kriahna bhajan krishna bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Phirta Main Mara Mara Darshan Do Bansi Wale Lyrics (फिरता मैं मारा मारा दर्शन दो बंसी वाले) – Sangeet Pandey Krishna Bhajan 2026 | Tere Naam Ke Sahare

गायक संगीत पाण्डेय द्वारा गाया प्रसिद्ध कृष्ण भजन 'फिरता मैं मारा मारा दर्शन दो बंसी वाले' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 फिरता मैं मारा मारा – तेरे नाम के सहारे

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Phirta Main Mara Mara Darshan Do Bansi Wale Lyrics In Hindi) – Sangeet Pandey Krishna Bhajan 2026 | Nand Ke Dulare

गायक: संगीत पाण्डेय || तर्ज: कभी गम से दिल लगाया

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: संगीत पाण्डेय (Sangeet Pandey)
🎵 तर्ज: कभी गम से दिल लगाया
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / दर्शन भजन
📍 भाव: व्याकुलता, प्रेम, दर्शन की लालसा
🎨 विशेष: बंसी वाले कृष्ण

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

फिरता मैं मारा मारा,
तेरे नाम के सहारे,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले॥

तर्ज – कभी गम से दिल लगाया

॥ अंतरा १ ॥

पाने को दर्श तेरा,
छाना मैंने जमाना,
बैठे कहाँ हो मोहन,
पाया नहीं ठिकाना,
उम्मींद में मैं फिरता,
ओ नन्द के दुलारे,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले॥

॥ अंतरा २ ॥

काशी व मथुरा देखा,
तुझको वहां ना पाया,
गोकुल में पहुंचा जब मैं,
मुझे द्वारिका बताया,
मैंने द्वारिकापुरी के,
घर घर ही छान डाले,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले॥

॥ अंतरा ३ ॥

गिर गिर के उठ रहा हूँ,
तन में ना जान बाकी,
दिल में यही तमन्ना,
कर लूँ तुम्हारी झांकी,
कश्ती मेरी भंवर में,
आके लगा किनारे,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले॥

॥ अंतरा ४ ॥

यशोदा ललन कहाँ हो,
आवाज सुन लो मेरी,
भक्तों का कष्ट हरते,
करते नहीं हो देरी,
गा गा के तेरा कीर्तन,
बेटा तुम्हे पुकारे,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले॥

फिरता मैं मारा मारा,
तेरे नाम के सहारे,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले,
दर्शन दो बंसी वाले॥

🎤 गायक :- संगीत पाण्डेय (Sangeet Pandey)

तर्ज: कभी गम से दिल लगाया पर आधारित

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन "फिरता मैं मारा मारा दर्शन दो बंसी वाले" संगीत पाण्डेय की सुरीली आवाज़ में भगवान कृष्ण के दर्शनों के लिए एक भक्त की व्याकुलता और प्रेम को दर्शाता है। भजन का मूल स्वर एक भक्त की पुकार है जो बंसी वाले कृष्ण के दर्शन के लिए तरस रहा है।

"फिरता मैं मारा मारा, तेरे नाम के सहारे" – भक्त कहता है कि वह मारा-मारा फिर रहा है, केवल कृष्ण के नाम के सहारे। वह बंसी वाले कृष्ण से दर्शन देने की प्रार्थना करता है।

"पाने को दर्श तेरा, छाना मैंने जमाना" – भक्त ने कृष्ण के दर्शन पाने के लिए सारा जमाना छान मारा है, लेकिन उनका ठिकाना नहीं मिला। वह नंद के दुलारे से पूछता है कि वे कहाँ बैठे हैं।

"काशी व मथुरा देखा, तुझको वहां ना पाया" – भक्त ने काशी और मथुरा देखे, लेकिन वहाँ कृष्ण नहीं मिले। गोकुल पहुँचा तो उसे द्वारिका बताई गई। उसने द्वारिकापुरी के घर-घर छान डाले, फिर भी कृष्ण नहीं मिले।

"गिर गिर के उठ रहा हूँ, तन में ना जान बाकी" – भक्त गिर-गिरकर उठ रहा है, शरीर में जान नहीं बची है, लेकिन दिल में यही तमन्ना है कि वह कृष्ण की एक झाँकी कर ले। वह प्रार्थना करता है कि उसकी कश्ती (नैया) भंवर में फंसी है, आकर किनारे लगा दो।

