Hanuman Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

श्री हनुमान अमृतवाणी (Shree Hanuman Amritwani Lyrics in Hindi) - By ANURADHA PADUWAL Hanuman Amritwani

पढ़ें श्री हनुमान अमृतवाणी (Shree Hanuman Amritwani Lyrics in Hindi) - By ANURADHA PADUWAL Hanuman Amritwani - Bhaktilok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंद

श्री हनुमान अमृतवाणी परिचय एवं भक्ति का स्वरूप

श्री हनुमान अमृतवाणी (Shree Hanuman Amritwani) माँ अनुराधा पौडवाल की मधुर एवं दिव्य वाणी में गायी जाने वाली एक अत्यंत लोकप्रिय, शक्तिशाली और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रचना है। सनातन भक्ति परंपरा में संकटमोचन हनुमान जी की उपासना को कलयुग में समस्त प्रकार के भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों का निवारण करने वाली सर्वोच्च साधना माना जाता है। इस अमृतवाणी में हनुमान जी के असीम पराक्रम, उनकी बाल-लीलाओं, लंकादहन, संजीवनी बूटी लाने के प्रसंग और भगवान श्रीराम के प्रति उनके अनन्य, निश्छल समर्पण का अत्यंत सजीव एवं काव्यात्मक वर्णन किया गया है। जब कोई साधक या भक्त सच्चे मन से अनुराधा पौडवाल द्वारा स्वरबद्ध इस हनुमान अमृतवाणी का श्रवण या पाठ करता है, तो उसके आसपास एक सकारात्मक सुरक्षा कवच का निर्माण होता है। यह अमृतवाणी न केवल भय, चिंता, और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है, बल्कि मन में अदम्य साहस, संयम, आत्मविश्वास और भगवान श्रीराम के प्रति अगाध भक्ति का संचार करती है। मंगलवार, शनिवार या नियमित दैनिक पूजा के दौरान इसका पाठ करना साधक के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्री हनुमान अमृतवाणी - मूल पाठ (देवनागरी)

आदि गणेश मनाइए, ललन करे पुकार।
हाथ जोड़ अरजी करूँ, सुनो पवनसुत वार।
संकट मोचन नाम तिहारो, जो ध्यावै सो पावै पार।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।

पवनसुत हनुमान की जय, संकट हरण मंगल करण।
अंजनि सुत महाबलदायी, संतन के प्रभु सदा सहाई।
बाल समय रवि भयो लिल्यो जब, तीनहुँ लोक भयो अंधियारो।
ताहि सोफ भय लियो जब तब, तीनों लोक भयो उजियारो।

कंचन बरन बिराज सुवेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै, काँधे मुंज जनेऊ साजै।
संजीवनी बूटी लाए, लक्ष्मण के प्राण बचाए।
राधे कृष्ण की जय बोलो, जय बजरंगबली की बोलो।

अघटित घटना कर सके, जो राम का हो दास।
संकट मोचन नाम है, पूरै सब की आस।
महावीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी।
कंचन बरन बिराज सुवेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा।

(मुख्य रिफ्राइन / धुन)
श्री हनुमान अमृतवाणी नित गावै, ताके कारज सब बन जावै।
भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै।
नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा।
संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।

सब सुप्रसिद्ध जगत में जाना, संकट मोचन नाम बखाना।
बाल समय र रवि भयो भक्ष्यो, तीन लोक भयो तब रच्छ्यो।
प्रभु श्री राम चन्द्र के काजे, लंका जाइ सुरति बिराजे।
लक्ष्मण मूर्च्छित जब पर डारे, आनि संजीवन प्राण उबारे।

पे्रस लहै हनुमान की सेवा, पावै लाभ सुयश बड़ देवा।
साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे।
अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता, अस वर दीन जानकी माता।
राम रसायन तुम्हारे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा।

तुम्हरे भजन राम को पावै, जन्म जन्म के दुख बिसरावै।
अंत काल रघुवर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई।
और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई।
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।

जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करो गुरुदेव की नाईं।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्ध साखी गौरीसा।
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।
पवनतनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

