी भावार्थ सहित नित्य पाठ करें।
भावार्थ: हे भगवान गणेश! आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष रूप से ब्रह्म तत्व हैं। आप ही केवल सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता …
भावार्थ: हे गणपति भगवान! आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष तत्व हैं। आप ही केवल कर्ता, धर्ता और संहारक हैं। आप ही यह संपूर्ण ब्रह्…
भावार्थ: भगवान गणेश को ब्रह्मांड का सर्वोच्च ईश्वर, परम ब्रह्म और समस्त सिद्धियों का दाता स्वीकार करते हुए की गई अमोघ स्तुति।
भावार्थ: समस्त विघ्नों के हर्ता, गणों के अधिपति भगवान गणेश को मेरा बारंबार नमस्कार है।
भावार्थ: समस्त विघ्नों के हर्ता, गणों के अधिपति श्री गणेश को मेरा बारंबार नमस्कार है।
भावार्थ: हे बीज रूप गणेश! हम आपको बारंबार नमस्कार करते हैं। आप हमारे समस्त विघ्नों को हरें और हमें बुद्धि प्रदान करें।
भावार्थ: हम समस्त विघ्नों के निवारक, गणों के स्वामी श्री गणेश को नमस्कार करते हैं और उनके बीज मंत्र 'गं' का आह्वान करते हैं।
भावार्थ: परब्रह्म स्वरूप श्री गणेश, जो समस्त गणों और ऊर्जाओं के स्वामी हैं, मैं उनके बीज तत्व 'गं' को नमन करता हूँ।
भावार्थ: समस्त विघ्नों के हर्ता, गणों के स्वामी श्री गणेश को मेरा बारंबार नमस्कार है।
भावार्थ: भगवान गणेश के आरोग्य मंत्र का अर्थ, जप विधि और अनुष्ठान की संपूर्ण जानकारी। जानें कैसे गणेश उपासना से मानसिक और शारीरिक …
भावार्थ: भगवान गणेश के आरोग्य मंत्र का अर्थ, जाप विधि और अनुष्ठान की संपूर्ण जानकारी। जानें कैसे गणेश उपासना से मानसिक और शारीरिक…
भावार्थ: भगवान गणेश के विद्या मंत्र का अर्थ, जाप विधि और परीक्षा में सफलता हेतु अनुष्ठान की संपूर्ण जानकारी। जानें कैसे करें गणेश…
सनातन धर्म में 'मंत्र' केवल शब्द या अक्षरों का समूह नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Vibration) को मानव शरीर और चेतना में संचरित करने का एक अत्यंत सूक्ष्म एवं वैज्ञानिक माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने गहन तपस्या और नाद-ब्रह्म के अनुसंधान द्वारा इन दिव्य ध्वनियों की अनुभूति की थी।
संस्कृत भाषा के प्रत्येक वर्ण का संबंध मानव शरीर के 72,000 नाड़ियों और 7 प्रमुख चक्रों से है। जब किसी वैदिक मंत्र का लयबद्ध और शुद्ध उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न होने वाली अनुनाद (Resonance) तरंगे मस्तिष्क की अल्फा-तरंगों को सक्रिय कर मानसिक तनाव को शांत करती हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। साथ ही सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास का लगभग 108 गुना है। अतः 108 जप संपूर्ण ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ आत्म-संरेखण स्थापित करता है।
प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।