Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

शिव नाम (SHIV NAAM) - Shiv Bhajan PREM KUMAR

प्रेम कुमार द्वारा गाए गए पावन शिव भजन 'शिव नाम' के लिरिक्स और भावार्थ। महादेव की भक्ति में लीन करने वाला सुंदर भजन, संदर्भ सहित।

Shiv Bhajan PREM KUMAR - Bhaktilok

देवादिदेव महादेव को समर्पित यह अत्यंत पावन भजन "शिव नाम (SHIV NAAM) - Shiv Bhajan PREM KUMAR - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी, वैराग्यपूर्ण और परम चेतना स्वरूप का सजीव चित्रण करता है। सनातन परंपरा में शिव का अर्थ ही 'कल्याण' है। इस भजन के प्रत्येक शब्द के माध्यम से साधक भगवान शिव की अनंत महिमा, उनकी भस्म आरती, डमरू की निनाद, और ध्यानमग्न समाधि का स्मरण करता है। शिव भक्ति का मूल संदेश यह है कि इस संसार की हर नश्वर वस्तु का अंत और पुनरुत्थान अंततः महाकाल शिव में ही निहित है। यह भजन साधक को सांसारिक मोह-माया, राग-द्वेष और अज्ञानता के बंधनों से ऊपर उठाकर आत्मा के वास्तविक और पावन स्वरूप से परिचित होने की प्रेरणा देता है। भगवान शिव पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) के स्वामी तथा परम योगेश्वर हैं। प्रेम कुमार की मधुर स्वर लहरियों और भावपूर्ण प्रस्तुति से सजा यह भजन शिव भक्तों के हृदय में भक्ति का अलख जगाता है और मन को एकाग्र करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:
शिव नाम जपो मन मेरे, शिव नाम से कटेंगे फेरे।
देवादिदेव महादेव की महिमा अपरंपार है भाई, शरण में जो भी आया, उसकी बिगड़ी बात बनाई।
डमरू वाले बाबा की जय, भोले भंडारी की जय...

अंतरा 1:
भस्म रमे अंगों पर मेरे भोलेनाथ का डेरा, कैलाश पर्वत पर सजता है भक्तों का सुंदर घेरा।
जटाओं से बहे गंगा पावन, चन्द्रमा मस्तक विराजे, डमरू की डम डम से देखो सारा ब्रह्मांड ही गाजे।
शिव नाम जपो मन मेरे...

अंतरा 2:
बेलपत्र और धतूरा जो कोई श्रद्धा से चढ़ाए, भोले भंडारी की कृपा से वो मनचाहा फल पाए।
मृत्युंजय महारुद्र का जो जपते नित्त ही नाम, उनके जीवन में कभी न आए कोई दुःख और काम।
शिव नाम जपो मन मेरे...

अंतरा 3:
वैराग्य के तुम हो स्वामी, तुम हो पालनहारे, प्रलय के तुम डांसर हो, शिव शंभु त्रिपुरारे।
प्रेम कुमार पुकारे तुझको, दर्शन दे दो आके, भवसागर से पार लगा दो अपनी शरण में बिठा के।
शिव नाम जपो मन मेरे, शिव नाम से कटेंगे फेरे...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान शिव के प्रति अनन्य समर्पण और प्रेम का प्रतीक है। मुखड़े में गायक यह संदेश देता है कि मनुष्य को अपने जीवन की व्यस्तता के बीच निरंतर शिव के नाम का स्मरण करना चाहिए। शिव नाम का स्मरण करने से जन्म-मृत्यु के चक्र और सांसारिक फेरों से मुक्ति मिलती है। महादेव को 'देवादिदेव' और 'भोले भंडारी' कहा गया है क्योंकि वे अपने भक्तों की छोटी सी सच्ची भक्ति से ही प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

पहले अंतरे में शिव के भौतिक और अलौकिक स्वरूप का वर्णन किया गया है। उनके शरीर पर भस्म लगी है, जो इस नश्वर शरीर की वास्तविकता और वैराग्य का प्रतीक है। कैलाश पर्वत उनका निवास स्थान है, जहाँ वे ध्यानमग्न रहते हैं। उनकी जटाओं से प्रवाहित होने वाली माँ गंगा और मस्तक पर सुशोभित चंद्रदेव उनके शीतलता और पवित्रता के परिचायक हैं। उनके हाथ के डमरू की ध्वनि से संपूर्ण ब्रह्मांड में ऊर्जा का संचार होता है।

