Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

माई के लाल चुनरी ( Maai Ke Lal Chunari) - Priti Lata Devigeet Mata Ka Bhajan

प्रीति लता जी के स्वर में सजे लोकप्रिय देवी गीत 'माई के लाल चुनरी' के बोल, संदर्भ एवं व्याख्या सहित पढ़ें। माँ दुर्गा की भक्ति का आनंद लें।

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "माई के लाल चुनरी (Maai Ke Lal Chunari)" जगत जननी की कृपा, ममता और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है — जहाँ एक ओर माँ दुर्गा दुष्टों का नाश करती हैं, वहीं दूसरी ओर वे भक्तों के कष्टों को चुटकी में हर लेती हैं। यह भजन प्रीति लता जी की भक्तिमय स्वर-लहरी में गाया गया एक अत्यंत लोकप्रिय देवीगीत है, जिसमें भक्त माता की चुनरी, चरण-कमल और ममतामयी रूप का वर्णन करते हुए अपनी प्रार्थना रखता है। भजन का मूल स्वर पूर्ण समर्पण का है — जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी व्यथा सुनाता है, तो देवी माँ उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है। विशेषकर नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, दुर्गा पूजा, ज्योति एवं भक्ति-संगीत के कार्यक्रमों तथा घर के नित्य आराधना में इसका गायन अत्यंत शुभ माना जाता है। भाव, लय और श्रद्धा — तीनों का जो संगम इस भजन में है, वह श्रोता को सीधे माँ के चरणों से जोड़ देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा (Mukhda):

माई के लाल चुनरी, माई के लाल चुनरी,
हे माँ दुर्गे तोहरे चरणन में,
भक्तन की प्यारी चुनरी।
माई के लाल चुनरी, माई के लाल चुनरी।

अंतरा १:

जगत जननी ममता मईया,
तेरे चरणन की धूलि बनूँ मैं,
तेरे नाम की माला जपूँ मैं,
तेरे दरबार में हाजिर हूँ,
सुन ले मेरी पुकार सजनी।
माई के लाल चुनरी...

अंतरा २:

दुष्ट दलन करती है मईया,
भक्तन की रखवाली करती,
संकट में जो तेरा सुमिरन,
विपदा सारी दूर हो जाती।
तेरे चरणन में शीश झुकाऊँ,
माँ मेरी बेड़ा पार लगा दे।
माई के लाल चुनरी...

अंतरा ३:

शेरावाली मेरी भवानी,
महालक्ष्मी महासरस्वती,
तीनों लोक की स्वामिनी मईया,
तेरी महिमा सब जग जाने।
जो भी तेरे दर पे आए,
खाली हाथ नहीं लौट जाए।
माई के लाल चुनरी...

अंतरा ४:

नवरात्रि के नौ दिन मईया,
भक्त करें तेरा व्रत-पूजन,
ज्योति जले तेरे मंदिर में,
घंटा-घड़ियाल बजे चहुँ ओर।
माँ मेरी कृपा कर दे,
सुख-समृद्धि घर में भर दे।
माई के लाल चुनरी...

अंतरा ५:

हे माँ शेरावाली भवानी,
तेरे चरणन की आरती गाऊँ,
तेरे दरबार में आँचल फैलाऊँ,
भक्ति का वरदान माँगूँ।
जन्म-जन्म का साथ निभा दे,
माँ मेरी भवसागर तार दे।
माई के लाल चुनरी, माई के लाल चुनरी।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का केंद्रीय भाव माता के प्रति पूर्ण समर्पण और उनकी ममता पर अटूट विश्वास है। "माई के लाल चुनरी" पंक्ति में भक्त माता की लाल चुनरी का गुणगान करता है — लाल रंग शक्ति, तेज, प्रेम और मंगल का प्रतीक है। माँ दुर्गा की लाल चुनरी केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि भक्त के हृदय की भक्ति, उसकी श्रद्धा और उसके समर्पण का प्रतीक है। जब भक्त कहता है कि वह माता के चरणों की धूलि बनना चाहता है, तो वह अपने अहंकार का पूर्ण त्याग प्रकट करता है — यही भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है।

भजन के प्रत्येक अंतरे में भक्त माता के भिन्न-भिन्न स्वरूपों की स्तुति करता है। पहले अंतरे में वह जगत जननी की ममता का वर्णन करता है और अपनी पुकार सुनाने की प्रार्थना करता है। दूसरे अंतरे में माँ के दुष्ट-दलन रूप की महिमा है — संकट में माँ का सुमिरन करने से सारी विपदाएँ दूर हो जाती हैं। तीसरे अंतरे में भक्त माँ को महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में स्मरण करता है, जो तीनों लोकों की स्वामिनी हैं और जो भी उनके दर पर आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता।