श्री हनुमान अमृतवाणी का प्रत्येक शब्द और छंद साधक के अंतःकरण को शुद्ध करने वाला आध्यात्मिक मंत्र है। इस अमृतवाणी के आरंभ में गणेश वंदना और हनुमान जी के प्रारंभिक स्मरण के साथ उनकी महिमा का विस्तार किया गया है। भावार्थ यह है कि जिस प्रकार हनुमान जी ने बाल्यावस्था में ही अपने पराक्रम से सूर्य देव को फल समझकर निगल लिया था और तीनों लोकों में प्रकाश फैलाया था, उसी प्रकार वे अपने भक्तों के जीवन के अंधकार (अज्ञान, भय और संकट) को दूर कर ज्ञान और आनंद का प्रकाश फैलाते हैं।

अमृतवाणी के अगले चरणों में हनुमान जी के स्वरूप का सुंदर वर्णन है—उनके स्वर्ण समान शरीर, कानों में सुंदर कुंडल, कंधे पर जनेऊ और हाथ में वज्र व ध्वजा। यह रूप केवल उनकी शारीरिक शक्ति का नहीं, बल्कि उनके धैर्यहारी, ब्रह्मचर्य और विनयशील चरित्र का प्रतीक है। जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगने पर वे अचेत हो गए थे, तब हनुमान जी ने द्रोणगिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राण बचाए थे। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि संकट के समय यदि कोई व्यक्ति निष्काम भाव से भगवान और उनके भक्तों की सेवा करे, तो स्वयं ईश्वर उसकी रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। अंततः अमृतवाणी यह संदेश देती है कि हनुमान जी की शरण में जाने वाले साधक को अष्ट सिद्धियों और नवनिधियों की प्राप्ति होती है और उसके जीवन के सभी कष्ट सदा के लिए समाप्त हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

श्री हनुमान अमृतवाणी की सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्यंत लयबद्ध, भावनात्मक और श्रवण-प्रिय होना है। प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल की ओजस्वी और मधुर आवाज में इस अमृतवाणी को रिकॉर्ड किया गया है, जो श्रोता के मन में तुरंत भक्ति का भाव जगा देती है। इसका महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश: इसके नियमित श्रवण से घर की नकारात्मक ऊर्जा, बुरी दृष्टियां और मानसिक भय दूर होते हैं।
  • कलयुग में प्रत्यक्ष फल: हनुमान जी कलयुग के जाग्रत देवता हैं, और अमृतवाणी उनका आह्वान करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।
  • स्वास्थ्य और दीर्घायु: 'नासै रोग हरै सब पीरा' के मंत्रवत प्रभाव से शारीरिक बीमारियां और कष्ट शांत होते हैं।
  • मानसिक शांति: तनाव, डिप्रेशन और अत्यधिक मानसिक उद्वेग से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए यह अमृतवाणी किसी औषधि से कम नहीं है।
  • संबंधित अध्ययन के लिए आप श्री हनुमान चालीसा और श्री सुंदरकांड पाठ के नियम भी देख सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

हनुमान अमृतवाणी का पाठ या श्रवण करने के लिए कुछ विशेष नियमों और समय का पालन करने से साधना का पूर्ण फल प्राप्त होता है:

  • सर्वोत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः काल 4:00 से 6:00 बजे) या संध्या काल (गोविन्द बेला) में इसका श्रवण सबसे उत्तम माना जाता है।
  • विशेष वार: मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। इन दोनों दिनों में व्रत रखकर या विशेष पूजा के समय इस अमृतवाणी का पाठ अवश्य करना चाहिए।
  • पूजा विधि: स्नान करके लाल या पीले वस्त्र धारण करें। हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं, सिंदूर, चोला, और बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
  • स्थान: घर का पूजा स्थल या किसी पवित्र हनुमान मंदिर में बैठकर एकाग्र चित्त से इसे सुनना या गाना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस पूरी अमृतवाणी के केंद्र बिंदु संकटमोचन महाबली हनुमान जी हैं, जो भगवान श्रीराम के परम भक्त, माता अंजनी और केसरी नंदन के पुत्र तथा पवन देव के आध्यात्मिक पुत्र हैं। इसके साथ ही भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी का स्मरण इसके बिना अधूरा रहता है। अनुराधा पौडवाल जी जैसी प्रसिद्ध भजन गायिका ने अपनी सुमधुर वाणी से इस रचना को जन-जन तक पहुँचाने में ऐतिहासिक योगदान दिया है। सनातन परंपरा में तुलसीदास जी के रामचरितमानस और हनुमान चालीसा की प्रेरणा से ही ऐसी अमृतवाणियों की रचना की परंपरा विकसित हुई है। अधिक जानकारी के लिए संत तुलसीदास जी के दोहे पढ़ें।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