दूसरे अंतरे में शिव की पूजा की सरलता और उनके महामृत्युंजय स्वरूप का बखान किया गया है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किसी महंगे आभूषण या कठिन अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती; मात्र एक लोटा जल, बेलपत्र और सच्चे भाव से अर्पित धतूरा ही उन्हें संतुष्ट कर देता है। जो भक्त नित्य 'महामृत्युंजय' मंत्र या शिव नाम का जाप करते हैं, वे अकाल मृत्यु और सभी प्रकार के मानसिक तथा शारीरिक कष्टों से मुक्त हो जाते हैं।

अंतिम अंतरे में गायक प्रेम कुमार भगवान शिव को त्रिपुरारि, प्रलय के देवता और वैराग्य के अधिपति के रूप में संबोधित करते हुए अपनी प्रार्थना प्रस्तुत करते हैं। वे विनती करते हैं कि हे भोलेनाथ! इस भवसागर से इस नश्वर प्राणी को अपनी शरण में लेकर पार लगा दीजिए। यह भजन साधक के भीतर छिपे अहंकार को समाप्त कर दिव्यता और शांति की स्थापना करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता, लयबद्धता और गहरा आध्यात्मिक संदेश है। इसमें शिव के तांडव, ध्यान, और करुणा का बहुत ही संतुलित चित्रण किया गया है। शिव पुराण और हिंदू पौराणिक परंपरा के अनुसार, भगवान शिव को आदियोगी माना गया है। इस भजन का संकीर्तन करने से सुनने वाले के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, मानसिक तनाव दूर होता है और ध्यान में एकाग्रता बढ़ती है। विशेष रूप से सावन मास, महाशिवरात्रि और प्रदोष व्रत के दिनों में इस भजन का श्रवण और गायन अत्यंत फलदायी माना गया है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

शिव भजन को सुबह के समय ब्रह्ममुहूर्त में या संध्या वंदन के पश्चात गाना या सुनना सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है। इसे आप अपने घर के पूजा स्थल पर दीपक जलाकर, शिवलिंग पर जल या बेलपत्र अर्पित करते समय गा सकते हैं। इसके अतिरिक्त सोमवार के व्रत, रुद्राभिषेक अनुष्ठान, और शिव सत्संग के दौरान इस भजन का सामूहिक संकीर्तन करने से वातावरण पवित्र और ऊर्जावान हो जाता है। साधक को चाहिए कि वह स्नान आदि से निवृत्त होकर शुद्ध मन से इस भजन का गान करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में देवादिदेव महादेव (भगवान शिव), माता पार्वती और उनके गण हैं। शिवजी को योग, संगीत, कला और नृत्य (तांडव) का आदि गुरु माना जाता है। इस भजन को स्वरबद्ध करने वाले कलाकार प्रेम कुमार ने अपनी समर्पित गायकी के माध्यम से शिव भक्तों को एक अनूठी भेंट दी है। शिव भक्ति की यह परंपरा आदि काल से चली आ रही है, जिसमें आदि शंकराचार्य से लेकर आधुनिक संतों तक सभी ने शिव के निर्गुण और सगुण रूप की वंदना की है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोक संगीत और पारंपरिक भक्ति धाराओं के संलयन से रचित यह भजन भारतीय ग्रामीण और शहरी दोनों ही संस्कृतियों में बेहद लोकप्रिय है। इसकी रचना का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को भगवान शिव के सरल स्वभाव और उनकी शरण में मिलने वाली शांति से अवगत कराना है। प्रेम कुमार की आवाज में यह भजन पंजाबी और हिंदी भाषी क्षेत्रों के शिव भक्तों के बीच विशेष रूप से सराहा गया है, जहाँ लोग इसे शिव बारात और जागरण के अवसरों पर बड़े प्रेम से गाते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और लोकभाषा के सं मिश्रण से तैयार किया गया है, ताकि हर आयु वर्ग का व्यक्ति इसे आसानी से समझ सके और गा सके। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है जैसे 'डमरू की डम डम' और 'भस्म रमे अंगों पर'। भाषा की यह सहजता ही इस भजन की आत्मा है, जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करती है और उसे भक्ति रस से सराबोर कर देती है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें यह गहरी जीवन सीख मिलती है कि भौतिक संसार की चकाचौंध क्षणिक है। भगवान शिव का भस्म लगाना हमें यह याद दिलाता है कि अंततः इस शरीर को मिट्टी में ही मिल जाना है, इसलिए अहंकार का त्याग कर ईश्वर की शरण में जाना ही मानव जीवन का परम लक्ष्य होना चाहिए। संकट के समय घबराने के बजाय शिव नाम का स्मरण करने से मन को संबल और धैर्य प्राप्त होता है।

