Chhath Puja Geet मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

सवा लाख के साड़ी भीजे (Sava Lakh Ke Saree Bhije) - Anu Dubey Chhath Puja Geet

अनु दुबे का प्रसिद्ध छठ गीत 'सवा लाख के साड़ी भीजे' के बोल, संदर्भ एवं व्याख्या सहित। छठी मैया की महिमा का यह भावपूर्ण गीत पढ़ें Bhaktilok पर।

छठ पूजा का पर्व बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा एवं भव्यता के साथ मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीतों में "सवा लाख के साड़ी भीजे" एक अत्यंत प्रचलित और भावपूर्ण गीत है, जिसे प्रसिद्ध लोकगायिका अनु दुबे (Anu Dubey) की मधुर आवाज़ में बड़े ही भक्ति भाव से सुना और गाया जाता है। यह गीत छठी मैया (छठी माई) की महिमा, उनके प्रति अटूट विश्वास और व्रती की निष्ठा को दर्शाता है। इस गीत में व्रती माताएं अपनी सासु मां या परिवार के साथ छठ घाट की ओर प्रस्थान करती हैं और अपने सुहाग, संतान तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। "सवा लाख के साड़ी भीजे" का अर्थ है कि व्रती माता के असंख्य वस्त्र (सवा लाख साड़ियाँ) छठ घाट पर भीग जाते हैं, जो उनकी अपार भक्ति और त्याग का प्रतीक है। यह गीत न केवल एक लोकगीत है, बल्कि सनातन संस्कृति में नारी शक्ति, मातृत्व और प्रकृति पूजा का जीवंत उदाहरण है। इस लेख में हम इस गीत के सम्पूर्ण बोल, उनका गहन अर्थ, आध्यात्मिक महत्व और गायन विधि पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

सवा लाख के साड़ी भीजे, छठी मैया के दरबार में।
सवा लाख के साड़ी भीजे, छठी मैया के दरबार में।।

(सम्पूर्ण गीत के बोल उपलब्ध संदर्भ के अनुसार प्रस्तुत हैं)

सवा लाख के साड़ी भीजे, छठी मैया के दरबार में।
सवा लाख के साड़ी भीजे, छठी मैया के दरबार में।।

सोनवा के थारी, सोनवा के बेरना,
छठी मैया के दरबार में।
सवा लाख के साड़ी भीजे, छठी मैया के दरबार में।।

काँच ही के थारी, काँच ही के बेरना,
छठी मैया के दरबार में।
सवा लाख के साड़ी भीजे, छठी मैया के दरबार में।।

अरघ के सामग्री, सजा के लेली,
छठी मैया के दरबार में।
सवा लाख के साड़ी भीजे, छठी मैया के दरबार में।।

सासु माँ के संगे, बहुरिया जाली,
छठी मैया के दरबार में।
सवा लाख के साड़ी भीजे, छठी मैया के दरबार में।।

सुहाग हमार, अटल रहेला,
छठी मैया के दरबार में।
सवा लाख के साड़ी भीजे, छठी मैया के दरबार में।।

संतान हमार, बढ़त रहेला,
छठी मैया के दरबार में।
सवा लाख के साड़ी भीजे, छठी मैया के दरबार में।।

गीत का भावार्थ एवं अर्थ | Song Meaning

इस छठ पूजा गीत का प्रत्येक पंक्ति में गहरा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भाव छिपा है। "सवा लाख के साड़ी भीजे" का तात्पर्य है कि छठी मैया के दरबार में जब व्रती माताएं अर्घ्य देने जाती हैं, तो उनके वस्त्र भीग जाते हैं। यहाँ "सवा लाख" शब्द असंख्यता और अपारता का प्रतीक है, जो यह दर्शाता है कि माताओं की भक्ति इतनी विशाल है कि उनके असंख्य वस्त्र भी छठी मैया के चरणों में भीग जाते हैं। यह भीगना केवल जल से नहीं, बल्कि भक्ति के आँसुओं और प्रेम की वर्षा से है।

"सोनवा के थारी, सोनवा के बेरना" में सोने के थाल और बेर (फल) की बात की गई है, जो समृद्धि और शुद्धता का प्रतीक है। छठ पूजा में सोने के बर्तनों का उपयोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है। "काँच ही के थारी, काँच ही के बेरना" में काँच के बर्तनों का जिक्र है, जो यह दर्शाता है कि भक्ति में सामग्री की नहीं, बल्कि भाव की महत्ता है। चाहे सोने का थाल हो या काँच का, छठी मैया सबको समान भाव से स्वीकार करती हैं।

