Durga Bhajan Lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

श्री दुर्गा गायत्री मंत्र लिरिक्स इन हिंदी (Shri Durga Gayatri Mantra Lyrics in Hindi) - By Anup Jalota Mantra Sangrah - भक्तिलोक

श्री दुर्गा गायत्री मंत्र लिरिक्स इन हिंदी, अनूप जलोटा मंत्र संग्रह, जप विधि, अर्थ एवं इसके चमत्कारी लाभों की संदर्भ सहित संपूर्ण जानकारी।

सनातन धर्म में आदि शक्ति मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व है। मां दुर्गा शक्ति, साहस, करुणा और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं। जब हम उनके दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हैं, तो हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अनूप जलोटा जी के सुमधुर कंठ से सजे "मंत्र संग्रह" में शामिल "श्री दुर्गा गायत्री मंत्र" (Shri Durga Gayatri Mantra) एक अत्यंत प्रभावशाली और कल्याणकारी महामंत्र है। यह मंत्र न केवल साधक के मानसिक क्लेशों को दूर करता है, बल्कि उसे जीवन के हर क्षेत्र में विजय और सुरक्षा प्रदान करता है। इस विस्तृत लेख में हम श्री दुर्गा गायत्री मंत्र के लिरिक्स, उसके गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ, शास्त्रीय संदर्भ, जप की विधि और इसके चमत्कारी लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

श्री दुर्गा गायत्री मंत्र | Complete Durga Gayatri Mantra Lyrics

॥ श्री दुर्गा गायत्री मंत्र ॥

ॐ गिरिजायै च विद्महे शिवप्रियायै च धीमहि।
तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥


॥ वैदिक दुर्गा गायत्री मंत्र ॥

ॐ कात्यायन्यै विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि।
तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्॥

मंत्र उच्चारण एवं पद-विच्छेद | Mantra Pronunciation

संस्कृत मंत्रों के जप में शुद्ध उच्चारण का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। अशुद्ध उच्चारण से मंत्र का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। नीचे मंत्र का पद-विच्छेद और उच्चारण निर्देश दिया गया है:

  • ॐ (Om): इसे 'ओम्' के रूप में उच्चारित करें, जिसमें 'म' का स्वर नासिका से निकले।
  • गिरिजायै (Giri-jaa-yai): गिरिजा (पर्वतराज हिमालय की पुत्री) के लिए।
  • च (Cha): और।
  • विद्महे (Vid-ma-he): हम जानते हैं या ध्यान करते हैं।
  • शिवप्रियायै (Shiva-pri-yaa-yai): भगवान शिव की प्रियतमा के लिए।
  • धीमहि (Dhee-ma-hi): हम बुद्धि को एकाग्र कर ध्यान करते हैं।
  • तन्नो (Tan-no): वे हमें।
  • दुर्गा (Dur-gaa): मां दुर्गा।
  • प्रचोदयात् (Pra-cho-da-yaat): सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें।

विस्तृत शब्दार्थ एवं पद-विच्छेद | Word-by-word Meaning

संस्कृत शब्द पद-विच्छेद सरल हिंदी अर्थ संदर्भगत आध्यात्मिक अर्थ
ॐ ओम् परम ब्रह्म का प्रतीक ध्वनि सृष्टि की आदि ध्वनि, जो परमात्मा की उपस्थिति दर्शाती है।
गिरिजायै गिरिजा + आयै पर्वतराज हिमालय की पुत्री के लिए मां पार्वती का स्वरूप, जो स्थिरता और अडिगता की प्रतीक हैं।
विद्महे विद्महे हम जानते हैं / अनुभव करते हैं हम देवी के वास्तविक ज्ञान और चेतना को समझने का प्रयास करते हैं।
शिवप्रियायै शिवप्रिया + आयै भगवान शिव की प्रियतमा के लिए कल्याणकारी शिव की शक्ति, जो संपूर्ण जगत का मंगल करती हैं।
धीमहि धीमहि हम ध्यान करते हैं हम अपनी बुद्धि और चित्त को मां के चरणों में अर्पित करते हैं।
तन्नो तद् + नः वे हमारी / हमें वह परम शक्ति हमारे अस्तित्व को आलोकित करे।
दुर्गा दुर्गा दुर्गति का नाश करने वाली देवी जो जीवन के समस्त संकटों और दुखों का अंत करने वाली हैं।
प्रचोदयात् प्रचोदयात् प्रेरित करें / सन्मार्ग पर चलाएं हमारी बुद्धि को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाएं।

सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Hindi Meaning & Bhavarth

श्री दुर्गा गायत्री मंत्र का सरल हिंदी भावार्थ इस प्रकार है:

"हम पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां गिरिजा को जानते हैं और उनके दिव्य स्वरूप का साक्षात्कार करते हैं। हम भगवान शिव की परम प्रियतमा शिवप्रिया का ध्यान करते हैं। वे आदि शक्ति मां दुर्गा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें और हमें ज्ञान, शक्ति तथा समृद्धि का आशीर्वाद दें।"

विस्तृत भावार्थ:
इस मंत्र में साधक मां दुर्गा से प्रार्थना करता है कि वे उसकी बुद्धि को जागृत करें। गायत्री छंद में रचित होने के कारण यह मंत्र सीधे साधक की चेतना और विवेक पर कार्य करता है। 'गिरिजा' शब्द हमें यह सिखाता है कि जिस प्रकार पर्वत अडिग और ऊंचे होते हैं, उसी प्रकार हमारी श्रद्धा और संकल्प भी जीवन में अडिग होने चाहिए। 'शिवप्रिया' शब्द शिव और शक्ति के अभेद संबंध को दर्शाता है। शिव कल्याण हैं और शक्ति उस कल्याण को क्रियान्वित करने वाली ऊर्जा हैं। जब हम इस मंत्र का जप करते हैं, तो हम अपने भीतर की सुप्त शक्तियों को जाग्रत करते हैं ताकि हम जीवन के संघर्षों का सामना साहस और विवेक के साथ कर सकें।

मंत्र का भाव एवं आध्यात्मिक संदेश | Spiritual Message

श्री दुर्गा गायत्री मंत्र का मुख्य संदेश आत्म-बल और विवेक की प्राप्ति है। यह मंत्र हमें सिखाता है कि बाहरी शत्रुओं से लड़ने से पहले हमें अपने भीतर के काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रूपी महिषासुर का वध करना होगा। मां दुर्गा केवल संहारक नहीं हैं, वे ममतामयी माता भी हैं। इस मंत्र के माध्यम से साधक मां के चरणों में पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त करता है। जब समर्पण गहरा होता है, तो भय का नाश होता है और साधक निर्भय होकर धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

शास्त्रीय संदर्भ, ऋषि, छंद एवं देवता | Scriptural Origin

गायत्री मंत्रों का वर्णन वेदों और उपनिषदों में विस्तार से मिलता है। तैत्तिरीय आरण्यक में विभिन्न देवताओं के गायत्री मंत्रों का उल्लेख है, जिसमें मां दुर्गा का भी पावन गायत्री मंत्र शामिल है।

  • स्रोत ग्रंथ: तैत्तिरीय आरण्यक (१०.१), देवी उपनिषद और देवीभागवत पुराण।
  • ऋषि: इस मंत्र के द्रष्टा ऋषि नारायण या स्वयं सदाशिव हैं।
  • छंद: गायत्री छंद (जिसमें २४ अक्षर होते हैं और यह बुद्धि को तीव्र करने वाला माना जाता है)।
  • अधिष्ठात्री देवी: आदि शक्ति मां दुर्गा, जो महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती का एकीकृत स्वरूप हैं।

मंत्र जप विधि, नियम एवं शुभ मुहूर्त | Chanting Method & Rules

मंत्र का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए इसे विधि-विधान और शुद्धता के साथ जपना चाहिए। नीचे दी गई विधि का पालन करें:

