Krishna Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मिला क्या मोहन (Mila Kya Mohan) - Radha Krishna Bhajan Krishna Bhajan

मिला क्या मोहन दिल राधा का तोड़के भजन के संपूर्ण लिरिक्स, हिंदी अर्थ और संदर्भ एवं व्याख्या सहित पढ़ें। Bhaktilok पर पावन श्री कृष्ण भजन का आनंद लें।

हिंदू सनातन धर्म की समृद्ध भक्ति परंपरा में श्री राधा-कृष्ण का दिव्य प्रेम जीवात्मा और परमात्मा के परम मिलन का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। सुप्रसिद्ध भजन "मिला क्या मोहन दिल राधा का तोड़के" (Mila Kya Mohan Dil Radha Ka Todke) इसी अलौकिक प्रेम, विरह और अनन्य समर्पण की भावना को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। वैष्णव संप्रदाय, विशेषकर गौड़ीय वैष्णव दर्शन में, 'विरह-भाव' या 'विप्रलम्भ श्रृंगार' को भक्ति की पराकाष्ठा माना गया है। जब भगवान श्री कृष्ण कंस वध के लिए वृंदावन छोड़कर मथुरा चले जाते हैं, तब पीछे छूटी श्री राधा रानी और ब्रजवासियों की जो व्याकुलता है, वह इस भजन के माध्यम से सजीव हो उठती है। दिव्य शक्ति की मधुर आवाज में गाया गया यह भजन श्रोताओं के हृदय में करुणा, भक्ति और समर्पण का संचार करता है। इस लेख के माध्यम से हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, दार्शनिक महत्व और इससे जुड़ी आध्यात्मिक शिक्षाओं का रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मिला क्या मोहन दिल राधा का तोड़के

मिला क्या मोहन दिल राधा का तोड़के,
चले गए तुम तो मथुरा में मुख मोड़ के।
मिला क्या मोहन दिल राधा का तोड़के...

वृंदावन की कुंज गलिन में, रोती है बैठी राधा,
तेरे बिना इस जीवन में है, दुःख और दर्द अगाधा।
मुरली की वो तान सुरीली, अब तो सुनाई न देती,
तेरी याद में रो-रो कर, अखियां आंसू हैं पीती।
छोड़ गए तुम हमको अकेला, नाता सब से तोड़ के,
मिला क्या मोहन दिल राधा का तोड़के...

यमुना का वो पावन पानी, कदम की वो छैयां,
तरस रही है देखने को, तरसे मोरी बहियां।
गोपी ग्वाल और गैयां रोतीं, रोता सारा मधुबन,
तेरे बिना हे श्याम सुंदर, सूना है ये जीवन।
चले गए तुम दूर कन्हाई, नाता हमसे तोड़ के,
मिला क्या मोहन दिल राधा का तोड़के...

राधे-राधे नाम पुकारे, हर धड़कन हर सांस,
कब आओगे लौट के मोहन, टूटे न ये आस।
दिव्य शक्ति की यही पुकार, सुन लो हे घनश्याम,
राधा के बिन अधूरे हो तुम, अधूरे तुम्हारे काम।
आ जाओ अब लौट के मोहन, अपनी डगरिया मोड़ के,
मिला क्या मोहन दिल राधा का तोड़के...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य स्वर विरह वेदना का है। जब भगवान श्री कृष्ण ब्रजमंडल को छोड़कर मथुरा प्रस्थान करते हैं, तो संपूर्ण ब्रजभूमि शोक की लहर में डूब जाती है। यहाँ 'दिल तोड़ने' का अर्थ सांसारिक अर्थों में नहीं, बल्कि उस परम व्याकुलता से है जो एक भक्त अपने आराध्य से दूर होने पर महसूस करता है।

भजन के प्रथम भाग में राधा रानी की दशा का वर्णन है। वे वृंदावन की उन्हीं कुंज गलियों में बैठी अश्रु बहा रही हैं जहाँ कभी वे कन्हाई के साथ रास रचाया करती थीं। मुरली की मधुर ध्वनि, जो कभी संपूर्ण सृष्टि को आनंदित करती थी, अब मौन हो चुकी है। यह मौन भक्त के जीवन में भगवान की अनुपस्थिति के कारण उत्पन्न हुए अंधकार को दर्शाता है।

