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एक आस तुम्हारी है लिरिक्स(Ek Aas Tumhari Hai Lyrics in Hindi)

एक आस तुम्हारी है भजन लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित शुद्ध उच्चारण के साथ खाटू श्याम जी का यह सुंदर भजन पढ़ें Bhaktilok पर।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

एक आस तुम्हारी है लिरिक्स

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

एक आस तुम्हारी है

फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे

फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे

मेरे बाबा…..

इतना बता दो कहा तुम नहीं हो

ये सब को पता है कि तुम हर कहीं हो

अगर तुम ना होते तो दुनिया ना होती

अँधेरा मिटाती है तेरी ही ज्योति

अँधेरा मिटाती है तेरी ही ज्योति

फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे

फूलों में महक तुमसे, तारों में चमक तुमसे

बर्फो में शीतलता, अग्नि में धधक तुमसे

बर्फो में शीतलता, अग्नि में धधक तुमसे

अग्नि में धधक तुमसे

जिस ओर नज़र डालू, तेरा ही नजारा है

जिस ओर नज़र डालू, तेरा ही नजारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

मंझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है

मंझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है

कन्हैया…

विश्वास मेरा ये टूटे ना प्यारे

तुम्हिको लगानी है नैया किनारे

चले आओ ढूंढो ना कोई बहाना

सोचो जरा है ये रिश्ता पुराना

सोचो जरा है ये रिश्ता पुराना

मंझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है

मंझधार में नैया है, मजबूर खिवैया है

नैया का खिवैया तो, अब तू ही कन्हैया है

नैया का खिवैया तो, अब तू ही कन्हैया है

अब तू ही कन्हैया है

भव पार लगा बाबा, मंझधार किनारा है

भव पार लगा बाबा, मंझधार किनारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

इस तन में रमे हो तुम, इस मन में रमे हो तुम

इस तन में रमे हो तुम, इस मन में रमे हो तुम

ऐ मेरे बाबा…

तुझसे जुडी है मेरी हर कहानी

तुम्ही दे रहे हो मुझे दाना पानी

ये अहसान तेरा मैं कैसे चुकाऊं

दिया है जो तूने मैं ना भूल पाऊं

दिया है जो तूने मैं ना भूल पाऊं

इस तन में रमे हो तुम, इस मन में रमे हो तुम

इस तन में रमे हो तुम, इस मन में रमे हो तुम

मैं तुमको कहा ढूँढूँ, इस दिल में बसे हो तुम

मैं तुमको कहा ढूँढूँ, इस दिल में बसे हो तुम

इस दिल में बसे हो तुम

घनश्याम दर्श देदो, कोई न हमारा है

घनश्याम दर्श देदो, कोई न हमारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

अब तेरे सिवा बाबा, कहो कौन हमारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

एक आस तुम्हारी है, विश्वास तुम्हारा है

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "एक आस तुम्हारी है लिरिक्स(Ek Aas Tumhari Hai Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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