hari bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मंगल मूर्ति गौरी लाला लिरिक्स (Mangal Murti Gauri Lala Lyrics In Hindi) - Shri Ganesh Bhajan

मंगल मूर्ति गौरी लाला भजन के संपूर्ण लिरिक्स और हिंदी अर्थ यहाँ पढ़ें। गणेश जी की भक्ति और स्तुति के लिए यह भजन अत्यंत प्रभावशाली है। देखें Bhaktilok पर।

श्री गणेश भजन - सम्पूर्ण परिचय

प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, और मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश जी की आराधना भारतीय संस्कृति में हर शुभ कार्य के आरंभ का अनिवार्य अंग है। जब भी हम नया कार्य, गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार या किसी अनुष्ठान का श्रीगणेश करते हैं, तो सबसे पहले गौरी-नंदन विनायक का स्मरण किया जाता है। "मंगल मूर्ति गौरी लाला" भजन श्री गणेश जी की महिमा, उनके रूप-शृंगार और उनके भक्तों के दुखों का हरण करने वाली असीम करुणा का एक अत्यंत सुंदर और मनमोहक वर्णन प्रस्तुत करता है। इस भजन का मुख्य भाव (Bhava) प्रेम, समर्पण, विनय और उत्सव का है, जो श्रोताओं के मन में आनंद और सकारात्मकता का संचार करता है। इस लेख में हम इस पवित्र भजन के संपूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि, आध्यात्मिक महत्व और गणेश उपासना से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। भगवान गणेश को समर्पित यह भजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि हमारे जीवन के समस्त विघ्नों को दूर कर बुद्धि, विवेक और रिद्धि-सिद्धि का आशीर्वाद भी प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मukhda):

मंगल मूर्ति गौरी लाला, तेरी जय हो विघ्नहर्ता,
सबके संकट दूर करो तुम, हे सुख के कर्ता धरता।
गौरी लाला ओ भोले बाबा के दुलारे,
चरणों में तेरे झुकते हैं जग के सारे!

प्रथम अंतरा:

मूषक वाहन सोहत प्यारे, मोदक भोग लगावे,
जो कोई दिल से ध्यावे तुमको, मनवांछित फल पावे।
हाथ में परशु और फंदा साजे, गजमुख रूप निराला,
रिद्धि-सिद्धि के तुम हो दाता, हे सिंदूर लगाने वाला।

द्वितीय अंतरा:

संकट मोचन नाम तुम्हारा, वेद पुराण बखाने,
ब्रह्मा विष्णु महेश भी पहले, तुमको ही पूजानै।
भक्तन के हितकारी तुम हो, अज्ञान तिमिर नाशक,
ज्ञान प्रकाश भरो घट-घट में, हे विघ्नों के नाशक।

तृतीय अंतरा (समापन):

चरण शरण में आए हैं हम, रख लो लाज हमारी,
भक्ति दान दो ऐसी हमको, छूटे दुनियादारी।
'भaktilok' गाए नित महिमा, चरणों में शीश झुकाए,
मंगल मूर्ति गौरी लाला, सब मिल दर्शन पाए!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान श्री गणेश की अलौकिक महिमा और उनके स्वरूप का सजीव चित्रण करता है। भजन की शुरुआत 'मंगल मूर्ति गौरी लाला' संबोधन से होती है, जिसका अर्थ है कि माता पार्वती (गौरी) के प्यारे लाडले पुत्र स्वयं मंगल के स्वरूप हैं और वे सभी प्रकार के अमंगल व विघ्नों का नाश करने वाले हैं। भक्त उनसे प्रार्थना करता है कि हे सुखों के कर्ता और विघ्नहर्ता, हमारे जीवन के सभी संकटों को दूर कीजिए।

अगले चरणों में श्री गणेश के वाहन मूषक (चूहा), उनके प्रिय मोदक (लड्डू) का भोग, उनके गजमुख (हाथी का मुख) स्वरूप तथा उनके हाथों में सुशोभित शस्त्रों का वर्णन है। यह इस बात का प्रतीक है कि भगवान गणेश बुद्धि और बल दोनों के संतुलन के देवता हैं। वे रिद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (साधना की पूर्णता) के स्वामी हैं। ब्रह्मा, विष्णु और महेश जैसे त्रिदेव भी किसी भी कार्य के आरंभ में सबसे पहले श्री गणेश की पूजा करते हैं, जो उनके सर्वोच्च प्रथम पूज्य स्थान को स्थापित करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की रचना पारंपरिक लोक और शास्त्रीय भक्ति शैलियों के सुंदर समन्वय से हुई है। गणेश पुराण और मुद्गल पुराण में गणेश जी के विभिन्न स्वरूपों का जो वर्णन मिलता है, उसकी झलक इस भजन के शब्दों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इसे गाने और सुनने से मन में एकाग्रता आती है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और कार्यक्षेत्र में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर गाना अत्यंत शुभ माना जाता है:

