Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जय माँ दुर्गा (Jai Maa Durga Lyrics in Hindi) - Deepali Somaiya Maa Devi Bhajan

जय माँ दुर्गा भजन, माँ की कारुणिकता और दयालुता का संदेश देता है, जो भक्त को संकटों से बाहर निकलने की शक्ति प्रदान करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

जगदंबा माँ दुर्गा की आराधना: भक्ति का शुद्ध पाठ

माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान कर, भक्ति से परिपूर्ण इस भजन को गाएँ और आत्मा को शांति प्रदान करें।
जय माँ दुर्गा
(जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा,
जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा)

जगदंबा दुर्गे माता, जगत की तुम पालक,
दुखों का तुम करती हो, दूर करो आप अपना।
(जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा,
जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा)

तेरा ही गुण गाऊँ मैं, करूँ तेरे नाम का जप,
भक्ति की धारा बहाकर, चढ़ा दूँ तुझको भोग।
(जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा,
जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा)

विधाता तू हो सृष्टि की, साकार भी तुम निराकार,
माँ तुमसे है शक्ति मेरी, जगत की हो सदा साकार।
(जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा,
जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा)

धन्य हैं हम भक्त तेरे, कर दे मुझ पर कृपा माँ,
तू है त्रिलोक की शान, साधक का तू है कारनमा।
(जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा,
जय माँ दुर्गा, जय माँ दुर्गा)

साझा करें:
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ इस भजन में माँ दुर्गा की महिमा का प्राणाम किया गया है। 'जय माँ दुर्गा' का उद्घोष करते हुए, भजनकार ने जगदंबा दुर्गे माता को जगत की पालक और संकटों से दूर करने वाली मानी है। माँ दुर्गा को संपूर्ण सृष्टि का आधार और शक्ति के स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। भजन में यह बताया गया है कि माँ दुर्गा की कृपा से व्यक्ति के दुख दूर होते हैं। यहाँ माँ की शक्ति और संजीवनी को महसूस करते हुए, भक्त उन पर विश्वास व्यक्त करते हैं कि वे हमेशा उनके साथ हैं।
इस भजन के भावार्थ में यह संदर्भित है कि जब भक्त अपने हृदय में सच्ची भक्ति स्थापित करता है, तो माँ दुर्गा उसकी इच्छाओं का ध्यान रखती हैं। 'तेरा ही गुण गाऊँ मैं' के माध्यम से भक्त माँ के गुणों का गान करता है और अपने जीवन को माँ के प्रति समर्पित करता है। यह एक गहरी भावना है जो भक्त की भक्ति को दर्शाती है, जहाँ वे माँ दुर्गा का ध्यान रखते हुए जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की ताकत प्राप्त करते हैं। इस प्रकार, यह भजन मानसिक शांति और ऊर्जा का संचार करता है।
भक्ति मार्ग का उद्देश्य माँ दुर्गा के प्रति आस्था और विश्वास को दृढ़ बनाना है। भजन में 'माँ तुमसे है शक्ति मेरी' का वर्णन दर्शाता है कि भक्त का संपूर्ण अस्तित्व माँ के प्रति समर्पित है। यहाँ ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि माँ दुर्गा केवल शक्ति की देवी नहीं हैं, बल्कि प्रेम और करुणा की साक्षात रूप भी मानी जाती हैं। उनके प्रति भक्ति केवल व्यक्तिगत लाभ की भावना नहीं, बल्कि समर्पण और निःस्वार्थता का प्रतीक है। साथ ही, यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति में सच्चाई और नियमितता होनी चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ इस भजन का महत्वपूर्ण संदर्भ विभिन्न पौराणिक कथाओं में है, जहाँ माँ दुर्गा को दुष्ट शक्तियों का नाशक और भक्तों की रक्षक माना गया है। देवी दुर्गा का मुख्यतः नवदुर्गा पूजा में भव्य स्वागत किया जाता है, जहां श्रद्धालु अपने संकटों से मुक्ति के लिए उनकी आराधना करते हैं। इसे 'देवी महात्म्य' जैसे पुराणों में विस्तृत रूप से वर्णित किया गया है। माँ दुर्गा की उपासना करने से भक्त को विश्राम, सुरक्षा, और दुर्जेय शक्तियों से मुक्ति प्राप्त होती है।
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। जय माँ दुर्गा का भजन गाने से भक्त के मानसिक तनाव में कमी आती है और वे अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करते हैं। इसे नियमित रूप से गाने से मन को शांति और संतुलन मिलता है, जिससे आत्मा की सफाई होती है। यह भजन आंतरिक शक्ति के साथ-साथ बाहरी संकटों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ाता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना सर्वोत्तम होता है। पूजा क्षेत्र की सफाई करें, वहाँ यदि संभव हो, एक दीपक जलाएँ एवं कुछ फल या मिठाई का भोग लगाएँ। भक्त को ध्यान लगाकर और सकारात्मक मन से भजन का जप करना चाहिए। मन को स्थिर करके, माँ दुर्गा के प्रति अपनी भक्ति को व्यक्त करें।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) जय माँ दुर्गा भजन को किस समय गाना चाहिए?जय माँ दुर्गा भजन को सुबह के समय गाना सबसे अच्छा माना जाता है। यह भक्त के दिन की शुरुआत को सकारात्मक ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है।

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?इस भजन का मुख्य उद्देश्य माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करना और जीवन के संकटों से मुक्ति पाने के लिए उनकी स्तुति करना है। यह भक्ति और समर्पण की भावना को उजागर करता है।
क्या इस भजन का कोई विशेष तरीका है गाने का?इस भजन को गाते समय श्रद्धा और ध्यान से भक्ति भाव में रहना चाहिए। इसे सामूहिक या एकल रूप में गाया जा सकता है, जिससे सामूहिक साधना का अनुभव हो सकता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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