श्री हनुमान अमृतवाणी की रचना पारंपरिक सनातन कथाओं, वाल्मीकि रामायण के प्रसंगों और तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा के तत्वों को आधार बनाकर की गई है। टी-सीरीज (T-Series) के बैनर तले गुलशन कुमार के मार्गदर्शन और अनुराधा पौडवाल के स्वर ने इसे आधुनिक युग में भक्ति संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय बना दिया। इसका मुख्य उद्देश्य आज की व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली में जी रहे लोगों को हनुमान जी की शक्ति से जोड़ना और उन्हें मानसिक संबल प्रदान करना है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह अमृतवाणी सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी तथा अवधी मिश्रित लोकभाषा में रची गई है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जो इसके सौंदर्य को बढ़ाता है। भाषा इतनी सरल है कि एक साधारण गृहस्थ से लेकर वृद्ध और बच्चे तक इसे आसानी से समझ और गा सकते हैं। इसकी लयबद्ध चौपाइयां और दोहे मन को तुरंत मोह लेते हैं और ध्यान की अवस्था में ले जाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

श्री हनुमान अमृतवाणी केवल एक भजन नहीं बल्कि जीवन जीने की एक अचूक कला सिखाती है:

  • निःस्वार्थ सेवा: हनुमान जी ने बिना किसी स्वार्थ के राम काज किया। हमें भी अपने कर्मों में निष्काम भाव रखना चाहिए।
  • अदम्य साहस: कितनी भी बड़ी बाधा (समुद्र लांघना, लंका दहन) क्यों न आए, अटूट विश्वास से उसे पार किया जा सकता है।
  • अहंकार का त्याग: तीनों लोकों के स्वामी होने के बावजूद हनुमान जी खुद को हमेशा 'राम दास' मानते थे। विनम्रता ही असली बल है।
  • संकट में धैर्य: संकट आने पर घबराने के बजाय हनुमान जी का स्मरण करने से बुद्धि और विवेक जागृत होते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ
संकटमोचन सारे संकटों या दुखों को दूर करने वाला हनुमान जी का विशेष नाम जो भक्तों के सभी कष्ट हर लेता है
अंजनि सुत माता अंजनी के पुत्र हनुमान जी की माता का नाम अंजनी था
अष्ट सिद्धि नवनिधि आठ प्रकार की सिद्धियां और नौ निधियां दैवीय शक्तियां जो माता सीता के वरदान से हनुमान जी को प्राप्त हैं
संजीवनी बूटी मृत्युतुल्य मूर्छा को ठीक करने वाली जड़ी-बूटी लक्ष्मण जी के प्राण बचाने हेतु पर्वत सहित लाई गई औषधि
सुमित के संगी अच्छी बुद्धि (सुमति) देने वाले भक्तों के मन से कुमति हटाकर सन्मार्ग दिखाने वाले

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"आदि गणेश मनाइए, ललन करे पुकार..."
कवि या गायक सबसे पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश का आह्वान करता है ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो और तत्पश्चात पवनसुत हनुमान का ध्यान करते हुए शरणागत होने की प्रार्थना की जाती है।

