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उभा कसा राहीला विटेवरी लिरिक्स (Ubha Kasa Rahila Vitewari Lyrics in Hindi) - Marathi Bhajan

उभा कसा राहीला विटेवरी लिरिक्स पढ़ें। प्रियंका कारंजे द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय मराठी भजन का संदर्भ, अर्थ और भावार्थ जानें।

उभा कसा राहीला विटेवरी लिरिक्स (Ubha Kas Rahila Vitewari Lyrics in Hindi) - परिचय एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

भक्ति और समर्पण की पावन भूमि महाराष्ट्र की वारकरी संप्रदाय परंपरा में भगवान श्री विठ्ठल (विठोबा या पाण्डुरंग) की महिमा अपरंपार है। 'उभा कसा राहीला विटेवरी' यह अति लोकप्रिय मराठी भजन भगवान पाण्डुरंग के उस अलौकिक, अचल और करुणा से ओत-प्रोत स्वरूप का सुंदर वंदन करता है, जिसमें वे पुण्डरीक भक्त के प्रति अपनी प्रतिज्ञा को निभाने के लिए युगों-युगों से ईंट (वीट) पर समदंड अवस्था में खड़े हैं। यह भजन न केवल श्रोताओं को पंढरपुर की पावन यात्रा का मानसिक अनुभव कराता है, बल्कि जीव और ब्रह्म के उस अटूट संबंध को भी उजागर करता है जहाँ भक्त की पुकार पर परमात्मा स्वयं द्वार पर आ खड़े होते हैं। प्रियंका कारंजे (Priyanka Karanje) की मधुर वाणी में गाए गए इस भजन ने लाखों श्रद्धालुओं के हृदयों में विठ्ठल भक्ति की अलख जगाई है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, हिंदी अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो आपको भगवान विठ्ठल के चरणों में लीन होने की प्रेरणा देगा।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:


विठ्ठल विठ्ठल म्हणतील सगळे,
विठूराय कितीसे दूर...
इमानदारांच्या समीप अन्
बैमानापासून दूर...
पंढरीचा विठ्ठल कूणी पाहीला,
उभा कसा राहीला विटेवरी... ||धृ.||

अंगी शोभे पितांबर पिवळा,
गळ्यामध्ये वैजयंती माळा...
चंदनाचा टिळा माथी शोभला,
उभा कसा राहीला विटेवरी... ||1||

चला चला पंढरीला जाऊ,
डोळे भरूनी विठू माऊलीला पाहू...
भक्ती मार्ग आम्हाला त्याने दाविला,
उभा कसा राहीला विटेवरी... ||2||

ठेवूनिया दोन्ही करकटी,
उभा हा मुकूंद वाळवंटी...
हरिनामाचा झेंडा तिथे रोविला,
उभा कसा राहीला विटेवरी... ||3||

बाळ श्रावण प्रार्थी आता,
नका दूर लोटू पंढरीनाथा...
तव चरणी हा देह सारा वाहिला,
उभा कसा राहीला विटेवरी... ||4||

पंढरीचा विठ्ठल कूणी पाहीला,
उभा कसा राहीला विटेवरी...***

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस सुंदर मराठी भजन के प्रत्येक चरण में वारकरी दर्शन और विठ्ठल प्रेम की महक है। ध्रुपद (स्थाई) में कवि प्रश्न करता है कि पंढरी के पाण्डुरंग को किसने देखा है, जो ईंट पर अचल रूप से खड़े हैं। विठ्ठल उन लोगों के अत्यंत समीप हैं जो सत्य, धर्म और ईमानदारी के मार्ग पर चलते हैं, किंतु छल-कपट और अहंकार से कोसों दूर रहते हैं।

प्रथम अंतरे में भगवान के दिव्य श्रृंगार का वर्णन किया गया है। उनके शरीर पर चमकता हुआ पीतांबर (पीला वस्त्र), गले में महकती हुई वैजयंती माला और ललाट पर चंदन का शीतल टिळा (तिलक) उनकी परम सुंदरता और शांत स्वरूप को दर्शाता है। यह रूप भक्त के मन को मोह लेता है और उसे संसार के प्रपंचों से मुक्त कर देता है।

