SEO Title: ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा | Guru Ji Pyare Bhajan Lyrics & Bhavarth - Bhaktilok
Meta Title: Guru Ji Pyare Bhajan - ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा
Meta Description: पढ़िए अत्यंत पावन गुरुजी प्यारा भजन 'ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा तुम देना साथ मेरा गुरूजी' के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व।
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ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा तुम देना साथ मेरा गुरूजी | Guru Ji Pyare Bhajan
प्रस्तुतकर्ता: Bhaktilok Editorial Team | अद्यतन: फरवरी 2026
सनातन भक्ति परंपरा में सद्गुरु का स्थान साक्षात परमेश्वर से भी उच्च माना गया है, क्योंकि वही अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश का मार्ग दिखाते हैं। यह अत्यंत पावन और हृदय को झकझोर देने वाला भजन "ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा तुम देना साथ मेरा गुरूजी" जीवात्मा की अपने आराध्य गुरुदेव के प्रति अनन्य निष्ठा, पूर्ण शरणागति (Surrender) और गाढ़े प्रेम का जीवंत दस्तावेज है। जब संसार की भागदौड़ और मोह-माया से विरक्त होकर एक साधक का मन अकेलापन महसूस करता है, तब केवल सद्गुरु का स्मरण ही उसे संबल प्रदान करता है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति में एक ऐसी हूक और पुकार है, जो सुनने वाले के अंतःकरण को द्रवित कर देती है और उसे भक्ति के उच्च सोपान पर ले जाती है। सत्संग, ध्यान शिविरों, और गुरु पूर्णिमा जैसे पावन अवसरों पर गाए जाने वाले इस गुरु भजन का स्मरण साधक को भवसागर से तरने की असीम शक्ति देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
स्थायी (मुखड़ा):
ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी...
ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी।
अंतरा 1:
भटक रहा था मैं दर-दर अंधेरे में अकेला,
यह झूठा जग निकला रे, यहाँ सबका है मेला!
किसको अपना कहूँ मैं यहाँ, कोई नहीं अपना साया,
मैंने जब तुमको पुकारा, तुमने मुझको अपनाया।
चरणों में जगह देना अब छोड़ न जाना कभी तू,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी।
अंतरा 2:
दुनिया के बंधनों ने मुझको बहुत रुलाया,
माया के जाल में मैंने पल-पल धोखा खाया!
अब आस बची है केवल तेरे पावन चरणों की,
रख लेना लाज मेरी, ओ दाता मेरे प्राणों की।
इस भवसागर से मुझको पार लगाना ही होगा,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी।
अंतरा 3:
ना ज्ञान है ना भक्ति है, ना कोई साधन मेरे पास,
बस तेरी दया पर टिकी है मेरी हर इक सांस!
तू ही मेरी नैया, तू ही माझी, तू ही खेवनहार,
तेरे ही सहारे मेरी नैया उतरेगी उस पार।
जीवन की हर एक सांस में तेरा नाम पुकारूँ,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी।
समापन / टेक:
ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा,
तुम देना साथ मेरा गुरूजी, तुम देना साथ मेरा गुरूजी।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह गुरुदेव भजन साधक और गुरु के बीच के अद्वैत और अनन्य प्रेम का अद्भुत व्याख्यान है। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक की लाचारी और गुरु की करुणा का सुंदर चित्रण करता है:
स्थायी का भाव: साधक अपने सद्गुरु से प्रार्थना करता हे कि हे गुरुदेव! इस विशाल ब्रह्मांड और नश्वर संसार में मेरा अपना कहने वाला कोई नहीं था और ना ही भविष्य में कोई हो सकता है। मेरे जीवन का एकमात्र सत्य और आधार केवल आप हैं। इसलिए हे मेरे गुरु! जीवन के हर कदम पर मेरा साथ कभी मत छोड़ना।
अंतरा का भाव: अज्ञानता के अंधकार में भटकते हुए मनुष्य को जब संसार के हर रिश्ते और नाते से छल मिलता है, तब उसे सच्चे मार्गदर्शक की याद आती है। भजन में बताया गया है कि जब सारी दुनिया के द्वार बंद हो जाते हैं और माया के बंधन व्यक्ति को रुलाने लगते हैं, तब केवल गुरु के चरण कमल ही आश्रय देते हैं। साधक स्वीकार करता है कि उसके पास न तो कोई बड़ा तप है, न जप और न ही योग-साधन का ज्ञान है; उसकी साँसें और उसका जीवन केवल गुरु की अहैतुकी कृपा पर ही चल रहा है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- पूर्ण शरणागति (Total Surrender): यह भजन साधक को अहंकर त्यागकर गुरु चरणों में पूरी तरह समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