  1. शुभ मुहूर्त: इस मंत्र का जप प्रातः काल (ब्रह्म मुहूर्त) या संध्या काल में करना सर्वोत्तम माना जाता है। नवरात्रि, गुप्त नवरात्रि, दुर्गाष्टमी और मंगलवार या शुक्रवार के दिन इसका विशेष फल मिलता है।
  2. आसन और दिशा: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। लाल रंग के ऊनी आसन का प्रयोग करना अत्यंत शुभ होता है।
  3. माला: जप के लिए रुद्राक्ष की माला या लाल चंदन की माला का प्रयोग करें।
  4. संकल्प और ध्यान: जप शुरू करने से पहले हाथ में जल लेकर संकल्प करें और मां दुर्गा के सिंहवाहिनी रूप का ध्यान करें।
  5. जप संख्या: प्रतिदिन कम से कम १०८ बार (एक माला) जप करें। यदि समय कम हो तो २७ या ५४ बार भी जप किया जा सकता है।
  6. सावधानी: जप के दौरान मन को शांत रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक भोजन ग्रहण करें।

मंत्र का दार्शनिक एवं आध्यात्मिक महत्व | Philosophical Significance

दार्शनिक दृष्टि से, मां दुर्गा 'प्रकृति' हैं और भगवान शिव 'पुरुष' हैं। इन दोनों के संयोग से ही सृष्टि का संचालन होता है। दुर्गा गायत्री मंत्र का जप करने से साधक के भीतर की 'कुंडलिनी शक्ति' जाग्रत होती है। यह मंत्र आज्ञा चक्र को प्रभावित करता है, जिससे साधक की निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। यह मंत्र हमें यह भी स्मरण कराता है कि शक्ति का वास्तविक उपयोग रक्षा और कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि विनाश के लिए।

मंत्र के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ | Benefits of Chanting

नियमित रूप से श्री दुर्गा गायत्री मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति: यह मंत्र मस्तिष्क की तरंगों को शांत करता है और अवसाद व चिंता को दूर करता है।
  • भय और शत्रुओं का नाश: मां दुर्गा की कृपा से साधक के भीतर अदम्य साहस का संचार होता है और अज्ञात भय समाप्त हो जाता है।
  • बुद्धि और एकाग्रता का विकास: विद्यार्थियों के लिए यह मंत्र अत्यंत लाभकारी है, क्योंकि यह स्मृति शक्ति और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बढ़ाता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा: घर और कार्यस्थल पर इस मंत्र के गुंजन से नकारात्मक शक्तियां और नजर दोष दूर रहते हैं।
  • सुख और समृद्धि: मां दुर्गा के आशीर्वाद से जीवन में भौतिक सुख-सुविधाओं की कमी नहीं होती और दरिद्रता का नाश होता है।

मंत्र का दैनिक जीवन में महत्व | Daily Life Relevance

आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में हर व्यक्ति किसी न किसी मानसिक द्वंद्व से जूझ रहा है। ऐसे में श्री दुर्गा गायत्री मंत्र का ५ मिनट का दैनिक जप भी संजीवनी की तरह काम करता है। यह हमें कार्यक्षेत्र में आने वाली चुनौतियों से निपटने की आंतरिक शक्ति देता है। जब हम शांत मन और सुदृढ़ संकल्प के साथ काम करते हैं, तो सफलता स्वतः हमारे कदम चूमती है।

एक नजर में मंत्र की जानकारी | Quick Information Table

मंत्र का नाम श्री दुर्गा गायत्री मंत्र (Shri Durga Gayatri Mantra)
मुख्य देवी आदि शक्ति मां दुर्गा (गिरिजा / शिवप्रिया)
गायक / संकलनकर्ता अनूप जलोटा (Anup Jalota Mantra Sangrah)
मंत्र का छंद गायत्री छंद (२४ अक्षर)
जप के लिए माला रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला
सर्वोत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः काल) या गोधूलि बेला (संध्या काल)
मुख्य लाभ भयमुक्ति, मानसिक शांति, बुद्धि का विकास, शत्रुओं पर विजय
संबंधित त्योहार शारदीय व चैत्र नवरात्रि, दुर्गाष्टमी, विजयदशमी

