शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ लिरिक्स - अनुराधा पौडवाल शिव आराधना
भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है, जो अपने भक्तों की एक सच्ची पुकार पर ही प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं। सनातन धर्म में देवाधिदेव महादेव की आराधना का विशेष स्थान है। अनुराधा पौडवाल की सुमधुर वाणी में गाया गया पावन भजन "शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ" शिव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय एवं ऊर्जा का संचार करने वाला स्रोत है। यह भजन न केवल भगवान भोलेनाथ की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि जो साधक पूर्ण निष्ठा, समर्पण और श्रद्धा के साथ आशुतोष शिव की शरण में जाता है, उसके जीवन के सभी कष्ट और बंधन हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं। महाशिवरात्रि, सावन मास और सोमवार के व्रत-त्योहारों के अवसर पर इस भजन का श्रवण और गायन मन को असीम शांति प्रदान करता है। इस लेख में हम इस लोकप्रिय भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व की विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि साधक महादेव की भक्ति में पूरी तरह से सराबोर हो सकें।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ ॥
शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ,
भोले बाबा की महिमा का, जग में बेड़ा पार हुआ।
डमरू वाले की जब कृपा, भक्त के ऊपर होती है,
बंद किस्मत के ताले की, हर मुश्किल आसान होती है।
चरणों में जो झुक गया आकर, उसका बेड़ा पार हुआ,
शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ...
कैलाशपति की जटाओं से, गंगा निर्मल बहती है,
पापियों के भी पाप धोकर, महिमा अमर ये कहती है।
हर हर भोले का जप करके, हर पापी भव से तर गया,
शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ...
भस्म रमाने वाले भोले, दया के हैं वो सागर भारी,
दीन-दुखियों की सुनते हैं, विनती पल में वे हमारी।
शरण तिहारी जो भी आया, उसका जीवन संवर गया,
शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ...
हे नीलकंठ, हे महाकाल, तेरी महिमा अपरम्पार,
तेरी कृपा बिना प्रभुजी, चले न सांसों का संसार।
अनुराधा गाये महिमा तेरी, भक्त का बेड़ा पार हुआ,
शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
प्रस्तुत भजन की पंक्तियों में महादेव शिव की अनंत करुणा और उनकी शरण में जाने मात्र से मिलने वाले मोक्ष का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। भजन का मुख्य संदेश यह है कि भगवान शिव अपने नाम के अनुरूप ही 'भोले' हैं और वे अपने भक्तों की भावना देखते हैं, उनके बाहरी दिखावे को नहीं।
भजन की शुरुआत इस पावन सत्य से होती है कि जिस किसी ने भी सच्चे मन से शिव शंकर की आराधना की है, उसका इस भवसागर से उद्धार निश्चित हो जाता है। भगवान भोलेनाथ की महिमा इतनी व्यापक है कि इस संसार में उनके चरणों में ध्यान लगाने वाले हर प्राणी का जीवन सफल हो जाता है। जब डमरू वाले भोलेनाथ की कृपा किसी साधक पर बरसती है, तो उसकी बंद किस्मत के ताले खुल जाते हैं और जीवन की बड़ी से बड़ी कठिनाई भी आसानी से दूर हो जाती है।
कैलाश पर्वत पर विराजमान भगवान शिव की जटाओं से निकलने वाली पवित्र माँ गंगा के जल का स्पर्श पाकर बड़े-बड़े पापी भी पवित्र हो जाते हैं। 'हर हर महादेव' का महामंत्र जपते ही मनुष्य जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। जो प्रभु अपने शरीर पर भस्म रमाते हैं, वे वास्तव में दया के सागर हैं और दीन-दुखियों की पुकार सबसे पहले सुनते हैं। जो भी भक्त सच्चे भाव से उनकी शरण में आता है, उसका जीवन संवर जाता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- दैवीय कृपा का अनुभव: यह भजन साधक के मन में शिवभक्ति की अलख जगाता है और महादेव की शरण में जाने का मार्ग प्रशस्त करता है।
- भक्ति रस से ओतप्रोत: अनुराधा पौडवाल की शांत और मधुर आवाज इस भजन को सुनने वाले के अंतःकरण को प्रफुल्लित कर देती है।
- कष्टों का निवारण: भगवान शिव को 'संकटमोचन' और 'महाकाल' माना जाता है, जिनका स्मरण करने मात्र से भय दूर होता है।
- सार्वभौमिक स्वीकार्यता: यह भजन सभी आयु वर्ग के भक्तों और शिव प्रेमियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
शिव आराधना के लिए प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त और प्रदोष काल (संध्या समय) को सबसे उत्तम माना गया है। इस भजन को सुनने या गाने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- सोमवार का व्रत एवं पूजा: सावन मास या प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते समय इस भजन का मानसिक या मौखिक स्मरण करें।
