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गह गह करेला माई के अंगनवा ( Gah Gah Kare Lagal Mai Ke Mandiriya ) - Devigeet Birbal lal Yadav

पढ़ें गह गह करेला माई के अंगनवा ( Gah Gah Kare Lagal Mai Ke Mandiriya ) - Devigeet Birbal lal Yadav - Bhaktilok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ

गह गह करेला माई के अंगनवा (Gah Gah Kare Lagal Mai Ke Mandiriya) - बिरबल लाल यादव भजन

श्रेणी: देवी गीत | भोजपुरी भक्ति गana | शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि विशेष

‘गह गह करेला माई के अंगनवा’ भोजपुरी लोक-भक्ति परंपरा का एक अत्यंत हृदयस्पर्शी, ओजस्वी और दिव्य देवी गीत है। प्रसिद्ध लोक गायक बिरबल लाल यादव द्वारा अपनी अनूठी और सजीली शैली में स्वरबद्ध यह भजन माँ आदिशक्ति जगदम्बा भवानी के दरबार की अलौकिक आभा, दिव्यता और महिमा का अत्यंत सुंदर जीवंत चित्रण करता है। इस भजन में प्रयुक्त ‘गह गह’ शब्द भोजपुरी लोक-संस्कृति में प्रकाश, जगमगाहट, उत्सव और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में अत्यंत गहराई से जुड़ा हुआ है। जब भक्त नवरात्रि के दिनों में या किसी भी विशेष अनुष्ठान पर माँ के दरबार को सजाते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि संपूर्ण ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा उस पावन प्रांगण में सिमट आई हो। यह भजन न केवल शारदीय या चैत्र नवरात्रि के पावन पर्वों पर बल्कि गाँव-गाँव और नगर-नगर में माता के जागरण, चौकी और संध्या वंदना के समय पूरे उत्साह के साथ गाया जाता है। इसमें निहित भाव अबोध बालक की अपनी माता के प्रति अनन्य पुकार, निश्छल समर्पण और अगाध विश्वास का अद्भुत संगम है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

गह गह करेला माई के अंगनवा, गह गह करेला माई के अंगनवा। गोदी में ले लो माई, गोदी में ले लो माई। भैरव के दर पर जाके, सब दुख दूर हो जाएं। गह गह करेला माई के अंगनवा।। आंसू बहा के कहे भैया, माई लाए कब औ माई लाए कब। माई के अंगनवा में, सब कुछ है माई के अंगनवा में। गह गह करेला माई के अंगनवा।। झुक झुके चरणन में शीश नवाए, अर्जी हमार माई सुन ली तू आके। भक्तन के भीड़ बाटे भारी दरबार में, दर्शन पाके धन्य हो जाए संसार में। गह गह करेला माई के अंगनवा, गह गह करेला माई के अंगनवा।। लाल चुनरिया सोहे अउर माथे सिंदूरवा, देख के दर्शन हरषाए मन मोरवा। बिरबल लाल गावे महिमा बारंबार हो, मैया के चरणन में बहे प्रेम धार हो। गह गह करेला माई के अंगनवा, गह गह करेला माई के अंगनवा।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस अमर भोजपुरी देवी गीत का आंतरिक और आध्यात्मिक अर्थ माँ भगवती और भक्त के बीच के वात्सल्यपूर्ण संबंध को उजागर करता है। मुखड़े की पंक्तियाँ ‘गह गह करेला माई के अंगनवा’ इस बात का द्योतक हैं कि जब जगदम्बा भवानी की कृपा किसी के जीवन में बरसती है, तो उसका अंतःकरण और संसार दोनों ही प्रकाशित हो उठते हैं। 'गह गह' होना यानी प्रकाश से परिपूर्ण होना, उल्लास से जगमगाना।

