Ram Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जब बाला जी के मंदिर जाते हो(jab bala ji ke mandir jate ho unhe ram ram bhi kaha karo lyrics in hindi)

जब बाला जी के मंदिर जाते हो, उन्हें राम राम भी कहा करो - इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ और आध्यात्मिक महत्व को यहाँ पढ़ें।

जब बाला जी के मंदिर जाते हो (Jab Bala Ji Ke Mandir Jate Ho) - संपूर्ण भक्ति गीत, लिरिक्स एवं आध्यात्मिक विवेचन

भगवान श्री हनुमान जी (संकटमोचन बालाजी) की असीम कृपा और महिमा का गान करने वाला यह अत्यंत लोकप्रिय भजन "जब बाला जी के मंदिर जाते हो, उन्हें राम राम भी कहा करो" सनातन भक्ति परंपरा में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि उस महान दार्शनिक और आध्यात्मिक सत्य का प्रतीक है, जिसके केंद्र में प्रभु श्रीराम के प्रति श्री हनुमान जी की अनन्य निष्ठा, परम समर्पण और अगाध प्रेम विराजमान है। जब कोई भक्त राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी, सालासर धाम या अपने निकटतम किसी भी हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए जाता है, तब वह अपनी आर्त पुकार और श्रद्धा के साथ जब राम नाम का स्मरण जोड़ता है, तो उसकी साधना स्वतः परिपूर्ण हो जाती है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल, प्रभावी और अचूक मार्ग उनके इष्ट आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का स्मरण करना है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ, गायन की विधि, और इसके गहरे आध्यात्मिक संदेश का अन्वेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:
जब बाला जी के मंदिर जाते हो,
उन्हें राम राम भी कहा करो।
जब लड्डुओं का भोग लगाते हो,
उन्हें राम राम भी कहा करो॥

अंतरा 1:
बाला जी के मंदिर में राम नाम जो गाते हैं,
ऐसे भक्त बाला जी के मन को बड़ा ही भाते हैं।
जब बाला जी को चोला चढ़ाते हो,
उन्हें राम राम भी कहा करो।
जब लड्डुओं का भोग लगाते हो,
उन्हें राम राम भी कहा करो॥

अंतरा 2:
संकट मोचन को जो तुम,
राम राम जी बुलाओगे।
जीवन में हर छोटे बड़े संकट से बच जाओगे,
जब बाला जी को पान खिलाते हो,
उन्हें राम राम भी कहा करो।
जब लड्डुओं का भोग लगाते हो,
उन्हें राम राम भी कहा करो॥

अंतरा 3:
बाला जी को राम नाम सागर बड़ा ही प्यारा है,
राम भक्तों का वो आप बनते सदा सहारा है।
जब बाला जी को शीश झुकाते हो,
उन्हें राम राम भी कहा करो।
जब लड्डुओं का भोग लगाते हो,
उन्हें राम राम भी कहा करो॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त और भगवान के बीच के उस मधुर और अटूट संबंध को परिभाषित करता है, जहाँ हनुमान जी की आराधना राम नाम के बिना अधूरी मानी जाती है। सनातन धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी का रोम-रोम श्री राम के नाम से स्पंदित होता है। वेदों और पुराणों में उल्लेख मिलता है कि जब एक बार माता सीता ने हनुमान जी को सिंदूर लगाते देखा, तो उनके मन में यह जिज्ञासा हुई कि हनुमान जी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर क्यों लगाते हैं। इस पर हनुमान जी ने अत्यंत विनम्रता से उत्तर दिया कि यह सिंदूर माता सीता और प्रभु श्रीराम की दीर्घायु और कल्याण के लिए है। यह सुनकर माता सीता अति प्रसन्न हुईं और उन्होंने वरदान दिया कि जो कोई भी तुम्हारे दर्शन करेगा और राम नाम का स्मरण करेगा, उसके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे।

भजन की पंक्तियाँ हमें यह समझाती हैं कि जब हम मंदिर में जाकर भगवान हनुमान को लड्डुओं का भोग लगाते हैं, उन्हें सिंदूर या चोला अर्पित करते हैं, अथवा पान का बीड़ा चढ़ाते हैं, तब यदि हम साथ में 'राम राम' का उच्चारण नहीं करते, तो हमारी पूजा औपचारिक मात्र बनकर रह जाती है। हनुमान जी को भौतिक वस्तुएं जैसे लड्डू, चोला या पान से उतना प्रेम नहीं है, जितना प्रेम उनके इष्टदेव श्रीराम के पावन नाम से है। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में भी स्पष्ट किया है— "भक्तहि भगवंत सम कहुत कुलीन सुजान।" जो राम का है, वही हनुमान का है। इसलिए जब भी हम संकटमोचन के दरबार में अपनी अर्जी लेकर जाएं, तो उनकी प्रीति को साधने के लिए राम नाम का संकीर्तन अवश्य करना चाहिए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन आधुनिक और पारंपरिक भक्ति संगीत का एक उत्कृष्ट समन्वय है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में निम्नलिखित बिंदु सम्मिलित हैं:

