Chhath Puja Geet मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

नौ देवी नयन खोलो पुजारी द्वार आया है लिरिक्स भजन इन हिंदी

नौ देवी की आराधना के इस भजन में भक्ति, आशा और कृपा का अद्भुत स्वरूप है। इसे गाकर आत्मिक शांति प्राप्त करें।

प्रस्तावना एवं परिचय

नौ शक्तियों के संग देवी की आराधना

इस भजन में नौ देवियों की महिमा और आराधना का अद्भुत संयोग है।

नौ देवी नयन खोलो पुजारी द्वार आया हैमैया के द्वारे मेरे ब्रह्मा जी पधारेशंख दे दो चले जाएं पुजारी द्वार आया हैनौ देवी नयन खोलो पुजारी द्वार आया है....||मैया के द्वारे मेरे विष्णु जी पधारेचक्र दे दो चले जाएं पुजारी द्वार आया हैनौ देवी नयन खोलो पुजारी द्वार आया है....||मैया के द्वारे मेरे भोले जी पधारेडमरु दे दो चले जाएं पुजारी द्वार आया हैनौ देवी नयन खोलो पुजारी द्वार आया है....||मैया के द्वारे मेरे रामा जी पधारेधनुष दे दो चले जाएं पुजारी द्वार आया हैनौ देवी नयन खोलो पुजारी द्वार आया है....||मैया के द्वारे मेरे कान्हा जी पधारेमुरली दे दो चले जाएं पुजारी द्वार आया हैनौ देवी नयन खोलो पुजारी द्वार आया है....||मैया के द्वारे तेरे भगत पधारेदरस दे दो चले जाएं पुजारी द्वार आया हैनौ देवी नयन खोलो पुजारी द्वार आया है....||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन का केंद्रीय थीम मां देवी के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रकट करना है। 'नौ देवी नयन खोलो' का अभिप्राय है कि नौ शक्तियों का स्वरूप खुलकर भक्‍तों पर अपनी कृपा बरसाए। यहां ये नौ देवी विभिन्न स्वरूपों में प्रस्तुत हैं, जैसे ब्रह्मा, विष्णु, शिव, राम और कृष्ण का आगमन देवता की तरह है। प्रतीकात्मक रूप से, जब ये देवता मां के द्वार पर आते हैं, तो यह संदेश मिलता है कि माता की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है। भजन में पुजारी का उल्लेख इस बात की ओर संकेत करता है कि कोई भक्त अपनी भक्ति से इन देवी-देवताओं को आमंत्रित कर रहा है।

इस भजन में भावार्थ भक्ति और श्रद्धा की गहराइयों में छिपा है। प्रत्येक देवी का आगमन भक्ति के अलग-अलग पहलुओं का प्रतिनिधित्व करता है। जब भक्त बार-बार माता के द्वार को खोलने का प्रार्थना करते हैं, वे दरअसल मां से अपने जीवन में कृपा और अनुग्रह की अपेक्षा कर रहे हैं। वाक्यांश 'चले जाएं पुजारी' इस बात को दर्शाता है कि उनके आगमन से भक्तों के जीवन में नकारात्मकता का अंत हो जाता है और सकारात्मकता का संचार होता है। यह भजन यह विश्वास दिलाता है कि देवी-देवताओं का संरक्षण हमेशा भक्तों के साथ रहता है।

इस भजन में भक्तिपथ (भक्ति मार्ग) की महिमा है, जो यह बताता है कि भक्त को अपने हृदय में ईश्वर का निवास बनाना चाहिए। भक्ति केवल मंत्र जाप और पूजा तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह एक आंतरिक संबंध का प्रतीक है। भक्त को अपने भीतर देवी-देवताओं की चेतना को जागृत करना होता है। यह एकात्मता का अनुभव करने का एक साधन है जो जीवन को सुखदायी बनाता है। इस भजन में निहित शिक्षाएं महाभारत, रामायण और पुराणों में भगवान की महानता और भक्तों को सिखाई गई उपासना पद्धतियों से मिलती हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय संस्कृति और धार्मिक आस्था में गहरा है। नौ देवियों का उल्लेख विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में मिलता है जैसे देवी भागवत, महाकाली, और दुर्गा सप्तशती। ये नौ शक्तियाँ व्यक्ति के जीवन में दुःख, कष्ट और कठिनाईयों को दूर करती हैं। भारतीय पौराणिक कथाएँ बताती हैं कि जब देवी भाग्य का द्वार खोली जाती है, तब भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस भजन का गान न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि भक्तों को ध्यान, साधना एवं उपासना के मार्ग पर आगे बढ़ाता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का संगीतमय पाठ मानसिक तनाव को कम करता है, आत्मविश्वास में वृद्धि करता है और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ाता है। नियमित रूप से इसका गायन करने से व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि का अनुभव होता है। भक्ति भाव में डूबकर गाने से मन की शांति और संतोष भी मिलता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सस्वर पाठ सुबह या शाम को करना उत्तम रहता है। इस दौरान एक स्वच्छ स्थल पर बैठकर दिव्य ऊर्जा का अनुभव करने के लिए एक दीया जलाया जा सकता है। भक्ति भाव से ध्यान लगाकर इस भजन का पाठ करने से माता के प्रति मन में श्रद्धा का संचार होता है। सही मुद्रा में बैठकर, मन को वश में करके ईश्वर के चरणों में अर्पित करने से आध्यात्मिक अनुभव की प्राप्ति होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में नौ देवी का क्या महत्व है?

नौ देवी का महत्व भारतीय संस्कृति में इनके विविध रूपों के माध्यम से मानवीय जीवन पर उनकी कृपा के प्रभाव में निहित है। ये देवी शक्तियों का प्रतीक हैं जो भक्तों को सुरक्षा, समृद्धि और शांति प्रदान करती हैं।

क्या नौ देवी की उपासना में विशेष कोई विधि है?

हाँ, नौ देवी की उपासना में विभिन्न पर्वों, जैसे नवरात्रि में, विशेष विधियों का पालन करना महत्व रखता है, जैसे उपवासी रहना, नौ दिनों तक पूजा करना और अर्चना करना।

इस भजन का पाठ कब करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह के समय या संध्या के समय करना चाहिए। इसका नियमित पाठ मानसिक शांति लाने और भक्ति में वृद्धि करने में सहायक होता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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