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फूट गईले ललकी किरणिया मईया (Phut Gaile Lalki Kiriniya Maai) - Ritika Pandey Bhakti Song Mata Bhajan

रितिका पांडेय द्वारा स्वरबद्ध लोकप्रिय देवी भजन फूट गईले ललकी किरणिया मईया के बोल, संदर्भ एवं व्याख्या सहित पढ़ें। | Bhaktilok

Ritika Pandey Bhakti Song Mata Bhajan

भक्ति संगीत की पावन धारा में लोकगीतों और देवी गीतों का एक विशिष्ट स्थान रहा है, जो सीधे जनमानस के अंतर्मन को स्पर्श करते हैं। गायिका रीतिका पांडेय द्वारा स्वरबद्ध किया गया लोकप्रिय देवी भजन "फूट गईले ललकी किरणिया मईया" (Phut Gaile Lalki Kiriniya Maai) माता रानी के प्रति अटूट प्रेम, प्रातःकालीन जागरण और पूर्ण शरणागति का एक अत्यंत मनमोहक व सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है। भारतीय सनातन परंपरा में सूर्योदय के साथ ही भगवती जगदंबा के आह्वान की प्राचीन परंपरा रही है, जहाँ उषाकाल की लालिमा को देवी के आगमन और उनके तेजोमय स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। भोजपुरी आंचलिक संस्कृति और शास्त्रीय भक्ति भाव का यह अद्भुत संगम साधक के मन में ऊर्जा, उत्साह और भक्ति रस का संचार करता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन की परंपरा और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो भक्तों को माता रानी के चरणों में और अधिक निकटता का अनुभव कराएगा।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भजन के बोल शुद्ध उच्चारण और पूर्ण भक्ति भाव के साथ नीचे दिए गए हैं:


स्थाई (Mukhda):
फूट गईले ललकी किरणिया मईया, दरसवा देखावs तू आके...
भोर भईले जगमग भईल जग, किरपा बरसावs तू आके...
फूट गईले ललकी किरणिया मईया, दरसवा देखावs तू आके...

अंतरा 1:
निंदिया से जागल सभे तोहरे भरोसा, धइले बानी चरनिया के आसरा भरोसा।
कोना-कोना गूंजे तोहरे महिमा के सुरता, दरस बिना तड़पेला भक्तन के सुरता।
झोली भर देवs मईया झोली फैलावs तू आके,
फूट गईले ललकी किरणिया मईया, दरसवा देखावs तू आके...

अंतरा 2:
घर-आँगन महके मईया धुप अरधिया, दर्शन के प्यासल बाड़े तोहरे जोगिया।
पर्वत पर बाटे तोहरा ऊंच भवनिया, झुमझुम नाचे तोहरे भक्तन के दुनिया।
भवसागर तर जाई नाम के सुनावs तू आके,
फूट गईले ललकी किरणिया मईया, दरसवा देखावs तू आके...

अंतरा 3:
रितिका पांडेय गावे मईया तोहरे महिमा, पावन कs दs आके आजु हमरे उमरिया।
शरण में राखs मईया चरण के धूलिया, मिल जावs जीवन के सांचो सुधि कुलिया।
ममता लुटाइवs मईया अपना बनावs तू आके,
फूट गईले ललकी किरणिया मईया, दरसवा देखावs तू आके...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक भक्त की व्याकुलता और माँ के प्रति उसकी अनन्य पुकार का जीवंत दस्तावेज है। जब प्रातःकाल पूर्व दिशा में सूरज की लाल किरणें फूटती हैं (फूट गईले ललकी किरणिया), तो वह दृश्य साधक को माता रानी के दिव्य तेज की याद दिलाता है। उषाकाल की यह लालिमा इस बात का प्रतीक है कि अज्ञान और अंधकार का नाश हो चुका है और अब ज्ञान व भक्ति का प्रकाश फैल रहा है। भक्त माता से आग्रह करता है कि हे मईया! अब और परीक्षा न लो, अपने भक्तों को अपने दर्शन से कृतार्थ करो।

भजन के दूसरे चरण में भक्त अपनी विवशता और माता के प्रति पूर्ण समर्पण को व्यक्त करता है। वह कहता है कि हम अपनी नींद और मोह-माया का त्याग करके केवल आपके भरोसे बैठे हैं। संसार के सभी कार्यों को छोड़कर हमारा मन आपके चरणों की शरण में आ गया है। इस सृष्टि के कण-कण में आपकी महिमा गूंज रही है। जिस प्रकार चकवा-चकवी सूर्य के दर्शन के लिए तड़पते हैं, उसी प्रकार एक सच्चा भक्त माता के दर्शन के लिए लालायित रहता है।