  • इष्ट-समर्पण की भावना: यह भजन हनुमान जी से पहले उनके आराध्य श्रीराम को स्मरण करने का संदेश देता है, जो सच्ची भक्त निष्ठा का लक्षण है।
  • सरल एवं सुगम शब्दावली: इसकी भाषा अत्यंत सरल हिंदी और ब्रज-अवधि के प्रभाव वाली लोकबोली है, जिसे हर उम्र के लोग आसानी से गा सकते हैं।
  • संकट निवारण का अचूक मंत्र: इसमें राम नाम को सभी संकटों से मुक्ति पाने की महाऔषधि बताया गया है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मकता: इसके श्रवण और गायन से मन में व्याप्त भय, चिंता और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को गाने और सुनने के लिए कोई कठोर नियम बाध्यता नहीं है, किंतु यदि इसे विधि-विधान से गाया जाए तो इसका आध्यात्मिक फल कई गुना बढ़ जाता है:

  • मंगलवार और शनिवार का विशेष महत्व: हनुमान जी को समर्पित इन दोनों वारों पर प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर इस भजन का गान करना चाहिए।
  • मंदिर दर्शन के समय: जब भी आप किसी हनुमान मंदिर (विशेषकर बालाजी धाम) में जाएं, तो गर्भगृह के बाहर या कतार में खड़े होकर मन ही मन इस भजन की पंक्तियों का स्मरण कर सकते हैं।
  • संध्याकालीन आरती: घर में संध्या के समय दीपक प्रज्वलित करने के बाद परिवार के साथ मिलकर इस भजन का संकीर्तन करना अत्यंत मंगलकारी होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र बिंदु स्वयं भगवान श्री हनुमान (बालाजी महाराज) हैं, जिन्हें रुद्र अवतार, पवनसुत, संकटमोचन और केसरी नंदन के रूप में पूजा जाता है। साथ ही, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम इस भजन के अप्रत्यक्ष प्राण हैं क्योंकि हनुमान जी की संपूर्ण शक्ति और भक्ति का स्त्रोत श्री राम नाम ही है। संत तुलसीदास जी, समर्थ गुरु रामदास जी और नीम करोली बाबा जैसे संतों ने भी हनुमान आराधना और राम नाम संकीर्तन को कलियुग में सबसे बड़ा साधन माना है। आप इस संदर्भ में हमारे विस्तृत लेख श्री हनुमान चालीसा का पाठ और महत्व को भी पढ़ सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन लोक परंपरा से उपजा हुआ एक ऐसा संकीर्तन है जो पीढ़ियों से संतों, कीर्तनकारों और श्रद्धालुओं की जुबान पर चला आ रहा है। उत्तर भारत के राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बालाजी मंदिरों में इस तर्ज पर गाए जाने वाले भजन भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को यह सिखाना है कि हनुमान जी की पूजा में अहंकार का त्याग करके केवल रामभक्ति को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा लोक-सुलभ हिंदी है जिसमें प्रवाहमयता और आत्मीयता कूट-कूट कर भरी है। इसमें अनुप्रास और पुनरुक्ति अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे— "जब बाला जी के मंदिर जाते हो, उन्हें राम राम भी कहा करो"। यह शैली श्रोता के मन पर सीधा प्रभाव डालती है और उसे भजन के साथ झूमने और गाने के लिए प्रेरित करती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई गहरे दार्शनिक और व्यावहारिक पाठ पढ़ाता है:

  • अहंकार का विसर्जन: हनुमान जी अत्यंत बलशाली होने के बावजूद खुद को राम का दास मानते हैं। हमें भी अपने जीवन में अहंकार छोड़कर विनम्र बनना चाहिए।
  • स्मरण की शक्ति: निरंतर राम नाम का जप बड़े से बड़े मानसिक और शारीरिक संकट को चुटकियों में हल कर सकता है।
  • समर्पण का भाव: भगवान को केवल बाहरी चीजें (भोग, चोला, पान) चढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भीतर से सच्ची श्रद्धा और समर्पण होना आवश्यक है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
बाला जी भगवान हनुमान का बाल रूप (विशेषकर मेहंदीपुर एवं सालासर धाम में) संकटों का निवारण करने वाले दयालु देवता
चोला सिंदूर और चमेली के तेल का लेप जो हनुमान जी को चढ़ाया जाता है समर्पण और सुरक्षा का आवरण
संकट मोचन सारे संकटों या दुखों को दूर करने वाला भक्तों के जीवन के सभी कष्टों का हरण करने वाले हनुमान
राम नाम सागर प्रभु श्रीराम के नाम का अथाह भंडार मुक्ति और शांति का समुद्र

