Ritika Pandey & Ujala Upadhyay Chhath Puja Song - Bhaktilok
URL Slug: 2022/10/saj-gail-chhathi-ghat-ritika-pandey.html | Categories: Chhath Puja Geet, Matarani Bhajan, Latest Bhakti Song
लोक आस्था के महापर्व छठ की पावन बेला पर जब पूरा उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश सूर्य उपासना के इस चार दिवसीय अनुष्ठान में लीन होता है, तब लोकगीतों और पारंपरिक भजनों की गूंज वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक और ऊर्जावान बना देती है। "सज गईल छठी घाट" (Saj Gail Chhathi Ghat) ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय, कर्णप्रिय और भावपूर्ण लोकगीत है, जिसे सुप्रसिद्ध गायिका ऋतिका पांडे (Ritika Pandey) और उजाला उपाध्याय (Ujala Upadhyay) ने अपनी मधुर और सधी हुई आवाज से सजाया है। यह गीत छठी मइया के आगमन, नदी के घाटों की भव्य सजावट, और व्रतियों के उल्लासपूर्ण समर्पण का एक जीवंत दस्तावेज है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय छठ गीत के संपूर्ण बोल, इसका सांस्कृतिक महत्व, संगीत पक्ष और लोक आस्था से जुड़े विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
(स्थाई / मुखड़ा)
घाट सज गईल, मइया आईहें जरूर,
दउरा उठाईहें सेवकवा दूर-दूर से...
सज गईल छठी घाट, हो मइया आईहें आज,
भरेली मइया सबकर गोदिया आबाद!
(अंतरा १)
केकरा हाथे दउर सोभे, केकरा हाथे सूप?
छठी मइया के दर्शन से चमके जगत रूप!
अरघ के बेरिया भइल बाटे नजदीक,
भोरही से गउवे में बाटे हुलस ठीक!
(अंतरा २)
घाटवा पर बाजे ढोलक अउरी झूमर गान,
सूर्य भगवान के महिमा गावे सारा जहान!
उजाला, ऋतिका मिलके गावे पिरितिया के गीत,
छठी मइया के कृपा से सभे के मन जीत!
(अंतिम चरण / रिफ्रें)
लौट के जइहें ना कवनों खाली हाथ,
छठी मइया सबके सिर धरे हाथ!
सज गईल छठी घाट, मइया आईहें जरूर...
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
"सज गईल छठी घाट" गीत का भावार्थ केवल एक सामान्य उत्सव का वर्णन नहीं है, बल्कि यह लोकमानस के भीतर छिपी उस गहरी अटूट आस्था का प्रतीक है जो भगवान भास्कर (सूर्य देव) और छठी माता (माता षष्ठी) के प्रति समर्पित है। गीत के मुखड़े में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार नदी के घाटों को साफ-सुथरा करके भव्य रूप से सजाया गया है। यह सजावट केवल भौतिक नहीं है, बल्कि यह भक्तों के अंतःकरण की शुद्धता और उनके पवित्र मन की परिचायक है।
अंतरा में कवयित्री और गायिकाएं यह प्रश्न करती हैं कि किसके हाथों में पूजा का दौड़ा (बांस की टोकरी) और सूप शोभा पा रहा है और इसका उत्तर स्वयं देती हैं कि छठी मैया की कृपा से संपूर्ण संसार का रूप चमक उठता है। जब व्रती महिलाएं और पुरुष अस्ताचलगामी और उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाट पर पहुंचते हैं, तो उनके चेहरे का तेज और भक्ति का भाव देखने योग्य होता है। इस गीत में लोक संस्कृति, सामूहिक भागीदारी, अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत की केंद्रीय भावना लोक आस्था, समर्पण, पवित्रता और सामूहिक उल्लास है। छठ महापर्व भारतीय सनातन संस्कृति में एकमात्र ऐसा पर्व है जहां डूबते हुए सूर्य को भी प्रणाम किया जाता है, जो जीवन के चक्र, निरंतरता और प्रकृति के प्रति आभार का संदेश देता है। यह गीत समाज को जोड़ता है क्योंकि छठ घाट पर जाति, वर्ग और लिंग के भेद से परे सभी लोग एक साथ मिलकर इस लोकगीत को गाते हैं। इससे यह संदेश मिलता है कि सच्ची भक्ति और निष्ठा से किए गए अनुष्ठान से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मैया की कृपा से वंश और परिवार की वृद्धि होती है।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम (Song Name) | सज गईल छठी घाट (Saj Gail Chhathi Ghat) |
|---|---|
| गायिका (Singers) | ऋतिका पांडे (Ritika Pandey) एवं उजाला उपाध्याय (Ujala Upadhyay) |
| संगीत शैली (Music Genre) | पारंपरिक भोजपुरी छठ लोकगीत / भक्ति संगीत |
| पर्व / अवसर (Occasion) | छठ पूजा (Chhath Puja / Surya Shashthi Vrat) |
| भाषा (Language) | भोजपुरी (Bhojpuri / Folk) |
| मुख्य विषय (Theme) | सूर्य उपासना, छठी मइया की महिमा, घाट सजावट और भक्ति |
