Matarani Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

कट जांदे दुख सारे (Kat Jande Dukh Sare) - Guru Ji Bhajan Jai Guru Ji @taranhar​

गुरु जी के पावन भजन 'कट जांदे दुख सारे' के भावपूर्ण बोल और अर्थ यहाँ पढ़ें। सतगुरु की कृपा से दुखों का नाश करने वाली यह भक्ति रचना मन को शांति देगी।

गुरु भजन

Guru Ji Bhajan Jai Guru Ji @taranhar​ - BhaktiLok

प्रकाशित तिथि: 2023 / श्रेणी: गुरु भजन, सत्संग | स्रोत: Bhaktilok.in संपादकीय दल

यह अत्यंत पावन एवं कर्णप्रिय भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "कट जांदे दुख सारे (Kat Jande Dukh Sare)" सतगुरु की असीम कृपा, शरणगति और उनके पावन चरणों में अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक है। कलयुग के इस कठिन दौर में जहाँ मनुष्य भौतिक दुखों, मानसिक संतापों और चिंताओं से घिरा हुआ है, वहीं गुरु की शरण ही एकमात्र ऐसा आश्रय है जहाँ जीवात्मा को परम शांति की अनुभूति होती है। जय गुरु जी की महिमा का बखान करते हुए यह भजन साधक के अंतर्मन को झकझोर देता है और उसके समस्त संतापों का शमन कर देता है। इस व्यापक मार्गदर्शिका में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), उसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और जीवन पर इसके सकारात्मक प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ मुखड़ा ॥

कट जांदे दुख सारे, जब लेईए गुरु जी दा नाम,
बन जांदे बिगड़े सारे, जत्थे लग जांदे गुरु जी नाल धाम।
जय गुरु जी! शुकराना गुरु जी!

॥ प्रथम अंतरा ॥

दुनिया दे विच ठोकर खा के, जदों मैं दर ते आया,
गुरु जी तेरे चरणा विच आ के, मैनू चैन है पाया।
दूर अंधेरे पल विच हो गए, चमक्या किस्मत दा तारा,
कट जांदे दुख सारे, जब लेईए गुरु जी दा नाम...

॥ द्वितीय अंतरा ॥

ना कोई चिंता, ना कोई फिकर, जे गुरु दी मेहर हो जावे,
रंग जीवन दा बदल है जांदा, हर कोई खुशी मनावे।
रूह नू ठंडक मिल जांदी है, सुण के मीठा पैगाम,
कट जांदे दुख सारे, जब लेईए गुरु जी दा नाम...

॥ तृतीय अंतरा ॥

लक्खां लोकां दी तकदीर बदली, मेरे गुरु ने मेहर है कीती,
प्रेम भक्ति दी प्याली हर इक, झोली विच है पीती।
'तारणहार' पुकारे तुमको, ले लो शरण तमाम,
कट जांदे दुख सारे, जब लेईए गुरु जी दा नाम...

॥ समापन बोल ॥

जय गुरु जी बोल प्यारे, जीवन सफल बना ले,
गुरु चरणों में शीश झुका के, अपना जन्म सुधार ले।
जय गुरु जी! शुकराना गुरु जी! अनन्त शुकराना!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का एक समूह नहीं है, बल्कि यह एक साधक की उस आंतरिक अनुभूति की अभिव्यक्ति है जो उसने अपने सतगुरु के सान्निध्य में प्राप्त की है। भजन के मुख्य बोल "कट जांदे दुख सारे..." यह संदेश देते हैं कि जब मनुष्य अपने अहकार और चिंताओं को छोड़कर पूर्ण रूप से गुरु चरणों में समर्पित हो जाता है, तो उसके जीवन के समस्त कष्ट स्वतः ही समाप्त होने लगते हैं।

प्रथम अंतरे में यह दर्शाया गया है कि जब जीव भौतिक संसार की चकाचौंध और दुखों से प्रताड़ित होकर चारों तरफ से निराश हो जाता है, तब सतगुरु का दरबार ही उसे वास्तविक शांति प्रदान करता है। गुरु की एक दृष्टि मात्र से भाग्य के बंद द्वार खुल जाते हैं और जीवन का अंधकार ज्ञान के प्रकाश में बदल जाता है।