"अरघ के सामग्री, सजा के लेली" में व्रती माताएं अर्घ्य (अर्घ) की सामग्री को सजाकर लाती हैं, जिसमें ठेकुआ, कसार, केला, नारियल, सुथनी, पान, सुपारी आदि शामिल हैं। "सासु माँ के संगे, बहुरिया जाली" में बहू अपनी सास के साथ छठ घाट पर जाती है, जो पारिवारिक एकता और सामूहिक भक्ति का प्रतीक है। "सुहाग हमार, अटल रहेला" में व्रती माता अपने सुहाग (विवाहित जीवन) की अटलता की कामना करती हैं, और "संतान हमार, बढ़त रहेला" में संतान की वृद्धि और समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। इस प्रकार यह गीत छठ पूजा की सम्पूर्ण भावना—त्याग, भक्ति, पारिवारिक सुख और मातृत्व की कामना—को समेटे हुए है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण जानकारी
गीत का नाम सवा लाख के साड़ी भीजे (Sava Lakh Ke Saree Bhije)
गायिका अनु दुबे (Anu Dubey)
गीतकार पारंपरिक लोकगीत (Traditional Folk)
संगीत पारंपरिक लोक संगीत
भाषा भोजपुरी / मैथिली / हिंदी
विषय छठ पूजा, छठी मैया, व्रत, सुहाग, संतान
अवसर छठ पूजा (कार्तिक शुक्ल षष्ठी)

गीत की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह गीत छठ पूजा की लोक परंपरा का अभिन्न अंग है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति एवं शरणागति: यह गीत छठी मैया के प्रति पूर्ण शरणागति और अनन्य भक्ति का भाव प्रकट करता है।
  • नारी शक्ति का प्रतीक: इसमें व्रती माताओं की सामूहिक भागीदारी और उनकी शक्ति को दर्शाया गया है।
  • पारिवारिक एकता: सास और बहू का साथ छठ घाट पर जाना पारिवारिक सद्भाव का प्रतीक है।
  • प्रकृति पूजा: छठ पूजा में सूर्य, जल, और प्रकृति की उपासना की जाती है, जो इस गीत में भी झलकती है।
  • लोक संस्कृति: यह गीत बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है।

इस गीत को सुनने और गाने से मन में भक्ति भाव जागृत होता है, और छठी मैया की कृपा से सुख, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह गीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता आ रहा है और आज भी छठ पूजा के दौरान घाटों पर गूंजता है।

गीत गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यह गीत विशेष रूप से छठ पूजा के चार दिवसीय अनुष्ठान के दौरान गाया जाता है। इसके गायन की विधि इस प्रकार है:

  • समय: कार्तिक शुक्ल षष्ठी (छठ) के दिन, विशेषकर सायंकालीन अर्घ्य और प्रातःकालीन अर्घ्य के समय।
  • स्थान: नदी, तालाब या किसी पवित्र जलाशय के घाट पर, जहाँ छठ पूजा की परंपरा हो।
  • विधि: व्रती माताएं सामूहिक रूप से गाती हैं, ढोल, झाल, और मंजीरे की धुन पर। गाते समय मन में छठी मैया का ध्यान और भक्ति भाव रखें।
  • श्रवण: घर में या मोबाइल पर अनु दुबे के स्वर में इस गीत को सुनना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।

इस गीत को गाते समय शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव का विशेष ध्यान रखें। यह गीत केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और ईश्वर प्राप्ति का साधन है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इसका अर्थ है कि छठी मैया के दरबार में व्रती माताओं के असंख्य वस्त्र भीग जाते हैं, जो उनकी अपार भक्ति और प्रेम का प्रतीक है।

यह गीत प्रसिद्ध लोकगायिका अनु दुबे (Anu Dubey) की आवाज़ में अत्यंत लोकप्रिय है।

यह गीत छठ पूजा के दौरान, विशेषकर सायंकालीन और प्रातःकालीन अर्घ्य के समय घाटों पर गाया जाता है।

हाँ, इस गीत को घर में भी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ सुना जा सकता है। इससे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

ठेकुआ, कसार, केला, नारियल, सुथनी, पान, सुपारी, अदरक, गन्ना, और मौसमी फल आदि छठ पूजा की प्रमुख सामग्री हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे छठ पूजा की लोक परंपरा, पारंपरिक लोकगीतों और भक्ति साहित्य के संदर्भों के आधार पर तैयार किया गया है। "सवा लाख के साड़ी भीजे" गीत छठ पूजा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस लेख में दी गई जानकारी लोक परंपरा और श्रद्धा पर आधारित है। हमारा उद्देश्य इस पावन गीत के भावार्थ और महत्व को सरल हिंदी में पाठकों तक पहुँचाना है।

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!