मराठी भजन | Bhaktilok
"चल ग सखे चल ग सखे पंढरीला" यह अत्यंत पावन और कर्णमधुर मराठी भजन भगवान विठ्ठल (विठोबा) और माता रुक्मिणी (राखूबाई) की नगरी पंढरपुर की तीर्थयात्रा तथा उनके प्रति अनन्य प्रेम का जीवंत प्रतीक है। वारकरी संप्रदाय की महान परंपरा में संकीर्तन और विठ्ठल नाम स्मरण को ही मोक्ष का मार्ग बताया गया है। इस भजन में एक सखी अपनी सहचरी को संसार के प्रपंचों और भौतिक बंधनों से मुक्त होकर पंढरपुर के पांडुरंग के दर्शन के लिए चलने का निमंत्रण दे रही है। भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का परमात्मा से मिलने का आर्त विरह और अगाध भक्ति रस प्रवाहित होता है। यह रचना साधक के अंतर्मन को जागृत कर उसे विठ्ठलमय बना देती है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics in Devanagari
(स्थाई / मुखड़ा)
चल ग सखे चल ग सखे पंढरीला,
विठोबाचे दर्शन घेऊ डोळ्या भरूनिला!
पांडुरंग रायाची बघा सुंदर मूर्ती,
चरणी वाहू प्रेमभाव सुखाचीच पूर्ती।
(पहिला अंतरा)
चंद्रभागेच्या तीरी वाळवंट सुंदर,
जिथे जमले संत आणि भक्त निरंतर।
तुकाराम ज्ञानदेवांचा गर्जतय जयकार,
हरिनाम मुखी घेउनि उतरे भवपार।
(दूसरा अंतरा)
विटेवर उभा असे बाळ ब्रह्मचारी,
कटि दोन्ही वर ठेवून भक्तांकारी।
पुंडलिकासाठी उभा उभा विठ्ठल हरी,
त्याच्या प्रेमात भुलली सारी सृष्टी सारी।
(तीसरा अंतरा)
माया मोह जाळ्यात का ग अडकले मन?
पंढरीच्या वारीत हे तर जन्माचे धन।
फुगड्या फेर धरून् गाऊ विठ्ठलाचे गीत,
आनंदाने नाचुनी गाऊ विठ्ठलाची प्रीत।
(समापन / मूक संकीर्तन)
ज्ञानबा-तुकाराम, पंढरीनाथ महाराज की जय!
रामकृष्ण हरी, जय जय राम कृष्ण हरी!
विठ्ठल विठ्ठल जय हरी विठ्ठल...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह मराठी भजन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत गहरा अर्थ समेटे हुए है। इसमें सखी के माध्यम से गुरु या अंतरात्मा द्वारा जीवात्मा को संसार के नाशवान प्रपंचों को छोड़कर परम सत्य की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया गया है। पंढरपुर जाना केवल एक भौगोलिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह अंतःकरण की शुद्धि और परमात्मा के चरणों में पूर्ण आत्मसमर्पण की यात्रा है।
भजन की शुरुआत में सखी अपनी संगिनी से कहती है कि हे सखे! चलो, हम सब मिलकर पंढरी (पंढरपुर) चलें और अपनी आँखों में भगवान विठोबा के स्वरूप को भरकर तृप्त हो जाएँ। पांडुरंग की वह सांवली सलोनी मूर्ति इतनी मोहक है कि उसके दर्शन मात्र से सारे पाप और संताप नष्ट हो जाते हैं। उनके चरणों में अपने प्रेमभाव को अर्पित करना ही जीवन की सबसे बड़ी सार्थकता है।
अगले चरणों में चंद्रभागा नदी (भीमा नदी) के पावन तट और वारकरी संप्रदाय के महान संतों जैसे संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत नामदेव और संत एकनाथ के स्मरण का प्रसंग आता है। जहाँ संतों का मिलन होता है, वह भूमि तीर्थराज बन जाती है। विटे पर खड़े भगवान पांडुरंग अपने भक्त पुंडलिक की भक्ति से बंधे हुए युगों से खड़े हैं। यह भजन हमें याद दिलाता है कि सांसारिक मोह-माया के चक्रव्यूह से निकलकर हरिनाम संकीर्तन में तल्लीन होना ही मानव जीवन का परम ध्येय है। अधिक जानकारी के लिए आप हरि भजन संग्रह और रामचरितमानस कथाएं भी पढ़ सकते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- वारकरी परंपरा का सार: यह भजन महाराष्ट्र की सुप्रसिद्ध वारकरी संस्कृति और आषाढ़ी-कार्तिकी वारी की महान परंपरा को दर्शाता है।