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
देवादिदेव देवों के देव (भगवान शिव) समस्त ब्रह्मांड के सर्वोच्च स्वामी और नियंत्रक
भस्म रमे शरीर पर राख लगाना संसार की नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक
त्रिपुरारि त्रिपुर का वध करने वाले अहकार और बुराइयों का नाश करने वाली शक्ति
भवसागर दुखों और जन्म-मृत्यु का संसार आत्मा की मुक्ति का मार्ग

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"शिव नाम जपो मन मेरे, शिव नाम से कटेंगे फेरे।" - हे मन! तू निरंतर भगवान शिव के नाम का जाप कर, क्योंकि इसी से तेरे जन्म और मरण के चक्र का अंत होगा।

"कैलाश पर्वत पर सजता है भक्तों का सुंदर घेरा।" - भगवान शिव का वास हिमालय के कैलाश पर्वत पर है, जहाँ बड़े-बड़े ऋषि-मुनि और भक्तगण उनकी आराधना के लिए एकत्रित होते हैं।

"मृत्युंजय महारुद्र का जो जपते नित्त ही नाम..." - जो लोग मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले भगवान रुद्र का प्रतिदिन स्मरण करते हैं, उनके जीवन के समस्त भय और संकट दूर हो जाते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ साधक निम्नलिखित महामृत्युंजय मंत्र का भी जाप कर सकते हैं:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

इसके अतिरिक्त पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप भी इस भजन के प्रभाव को और अधिक बढ़ा देता है। अधिक जानकारी के लिए आप शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र के पावन लेखों का भी अध्ययन कर सकते हैं।

भजन की जानकारी विवरण
भजन का नाम शिव नाम (SHIV NAAM)
गायक / कलाकार प्रेम कुमार (PREM KUMAR)
समर्पित देवता भगवान शिव (महादेव)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव भक्ति, वैराग्य और समर्पण
उपयुक्त अवसर सोमवार व्रत, सावन मास, शिवरात्रि
प्लेटफॉर्म भक्तिकुल (Bhaktilok.in)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"शिव नाम" भजन के गायक कौन हैं?

इस पावन भजन को प्रसिद्ध गायक प्रेम कुमार (Prem Kumar) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश सांसारिक मोह-माया का त्याग कर भगवान शिव के चरणों में ध्यान लगाना और मोक्ष प्राप्त करना है।

शिव भजन को किस दिन गाना सबसे उत्तम माना जाता है?

सोमवार का दिन, प्रदोष काल और सावन मास का पूरा महीना शिव भजन के गायन और श्रवण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

क्या इस भजन को घर पर अकेले गाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को आप अपने घर के पूजा स्थल पर अकेले या परिवार के साथ सामूहिक रूप से गा सकते हैं।

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कौन सी सामग्री अर्पित करनी चाहिए?

शिवजी को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और सफेद चंदन अति प्रिय हैं।

क्या इस भजन से मानसिक शांति मिलती है?

निश्चित रूप से, शिव नाम के संकीर्तन से मन की चंचलता शांत होती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।

महामृत्युंजय मंत्र का क्या महत्व है?

महामृत्युंजय मंत्र अकाल मृत्यु के भय को दूर करने और उत्तम स्वास्थ्य तथा आरोग्य प्रदान करने वाला सबसे शक्तिशाली वैदिक मंत्र है।

भक्तिकुल पर ऐसे अन्य भजन कहाँ मिल सकते हैं?

आप भक्तिकुल (Bhaktilok.in) की वेबसाइट पर जाकर अन्य देवी-देवताओं के भजन, चालीसा और स्तोत्र पढ़ सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री धार्मिक ग्रंथों, शिव पुराण, और पारंपरिक लोक संगीत की परंपराओं के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और उच्च कोटि की आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव महापुराण (गीता प्रेस गोरखपुर संस्करण)
  • पारंपरिक शिव भजन एवं संकीर्तन परंपरा
  • वैदिक मंत्र एवं स्तोत्र संग्रह

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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