द्वितीय और तृतीय अंतरे में पंढरपुर तीर्थ यात्रा (वारी) का आह्वान किया गया है। भक्त अपने स्रेहियों से कहता है कि चलो सब मिलकर पंढरी चलें और अपने नेत्रों को तृप्त करके विठू माऊली का दर्शन करें। भगवान ने ही संसार को सच्ची भक्ति का मार्ग दिखाया है। दोनों हाथों को कटि (कमर) पर रखकर विठोबा चंद्रभागा नदी के तट (वाळवंट) पर खड़े हैं और वहाँ हरिनामा का विजय झेंडा लहरा रहा है, जो यह संदेश देता है कि हरिनाम संकीर्तन ही इस कलयुग में सबसे बड़ा तारणहार है।

अंतिम चरण में रचनाकार बाळ श्रावण अत्यंत विनम्र भाव से पंढरीनाथ से प्रार्थना करता है कि हे प्रभु! मुझे अपने चरणों से दूर मत करना। मैंने अपना यह संपूर्ण जीवन और शरीर आपके चरणों में समर्पित कर दिया है। यह समर्पण ही सच्ची भक्ति की पराकाष्ठा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन भगवान विठ्ठल और भक्त पुण्डरीक के उस ऐतिहासिक प्रसंग से जुड़ा है जहाँ माता-पिता की सेवा में लीन पुण्डरीक के द्वार पर जब भगवान आए, तो उन्होंने पुण्डरीक की ओर एक ईंट फेंककर उस पर खड़े रहने को कहा ताकि वे माता-पिता की सेवा पूरी कर सकें। भगवान उस ईंट पर आज भी खड़े हैं। इस भजन का महत्व इस बात में है कि यह सामान्य जनमानस को भगवान के सुलभ और करुणामय स्वरूप से परिचित कराता है। इसे पढ़ने या सुनने मात्र से मन में सात्विक भाव और पंढरपुर की वारी परंपरा के प्रति अगाध श्रद्धा जागृत होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय प्रातः कालीन बेला में या संध्या वंदन के दौरान गाया जा सकता है। एकादशी के पावन अवसरों पर, विशेषकर आषाढ़ी और कार्तिकी एकादशी के दिनों में, वारकरी संप्रदाय के भक्तों द्वारा इसका गायन घर-घर में होता है। इसे ताल, मृदंग और चिपल्सी के साथ भावविभोर होकर गाने से विशेष आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में जगत के पालनहार श्री कृष्ण के ही अवतार माने जाने वाले भगवान पाण्डुरंग (विठोबा) और उनकी अर्धांगिणि माता रुक्मिणी (रखुमाई) हैं। महाराष्ट्र के महान संतों जैसे संत ज्ञानेश्वर महाराज, संत तुकाराम महाराज, संत एकनाथ महाराज और संत नामदेव ने इसी विठ्ठल भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना पारंपरिक वारकरी भजन शैली में की गई है जिसके गीतकार बाळ श्रावण हैं। इसे आधुनिक समय में गायिका प्रियंका कारंजे ने अपनी सुरीली आवाज से सजाया है। यह रचना महाराष्ट्र की लोक संस्कृति, भजन संध्याओं और वारकरी दिंडियों में अत्यंत चाव से गाई जाती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल, सहज और हृदयस्पर्शी मराठी है, जिसे हिंदी भाषी क्षेत्र के लोग भी आसानी से समझ सकते हैं। इसमें उपमा और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। विठोबा के श्रृंगार और वाळवंट (रेत) का वर्णन श्रोताओं को मानसिक रूप से पंढरपुर के दृश्य से जोड़ देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि:

  • ईश्वर कपट और बेईमानी से दूर हैं और केवल सच्चे प्रेम व ईमानदारी के समीप हैं।
  • तीर्थयात्रा और संतों का सत्संग मनुष्य के जीवन को सफल बना देते हैं।
  • हरिनाम संकीर्तन इस भौतिक संसार के दुखों से पार पाने की सबसे सरल नौका है।
  • परमात्मा के चरणों में पूर्ण आत्मसमर्पण ही मोक्ष का मार्ग है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ
विठूराय भगवान विठ्ठल (पाण्डुरंग) भक्तों के आराध्य देव
विटेवरी ईंट के ऊपर विठोबा की समदंड मुद्रा
पितांबर पीले रंग का वस्त्र भगवान विष्णु/कृष्ण का परिधान
वैजयंती माला विभिन्न प्रकार के फूलों की लंबी माला भगवान की शोभा बढ़ाने वाला हार
करकटी कमर पर हाथ रखना विठोबा की प्रसिद्ध मुद्रा
वाळवंट नदी का रेतीला तट चंद्रभागा नदी का तट पंढरपुर