दूसरे भाग में प्रकृति और संपूर्ण ब्रजमंडल की पीड़ा को दर्शाया गया है। यमुना का जल, कदम का वृक्ष, गोपियाँ, ग्वाल-बाल और यहाँ तक कि मूक गायें भी कन्हाई के वियोग में अश्रु बहा रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि भगवान का प्रेम केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि चराचर जगत उनके प्रेम पाश में बंधा हुआ है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह श्रीमद्भागवत महापुराण के 'भ्रमर गीत' और विरह प्रसंगों का आधुनिक काव्यात्मक रूप है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • विप्रलम्भ भाव की प्रधानता: भक्ति मार्ग में संयोग (मिलन) से अधिक वियोग (विरह) को महत्व दिया गया है, क्योंकि वियोग में भक्त का चित्त निरंतर भगवान के स्मरण में लीन रहता है।
  • प्रकृति का मानवीकरण: भजन में यमुना, कदम और मधुबन के रोने का वर्णन करके यह दर्शाया गया है कि भगवान के वियोग में संपूर्ण प्रकृति भी दुखी हो जाती है।
  • राधा-कृष्ण की अभिन्नता: "राधा के बिन अधूरे हो तुम" पंक्ति के माध्यम से यह प्रतिपादित किया गया है कि शक्ति (राधा) के बिना शक्तिमान (कृष्ण) भी अपूर्ण हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को गाने और सुनने के लिए कोई कठोर नियम नहीं हैं, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है:

  • संध्या काल की प्रार्थना: संध्या आरती के पश्चात शांत चित्त से इस भजन का श्रवण करने से मन की चंचलता शांत होती है।
  • विशेष उत्सव: श्री कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी और कार्तिक मास के दौरान इस भजन का संकीर्तन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • सत्संग और संकीर्तन: सामूहिक सत्संगों में जब भक्त मिलकर इस भजन को गाते हैं, तो वहां का वातावरण अत्यंत करुणामय और भक्तिमय हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात आह्लादिनी शक्ति श्री राधा रानी और लीला पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। वैष्णव आचार्यों जैसे चैतन्य महाप्रभावु, स्वामी हरिदास और रूप गोस्वामी ने राधा-कृष्ण के इसी विरह भाव को अपनी साधना का मुख्य आधार बनाया था। चैतन्य महाप्रभु स्वयं को राधा भाव में स्थित करके दिन-रात श्री कृष्ण के विरह में अश्रु बहाया करते थे। यह भजन उसी महान गौड़ीय वैष्णव परंपरा की याद दिलाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन के निर्माण में आधुनिक कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है:

  • गायिका व संगीतकार: दिव्या शक्ति (Divya Shakti) ने अपनी सुमधुर और करुणामयी आवाज से इस भजन को जीवंत किया है।
  • गीतकार: रवि (Ravi) ने अत्यंत सरल किंतु मर्मस्पर्शी शब्दों का चयन किया है जो सीधे हृदय को छूते हैं।
  • संगीत संयोजन: बिट्टू सोनकर (Bittu Sonkar) का संगीत भजन के विरह भाव को और अधिक गहरा बनाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें ब्रजभाषा के शब्दों जैसे 'कुंज गलिन', 'छैयां', 'बहियां', 'गैयां' और 'डगरिया' का सुंदर सम्मिश्रण किया गया है। यह भाषाई संयोजन भजन को एक पारंपरिक और लोक-संस्कृति का पुट प्रदान करता है। काव्य शैली अत्यंत प्रवाहमयी है और इसमें करुण रस की प्रधानता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक सीख देता है:

  1. अनन्य प्रेम की सीख: सच्चा प्रेम वही है जो हर परिस्थिति में अडिग रहे, चाहे सामने वियोग ही क्यों न हो।
  2. अहंकार का त्याग: जब जीवात्मा अपने समस्त सांसारिक बंधनों को तोड़कर केवल परमात्मा की शरण में जाती है, तभी उसे वास्तविक शांति मिलती है।
  3. धैर्य और विश्वास: राधा रानी का विरह हमें सिखाता है कि भगवान के आने की प्रतीक्षा में भी एक दिव्य आनंद है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मोहन मन को मोहने वाले (श्री कृष्ण) वह जो अपनी सुंदरता और लीलाओं से संपूर्ण जगत को आकर्षित करता है।
कुंज गलिन वृंदावन की संकरी और हरी-भरी गलियां राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं और रास का गुप्त स्थान।
अगाधा असीम, जिसकी कोई सीमा न हो वियोग के कारण उत्पन्न हुआ असीम मानसिक और आध्यात्मिक कष्ट।
कदम (कदम्ब) एक पवित्र वृक्ष यमुना किनारे स्थित वह वृक्ष जिसके नीचे बैठकर कृष्ण मुरली बजाते थे।
मधुबन वृंदावन का एक पावन वन भक्ति और आनंद का प्रतीक जो भगवान के बिना सूना हो गया है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मिला क्या मोहन दिल राधा का तोड़के, चले गए तुम तो मथुरा में मुख मोड़ के।"
हे कृष्ण! राधा के निष्कपट और निश्छल हृदय को इस प्रकार तड़पता छोड़कर आपको क्या प्राप्त हुआ? आप तो हमसे विमुख होकर मथुरा चले गए और हमें इस दुख के सागर में छोड़ दिया।