- शिवरात्रि एवं प्रदोष व्रत: महाशिवरात्रि और मासिक प्रदोष व्रतों के दौरान रात्रि जागरण और शिव सत्संग में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है।
- ध्यान और मानसिक शांति: एकांत स्थान पर आसन लगाकर आँखें बंद करके इस भजन को सुनने से मानसिक तनाव दूर होता है और ध्यान केंद्रित होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में देवाधिदेव महादेव, भगवान शिव, माता पार्वती और उनके गण हैं। शिवजी को योगेश्वर, आशुतोष, और त्रिलोचन कहा गया है। इस भजन को प्रसिद्ध पार्श्वगायिका अनुराधा पौडवाल ने अपने दिव्य स्वर से सजाया है, जो अपनी भक्तिमय प्रस्तुतियों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं। शिव आराधना से जुड़ी अन्य पौराणिक कथाओं के लिए आप शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र के पावन आलेख भी पढ़ सकते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन पारंपरिक शिव आराधना और आधुनिक भक्ति संगीत का एक उत्कृष्ट संगम है। अनुराधा पौडवाल की 'शिव आराधना' एल्बम के अंतर्गत जारी इस गीत का उद्देश्य आम जनमानस में शिव महिमा का प्रचार करना और उन्हें आध्यात्मिकता से जोड़ना है। इसकी रचना बहुत ही सरल ब्रज-हिंदी मिश्रित बोलों में की गई है ताकि बच्चा-बच्चा इसे आसानी से गुनगुना सके।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
भजन की भाषा बेहद सहज, सरल और आम बोलचाल की हिंदी है जिसमें अवधी और खड़ी बोली के सुंदर शब्दों का मिश्रण है। इसमें अनुप्रास अलंकार और तुकांत पंक्तियों का बहुत ही सुंदर प्रयोग हुआ है, जिससे गाने वाले और सुनने वाले दोनों को एक अद्भुत लय और आनंद की अनुभूति होती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- अहंकार का त्याग: भस्म रमाए शिव यह सिखाते हैं कि यह शरीरश्वर नश्वर है, अतः अहंकार का त्याग कर भगवान की शरण में जाना ही मनुष्य का परम कर्तव्य है।
- संकट में धैर्य: कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी शिव नाम का स्मरण करने से संकट टल जाते हैं।
- शरणागत की रक्षा: भगवान शिव अपने शरण में आए हर छोटे-बड़े प्राणी की रक्षा करते हैं, चाहे वह देवता हो या सामान्य मनुष्य।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| उद्धार हुआ | मोक्ष मिला / कल्याण हुआ | जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति |
| कैलाशपति | कैलाश पर्वत के स्वामी | भगवान शिव का निवास स्थान |
| नीलकंठ | नीले गले वाले | समुद्र मंथन के समय विषपान करने वाले शिव |
| भस्म | विभूति / राख | नश्वरता का प्रतीक जो शिव अपने अंगों पर लगाते हैं |
| अपरम्पार | जिसकी कोई सीमा न हो | भगवान शिव की असीम महिमा |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका ही उद्धार हुआ..."
यहाँ कवि या रचनाकार यह स्पष्ट कर रहा है कि संसार के तमाम प्रपंचों को छोड़कर जो मनुष्य अपना ध्यान आशुतोष शिव में लगाता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है।
"कैलाशपति की जटाओं से, गंगा निर्मल बहती है..."
गंगावतरण की पौराणिक कथा की ओर संकेत करते हुए यह पंक्ति बताती है कि शिव की कृपा से ही पतित पावनी गंगा इस पृथ्वी पर प्रवाहित होकर संपूर्ण मानवता को पावन करती हैं।
"भस्म रमाने वाले भोले, दया के हैं वो सागर भारी..."
महादेव का स्वरूप वैरागी का है, जो भौतिक सुखों से परे हैं परंतु अपने भक्तों पर अपनी करुणा बरसाने में वे कभी संकोच नहीं करते।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
शिव आराधना को पूर्णता प्रदान करने के लिए इस भजन के साथ निम्नलिखित महामंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी माना गया है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ (Shiv Shankar Ko Jisne Puja) |
|---|---|
| गायक / गायिका | अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) |
| एल्बम / श्रेणी | शिव आराधना (Shiv Aaradhana) / शिव भजन |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज आधारित |
| मुख्य विषय | शिव भक्ति, शरणागति और कल्याण |
| शुभ अवसर | महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, प्रदोष व्रत |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री शिव भक्तों की धार्मिक भावनाओं और पारंपरिक स्रोतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। इसमें भजन के सटीक बोल, उसका आध्यात्मिक अर्थ और प्रासंगिक जानकारी को समाहित किया गया है ताकि पाठकों को पूर्ण और सात्विक अनुभव मिल सके। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रकाशित की गई है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक शिव आराधना एवं लोक भजन परंपरा
- टी-सीरीज़ भक्ति सागर अभिलेखागार
- शिव पुराण एवं धार्मिक संकीर्तन ग्रंथ
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