Holi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तू कितनी अच्ची है तू कितनी भोली है प्यारी प्यारी है (Tu kitni achhi hai tu kitni bholi hai Lyrics in Hindi) - Maa Bhajan श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज

माँ के प्रति भक्ति और श्रद्धा से भरा यह भजन, उनके ममता और करुणा का अनुपम चित्रण करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ की ममता: माँ के प्रति भक्ति का स्तोत्र

इस भजन के माध्यम से माँ की ममता और करुणा का गुणगान करें।

तू कितनी अच्ची है तू कितनी भोली है प्यारी प्यारी है (Tu kitni achhi hai tu kitni bholi hai Lyrics in Hindi) - तेरी ममता पर बलिहारी है ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ ।यह जो दुनिया है वन है कांटो का तू फुलवारी है ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ ॥दुखन लागी हैं माँ तेरी अँखियाँ मेरे लिए जागी है तू सारी सारी रतिया ।मेरी निदिया पे अपनी निदिया भी तूने वारी है ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ ॥तू कितनी अच्ची है तू कितनी भोली है प्यारी प्यारी है....अपना नहीं तुझे सुख दुःख कोई मैं मुस्काया तू मुस्काई मैं रोया तू रोई ।मेरे हसने पे मेरे रोने पे तू बलिहारी है ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ ॥तू कितनी अच्ची है तू कितनी भोली है प्यारी प्यारी है....माँ बच्चो की जा होती है वो होते हैं किस्मत वाले जिनकी माँ होती है ।कितनी सुन्दर है कितनी शीतल है न्यारी नयारी है ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ ॥तू कितनी अッチी है तू कितनी भोली है प्यारी प्यारी है....
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से माता की करुणामयी और स्नेहमयी छवि को प्रस्तुत किया गया है। 'तू कितनी अच्ची है तू कितनी भोली है प्यारी प्यारी है' यह पंक्ति माता के असीम प्रेम और सादगी को दर्शाती है। भक्त माँ को एक प्यारी और भोली माता के रूप में देखता है, जिनकी ममता सब दुख-सुख को समेट लेती है। इससे भक्त को यह भावना मिलती है कि माँ हमेशा उनके साथ है, विशेषकर जब वह दुखी होते हैं। भजन में संकेत है कि माँ की आँखों में बसने वाला प्रेम और उनकी करुणा की सार्थकता इस दुनिया की कांटेदार राहों में एक फुलवारी की तरह है, जो जीवन में सुख और शांति प्रदान करती है।

भजन का भावार्थ भक्त के मन में गहरी भावनाओं को जगाने वाला है। जब वह कहता है 'मेरे हसने पे मेरे रोने पे तू बलिहारी है', तो यह माँ की ऐसी अनुकंपा को दर्शाता है, जहाँ वह अपने पुत्र के सुख-दुख में समाहित होती है। यहाँ माँ का स्वरुप एक सजीव सहारा बिंदु के रूप में प्रकट होता है, जिससे भक्त को अपने दुखों का उपशमन होता है। यह भाव भक्त को यह सिखाता है कि माँ का प्रेम कभी भिन्न नहीं होता और वह अपने बच्चों के सुख-दुख में हमेशा उनका साथी होती है। इसी भावना से भजन सुनने वाला शक्ति और साहस प्राप्त करता है।

इस भजन में अंतर्निहित भक्ति मार्ग भी महत्वपूर्ण है। भक्त भावना से भरपूर होकर माँ को एक व्यक्ति की तरह नहीं बल्कि एक सार्वभौमिक शक्ति के रूप में देखता है। जब भक्त माँ को एक करुणामयी देवी मानता है, तो वह अपनी आस्था को और मजबूत करता है। यह भक्ति केवल भजन गाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भक्त का जीवन एक समर्पण का उदाहरण बन जाता है। माता का स्वरूप सभी जीवों में समाहित है, इसलिए जितना हम माता की आराधना करते हैं, उतनी ही हमारी भक्ति प्रगाढ़ होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में माता के प्रति असीम आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। भारतीय पौराणिक कथाओं में माँ दुर्गा, माँ काली और देवी सति जैसी अद्भुत माताओं का उल्लेख मिलता है, जो भक्तों की रक्षा करती हैं। रामायण और महाभारत में माँ का स्थान हमेशा सर्वोच्च रहा है। इस भजन के माध्यम से भक्तों को याद दिलाया जाता है कि माँ का प्रेम असीम है और भक्तों के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का श्रवण मन को शांति और संतोष देता है। यह मानसिक तनाव को कम करने, गहरी नींद लाने और ध्यान लगाने में सहायता करता है। माँ की भक्ति में आत्मिक बल और साहस का संचार होता है, जो जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता को बढ़ाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह या संध्या के समय किया जा सकता है। भक्त को चाहिए कि वह एक सरल स्थान पर बैठकर ध्यान लगाएं और एक दीया जलाएं। माँ के प्रति श्रद्धा भाव से हृदय में प्रेम भरकर इसे गाने से भक्ति का अनुभव गहरा होता है। मन को शांत रखकर और एकाग्रता से इस भजन को गाना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है माँ के प्रति असीम श्रद्धा और प्रेम को व्यक्त करना, जो हमें दुख-सुख में सहारा देती हैं।

भजन सुनने का सही समय कब है?

इस भजन को सुबह या संध्याकाल में ध्यानपूर्वक सुनना उचित होता है, जिससे भक्ति भाव का अनुभव अधिक होता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष महत्व है?

हाँ, इस भजन का महत्व माँ की करुणा और ममता को दर्शाने में है, जिससे भक्तों को सुकून और मानसिक शांति मिलती है।

श्रेणियां: Holi Bhajan Holi Geet holi song

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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