मुख्य आध्यात्मिक सीख | Key Takeaways

  • समर्पण ही शक्ति है: मां के चरणों में पूर्ण समर्पण ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
  • विवेक का जागरण: गायत्री मंत्र का मुख्य उद्देश्य हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर ले जाना है।
  • नकारात्मकता का अंत: आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने में यह मंत्र सक्षम है।
  • नियमितता का महत्व: साधना में निरंतरता ही सिद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।

संबंधित मंत्र, श्लोक एवं प्रार्थनाएं

मां दुर्गा की आराधना के समय आप इन मंत्रों और प्रार्थनाओं का भी पाठ कर सकते हैं:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस मंत्र का मुख्य उद्देश्य बुद्धि को शुद्ध करना, मानसिक शक्ति बढ़ाना, भय से मुक्ति पाना और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। यह मां दुर्गा से प्रार्थना है कि वे हमें सही मार्ग दिखाएं।

हां, सनातन धर्म में महिलाएं और पुरुष दोनों ही पूर्ण श्रद्धा और शुद्धता के साथ मां दुर्गा गायत्री मंत्र का जप कर सकते हैं। मां के लिए उनके सभी बच्चे समान हैं।

भजन सम्राट अनूप जलोटा जी ने अपने मंत्र संग्रह में इस मंत्र को बहुत ही शास्त्रीय और सुमधुर राग में गाया है। इसे सुनने मात्र से ही मन शांत हो जाता है और ध्यान लगाने में आसानी होती है।

सामान्य साधना के लिए प्रतिदिन १०८ बार (एक माला) जप करना सर्वोत्तम माना जाता है। विशेष अनुष्ठान में इसकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।

सामान्य कल्याण और मानसिक शांति के लिए इस मंत्र का जप बिना दीक्षा के भी श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है। हालांकि, किसी विशेष तांत्रिक या उच्च साधना के लिए गुरु दीक्षा आवश्यक होती है।

वैसे तो प्रतिदिन जप करना फलदायी है, लेकिन मंगलवार, शुक्रवार, दुर्गाष्टमी और नवरात्रि के नौ दिन इस मंत्र के जप के लिए अत्यंत शुभ और शक्तिशाली माने जाते हैं।

हां, इस मंत्र के नियमित जप से आज्ञा चक्र सक्रिय होता है, जिससे आत्म-विश्वास बढ़ता है और हर प्रकार का मानसिक तनाव, डिप्रेशन व अज्ञात भय पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

मां दुर्गा की पूजा में लाल, पीले या नारंगी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है। जप के समय काले या नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "भक्तिलोक" के विद्वान संपादकों और संस्कृत विद्वानों द्वारा शास्त्रीय ग्रंथों जैसे तैत्तिरीय आरण्यक, देवीभागवत पुराण और पारंपरिक मंत्र विज्ञान के आधार पर तैयार किया गया है। इस सामग्री को पूरी तरह से शोधित और शुद्ध उच्चारण के मानकों पर परखा गया है। (संपादकीय रूप से तैयार सामग्री)

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • तैत्तिरीय आरण्यक: वैदिक गायत्री मंत्रों का प्राचीनतम स्रोत।
  • देवी उपनिषद: शक्ति संप्रदाय का महत्वपूर्ण ग्रंथ।
  • अनूप जलोटा मंत्र संग्रह: श्रव्य माध्यम और पारंपरिक गायन शैली।
  • देवीभागवत पुराण: मां दुर्गा की महिमा और उनके विभिन्न स्वरूपों का विस्तृत वर्णन।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!