- अकेलेपन और अवसाद से मुक्ति: सांसारिक दुखों से टूटे हुए व्यक्तियों के मन में यह भजन नया संबल और मानसिक शांति जागृत करता है।
- गुरु-शिष्य परंपरा: भारतीय संस्कृति की महान गुरु-शिष्य परंपरा (जैसे कबीर-गुरु, मीरा-रविदास) के गहरे भावों को यह भजन आत्मसात करता है।
- संसार की असारता: यह बोध कराता है कि यह संसार केवल एक मेला है और शाश्वत सत्य केवल गुरु की कृपा है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन का आनंद और आध्यात्मिक प्रभाव तब और बढ़ जाता है जब इसे उचित विधि और भाव से गाया या सुना जाए:
- नित्य साधना के समय: प्रातःकाल ध्यान या संध्या वंदन के पश्चात इसे गुनगुनाने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- गुरु पूर्णिमा एवं सत्संग: गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा या साप्ताहिक सत्संग के आयोजनों में इस संकीर्तन का विशेष महत्व है।
- मानसिक अशांति के क्षण: जब जीवन में कठिनाइयां आएं और अकेलापन सताए, तब एकांत में बैठकर इस भजन का श्रवण करने से आंतरिक बल प्राप्त होता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
सनातन धर्म में 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः' के मंत्र के माध्यम से गुरु को ही त्रिमूर्ति और साक्षात परब्रह्म माना गया है। यह भजन किसी एक व्यक्ति विशेष तक सीमित न होकर उस सार्वभौमिक सद्गुरु तत्व को समर्पित है जो हर ज्ञानी, संत और मार्गदर्शक के रूप में प्रकट होता है। कबीर दास, तुलसीदास और मीराबाई जैसी महान विभूतियों ने भी अपने पदों में गुरु महिमा का ही गान किया है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पंक्ति | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| सिवा | अतिरिक्त / अलावा | गुरु के अतिरिक्त इस संसार में कोई भी वास्तविक रक्षक नहीं है। |
| माया जाल | सांसारिक मोह-माया | वह भ्रम जिसमें फंसकर जीव ईश्वर को भूल जाता है। |
| भवसागर | जन्म-मृत्यु का चक्र | दुखों से भरा संसार जिससे तरने के लिए गुरु की नाव आवश्यक है। |
| खेवनहार | नाव पार लगाने वाला (नाच चलाने वाला) | सद्गुरु जो जीवन नैया को भवसागर से पार लगाते हैं। |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | ना कोई है ना कोई था जिंदगी में तुम्हारे सिवा (Guru Ji Pyare Bhajan) |
|---|---|
| समर्पित भाव | गुरु भक्ति, पूर्ण शरणागति और अनन्य प्रेम |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित बोलचाल |
| प्रमुख विषय | सद्गुरु की महिमा और संसार की असारता |
| उपयुक्त अवसर | गुरु पूर्णिमा, सत्संग, दैनिक ध्यान, भजन संध्या |
| संबंधित लेख | सतगुरु भजन संग्रह |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
यह भजन मुख्य रूप से किसको समर्पित है?
यह भजन साक्षात सद्गुरु और गुरुदेव के चरणों में अनन्य प्रेम और समर्पण को समर्पित है।
क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?
हाँ, एकांत में ध्यान या पूजा के समय इस भजन को गुनगुनाने से मन को असीम शांति और मानसिक संबल मिलता है।
गुरु भक्ति के लिए ऐसे भजनों का क्या महत्व है?
ऐसे भजन साधक के अहंकार को गलाते हैं और गुरु के प्रति अटूट विश्वास और भक्ति भावना को मजबूत करते हैं।
इस भजन को किस ताल या स्वर में गाया जा सकता है?
इसे धीमे ताल (जैसे कहरवा या दादरा) और करुणा से भरे भावपूर्ण स्वर में गाया जाता है।
क्या इसे गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गा सकते हैं?
बिल्कुल, गुरु पूर्णिमा और व्यास पूजन के पावन पर्व पर यह भजन सबसे अधिक लोकप्रिय और उपयुक्त माना जाता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री भारतीय सनातन गुरु परंपरा, संकीर्तन ग्रंथों और पारंपरिक भक्ति गीतों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भक्ति साहित्य उपलब्ध कराना है।
स्रोत एवं संदर्भ
- सनातन गुरु-शिष्य परंपरा एवं संत वाणी
- पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन संग्रह
- भक्ति रस और आध्यात्मिक चिंतन ग्रंथ
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