अंत में, गायिका रीतिका पांडेय अपनी कला के माध्यम से भगवती जगदंबा के चरणों में अपनी हाजिरी लगाती हैं और प्रार्थना करती हैं कि हे माँ! हमारे जीवन के इस सूनेपन को अपनी ममता से भर दो। हमें अपने चरणों की धूल प्रदान करो ताकि हमारा यह मानव जन्म सफल हो सके। यह भावार्थ हमें सिखाता है कि जब भक्त पूरी निष्ठा और बाल-हठ के साथ माँ को पुकारता है, तो माँ को दौड़े चले आना ही पड़ता है। इसी दिव्य आनंद की प्राप्ति के लिए इस देवी गीत संग्रह और संकीर्तन का विशेष महत्व है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता, मधुरता और आंचलिक मिठास है। भोजपुरी भाषा में रचे गए यह देवी गीत सीधे हृदय को छू लेते हैं। इसमें शास्त्रीय जटिलताओं के स्थान पर विशुद्ध प्रेम और भक्ति की प्रधानता है। माता रानी के विभिन्न रूपों जैसे माता वैष्णो देवी, दुर्गा और शेरवाली के स्वरूप का स्मरण करते हुए इस भजन को नवरात्रि या किसी भी शुभ अवसर पर गाया जा सकता है। यह भजन साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और मन के विकारों को दूर कर आध्यात्मिक शुद्धि प्रदान करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रकार के प्रातकालीन देवी गीतों को गाने और सुनने का सबसे उत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय का समय (प्रातः 4:00 बजे से 7:00 बजे तक) माना जाता है। इसके अतिरिक्त:

  • शारदीय और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान प्रातः कालीन पूजा और आरती के समय।
  • माता रानी के जागरण, चौकी या संकीर्तन के प्रारंभिक चरणों में वातावरण को ऊर्जावान बनाने के लिए।
  • घर की साफ-सफाई के पश्चात दीप प्रज्वलित करते समय मानसिक शांति और सकारात्मकता के लिए।
  • किसी भी शुभ कार्य या यात्रा पर निकलने से पूर्व माता के स्मरण के लिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी आदि शक्ति माँ दुर्गा, महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली का सम्मिलित स्वरूप जगदंबा भवानी हैं। सनातन संस्कृति में माँ को सृजन, पालन और संहार तीनों शक्तियों की स्वामिनी माना गया है। गायिका रीतिका पांडेय ने अपनी सुमधुर वाणी से इस लोक परंपरा को जीवंत रखा है। लोक कलाकारों द्वारा गाए जाने वाले ऐसे भजन हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भोजपुरी लोक संगीत और देवी गीतों की परंपरा सदियों पुरानी है। लोक गीतों में महिलाएँ और कलाकार पर्व-त्योहारों, विशेषकर नवरात्र और जिउतिया जैसे व्रतों में माता के गीतों का गान करती थीं। "फूट गईले ललकी किरणिया" इसी लोक परंपरा का एक आधुनिक और अत्यंत लोकप्रिय संस्करण है, जिसे रीतिका पांडेय ने अपनी स्वर-लहरियों से सजाया है। इसकी धुन इतनी कर्णप्रिय है कि सुनते ही श्रोता झूम उठता है और उसका मन स्वतः ही ध्यान में लीन हो जाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी और अंगिका-मैथिली प्रभाव वाली लोक भाषा में रध है। इसमें रूपक अलंकार और प्रकृति के उपादानों (जैसे ललकी किरणिया, भोर, सूरज, कोना-कोना) का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है। भाषा की सरलता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिससे अनपढ़ से लेकर पढ़ा-लिखਾ हर व्यक्ति इसे आसानी से समझ सकता है और गुनगुना सकता है। लोकगीत शैली होने के कारण इसमें ताल और लय का अनूठा सामंजस्य देखने को मिलता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों, मनुष्य को कभी भी ईश्वर पर से अपना भरोसा नहीं खोना चाहिए। जिस प्रकार रात्रि के पश्चात सूर्य का उदय होना निश्चित है, उसी प्रकार दुखों के बादल छटने के बाद सुख का प्रकाश अवश्य आता है। माता की शरण में जाने से अहंकार स्वतः समाप्त हो जाता है और जीवन में विनम्रता तथा सेवाभाव का उदय होता है।