द्वितीय अंतरे में गुरु की अहैतुकी कृपा (Grace) का वर्णन है। गुरु की कृपा होने पर संसार की चिंताएं और भविष्य का भय समाप्त हो जाता है। साधक का अंतःकरण तृप्त हो जाता है और वह हर परिस्थिति में आनंद का अनुभव करता है। अंत में, 'तारणहार' के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि गुरु का नाम ही इस भवसागर से पार लगाने वाली नौका है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • पूर्ण शरणागति (Surrender): यह भजन साधक को सिखाता है कि बिना किसी अहंकार के गुरु के चरणों में समर्पित होने से क्या लाभ मिलते हैं।
  • मानसिक शांति और संबल: तनावपूर्ण आधुनिक जीवन में इस भजन का श्रवण या गायन मानसिक अवसाद को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
  • नाम सिमरन का महत्व: गुरु के नाम के स्मरण (Simran) को सभी दुखों की औषधि बताया गया है।
  • शुकराना भाव (Gratitude): भजन के अंत में "शुकराना गुरु जी" कहकर हर परिस्थिति में ईश्वर और गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा दी गई है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत की कोई समय सीमा नहीं होती, परंतु इस प्रकार के गुरु भजनों को प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में या संध्याकालीन वंदना के समय सुनना अत्यंत लाभदायक माना गया है।

  • दैनिक पूजा के समय: घर के मंदिर में धूप-दीप प्रज्वलित करने के पश्चात गुरु जी के स्वरूप के समक्ष इस भजन को गुनगुनाया जा सकता है।
  • गुरु सत्संग में: साप्ताहिक सत्संग या लंगर के दौरान सामूहिक रूप से इस भजन का गायन वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक बना देता है।
  • तनाव के क्षणों में: जब भी मन अशांत हो, एकांत में बैठकर इस भजन को सुनने से मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।

सत्संग और ध्यान से जुड़े अन्य विषयों के लिए आप सतगुरु महिमा और सत्संग के पावन प्रसंग और श्री गुरु स्तोत्र एवं उसका विस्तृत अर्थ पढ़ सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

सनातन संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर से भी बढ़कर माना गया है— "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।" यह भजन विशेष रूप से उन सभी श्रद्धालुओं के लिए समर्पित है जो 'जय गुरु जी' की परंपरा से जुड़े हैं और अपने गुरु को ही अपना सर्वस्व मानते हैं। गुरु का स्वरूप साक्षात् परब्रह्म का प्रतिनिधित्व करता है, जो अपने शिष्यों को अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन आधुनिक संत परंपरा और यूट्यूब माध्यमों पर लोकप्रिय हुए संकीर्तन स्वरूपों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे विशेष रूप से 'तранहार' (@taranhar) जैसे भक्ति चैनलों और कलाकारों द्वारा स्वरबद्ध किया गया है। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को गुरु भक्ति से जोड़ना और उन्हें यह विश्वास दिलाना है कि कठिन से कठिन समय में भी गुरु की कृपा साधक का साथ कभी नहीं छोड़ती।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी-पंजाबी मिश्रित (साझा संतों की भाषा) है, जिसे हर उम्र का भक्त आसानी से समझ सकता है। इसमें रूपक अलंकारों और भावपूर्ण शब्दों का प्रयोग किया गया है जैसे— 'किस्मत दा तारा चमकना', 'रूह नू ठंडक मिलना', और 'प्रेम भक्ति की प्याली'। यह काव्यात्मक शैली सीधे हृदय को स्पर्श करती है और श्रोता को भक्ति रस में सराबोर कर देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अहंकार का त्याग: जीवन में आने वाली हर बाधा को गुरु चरणों में समर्पित कर देना ही सच्ची बुद्धिमत्ता है।
  • कृतज्ञता (Gratitude): हर छोटी-बड़ी सफलता और श्वास के लिए गुरु का शुकराना अदा करना चाहिए।
  • धैर्य और विश्वास: विपरीत परिस्थितियों में भी गुरु पर अटूट विश्वास रखना ही असली साधना है।

