Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

अमवा के डलिया पे बोले कोयलिया (Amwa Ke Daliya Pe Bole Koyaliya) - Ritika Pandey devigeet Bhakti Song Mata Bhajan

रितिका पांडेय द्वारा गाए गए लोकप्रिय देवी गीत 'अमवा के डलिया पे बोले कोयलिया' का आनंद लें। माँ दुर्गा की भक्ति से ओत-प्रोत यह लोक गीत यहाँ उपलब्ध है।

देवी गीत / लोक भक्ति

Ritika Pandey Devigeet Bhakti Song

प्रस्तुति: Bhaktilok.in | श्रेणी: देवी गीत, भोजपुरी भक्ति गान, छतीसगढ़ी एवं भोजपुरी लोक परंपरा

भारतीय लोक संस्कृति और सनातन परंपरा में आदिशक्ति माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती की स्तुति का एक अत्यंत विशिष्ट और हृदयस्पर्शी स्थान है। लोकगीतों के माध्यम से जब देवी-आराधना की जाती है, तो वह केवल एक अनुष्ठान नहीं बल्कि जन-मानस की गहरी भावनाओं की अभिव्यक्ति बन जाती है। प्रसिद्ध गायिका रितिका पांडेय (Ritika Pandey) द्वारा गाया गया यह पावन देवी गीत "अमवा के डलिया पे बोले कोयलिया (Amwa Ke Daliya Pe Bole Koyaliya)" जगत जननी माँ अम्बे के आगमन, उनकी महिमा और प्रकृति के साथ उनके अद्भुत संबंध का सुंदर चित्रण करता है। सनातन परंपरा में वसंत, आम के बौर और कोयल की कूक को शुभता, उल्लास और नव-सृजन का प्रतीक माना गया है। जब आम की डालियों पर कोयल की मीठी वाणी गूँजती है, तो वातावरण में सकारात्मकता और दिव्यता का संचार होता है, जो माँ दुर्गा के पावन नवरात्रों या देवी जागरण के उल्लास को और अधिक प्रगाढ़ कर देता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय देवी गीत के संपूर्ण बोल, भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और आध्यात्मिक पक्ष का गहराई से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

शुद्ध उच्चारण और पूर्ण भक्ति भाव के साथ रितिका पांडेय द्वारा गाए गए इस देवी गीत के बोल नीचे दिए गए हैं:

अमवा के डलिया पे बोले कोयलिया, जागृत होय माई तोहरे नगरिया! कोयलिया के बोले से मनवा हरषाए, दर्शन देहू न हे भवानी, भक्त बुलवाए। डाल-डाल पापात पियवा झूले झुलनिया, मैया के भवनवा बाजे बंसुरिया। सजे ला अजबरी दरबार तोहार माई, लवले चुनरिया हम पाँव के पदारिया। नवरतिया के दिनवा आवे जब-जब, झूमे धरती-अंबर मोहे सब-सब। शेरवा पे सवार होके आइलू तू भवानी, गावे रितिका पांडेय तोहरे सुयश बानी। झिमझिम बरसे ला अमृत फुहारिया, निहाल भइले मैया तोहरे दुआरिया। अमवा के डलिया पे बोले कोयलिया, जागृत होय माई तोहरे नगरिया!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

लोक परंपरा में रचे-बसे इस देवी गीत की हर पंक्ति में माँ के प्रति अगाध प्रेम और प्रकृति का सुंदर सामंजस्य दिखाई देता है। आइए, इस गीत के एक-एक अंश के गहरे अर्थ को समझें:

मुखड़ा और प्रथम अंतरा: प्रकृति और देवी का मिलन

गीत की शुरुआत आम के पेड़ की डालियों (अमवा के डलिया) पर बैठी कोयल की कूक से होती है। भारतीय संस्कृति में कोयल की वाणी को ऋतु परिवर्तन और उत्सव का संदेशवाहक माना गया है। गायिका कहती है कि जब आम की डालियों पर कोयल बोलती है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि वह माँ के आगमन का संदेश दे रही है और हे मैया! अब तुम्हारी नगरिया (पूरा संसार या पूजा स्थल) जागृत हो उठी है। कोयल की यह मीठी तान सुनकर भक्तों का मन प्रफुल्लित हो जाता है और वे माँ से करबद्ध प्रार्थना करते हैं कि हे भवानी! अपने भक्तों को दर्शन दें।

दूसरा अंतरा: दिव्य दरबार और उल्लास

आगे के चरणों में लोक जीवन के दृश्यों को उकेरा गया है जहाँ मैया के भवन में बांसुरी की मधुर धुन गूँज रही है। देवी का दरबार अत्यंत भव्य और अलौकिक सजा हुआ है। भक्त अपनी श्रद्धा के प्रतीक रूप में माता के चरणों में चुनरी और उपहार अर्पित करते हैं। नवरात्रों के इन पावन दिनों में संपूर्ण धरती और आकाश आनंद से झूम उठते हैं क्योंकि तीन लोकों की स्वामिनी सिंह पर सवार होकर अपने भक्तों का कल्याण करने के लिए प्रकट होती हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