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: विठ्ठल विठ्ठल म्हणतील सगळे, विठूराय कितीसे दूर...
भावार्थ: जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का नाम जपता है, उसके लिए विठूराय दूर नहीं हैं, बल्कि वे उसके अंतःकरण में विराजमान हैं।

पंक्ति: अंगी शोभे पितांबर पिवळा, गळ्यामध्ये वैजयंती माळा...
भावार्थ: भगवान के पावन अंगों पर पीतांबर और गले में वैजयंती माला उनके साक्षात नारायण स्वरूप का दर्शन कराती है।

पंक्ति: ठेवूनिया दोन्ही करकटी, उभा हा मुकूंद वाळवंटी...
भावार्थ: दोनों हाथों को कमर पर टिकाए हुए भगवान मुकुंद (कृष्ण) चंद्रभागा के तट पर भक्तों की प्रतीक्षा में खड़े हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

विठ्ठल उपासना से जुड़ा अति प्रसिद्ध मंत्र है:

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" अथवा "राम कृष्ण हरि"

तथा प्रसिद्ध श्लोक:

"महायोगपीठे तटे भीमरथ्याः वरं पुण्डरीकाय दातुं मुनीन्द्रैः। समागत्य तिष्ठन्तमादन्तकालं समं पाण्डुरङ्गं महोदशमीडे॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

श्रेणी विवरण
भजन का नाम उभा कसा राहीला विटेवरी (Ubha Kasa Rahila Vitewari)
आराध्य देव भगवान श्री विठ्ठल / पाण्डुरंग
गायक / कलाकार प्रियंका कारंजे (Priyanka Karanje)
भाषा महिमामयी मराठी
संगीत परंपरा वारकरी भजन परंपरा
मुख्य भाव भक्ति, दर्शन, आत्मसमर्पण
उपयुक्त अवसर एकादशी, वारी, भजन संध्या, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन महाराष्ट्र के आराध्य देव भगवान श्री विठ्ठल (पाण्डुरंग विठोबा) को समर्पित है, जो भगवान श्री कृष्ण के ही स्वरूप माने जाते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, भक्त पुण्डरीक जब अपने वृद्ध माता-पिता की सेवा में लीन थे, तब भगवान उनके दर्शन देने आए। पुण्डरीक ने उन्हें बैठने के लिए एक ईंट फेंकी और सेवा पूरी होने तक रुकने को कहा। भगवान तभी से उस ईंट पर समदंड मुद्रा में खड़े हैं।

यह भजन लोकप्रिय गायिका प्रियंका कारंजे (Priyanka Karanje) की मधुर आवाज में विशेष रूप से प्रसिद्ध हुआ है।

वारकरी संप्रदाय में 'राम कृष्ण हरि' और 'विठ्ठल विठ्ठल' महामंत्र का निरंतर संकीर्तन किया जाता है।

पंढरपुर की वारी भक्तों को अहंकार से मुक्त कर सामूहिक भक्ति, समरसता और भगवान विठ्ठल के प्रति अनन्य प्रेम का पाठ पढ़ाती है।

इस भजन को किसी भी एकादशी, गुरुवार, भजन संध्या या दैनिक पूजा के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ गाया जा सकता है।

'वाळवंट' का अर्थ चंद्रभागा नदी का रेतीला तट है, जो पंढरपुर में स्थित है और जहाँ संत समागम होता है।

हाँ, इस लेख में इस मराठी भजन के बोल देवनागरी लिपि में और इसका संपूर्ण भावार्थ हिंदी में प्रस्तुत किया गया है ताकि सभी भक्त इसे समझ सकें।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस मार्गदर्शिका को वारकरी संप्रदाय की परंपरा, पाण्डुरंग के ऐतिहासिक ग्रंथों और लोक भजन संग्रहों के आधार पर प्रामाणिक रूप से संकलित किया गया है ताकि पाठकों को शुद्ध और उच्च कोटि की devotional सामग्री मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • वारकरी संप्रदाय संत गाथा एवं भजन संग्रह
  • पंढरपुर तीर्थक्षेत्र इतिहास एवं परंपराएं
  • पारंपरिक मराठी लोक भजन एवं संत वाणी

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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