bholenath bhajan lyrics बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे लिरिक्स (Bholenath Ki Shadi Hum To Nachenge Lyrics in Hindi) - by Hansraj Raghuwansh Shiv Bhajan

हंसराज रघुवंशी का लोकप्रिय शिव भजन भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। महाशिवरात्रि और सावन विशेष शिव भजन।

भगवान शिव अर्थात् भोलेनाथ की महिमा का गान करने वाला यह भजन "भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे" आधुनिक शिव भक्ति संगीत की एक अत्यंत लोकप्रिय रचना है, जिसे प्रसिद्ध भजन गायक हंसराज रघुवंशी ने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण वाणी में प्रस्तुत किया है। यह भजन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह (शिव-पार्वती विवाह) की पावन लीला का सजीव चित्रण करता है। भजन का मुख्य भाव यह है कि जब स्वयं देवाधिदेव महादेव अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती के साथ विवाह-बंधन में बंधते हैं, तो उस आनंदमयी क्षण में भक्त भी अपने हृदय में उत्सव मनाता है और भगवान के साथ नृत्य करता है। यह भजन भक्ति, प्रेम, समर्पण और आनंद का अद्भुत संगम है। शिव भक्ति में नृत्य और संकीर्तन का विशेष महत्व है, क्योंकि स्वयं भगवान शिव 'नटराज' के रूप में ब्रह्मांडीय नृत्य करते हैं। यह भजन विशेष रूप से सावन मास, महाशिवरात्रि, शिव विवाह उत्सव तथा शिव बारात के अवसर पर गाया जाता है। इसकी लय और ताल भक्तों को आनंदित कर देती है और मन में शिव के प्रति गहरी श्रद्धा उत्पन्न करती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे,
भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे।

डमरू बजेगा, डमरू बजेगा,
डमरू बजेगा तो हम तो नाचेंगे,
भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे।

माता पार्वती संग शिव विवाह रचाएंगे,
हिमालय से बारात लेकर शिव आएंगे।
भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे।

बम बम भोले, बम बम भोले,
बम बम भोले का जयकारा लगाएंगे,
भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे।

गंगा जी का जल भर लाएंगे,
बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएंगे,
भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे।

सर्प और चंद्रमा शिव के संग आएंगे,
नंदी और भोलेनाथ संग नाचेंगे,
भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे।

कैलाश से चलकर शिव बारात लाएंगे,
माता पार्वती का हाथ थामेंगे,
भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे।

हर-हर महादेव, हर-हर महादेव,
हर-हर महादेव का नारा लगाएंगे,
भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे।

हंसराज रघुवंशी भजन गाएंगे,
शिव के चरणों में शीश झुकाएंगे,
भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे।

भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे,
भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मूल भाव भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह के आनंद को भक्त के हृदय में जीवंत करना है। "भोलेनाथ की शादी हम तो नाचेंगे" पंक्ति का अर्थ है कि जब स्वयं महादेव अपनी शक्ति स्वरूपा माता पार्वती के साथ विवाह करते हैं, तो भक्त उस पावन अवसर पर आनंद विभोर होकर नृत्य करता है। यह नृत्य केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मिक आनंद का प्रतीक है। भक्ति परंपरा में नृत्य और संकीर्तन को मोक्ष का साधन माना गया है, क्योंकि इसमें अहंकार का विलय हो जाता है और भक्त पूर्णतः भगवान में लीन हो जाता है।

"डमरू बजेगा तो हम तो नाचेंगे" पंक्ति में डमरू की ध्वनि का विशेष महत्व है। डमरू भगवान शिव का प्रमुख आयुध है, जिससे सृष्टि की उत्पत्ति की नाद-ध्वनि उत्पन्न होती है। जब डमरू बजता है, तो यह ब्रह्मांडीय चेतना का प्रतीक है, और भक्त उस नाद के साथ ताल मिलाकर नाचता है। यह भक्त के आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।

"हिमालय से बारात लेकर शिव आएंगे" पंक्ति शिव-पार्वती विवाह की पौराणिक कथा की ओर संकेत करती है। माता पार्वती हिमालय राज की पुत्री हैं, और भगवान शिव कैलाश से बारात लेकर हिमालय आए थे। इस विवाह में समस्त देवता, ऋषि-मुनि, नंदी, सर्प, चंद्रमा और गण सम्मिलित हुए थे। भक्त इस दिव्य बारात का हिस्सा बनकर स्वयं को धन्य मानता है।