शब्द / मुहावरा सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
ललकी किरणिया लाल किरणें / उषाकाल ज्ञान और चेतना का उदय
भोर भईले सुबह होना / उजाला होना अज्ञान के अंधकार का अंत
सुरता स्मरण / ध्यान / लगन ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम
अरधिया अर्ध्य देना / जल अर्पित करना देवाधिदेव और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता
भवसागर संसार रूपी दुःखसागर जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"फूट गईले ललकी किरणिया मईया, दरसवा देखावs तू आके..."
अर्थात, हे माता! पूर्व दिशा में सूर्य की लाल किरणें फूट चुकी हैं, चारों ओर उजाला हो गया है। अब आप भी प्रकट होकर हमें अपने अलौकिक दर्शन से कृतार्थ कीजिए।

"निंदिया से जागल सभे तोहरे भरोसा, धइले बानी चरनिया के आसरा भरोसा।"
अर्थात, हम संसार की मोह-निद्रा को त्यागकर केवल आपके ही भरोसे जागे हैं और आपके चरणों को ही अपना एकमात्र आश्रय मान चुके हैं।

"घर-आँगन महके मईया धुप अरधिया, दर्शन के प्यासल बाड़े तोहरे जोगिया।"
अर्थात, हमारे घर-आँगन में धूप और अर्ध्य की सुगंध फैल रही है। आपके ये सभी साधक और जोगी आपके दर्शन के लिए अत्यंत प्यासे (व्याकुल) हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने के लिए निम्नलिखित पौराणिक मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता:

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थात: हे नारायणि! आप सब प्रकार का मंगल करने वाली हैं, आप कल्याणमयी हैं और सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं। हे त्रिनेत्री और गौरी रूप वाली माता! हम आपकी शरण में हैं, आपको हमारा बारंबार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विशेषता विवरण
भजन का नाम फूट गईले ललकी किरणिया मईया (Phut Gaile Lalki Kiriniya Maai)
गायिका रीतिका पांडेय (Ritika Pandey)
विधा देवी गीत / भोजपुरी भक्ति भजन / लोक भजन
भाषा भोजपुरी / हिंदी
मुख्य भाव प्रातःकालीन वंदना, समर्पण और दर्शन की लालसा
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, सुबह की पूजा, माता का जागरण, देवी संकीर्तन
संबंधित श्रेणी देवी गीत एवं माता भजन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय देवी भजन को प्रसिद्ध लोक गायिका रीतिका पांडेय (Ritika Pandey) द्वारा अपनी मधुर आवाज में गाया गया है।

यह एक प्रातःकालीन देवी गीत है, जिसे विशेष रूप से शारदीय या चैत्र नवरात्रि, सुबह की पूजा-आराधना, या माता के जागरण के समय सुनना अत्यंत आनंददायक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है।

यह भजन ठेठ भोजपुरी लोक भाषा में रचित है, जिसमें आंचलिक संस्कृति और भक्ति का अनूठा रस घोला गया है।

हाँ, बिल्कुल। घर पर माता की चौकी, सुबह की आरती या दैनिक पूजा के समय इस भजन को गाना और सुनना बहुत ही सकारात्मक वातावरण का निर्माण करता है।

इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण शरणागति, प्रातःकाल उठकर माता का स्मरण करना और अपनी झोली को उनकी कृपा से भरने की प्रार्थना करना है।

निश्चित रूप से। लोकगीत हमारी संस्कृति, परंपरा और लोक-आस्था के मूल आधार हैं, जो सनातन मूल्यों को जीवित रखते हैं।

भक्ति संगीत में उच्च कंपन और सकारात्मक ऊर्जा होती है, जो मन के तनाव को दूर करके अंतःकरण को शांत और आनंदित करती है।

मुख्य रूप से यह भोजपुरी में है, किंतु भक्तों की सुविधा के लिए इसे देवनागरी लिपि और हिंदी अर्थ के साथ Bhaktilok.in पर प्रस्तुत किया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन लोक परंपरा, देवी उपासना और भक्ति साहित्य के गहन अध्ययन के पश्चात तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन के बोल और उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ उपलब्ध कराना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी देवी गीत एवं लोक साहित्य परंपरा।
  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण एवं दुर्गा सप्तशती संदर्भ।
  • भक्ति संगीत संग्रह एवं लोकगीत संकलन आलेख।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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