"वृंदावन की कुंज गलिन में, रोती है बैठी राधा, तेरे बिना इस जीवन में है, दुःख और दर्द अगाधा।"
वृंदावन की जिन गलियों में कभी आनंद की वर्षा होती थी, आज वहां राधा रानी एकाकी बैठकर अश्रु बहा रही हैं। आपके बिना उनके जीवन में केवल असीम पीड़ा ही शेष रह गई है।

"मुरली की वो तान सुरीली, अब तो सुनाई न देती, तेरी याद में रो-रो कर, अखियां आंसू हैं पीती।"
वह मुरली जिसकी ध्वनि सुनकर गोपियाँ सुध-बुध खो बैठती थीं, अब शांत है। आपकी स्मृति में राधा रानी की आँखें निरंतर अश्रु बहा रही हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्री राधा-कृष्ण के इस पावन संबंध को समझने के लिए शास्त्रों में वर्णित निम्नलिखित श्लोक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

तप्त-कांचन-गौरांगि राधे वृंदावनेश्वरि।
वृषभानु-सुते देवि प्रणमामि हरि-प्रिये॥

अर्थ: सोने के समान दमकते गौर वर्ण वाली, वृंदावन की ईश्वरी, राजा वृषभानु की पुत्री और भगवान श्री हरि की प्रिय श्री राधा रानी को मैं बारंबार प्रणाम करता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण जानकारी
भजन का नाम मिला क्या मोहन दिल राधा का तोड़के (Mila Kya Mohan)
मुख्य विषय राधा-कृष्ण विरह, भक्ति, समर्पण
गायिका दिव्या शक्ति (Divya Shakti)
गीतकार रवि (Ravi)
संगीतकार बिट्टू सोनकर (Bittu Sonkar)
भाषा हिंदी (ब्रजभाषा पुट के साथ)
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, राधाष्टमी, संध्या आरती, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य भाव 'विप्रलम्भ श्रृंगार' यानी विरह भक्ति है। यह श्री कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद श्री राधा रानी और ब्रजवासियों की व्याकुलता और उनके अनन्य प्रेम को दर्शाता है।

इस भजन को सुप्रसिद्ध भजन गायिका 'दिव्या शक्ति' (Divya Shakti) ने गाया है और उन्होंने ही इसका संगीत निर्देशन भी किया है।

आध्यात्मिक दृष्टि से विरह का अर्थ है जीवात्मा का परमात्मा से मिलने के लिए तड़पना। जब तक यह तड़प तीव्र नहीं होती, तब तक जीव को मोक्ष या ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती।

यह भजन सीधे तौर पर श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में वर्णित श्री कृष्ण के मथुरा प्रस्थान और गोपियों के विरह प्रसंगों से प्रेरित है।

इस भजन को सुनने से मन में करुणा और भक्ति का उदय होता है, मानसिक तनाव दूर होता है और साधक का मन भगवान श्री कृष्ण के चरणों में लीन होता है।

कदम (कदम्ब) का वृक्ष यमुना किनारे स्थित है जहाँ भगवान श्री कृष्ण अपनी बांसुरी बजाया करते थे और रास रचाते थे। यह स्थान उनकी मधुर स्मृतियों का केंद्र है।

इस भजन के भावपूर्ण शब्द गीतकार 'रवि' (Ravi) द्वारा लिखे गए हैं।

हाँ, इसे दैनिक संध्या आरती या पूजा के समय गाया जा सकता है। यह मन को एकाग्र करने और ईश्वर के प्रति समर्पण भाव बढ़ाने में सहायक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस भजन के साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं का गहन विश्लेषण करके इसे तैयार किया है। भजन के बोल और उसके पीछे छिपे दार्शनिक संदेश को वैष्णव ग्रंथों के आलोक में स्पष्ट किया गया है ताकि पाठकों को न केवल भजन के शब्द बल्कि उसकी आत्मा का भी बोध हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण: दशम स्कंध (गोपी-गीत एवं भ्रमर-गीत प्रसंग)।
  • गर्ग संहिता: श्री राधा-कृष्ण की वृंदावन लीलाएं।
  • वैष्णव पदावली: मध्यकालीन संतों के विरह पद।

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन पसंद आया है, तो आप हमारी वेबसाइट पर निम्नलिखित सुंदर भजनों और स्तोत्रों का भी आनंद ले सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!