चौथे अंतरे में नवरात्रि के नौ दिनों की महिमा है — जब भक्त व्रत-पूजन करते हैं, मंदिर में ज्योति जलती है और घंटा-घड़ियाल बजते हैं। पाँचवें अंतरे में भक्त माँ से भक्ति का वरदान माँगता है और जन्म-जन्म का साथ निभाने की प्रार्थना करता है। समग्र रूप से यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस अटूट प्रेम-बंधन को दर्शाता है, जिसमें भक्त माँ को अपनी सखी, अपनी माँ और अपनी रक्षक मानता है। भावार्थ की दृष्टि से यह भजन साधक को यह सिखाता है कि जब हम अपने अहंकार को त्यागकर माँ के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देते हैं, तब माँ स्वयं हमारे जीवन की सारी बाधाएँ हर लेती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

देवीभागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। इस भजन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • देवी केंद्रित भक्ति: यह भजन माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती — तीनों स्वरूपों को एक साथ स्मरण करता है, जिससे साधक को शक्ति, समृद्धि और ज्ञान तीनों की प्राप्ति होती है।
  • ममता एवं करुणा का भाव: भजन में माँ को "ममता मईया" कहकर पुकारा गया है, जो भक्त और भगवान के बीच मातृ-वात्सल्य का संबंध स्थापित करता है।
  • दुष्ट-दलन एवं रक्षा: माँ के शेरावाली रूप का वर्णन भक्त को निर्भयता और सुरक्षा का बोध कराता है।
  • नवरात्रि से जुड़ाव: यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि के नौ दिनों में गाया जाता है, जब माँ के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है।
  • संगीतमय भक्ति: प्रीति लता जी की मधुर आवाज़ में यह भजन श्रोता के हृदय को भाव-विभोर कर देता है।

इस भजन को सुनने और गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मन की नकारात्मकता दूर होती है और भक्त के भीतर आत्मविश्वास एवं शक्ति का संचार होता है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी भजनों का गायन किसी भी शुभ समय में किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष समय और अवसर इसे और अधिक फलदायी बनाते हैं:

  • प्रातःकाल: स्नान के बाद, मंदिर में दीपक जलाकर, माँ के समक्ष बैठकर इस भजन का गायन करें।
  • संध्या आरती: संध्या के समय घंटा-घड़ियाल बजाकर, धूप-दीप दिखाकर भजन गाएँ।
  • नवरात्रि: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन इस भजन का गायन विशेष फलदायी माना जाता है।
  • दुर्गा पूजा एवं जागरण: दुर्गा पूजा, जागरण, भागवत कथा एवं देवी-संगीत के कार्यक्रमों में इसका गायन किया जाता है।
  • विधि: पूर्व दिशा की ओर मुख करके, लाल वस्त्र धारण करके, माँ को लाल फूल एवं लाल चुनरी अर्पित करके भजन का गायन करें।

भजन गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव रखें। शब्दों के उच्चारण पर ध्यान दें और हृदय से माँ को पुकारें। यदि संभव हो तो ढोलक, मंजीरा या हारमोनियम के साथ गाएँ, जिससे भक्ति का रस और गहरा हो जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "माई के लाल चुनरी" भजन किस देवी को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती — तीनों देवियों को समर्पित है, जो आदिशक्ति के तीन प्रमुख स्वरूप हैं।

प्रश्न 2: इस भजन को किसने गाया है?
उत्तर: यह भजन प्रसिद्ध देवीगीत गायिका प्रीति लता जी की मधुर आवाज़ में गाया गया है, जो भक्ति संगीत की एक प्रसिद्ध कलाकार हैं।

प्रश्न 3: इस भजन का गायन कब करना चाहिए?
उत्तर: इसे प्रातःकाल, संध्या आरती के समय, नवरात्रि के नौ दिनों में तथा दुर्गा पूजा एवं जागरण के अवसर पर गाया जा सकता है।

प्रश्न 4: क्या इस भजन को सुनने से कोई विशेष लाभ होता है?
उत्तर: हाँ, इस भजन को श्रद्धापूर्वक सुनने और गाने से मन की नकारात्मकता दूर होती है, घर में सुख-समृद्धि आती है और माँ की कृपा प्राप्त होती है।

प्रश्न 5: क्या इस भजन को गाने के लिए किसी विशेष विधि का पालन करना आवश्यक है?
उत्तर: किसी कठोर विधि का पालन अनिवार्य नहीं है, परंतु स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र धारण करके, माँ के समक्ष दीपक जलाकर और पूर्ण श्रद्धा भाव से गाना सर्वोत्तम माना जाता है।

प्रश्न 6: क्या यह भजन नवरात्रि के अलावा भी गाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, इसे किसी भी शुभ दिन, मंगलवार, शुक्रवार अथवा देवी से जुड़े किसी भी पर्व पर गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति परंपरा, देवी उपासना एवं लोक-संगीत के प्रामाणिक संदर्भों के आधार पर तैयार किया गया है। भजन के बोल लोक-परंपरा में प्रचलित रूप में प्रस्तुत किए गए हैं तथा भावार्थ की व्याख्या देवीभागवत पुराण, मार्कण्डेय पुराण एवं शाक्त परंपरा के सिद्धांतों के आधार पर की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि भजन के बोल एवं अर्थ को श्रद्धा भाव से ग्रहण करें तथा किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने कुल-गुरु अथवा स्थानीय पंडित जी से मार्गदर्शन अवश्य लें।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!