"बाल समय रवि भयो लिल्यो जब, तीनहुँ लोक भयो अंधियारो..."
इस पंक्ति में हनुमान जी की बाल लीला का वर्णन है जब उन्होंने बाल्यावस्था में सूर्य को फल समझकर मुख में रख लिया था, जिससे ब्रह्मांड में अंधकार छा गया था। यह उनकी असीम अमानवीय शक्ति का प्रतीक है।

"अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता, अस वर दीन जानकी माता..."
माता सीता ने हनुमान जी की अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें समस्त प्रकार की आठ सिद्धियों (अनिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व) और नौ निधियों का दाता होने का वरदान दिया था।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्री हनुमान अमृतवाणी के पाठ के साथ निम्नलिखित प्रसिद्ध श्लोक का स्मरण करना अति फलदायी माना जाता है:

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन / रचना का नाम श्री हनुमान अमृतवाणी (Shree Hanuman Amritwani)
प्रमुख गायक / स्वर अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal)
संगीतकार / लेबल्स टी-सीरीज (Gulshan Kumar / T-Series)
मुख्य आराध्य देवता संकटमोचन श्री हनुमान जी एवं भगवान श्रीराम
भाषा सरल हिंदी, अवधी एवं ब्रज मिश्रित लोकभाषा
मुख्य भाव एवं थीम भक्ति, समर्पण, संकट निवारण एवं आत्मबल
उपयुक्त अवसर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, संकट काल एवं दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हनुमान अमृतवाणी का पाठ या श्रवण करने का सर्वोत्तम समय प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त (4:00 से 6:00 बजे) या मंगलवार एवं शनिवार की संध्या बेला है। हालांकि, इसे किसी भी समय मानसिक शांति और संकट के निवारण हेतु सुना जा सकता है।

यह प्रसिद्ध अमृतवाणी टी-सीरीज (T-Series) के संस्थापक स्वर्गीय श्री गुलशन कुमार के मार्गदर्शन में तैयार की गई थी और इसे सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका अनुराधा पौडवाल ने अपने दिव्य स्वर से सजाया है।

इसके नियमित श्रवण से मानसिक तनाव, भय, नकारात्मक ऊर्जा, और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। साथ ही जीवन में साहस, आत्मविश्वास और भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है।

हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों ही हनुमान अमृतवाणी का श्रवण और पाठ कर सकते हैं। भक्ति में भाव और पवित्रता मुख्य है, और हनुमान जी सभी भक्तों पर समान रूप से अपनी कृपा बरसाते हैं।

पाठ के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। यदि संभव हो तो लाल आसन पर बैठकर पाठ करें और मन में सात्विक भाव रखें। किसी विशेष मनोकामना के लिए मंगलवार का व्रत रखकर इसका अनुष्ठान भी किया जा सकता है।

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, 'भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै' के प्रभाव से सभी प्रकार की मानसिक डरावनी स्थितियां और नकारात्मक शक्तियां साधक से दूर रहती हैं।

हनुमान चालीसा में निश्चित 40 चौपाइयां और दो दोहे होते हैं, जबकि हनुमान अमृतवाणी एक विस्तृत ऑडियो/काव्यात्मक प्रस्तुति है जिसमें चालीसा के साथ-साथ विशेष कथा प्रसंग, दोहे और स्तुति का संगीतमय संकलन होता है।

हाँ, आप इसे भक्ति पोर्टल या यूट्यूब के माध्यम से डिजिटल रूप से सुन सकते हैं। भावना और श्रद्धा मुख्य है, माध्यम चाहे जो भी हो।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म के ग्रंथों, हनुमान चालीसा परंपरा और लोक में प्रचलित भक्ति गीतों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को श्री हनुमान अमृतवाणी के सटीक लिरिक्स, अर्थ और उसके आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराना है। किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान को अपनी श्रद्धा और स्थानीय परंपरा के अनुसार करें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री हनुमान चालीसा एवं संकलित रामायण प्रसंग (गीता प्रेस, गोरखपुर)
  • सनातन पौराणिक कथाएं एवं हनुमान स्तुति परंपरा
  • टी-सीरीज भक्ति संगीत संग्रह (अनुराधा पौडवाल द्वारा प्रस्तुत हनुमान अमृतवाणी)

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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