  • प्रतिदिन प्रातःकालीन वंदना और संध्या आरती के समय।
  • गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और बुधवार के पावन व्रत के दिन।
  • नया मकान, नया वाहन खरीदते समय या नया व्यवसाय आरंभ करते वक्त।
  • घर में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य, विवाह या सत्यनारायण कथा के दौरान।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश (विनायक, एकदंत, गजानन) को समर्पित है। सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि अन्य देवी-देवताओं की पूजा से पहले यदि गणेश जी का आह्वान न किया जाए, तो वह पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। इस भजन के माध्यम से माता गौरी (पार्वती) और भगवान शिव के परिवार के सानिध्य का स्मरण होता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भक्ति साहित्य की परंपरा में गणेश वंदना के रूप में लिखे गए ऐसे भजन पीढ़ियों से संतों, लोक गायकों और श्रद्धालुओं द्वारा गाए जाते रहे हैं। इनका उद्देश्य जन-सामान्य के मानस पटल पर भगवान गणेश के मंगलकारी स्वरूप को स्थापित करना है, ताकि व्यक्ति भयमुक्त होकर अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर सके.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल और सुबोध ब्रज-अवधि मिश्रित हिंदी (खड़ी बोली के लोक स्वरूप) में रचा गया है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जैसे 'गजमुख रूप निराला', 'विघ्नों के नाशक' आदि, जो इसे संगीतबद्ध करने में अत्यंत सरल और कर्णप्रिय बनाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

श्री गणेश का विशाल मस्तक हमें 'बड़ा सोचो' (Think Big) की प्रेरणा देता है, उनके छोटे कान अधिक सुनने (Listening more) का संदेश देते हैं, और उनकी छोटी आँखें एकाग्रता (Concentration) का प्रतीक हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधा क्यों न आए, यदि अटूट श्रद्धा और गणेश जी का स्मरण हो, तो हर समस्या का समाधान मिल जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक / प्रासंगिक अर्थ
मंगल मूर्ति कल्याणकारी स्वरूप जिसके दर्शन मात्र से अमंगल दूर हो जाए
गौरी लाला माता गौरी के पुत्र माता पार्वती और शिवजी के दुलारे गणेश
मोदक भोग लड्डू का प्रसाद भक्ति का आनंद और मिठास
गजमुख हाथी का मुख प्रज्ञा, बुद्धि और विशालता का प्रतीक
तिमिर नाशक अंधकार को मिटाने वाला अज्ञानता को दूर कर ज्ञान देने वाला

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मंगल मूर्ति गौरी लाला, तेरी जय हो विघ्नहर्ता" - हे माता पार्वती के पुत्र, आप सभी मंगलों के आगार हैं, आपकी जय हो क्योंकि आप समस्त बाधाओं और विघ्नों का नाश करने वाले हैं।
"मूषक वाहन सोहत प्यारे, मोदक भोग लगावे" - छोटे से चूहे की सवारी करने वाले और मोदक का भोग ग्रहण करने वाले हे प्रभु, आपका रूप अत्यंत प्यारा है।
"रिद्धि-सिद्धि के तुम हो दाता..." - आप अपने भक्तों को समृद्धि (रिद्धि) और सफलता (सिद्धि) प्रदान करने वाले सर्वोच्च स्वामी हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलसारभक्षितम्।
उमासुतं शोकविनाशकारणं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥

यह श्लोक भगवान गणेश के उस स्वरूप का वर्णन करता है जो उमा (पार्वती) के पुत्र हैं और सभी दुखों का नाश करने वाले हैं। अधिक जानकारी के लिए श्री गणेश चालीसा का पाठ अवश्य करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

बिंदु विवरण
भजन का नाम मंगल मूर्ति गौरी लाला (Mangal Murti Gauri Lala)
समर्पित देवता प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश (विनायक)
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव विघ्न विनाश, भक्ति, समर्पण और उत्सव
उपयुक्त अवसर पूजा, हवन, नया कार्य आरंभ, गणेश चतुर्थी
संबंधित लिंक सुंदरकांड पाठ एवं श्री हनुमान चालीसा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश (गौरी पुत्र विनायक) को समर्पित है।

इस भजन को प्रतिदिन सुबह की पूजा, संध्या आरती, बुधवार के दिन, या किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

भगवान गणेश अपने भक्तों के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं, अड़चनों और संकटों को दूर करते हैं, इसलिए उन्हें 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है।

भगवान गणेश का वाहन मूषक (चूहा) है, जो गतिशीलता और सूक्ष्म दृष्टि का प्रतीक माना जाता है।

भगवान गणेश को मोदक और लड्डू का भोग सबसे अधिक प्रिय है।

हाँ, इसकी सरल शब्दावली और लयबद्ध रचना के कारण यह बच्चों द्वारा आसानी से याद किया जा सकता है, जिससे उनमें संस्कार और एकाग्रता बढ़ती है।

गणेश उपासना से बुद्धि, विवेक, ज्ञान, संयम और कार्यों में सफलता की प्राप्ति होती है तथा मानसिक शांति मिलती है।

भक्तलोक पर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ, शिव स्तोत्र और विभिन्न देवी-देवताओं के पावन भजन एवं चालीसा उपलब्ध हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री सनातन पौराणिक ग्रंथों, गणेश पुराण, लोक-भक्ति परंपरा और प्रामाणिक स्रोतों के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध लिरिक्स और आध्यात्मिक गहराई प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री यह सुनिश्चित करती है कि सभी तथ्य और भावार्थ पूरी निष्ठा और पवित्रता के साथ प्रस्तुत किए जाएं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • गणेश पुराण एवं मुद्गल पुराण - व्यास रचित पौराणिक ग्रंथ।
  • पारंपरिक सनातन भजन संग्रह एवं लोकगाथाएं।
  • वैदिक एवं पौराणिक देवताओं की स्तुति परंपरा।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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