भजन की दूसरी पंक्तियों में भक्त भगवान् श्री भैरवनाथ का स्मरण करते हुए कहता है कि माँ के दरबार (जो कि शक्तिपीठों की परंपरा में भैरव की उपस्थिति के बिना अधूरा माना जाता है) में जाने मात्र से मनुष्य के समस्त दुःख, संताप और कष्ट दूर हो जाते हैं। भक्त अपनी विह्वल अवस्था का वर्णन करते हुए आँखों में प्रेम के अश्रु भरकर माँ से अपनी झोली भरने की गुहार लगाता है। वह कहता है कि हे महामाया! इस संपूर्ण सृष्टि का वैभव और आनंद माँ के चरणों में ही निहित है। अंत में बिरबल लाल यादव जी माँ के श्रृंगार—लाल चुनरिया और माथे के सिंदूर—की अलौकिक छटा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि ऐसे पावन दर्शन को पाकर मानव जन्म धन्य हो जाता है और भक्त का हृदय प्रेम रस में सराबोर हो जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह लोक-भजन केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह लोक-संस्कृति और उच्च कोटि की आध्यात्मिक साधना का समन्वय है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • लोक-संस्कृति का सुंदर समावेश: भोजपुरी अंचल के ठेठ शब्दों और लोक-धुन का ऐसा प्रयोग जो सीधे हृदय को छू लेता है।
  • भैरव उपासना का प्रसंग: शाक्त परंपरा के अनुसार माता के दर्शन से पहले बटुक भैरव के दर्शन और उनकी कृपा का महत्व इस भजन में सहजता से दर्शाया गया है।
  • वात्सल्य और समर्पण का भाव: इसमें माँ को एक ममतामयी जननी के रूप में देखा गया है जो अपने रुठे या दुखी बच्चे को अपनी गोदी में समेट लेती है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मकता: इसके श्रवण मात्र से मन में व्याप्त निराशा दूर होती है और एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस ओजस्वी देवी गीत को गाने और सुनने के लिए कोई कठोर नियम बाध्यता नहीं है, किंतु शारदीय और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में प्रातःकाल या संध्याकालीन आरती के समय इसका गान विशेष फलदायी माना जाता है। माता के जागरण, चौकी, कन्या पूजन या किसी मांगलिक अनुष्ठान के अवसर पर ढोलक, झाल और मंजीरे की थाप के साथ जब इसे सामूहिक रूप से गाया जाता है, तो संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है। श्रवण करते समय दीप प्रज्वलित कर माता का ध्यान करना एकाग्रता को और गहरा करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी माँ दुर्गा, जगदम्बा, शेरवाली भवानी हैं। साथ ही, नाथ संप्रदाय और शाक्त परंपरा के अनुसार भगवान् भैरवनाथ को माता के द्वारपाल और क्षेत्रपाल के रूप में पूजा जाता है। इस लोक-गीत के रचनाकार एवं प्रख्यात गायक बिरबल लाल यादव हैं, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी और ठेठ भोजपुरी लोक-शैली के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति और भक्ति को जन-जन तक पहुँचाने का ऐतिहासिक कार्य किया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी लोक-भाषा में रचित है। इसकी काव्य शैली अत्यंत सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण है। इसमें अलंकारों के जटिल प्रयोग के स्थान पर सीधे और सच्चे भावों की अभिव्यक्ति है। 'गह गह' जैसे द्विरुक्ति शब्दों (Reduplication) का प्रयोग भोजपुरी लोक-काव्य की अपनी विशिष्ट खूबी है, जो दृश्य को जीवंत कर देती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि जीवन के कठिन संघर्षों और दुखों के समय मनुष्य को निराश होने के बजाय अपनी लोक-माता (ईश्वरीय शक्ति) के चरणों में शरण लेनी चाहिए। माँ का आँगन वह पावन स्थल है जहाँ हर प्रकार के भय, शोक और संताप का स्वतः अंत हो जाता है। सच्ची श्रद्धा और निश्छल पुकार ही वह कुंजी है जो भक्त को भगवान् से जोड़ती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
गह गह प्रकाशमय, जगमगाता हुआ, उल्लासपूर्ण माता के दरबार की अलौकिक चमक और ऊर्जा
अंगनवा आँगन, पवित्र प्रांगण देवी माँ का दरबार या गर्भ गृह
भैरव के दर भैरवनाथ का स्थान माता के दरबार में दर्शन की पारंपरिक शुरुआत
सिंदूरवा सिंदूर सुहाग और माता के दिव्य श्रृंगार का प्रतीक

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"गह गह करेला माई के अंगनवा..."
अर्थात् मैया का प्रांगण ऐसा दमक रहा है मानो कोटि-कोटि दीपों का प्रकाश और ब्रह्मांड का सारा सौंदर्य वहीं एकत्र हो गया हो।

"भैरव के दर पर जाके, सब दुख दूर हो जाएं..."
अर्थात् साधक पहले क्षेत्रपाल भैरव को नमन करता है और फिर माता के दरबार में पहुँचकर अपने सभी सांसारिक दुखों से मुक्ति पा लेता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम गह गह करेला माई के अंगनवा (Gah Gah Kare Lagal Mai Ke Mandiriya)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / भगवती जगदम्बा
गायक / रचनाकार बिरबल लाल यादव (Birbal Lal Yadav)
भाषा भोजपुरी (लोक-भक्ति शैली)
विषय एवं भाव भक्ति, वात्सल्य, शरणागति और दिव्यता
उपयुक्त अवसर शारदीय / चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भोजपुरी देवी गीत के गायक और लोक-कलाकार बिरबल लाल यादव हैं।

भोजपुरी लोकभाषा में 'गह गह' का अर्थ जगमगाना, प्रकाशमय होना और उत्सव की उमंग से परिपूर्ण होना है।

यह गीत मुख्य रूप से शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, माता के जागरण और देवी पूजन के विभिन्न उत्सवों पर गाया जाता है।

हाँ, इसे व्यक्तिगत साधना, संध्या वंदना या मंदिर में अकेले अथवा समूह दोनों ही रूपों में प्रेमपूर्वक गाया जा सकता है।

यह भजन सिखाता है कि समस्त दुखों का निवारण माँ की शरणागति और अनन्य प्रेम में ही निहित है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख पारंपरिक लोक-साहित्य, भोजपुरी भक्ति संगीत की परंपरा और प्रामाणिक सांस्कृतिक संदर्भों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को लोक-भजनों की थाती और उनके आध्यात्मिक भाव से अवगत कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ

  • भोजपुरी लोक-साहित्य और लोकगीत परंपरा के संग्रह
  • प्रसिद्ध लोक गायकों के पारंपरिक ऑडियो अभिलेख
  • शाक्त प्रमोद एवं भारतीय देवी उपासना पद्धतियाँ

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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