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: जब बाला जी के मंदिर जाते हो, उन्हें राम राम भी कहा करो...
भावार्थ: कवि या रचनाकार श्रद्धालु को यह प्रेमपूर्ण निर्देश दे रहा है कि जब भी तुम हनुमान मंदिर के प्रांगण में प्रवेश करो, तो केवल अपनी मनोकामनाओं की सूची भगवान के सामने मत रखो, बल्कि उनके सबसे प्रिय प्रभु श्रीराम के नाम का जयकारा लगाकर उनका अभिनंदन करो।

पंक्ति: संकट मोचन को जो तुम, राम राम जी बुलाओगे...
भावार्थ: जो देवता भक्तों के सभी संकटों का नाश करने वाले हैं, यदि उन्हें उनके सबसे प्रिय नाम से पुकारा जाए, तो वे अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त के जीवन के सभी छोटे-बड़े अवरोध अपने आप समाप्त हो जाते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के प्रभाव को और अधिक गहरा करने के लिए निम्नलिखित पावन श्लोक का स्मरण करना चाहिए:

बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमअरोग्यम् ।अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनूत्स्मरणान्भवेत् ॥

अर्थात हनुमान जी के स्मरण से बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, अच्छा स्वास्थ्य, निर्मलता और वाणी की चतुराई स्वतः प्राप्त हो जाती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम जब बाला जी के मंदिर जाते हो (Jab Bala Ji Ke Mandir Jate Ho)
मुख्य देवता भगवान श्री हनुमान (बालाजी महाराज) एवं प्रभु श्रीराम
संगीत शैली लोक भजन / संकीर्तन
भाषा सरल हिंदी / लोक बोली
मुख्य भाव अनन्य भक्ति, समर्पण और राम नाम की महिमा
उपयुक्त अवसर मंगलवार, शनिवार, मंदिर दर्शन, जागरण, संकट निवारण पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"जब बाला जी के मंदिर जाते हो" भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि हनुमान जी की पूजा में राम नाम का स्मरण सबसे महत्वपूर्ण है। भगवान हनुमान को राम नाम सबसे अधिक प्रिय है।

क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को आप घर पर अकेले या परिवार के साथ पूजा के दौरान कभी भी गा सकते हैं, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को।

बालाजी मंदिर में हनुमान जी को क्या-क्या चढ़ाया जाता है?

बालाजी महाराज को मुख्य रूप से सिंदूर का चोला, चमेली का तेल, बूंदी के लड्डू, पान का बीड़ा और ध्वजा अर्पित की जाती है।

हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय क्या है?

निरंतर 'श्री राम, जय राम, जय जय राम' का जाप करना और हनुमान चालीसा का पाठ करना हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे अचूक उपाय है।

क्या यह भजन बच्चों को याद कराया जा सकता है?

बिल्कुल, इसकी सरल लय और तुकबंदी के कारण बच्चे इसे बहुत जल्दी सीख लेते हैं, जो उनमें बचपन से ही धार्मिक संस्कार डालता है।

क्या इस भजन को गाने के कोई विशेष नियम हैं?

इसके लिए कोई कठोर नियम नहीं हैं, बस आपका मन पवित्र होना चाहिए और भाव सच्ची श्रद्धा से भरा होना चाहिए।

हनुमान जी को संकटमोचन क्यों कहा जाता है?

क्योंकि वे अपने भक्तों के जीवन के सभी बड़े से बड़े संकटों, भयों और बाधाओं को पल भर में दूर कर देते हैं।

क्या राम नाम के बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी है?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी अपनी हर स्तुति और पूजा में श्रीराम की उपस्थिति अनिवार्य मानते हैं, क्योंकि उनका रोम-रोम राममय है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन धर्म की पारंपरिक लोकभक्ति, वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और हनुमान जी से जुड़ी जनश्रुति तथा लोक कथाओं के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध, सकारात्मक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जानकारी प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीरामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी
  • वाल्मीकि रामायण - किष्किंधा एवं सुंदरकांड
  • उत्तर भारतीय लोक भजन एवं संकीर्तन परंपरा
  • सालासर धाम एवं मेहंदीपुर बालाजी की ऐतिहासिक एवं धार्मिक मान्यताएं

संबंधित भजन एवं लेख

श्रेणियां: Ram Bhajan

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!