यह गीत मुख्य रूप से भक्ति, समर्पण, और उल्लास (Festive Joy & Devotion) के भाव को समर्पित है। लोकगीतों की यह विशेषता होती है कि वे कठिन संस्कृत श्लोकों के स्थान पर सरल लोक-भाषा और प्रकृति के उपादानों (जैसे कोयल, आम का बौर, फुहार, झूला) के माध्यम से ईश्वर से सीधा जुड़ाव स्थापित करते हैं। इस गीत का मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य का मन शुद्ध होता है और प्रकृति भी उत्सवमय होती है, तो आदिशक्ति माँ दुर्गा स्वयं खिंची चली आती हैं और अपने भक्तों के जीवन को अमृत से भर देती हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम अमवा के डलिया पे बोले कोयलिया (Amwa Ke Daliya Pe Bole Koyaliya)
गायिका / कलाकार रितिका पांडेय (Ritika Pandey)
विधा / शैली देवी गीत, भोजपुरी भक्ति गान, लोक माता भजन
भाषा भोजपुरी / लोक हिंदी
मुख्य विषय माता दुर्गा की स्तुति, प्रकृति और भक्ति का संगम
उपयुक्त अवसर चैत्र / शारदीय नवरात्र, देवी जागरण, माता का चौकी अनुष्ठान
संबंधित मंच Bhaktilok.in

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
अमवा के डलिया आम के पेड़ की डाली प्रकृति का वह स्थान जहाँ कोयल बैठकर कूकती है
कोयलिया कोयल पक्षी मीठी वाणी से वसंत या माता के आगमन का संदेश देने वाली
नगरिया छोटा नगर या पावन क्षेत्र भक्त का घर या मंदिर परिसर जहाँ पूजा हो रही है
हरषाए प्रसन्न होना / आनंदित होना भक्तों के मन का उल्लास
शेरवा सिंह (माता की सवारी) माँ दुर्गा का वाहन
सुयश बानी यशोगान / महिमा का बखान गायिका द्वारा माँ के गुणों का गान

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भोजपुरी और आंचलिक देवी गीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। शहरी आधुनिकता के दौर में भी जब ऐसे लोकगीत गूँजते हैं, तो वे हमारी जड़ों को मजबूत करते हैं। नवरात्र के दिनों में जब माता के पंडाल सजते हैं या घरों में घटस्थापना होती है, तब इस प्रकार के भजन वातावरण को पूरी तरह से सात्विक और ऊर्जावान बना देते हैं।

सनातन परंपरा में प्रकृति और देवता का कभी अलगाव नहीं रहा। नदियाँ, वृक्ष, पर्वत और पशु-पक्षी सभी में ईश अंश देखा गया है। आम की डालियों पर कोयल का बोलना केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि वसंत और नवरात्र के आगमन का शंखनाद है। यह गीत हमें सिखाता है कि किस प्रकार हमारी लोक गायिकाओं ने अपनी कला के माध्यम से धर्म, संस्कृति और संगीत को जीवित रखा है। आप इसी प्रकार के अन्य पावन गीतों और कथाओं के लिए हमारे देवी भजन संग्रह का अवलोकन कर सकते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • प्रकृति के प्रति प्रेम: देवी की आराधना में प्रकृति के उपादानों का सुंदर उपयोग हमें सिखाता है कि हमें पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम रखना चाहिए।
  • आनंद और उत्सव का भाव: जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी भक्ति और संगीत हमारे भीतर उत्साह और ऊर्जा का संचार करते हैं।
  • समर्पण की भावना: जिस प्रकार भक्त मैया के दरबार में अपनी पूरी श्रद्धा समर्पित करता है, उसी प्रकार हमें भी अपने कर्मों में सच्ची निष्ठा रखनी चाहिए।
  • सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव: अपनी मातृभाषा और लोक संगीत का सम्मान करना हमारी संस्कृति को जीवंत रखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय देवी गीत को प्रसिद्ध लोक गायिका रितिका पांडेय (Ritika Pandey) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

यह गीत मुख्य रूप से चैत्र और शारदीय नवरात्र, देवी जागरण, माता की चौकी और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान बहुत चाव से सुना जाता है।

यह गीत भोजपुरी लोक भाषा और आंचलिक संगीत शैली में रचित है, जो सीधे श्रोताओं के हृदय को स्पर्श करता है।

इस भजन का मुख्य संदेश माँ जगदम्बे के प्रति अगाध प्रेम, प्रकृति के उल्लास और सामूहिक भक्ति के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता लाना है।

पारंपरिक देवी गीत हमारी लोक-संस्कृति, रीति-रिवाजों और आस्था को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखते हैं और समाज में समरसता का भाव जगाते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख Bhaktilok.in के संपादकीय मंडल द्वारा लोक संगीत, सांस्कृतिक परंपरा और श्रोताओं की रुचि को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। गीत के बोल और उनके भावार्थ को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है ताकि पाठकों को पूर्ण संतोष मिल सके।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री | अंतिम नवीनीकरण: वर्ष 2026 | सभी अधिकार सुरक्षित।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत एवं देवी भजन परंपरा।
  • क्षेत्रीय लोक संगीतकार एवं कलाकार प्रदर्शन संग्रह।
  • सनातन धर्म ग्रंथ एवं दुर्गा सप्तशती की लोक-व्याख्या परंपरा।
  • संपादकीय अनुसंधान एवं लोक-साहित्य अभिलेख।

संबंधित भजन एवं लेख

माँ दुर्गा के पावन भजन

नवरात्र विशेष और माता के अन्य लोकप्रिय भजनों के बोल पढ़ें।

और पढ़ें →

श्री दुर्गा चालीसा पाठ

माँ अम्बे की कृपा प्राप्ति के लिए संपूर्ण चालीसा और अर्थ।

और पढ़ें →

छठी मईया गीत एवं परंपरा

लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा और पारंपरिक गीतों का संग्रह।

और पढ़ें →

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!