radha bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

ॐ जय जगदीश हरे लिरिक्स (om jay jagadeesh hare Lyrics in Hindi and English) - ANURADHA PAUDWAL Vishnu Aarti

ॐ जय जगदीश हरे भजन भगवान जगदीश के प्रति भक्तों की आस्था और संकट निवारण की प्रार्थना का प्रतीक है।

प्रस्तावना एवं परिचय

जगदीश श्री से संकट निवारण का स्तोत्र

इस भजन के माध्यम से भक्त भगवान जगदीश से संकटों का निवारण करने की प्रार्थना करते हैं।

ॐ जय जगदीश हरेस्वामी जय जगदीश हरे । भक्त जनों के संकटदास जनों के संकटक्षण में दूर करे ॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ जो ध्यावे फल पावेदुःख बिनसे मन कास्वामी दुःख बिनसे मन का । सुख सम्पति घर आवेसुख सम्पति घर आवेकष्ट मिटे तन का ॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ मात पिता तुम मेरेशरण गहूं किसकीस्वामी शरण गहूं मैं किसकी । तुम बिन और न दूजातुम बिन और न दूजाआस करूं मैं जिसकी ॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ तुम पूरण परमात्मातुम अन्तर्यामीस्वामी तुम अन्तर्यामी । पारब्रह्म परमेश्वरपारब्रह्म परमेश्वरतुम सब के स्वामी ॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ तुम करुणा के सागरतुम पालनकर्तास्वामी तुम पालनकर्ता । मैं मूरख फलकामीमैं सेवक तुम स्वामीकृपा करो भर्ता॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ तुम हो एक अगोचरसबके प्राणपतिस्वामी सबके प्राणपति । किस विधि मिलूं दयामयकिस विधि मिलूं दयामयतुमको मैं कुमति ॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ दीन-बन्धु दुःख-हर्ताठाकुर तुम मेरेस्वामी रक्षक तुम मेरे । अपने हाथ उठाओअपने शरण लगाओद्वार पड़ा तेरे ॥॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ विषय-विकार मिटाओपाप हरो देवास्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा । श्रद्धा भक्ति बढ़ाओश्रद्धा भक्ति बढ़ाओसन्तन की सेवा ॥ॐ जय जगदीश हरेस्वामी जय जगदीश हरे । भक्त जनों के संकटदास जनों के संकटक्षण में दूर करे ॥
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'ॐ जय जगदीश हरे' का मुख्य विषय भगवान जगदीश की कृपा और भक्ति की महिमा है। इस भजन में कहा गया है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान का ध्यान करते हैं, उन्हें सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। 'जो ध्यावे फल पावे' का मतलब है कि जो लोग भगवान का ध्यान करते हैं, उनके दुःख दूर होते हैं और वे हर प्रकार की सुख-संपत्ति प्राप्त करते हैं, जैसा कि भजन में कहा गया है, 'सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का।' यह भजन भक्तों को यह समझाता है कि भगवान उनके संकटों को दूर करने वाले हैं और वे उनके हर समय सहायक रहेंगे।

भजन में यह भाव भी प्रतिपादित किया गया है कि भक्तों को भगवान के चरणों में शरण लेनी चाहिए। 'मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी' की पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि भक्त भगवान को अपना सब कुछ मानता है और उनसे सभी संकटों से मुक्ति की कामना करता है। यह भगवान की कृपा को दर्शाता है, जो उन्हें हर प्रकार की सहायता प्रदान करते हैं। भक्त का विश्वास और निष्ठा इस भजन में अत्यंत प्रगाढ़ है, जो भगवान के प्रति उनकी समर्पण भावना को दर्शाता है।

भगवान जगदीश को भक्तों का पालनहार और सृष्टि का सच्चा स्वामी माना जाता है। इस भजन में 'तुम हो एक अगोचर' का उच्चारण करके यह बताना चाहते हैं कि भगवान सबके हृदय में निवास करते हैं, और वे सर्वज्ञ हैं। 'किस विधि मिलूं दयामय' का संदर्भ भक्त की अपनी अनंपता को दर्शाता है, जिसके माध्यम से वे भगवान के प्रति अपनी दया की कामना करते हैं। यह भक्ति मार्ग का एक महत्वपूर्ण तत्व है, जहाँ भक्ति केवल एक साधना नहीं, बल्कि भगवान से प्रेम और स्नेह का एक गहरा संबंध है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व हिन्दू धर्म में विशेष रूप से पवित्र ग्रंथों जैसे भगवद गीता और उपनिषदों से भी जुड़ा हुआ है। भगवान जगदीश का स्वरूप भगवान विष्णु का है, जो सृष्टि के रक्षक और पालनहार माने जाते हैं। इस भजन का पाठ करने से भक्तों को संकटों से मुक्ति मिलने की आशा होती है, जो पौराणिक कथाओं में भी देखा गया है। भागवत पुराण और रामायण में भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति का महत्व बताया गया है, जो इस भजन के माध्यम से उजागर होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन के पाठ से भक्त मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त करते हैं। नियमित रूप से 'ॐ जय जगदीश हरे' का जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है और आत्मिक बल की वृद्धि होती है। यह भजन मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक है, जिससे भक्तों के जीवन में आनंद और समृद्धि का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का भक्ति पूर्वक पाठ सुबह की सुबह करना अति शुभ माना जाता है। भक्तों को चाहिए कि वे पूजा स्थान को स्वच्छ रखें, दीप जलाएं और अगरबत्ती लगाएं। ध्यान रखें कि आपके मन में निस्वार्थ भक्ति हो और आप श्रद्धा के साथ इस भजन का जाप करें। उचित आसन में बैठकर गहरी सांस लें और ध्यान केंद्रित करें, जिससे प्रार्थना का प्रभाव बढ़ सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

ॐ जय जगदीश हरे का क्या महत्व है?

यह भजन भगवान जगदीश से उनके भक्तों के संकटों को दूर करने के लिए प्रार्थना करता है, जिससे भक्तों को मानसिक शांति और सुख की प्राप्ति होती है।

इस भजन का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

पाठ करने से मानसिक तनाव कम होता है और भक्तों को आंतरिक शांति, सुख-संपत्ति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

इस भजन का सही समय और वातावरण क्या होना चाहिए?

भजन का पाठ सुबह के समय और स्वच्छ वातावरण में करना चाहिए। दीप जलाकर और अगरबत्ती लगाकर श्रद्धा से करना चाहिए।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 07 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!