- भक्ति और विरह रस: इसमें प्रभु के दर्शन के लिए व्याकुलता (विरह) और मिलने पर होने वाले आनंद (भक्ति रस) का अद्भुत समन्वय है।
- नामस्मरण की महिमा: 'रामकृष्ण हरी' और 'विठ्ठल विठ्ठल' के जाप के माध्यम से कलियुग में तरने का संदेश दिया गया है।
- सामूहिक संकीर्तन: महिलाओं और पुरुषों द्वारा मिलकर गाए जाने वाले इस भजन से समाज में प्रेम, समरसता और दिव्यता का संचार होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी पवित्र अवसर पर गाया जा सकता है। विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर इसका गायन अत्यधिक फलदायी माना जाता है:
- आषाढ़ी और कार्तिकी एकादशी: पंढरपुर वारी के पावन पर्वों पर विशेष रूप से यह भजन गूंजता है।
- सत्संग और भजन संध्या: साप्ताहिक हरिनाम कीर्तन या गुरुवार के दिन घरों में होने वाली पूजा के दौरान।
- प्रातःकालीन बेला: ब्रह्ममुहूर्त में उठकर भगवान विठ्ठल का स्मरण करते हुए इसे गुनगुनाना मन को शांति देता है।
- सामूहिक फुगड़ी और दिंडी: महिलाएं और भक्तगण पारंपरिक फुगड़ी खेलते समय इस तर्ज पर झूमते हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity & Saint
भगवान विठ्ठल (पांडुरंग): इन्हें भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का ही अवतार माना जाता है। ईंट पर कमर पर हाथ रखकर खड़े रहने वाले विठोबा अपने भक्तों के प्रति अत्यधिक वात्सल्य भाव रखते हैं।
संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम: वारकरी संप्रदाय के ये स्तंभ संत हैं जिन्होंने महाराष्ट्र की भूमि पर भक्ति की ऐसी गंगा बहाई जो आज भी प्रवाहित हो रही है। उनके विचारों और अभंगों ने समाज के हर वर्ग को ईश्वर से जोड़ा। भगवान श्री हरि के विभिन्न रूपों की उपासना के लिए आप श्री हरि स्तुति के लेख भी देख सकते हैं।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| सखे | सहेली, मित्र, संगिनी | आत्मा की साथी या गुरुबुद्धि जो सत्कर्म की प्रेरणा दे |
| पंढरीला | पंढरपुर धाम को | परमात्मा का निवास स्थान, मोक्षपुरी |
| चंद्रभागा | भीमा नदी का नाम | पाप धोने वाली पवित्र तीर्थ नदी |
| विटेवर | ईंट के ऊपर | भक्त पुंडलिक के माता-पिता सेवा भाव के सम्मान में रुकी मुद्रा |
| भवपार | संसार सागर से पार उतरना | जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाना |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री पारंपरिक वारकरी संत साहित्य, लोक भजनों और सांस्कृतिक संदर्भों पर आधारित है। इसे पाठकों की सुगमता के लिए देवनागरी लिपि में प्रस्तुत किया गया है ताकि सभी भक्तगण शुद्ध उच्चारण के साथ इसका आनंद ले सकें।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री - Bhaktilok Editorial Board
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