भक्ति और कर्म योग से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए श्रीमद्भगवद्गीता के प्रमुख उपदेश लेख का अध्ययन करें।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
सिमरन / नाम स्मरण करना या जपना ईश्वर या गुरु का निरंतर ध्यान
शुकराना कृतज्ञता प्रकट करना गुरु की कृपा के प्रति धन्यवाद व्यक्त करना
भवसागर संसार रूपी सागर जन्म-मरण का चक्र जिससे पार उतरना है
तारा चमकना भाग्य का उदय होना कष्टों के बाद अच्छे दिनों का आना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"कट जांदे दुख सारे, जब लेईए गुरु जी दा नाम..."
इस पंक्ति का अर्थ है कि जब कोई साधक पूरी निष्ठा के साथ अपने गुरु का नाम स्मरण करता है, तो उसके जीवन के समस्त दैहिक, दैविक और भौतिक कष्ट स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं।

"दुनिया दे विच ठोकर खा के, जदों मैं दर ते आया..."
इसका भाव यह है कि जब जीव संसार के स्वार्थी रिश्तों और दुखों से ठोकर खाकर थक जाता है, तब उसे केवल गुरु के दरबार में ही सच्ची शांति और शरण मिलती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

गुरु महिमा से संबंधित यह पावन श्लोक इस भजन के भाव को और अधिक दृढ़ करता है:

ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

अर्थात्: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं और गुरु ही भगवान शिव हैं। गुरु ही साक्षात् परम ब्रह्म हैं, ऐसे श्री गुरु को मेरा कोटि-कोटि नमन है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम कट जांदे दुख सारे (Kat Jande Dukh Sare)
समर्पित देवता / संत जय गुरु जी (सतगुरु)
संगीत / चैनल संदर्भ @taranhar (तणहार भक्ति)
भाषा हिंदी / पंजाबी (संत भाषा)
मुख्य विषय गुरु भक्ति, शरणागति और नाम सिमरन
मुख्य भाव शुकराना, प्रेम और शांति
उपयुक्त अवसर दैनिक सत्संग, पूजा, ध्यान और सुबह का समय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"कट जांदे दुख सारे" भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि सतगुरु की शरण में जाने और उनका नाम स्मरण करने से जीवन के सभी दुख और चिंताएं दूर हो जाती हैं।

यह भजन किस परंपरा से जुड़ा है?

यह भजन 'जय गुरु जी' की असीम कृपा और सतगुरु के प्रति अनन्य प्रेम की भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है।

इस भजन को कब सुनना सबसे अच्छा रहता है?

इस भजन को प्रातःकाल ध्यान के समय, पूजा के दौरान या जब भी मन अशांत हो, तब सुनना अत्यंत लाभकारी होता है।

क्या इस भजन को सत्संग में गाया जा सकता है?

हाँ, यह भजन सत्संग, लंगर और गुरु पर्व के आयोजनों में सामूहिक रूप से गाने के लिए बहुत ही मधुर और लोकप्रिय है।

भजन में 'शुकराना' शब्द का क्या अर्थ है?

'शुकराना' का अर्थ गुरु या परमात्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है, चाहे परिस्थिति कोई भी हो।

इस भजन से मानसिक शांति कैसे मिलती है?

इसके सकारात्मक बोल और भक्ति रस से भरे शब्द मन के विकारों को शांत करते हैं और ईश्वर पर विश्वास मजबूत करते हैं।

क्या यह भजन यूट्यूब पर उपलब्ध है?

हाँ, यह विभिन्न भक्ति चैनलों जैसे @taranhar और अन्य संगीत मंचों पर श्रवण के लिए उपलब्ध है।

गुरु भजन सुनने से जीवन में क्या बदलाव आता है?

गुरु भजन सुनने से नकारात्मकता समाप्त होती है, धैर्य बढ़ता है और व्यक्ति सकारात्मक मार्ग पर अग्रसर होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख Bhaktilok.in के संपादकीय दल द्वारा सनातन भक्ति परंपरा, गुरु महिमा और संकीर्तन साहित्य के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। सामग्री का उद्देश्य पाठकों को आध्यात्मिक प्रेरणा और सही जानकारी प्रदान करना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक गुरु वाणी एवं संकीर्तन संग्रह
  • श्रीमद्भगवद्गीता - भक्ति योग अध्याय
  • सनातन गुरु परंपरा एवं संत साहित्य
  • Bhaktilok.in देवotional Archives

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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