"गंगा जी का जल भर लाएंगे, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएंगे" पंक्ति में शिव पूजन की सामग्री का वर्णन है। गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं। भक्त इन वस्तुओं को अर्पित करके शिव की कृपा प्राप्त करना चाहता है। यह भक्ति का सरल और निश्छल भाव है, जिसमें भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार भगवान को प्रसन्न करता है।

"हर-हर महादेव का नारा लगाएंगे" पंक्ति शिव भक्तों के उत्साह और एकता का प्रतीक है। यह नारा शिव भक्ति की सामूहिक चेतना को जागृत करता है और वातावरण को पवित्र बनाता है। अंत में "हंसराज रघुवंशी भजन गाएंगे, शिव के चरणों में शीश झुकाएंगे" पंक्ति में गायक अपनी विनम्रता प्रकट करता है और भगवान के चरणों में समर्पण का भाव व्यक्त करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन भगवान शिव की भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण है, जिसमें भक्ति, आनंद और समर्पण का त्रिवेणी संगम है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • देवता एवं संदर्भ: यह भजन भगवान शिव (भोलेनाथ) और माता पार्वती के दिव्य विवाह पर आधारित है, जो शिव पुराण और अन्य पौराणिक ग्रंथों में वर्णित है।
  • भक्ति भाव: भजन में भक्त का भगवान के प्रति गहरा प्रेम, समर्पण और आनंद प्रकट होता है। यह भजन भक्त को सांसारिक चिंताओं से मुक्त करके आत्मिक आनंद की ओर ले जाता है।
  • संगीत एवं लय: हंसराज रघुवंशी की मधुर वाणी और भजन की चलती-फिरती लय इसे अत्यंत आकर्षक बनाती है। डमरू, ढोल और मंजीरे की ताल इस भजन की आत्मा है।
  • श्रवण एवं गायन का लाभ: इस भजन को सुनने और गाने से मन में शांति, आनंद और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भजन भय, चिंता और नकारात्मकता को दूर करने में सहायक माना जाता है।
  • सामूहिक भक्ति: यह भजन विशेष रूप से सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त है, जिसमें अनेक भक्त एक साथ मिलकर भगवान की महिमा गाते हैं और नृत्य करते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया और सुना जा सकता है, लेकिन कुछ विशेष अवसरों पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है:

  • सावन मास: सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस मास में प्रत्येक सोमवार को यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
  • महाशिवरात्रि: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिव भक्त रात्रि जागरण करते हुए इस भजन का गायन करते हैं।
  • शिव विवाह उत्सव: जहां शिव-पार्वती विवाह का आयोजन होता है, वहां यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
  • प्रातःकाल एवं संध्या काल: प्रतिदिन प्रातः स्नान के बाद और संध्या के समय दीप प्रज्वलित करके यह भजन गाया जा सकता है।
  • गायन विधि: भजन गाने से पूर्व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग के समक्ष बैठकर या शिव मंदिर में जाकर गायन करें। मंजीरे, ढोलक या हारमोनियम के साथ गायन करने से भक्ति भाव और भी गहरा होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन प्रसिद्ध भजन गायक हंसराज रघुवंशी द्वारा गाया गया है। उनकी भक्ति भाव से ओतप्रोत वाणी और मधुर संगीत ने इस भजन को अत्यंत लोकप्रिय बनाया है।

इस भजन का मुख्य भाव भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह के आनंद को भक्त के हृदय में जीवंत करना है। भक्त इस पावन अवसर पर आनंद विभोर होकर नृत्य करता है और भगवान के प्रति अपना समर्पण व्यक्त करता है।

यह भजन विशेष रूप से सावन मास, महाशिवरात्रि, शिव विवाह उत्सव तथा प्रत्येक सोमवार को गाना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त प्रातःकाल और संध्या के समय भी इसका गायन किया जा सकता है।

हां, इस भजन को सुनने और गाने से मन में शांति, आनंद और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भजन भय, चिंता और नकारात्मकता को दूर करने में सहायक माना जाता है।

शिव-पार्वती विवाह की कथा मुख्य रूप से शिव पुराण, रुद्र संहिता तथा अन्य पौराणिक ग्रंथों में विस्तार से वर्णित है। इसमें माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव की कृपा से उनका विवाह होने का वर्णन है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे शिव भक्ति परंपरा, पौराणिक संदर्भों तथा लोकप्रिय भजन परंपरा के आधार पर तैयार किया गया है। भजन के बोल हंसराज रघुवंशी द्वारा गाए गए प्रचलित संस्करण पर आधारित हैं। भावार्थ एवं व्याख्या में शिव पुराण, रुद्र संहिता तथा भक्ति आंदोलन की परंपरा का संदर्भ लिया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे भजन के बोल अपनी भक्ति भावना के अनुसार स्मरण करें और शिव की कृपा प्राप्त करें।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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