Sandeep Sehgal || Guru Ji Bhajan || Original Bhajan
सनातन आध्यात्मिक परंपरा में गुरु और गोविंद (परमात्मा) को एक ही चेतना का अभिन्न रूप माना गया है। जब साधक का हृदय अपने सदगुरु के प्रति अनन्य प्रेम, पूर्ण समर्पण और अगाध विश्वास से भर जाता है, तब उसके रोम-रोम से केवल एक ही स्वर गूंजता है — इष्ट का पावन नाम। प्रसिद्ध गायक संदीप सहगल द्वारा स्वरबद्ध और प्रस्तुत यह पावन भजन "दाता तेरा नाम लिखियाँ ऐ मेरे साँवा तें (Data Tera Naam)" गुरु महिमा और नाम स्मरण का एक अत्यंत दिव्य, हृदयस्पर्शी और आध्यात्मिक रस से परिपूर्ण उत्कृष्ट रचना है। इस भजन में ‘साँवा तें’ अर्थात हमारे प्राणप्रिय, करुणा निधान और सर्वसमर्थ साँईं या गुरुदेव के चरणों में अपनी संपूर्ण जीवन नैया को सौंप देने का अनुपम भाव झलकता है। कलयुग के इस भौतिक और अशांत युग में जहां मन भ्रमित रहता है, ऐसे में सदगुरु के पावन नाम का संकीर्तन जीवात्मा के लिए परम औषधि और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। यह भजन न केवल श्रोताओं के अंतर्मन को झंकृत करता है, बल्कि उन्हें आंतरिक शांति, भक्ति और परमसत्ता की अनुभूति भी कराता है।
भक्तिलोक विशेष संकलन
भक्तिलोक के इस पावन मंच पर आप इस भजन के शुद्ध और पूर्ण बोल (Lyrics), विस्तृत भावार्थ, कठिन शब्दों के अर्थ, तथा गुरु भक्ति से जुड़े अन्य पवित्र प्रसंगों का आनंद ले सकते हैं। इससे संबंधित अन्य रचनाएं जैसे श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र के माध्यम से भी अपनी साधना को और अधिक सुदृढ़ करें।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
स्थायी (मukhda):
दाता तेरा नाम लिखियाँ ऐ मेरे साँवा तें,
दिल विच बस्ता ऐ तेरा प्यार साँवा तें...
दाता तेरा नाम लिखियाँ ऐ मेरे साँवा तें!
अंतरा 1:
दुनिया की इन रीतियों से मैं तो दूर हो गया,
जब से गुरु तेरे चरणों का मजबूर हो गया।
रोम-रोम विच रच बस गया तेरा ही सुरूर, साँवा तें,
दिल विच बस्ता ऐ तेरा प्यार साँवा तें...
दाता तेरा नाम लिखियाँ ऐ मेरे साँवा तें!
अंतरा 2:
भटक रहा था दर-दर मैं अंधेरे की राहों में,
तूने आकर थाम लिया अपनी ही बाहों में।
जीवन नैया पार लगाई, मिटाए सारे ग़म, साँवा तें,
दिल विच बस्ता ऐ तेरा प्यार साँवा तें...
दाता तेरा नाम लिखियाँ ऐ मेरे साँवा तें!
अंतरा 3:
सांसों की हर माला पे तेरा ही सुमिरण हो,
आंखें जब भी बंद करूँ, दर्शन तेरा पावन हो।
तुझसे ही पहचान है मेरी, तू ही मेरा संसार, साँवा तें,
दिल विच बस्ता ऐ तेरा प्यार साँवा तें...
दाता तेरा नाम लिखियाँ ऐ मेरे साँवा तें!