"यशोदा ललन कहाँ हो, आवाज सुन लो मेरी" – भक्त यशोदा लालन (कृष्ण) को पुकारता है कि वे उसकी आवाज सुनें। वे भक्तों का कष्ट हरते हैं, देरी नहीं करते। भक्त गा-गाकर उनका कीर्तन करता है और बेटा (भक्त स्वयं) उन्हें पुकार रहा है।

🔍 कृष्ण भजन का विशेष महत्त्व

"बंसी वाले" – कृष्ण का विशेषण: कृष्ण को बंसी वाले (बांसुरी वाले) के रूप में पुकारना उनके मोहक स्वरूप को दर्शाता है। बांसुरी कृष्ण की लीलाओं का प्रतीक है और भक्तों के हृदय को मोह लेती है।

तर्ज: "कभी गम से दिल लगाया": यह भजन प्रसिद्ध गज़ल "कभी गम से दिल लगाया" की धुन पर बनाया गया है। यह धुन बहुत मधुर और भावपूर्ण है, जिससे यह भजन और भी हृदयस्पर्शी बन गया है।

चार धामों की यात्रा: भजन में भक्त काशी, मथुरा, गोकुल और द्वारिका का उल्लेख करता है – ये सभी कृष्ण से जुड़े पवित्र स्थान हैं। भक्त ने हर जगह कृष्ण को ढूंढा, लेकिन उनके दर्शन नहीं हुए। यह इस बात का प्रतीक है कि भगवान किसी एक स्थान पर सीमित नहीं हैं, वे सर्वत्र हैं।

दर्शन की व्याकुलता: "गिर गिर के उठ रहा हूँ" – यह पंक्ति भक्त की उस स्थिति को दर्शाती है जहाँ वह शारीरिक रूप से कमजोर हो चुका है, लेकिन दर्शन की लालसा अभी भी बाकी है। यह सच्चे प्रेम की निशानी है।

"बेटा तुम्हे पुकारे": अंतिम अंतरे में भक्त स्वयं को "बेटा" कहकर संबोधित करता है। यह वात्सल्य भाव को दर्शाता है जहाँ भक्त स्वयं को कृष्ण का पुत्र मानकर उन्हें पुकार रहा है।

संगीत पाण्डेय का गायन: गायक संगीत पाण्डेय ने अपनी भावपूर्ण और सुरीली आवाज़ से इस भजन को जीवंत कर दिया है। उनके गायन में वह व्याकुलता और प्रेम साफ सुनाई देता है जो एक भक्त के हृदय में होता है जब वह अपने आराध्य के दर्शनों के लिए तरसता है।

💖 दर्शन की लालसा

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि भक्त की सबसे बड़ी लालसा अपने आराध्य के दर्शन करने की होती है। भक्त काशी, मथुरा, गोकुल, द्वारिका – हर जगह ढूंढता है, गिर-गिरकर उठता है, लेकिन हार नहीं मानता। वह केवल कृष्ण के नाम के सहारे मारा-मारा फिरता है और अंततः उनसे दर्शन देने की प्रार्थना करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चे प्रेम में व्याकुलता होती है और वह व्याकुलता ही भक्त को भगवान तक ले जाती है।

✨ हर जगह कृष्ण

फिरता मैं मारा मारा दर्शन दो बंसी वाले केवल एक भजन नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास और प्रेम का प्रतीक है जो भक्त को कृष्ण की तलाश में हर जगह ले जाता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि कृष्ण काशी में भी हैं, मथुरा में भी, गोकुल में भी और द्वारिका में भी, लेकिन उनका वास्तविक निवास तो भक्त के हृदय में है। जब भक्त सच्चे मन से पुकारता है, कृष्ण अवश्य दर्शन देते हैं।

🙏 हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे || हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे 🙏

॥ संगीत पाण्डेय कृत कृष्ण भजन ॥
॥ दर्शन दो बंसी वाले, दर्शन दो बंसी वाले ॥

गायक: संगीत पाण्डेय | तर्ज: कभी गम से दिल लगाया

॥ फिरता मैं मारा मारा, तेरे नाम के सहारे ॥

साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Phirta Main Mara Mara Darshan Do Bansi Wale Lyrics (फिरता मैं मारा मारा दर्शन दो बंसी वाले) – Sangeet Pandey Krishna Bhajan 2026 | Tere Naam Ke Sahare" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 05 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!