समापन / विश्राम:
संदीप गाए महिमा तेरी, चरणों में झुकाए माथा,
तू ही मेरा सच्चा रहबर, तू ही मेरा भाग्य विधाता।
जन्म-जन्म का साथ है अपना, ओ मेरे साँवा तें,
दाता तेरा नाम लिखियाँ ऐ मेरे साँवा तें!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन एक साधारण गीत मात्र नहीं, अपितु एक साधक की अपने गुरु के प्रति अनन्य पुकार और आत्मीय समर्पण का सजीव दस्तावेज है। 'दाता तेरा नाम लिखियाँ ऐ मेरे साँवा तें' पंक्ति में 'दाता' शब्द परम कृपालु ईश्वर या सदगुरु के लिए प्रयुक्त हुआ है जो अपने भक्तों की झोली बिना मांगे भर देते हैं। 'साँवा तें' पंजाबी और उत्तर भारतीय लोक संस्कृति में अत्यंत आदरणीय, स्नेही और प्रिय गुरु या भगवान (जैसे साँईं या समर्थ गुरु) को संबोधित करने का एक बहुत ही प्यारा संबोधन है।
भजन के पहले अंतरे में गायक यह व्यक्त करता है कि सांसारिक मोह-माया, दिखावे और स्वार्थ की रीतियों से उसका मोहभंग हो चुका है। जब मनुष्य को सदगुरु के चरणों की वास्तविक शरण मिल जाती है, तो वह बाहरी प्रपंचों से मुक्त होकर केवल आंतरिक भक्ति में लीन हो जाता है। उसके रोम-रोम में केवल गुरु नाम का सुरूर (नशा) समा जाता है।
अंतिम चरणों में साधक स्वीकार करता है कि अज्ञानता के अंधकार में भटकते हुए जब वह हताश था, तब सदगुरु ने अपनी करुणा भरी बाहों में लेकर उसे संबल दिया। जीवन की इस भवसागर रूपी नैया को पार लगाने वाले केवल गुरु ही हैं। सांसों की हर माला पर गुरु का स्मरण करना और हर परिस्थिति में उन्हें अपना सर्वस्व मानना ही इस भजन का मूल आध्यात्मिक संदेश है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
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गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत रूप: यह भजन सनातन संस्कृति की उस महान परंपरा को दर्शाता है जहां शिष्य अपने गुरु को ही अपना सब कुछ मानता है।
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संदीप सहगल की मधुर शैली: गायक संदीप सहगल की भावनात्मक और सधी हुई आवाज श्रोताओं के हृदय में सीधे उतर जाती है, जिससे भजन का प्रभाव और भी गहरा हो जाता है।
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मानसिक शांति और सकारात्मकता: इस भजन के नियमित श्रवण से मानसिक तनाव दूर होता है और अंतर्मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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नाम स्मरण की महिमा: कलयुग में नाम जाप को सबसे बड़ा साधन माना गया है, और यह भजन निरंतर नाम स्मरण की प्रेरणा देता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत की पूर्णता उसके सही भाव और विधि के साथ श्रवण या गायन में निहित है। 'दाता तेरा नाम लिखियाँ' भजन को किसी भी समय सुना जा सकता है, परंतु इसके आध्यात्मिक लाभ को बढ़ाने के लिए कुछ विशेष समय और नियम उत्तम माने गए हैं:
ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातः काल
सुबह उठकर स्नान के पश्चात पूजा घर में धूप-दीप प्रज्वलित कर इस भजन को सुनने से पूरा दिन सकारात्मकता और ऊर्जा से भरपूर रहता है।
संध्या वंदन एवं सत्संग
संध्या आरती के समय या गुरु पूर्णिमा, साप्ताहिक सत्संग एवं विशेष पर्वों पर सामूहिक रूप से इस भजन का गान अत्यंत आनंददायी होता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / मुहावरा | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भावार्थ |
|---|---|---|
| दाता | देने वाला, कृपालु | जो बिना शर्त अपनी कृपा बरसाए (ईश्वर या गुरु)। |
| साँवा तें | हे मेरे साँईं / गुरुदेव | उत्तरी भारत में आदरणीय गुरु या प्रभु के लिए प्रेमसूचक संबोधन। |
| सुरूर | नशा, मस्ती, आनंद | भक्ति और प्रेम का वह आंतरिक आनंद जो अलौकिक हो। |
| रहबर | मार्गदर्शक, पथप्रदर्शक | अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला गुरु। |
| सुमिरण | स्मरण करना, जाप | निरंतर अपने इष्ट या गुरु के नाम का स्मरण करना। |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | दाता तेरा नाम लिखियाँ ऐ मेरे साँवा तें (Data Tera Naam) |
|---|---|
| गायक एवं प्रस्तुतकर्ता | संदीप सहगल (Sandeep Sehgal) |
| श्रेणी / विषय | गुरु जी भजन, गुरुदेव संकीर्तन, सतगुरु भक्ति |
| मुख्य भाव | अनन्य प्रेम, पूर्ण शरणागति और गुरु भक्ति |
| भाषा | हिंदी / पंजाबी मिश्रित लोक शैली |
| उपयुक्त अवसर | गुरु पूर्णिमा, दैनिक साधना, सत्संग, संध्या वंदन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख सनातन भक्ति परंपरा, गुरु-शिष्य महिमा और लोक संकीर्तन के ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है। प्रस्तुत सामग्री को पाठकों की आध्यात्मिक रुचि और प्रामाणिकता को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को शुद्ध भजन लिरिक्स और उसका गहरा भावार्थ उपलब्ध कराना है।
स्रोत एवं संदर्भ: पारंपरिक गुरु महिमा संकीर्तन, उत्तर भारतीय लोक भक्ति साहित्य और संगीत एल्बम के मूल बोल।
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