| प्लेटफॉर्म (Platform) | भक्तिलोक (Bhaktilok) |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
लोक संगीत की परंपरा पीढ़ियों से मौखिक और सांस्कृतिक रूप से आगे बढ़ती रही है। आधुनिक समय में ऋतिका पांडे और उजाला उपाध्याय जैसी प्रतिभाशाली कलाकारों ने इस पारंपरिक धरोहर को डिजिटल माध्यमों और आधुनिक संगीत संयोजन के साथ पुनर्जीवित किया है। इनकी सुरीली आवाजों में जो ठेठ पूरबी मिठास और ग्रामीण संस्कृति की महक है, वह श्रोताओं को सीधे बिहार और उत्तर प्रदेश के छठ घाटों की जीवंत अनुभूति कराती है। इन कलाकारों का उद्देश्य नई पीढ़ी को उनकी जड़ों और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़े रखना है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| दउरा / दउर | बांस की बनी बड़ी टोकरी | छठ पूजा में फल और ठेकुआ रखने के लिए प्रयुक्त पवित्र पात्र |
| सूप | बांस से निर्मित अनाज या पूजा सामग्री फटकने का पात्र | अर्घ्य की सामग्री सजाने हेतु उपयोग |
| अरघ (अर्घ्य) | जल अर्पित करना | सूर्य देव को जल और दूध का अर्घ्य देना |
| बेरिया | समय या बेला | पूजा का शुभ समय |
| हुलस | उत्साह, उल्लास और आनंद | त्योहार पर लोगों की खुशी |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि प्रकृति, जल स्रोतों और पर्यावरण के प्रति सम्मान का महाअभियान है। "सज गईल छठी घाट" जैसे गीत इस संस्कृति के मौखिक संवाहक हैं। जब महिलाएं नदी के किनारे या कृत्रिम तालाब के पास बैठकर इन गीतों को गाती हैं, तो एक अदृश्य सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह गीत हमें यह याद दिलाता है कि हमारे जीवन का आधार प्रकृति (सूर्य और जल) है, और इनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारा सबसे बड़ा धर्म है। इसके साथ ही, यह गीत परिवार के कल्याण, संतान की दीर्घायु और समाज में आपसी प्रेम को बढ़ावा देता है।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- समर्पण और अनुशासन: छठ पर्व चार दिनों तक अत्यधिक कठोर नियमों और अनुशासन के साथ मनाया जाता है, जो जीवन में संयम का पाठ पढ़ाता है।
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: यह गीत और पर्व हमें सिखाता है कि जो सूर्य समस्त संसार को जीवन ऊर्जा देता है, उसके प्रति कृतज्ञ होना आवश्यक है।
- सामूहिक सद्भाव: घाट की सजावट और गीत-संगीत में पूरा समाज मिलकर हिस्सा लेता है, जो सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण है।
- परंपराओं का संरक्षण: अपनी संस्कृति और लोकगीतों को जीवित रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले छठ महापर्व के दौरान सुना और गाया जाता है। विशेष रूप से जब व्रती महिलाएं नहाय-खाय, खरना, और संध्या अर्घ्य (पहला अर्घ्य) तथा सुबह के अर्घ्य के लिए नदी घाट की ओर प्रस्थान करती हैं, तब यह गीत हर घर और हर घाट पर गूंजता है। इसके अलावा, आजकल लोग इसे यूट्यूब, संगीत ऐप्स और भक्ति पोर्टल्स जैसे भक्तिलोक पर भी पूरे उत्साह के साथ सुनते हैं।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| भजन / गीत का नाम | सज गईल छठी घाट |
|---|---|
| कलाकार | ऋतिका पांडे एवं उजाला उपाध्याय |
| पर्व | छठ पूजा (Chhath Puja) |
| श्रेणी | भोजपुरी लोकगीत / छठ गीत |
| मुख्य भाव | भक्ति, उल्लास और सूर्य उपासना |
| वेबसाइट संदर्भ | Bhaktilok.in - सनातन संस्कृति एवं भक्ति पोर्टल |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "सज गईल छठी घाट" गीत के मुख्य गायक कौन हैं?
उत्तर: इस लोकप्रिय छठ गीत को सुप्रसिद्ध गायिका ऋतिका पांडे (Ritika Pandey) और उजाला उपाध्याय (Ujala Upadhyay) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।
प्रश्न 2: छठ पूजा का पर्व मुख्य रूप से किस राज्य में मनाया जाता है?
उत्तर: छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है, हालांकि अब यह देश-विदेश में भी फैल चुकी है।
प्रश्न 3: छठ पर्व में किनकी पूजा की जाती है?
उत्तर: छठ महापर्व में भगवान सूर्य (सूर्य नारायण) और छठी माता (माता षष्ठी) की पूजा की जाती है।
प्रश्न 4: छठ घाट की सजावट का क्या महत्व है?
उत्तर: घाट की सजावट स्वच्छता, पवित्रता और छठी मइया के स्वागत के प्रति भक्तों के उत्साह और उमंग का प्रतीक है।
प्रश्न 5: इस गीत को ऑनलाइन कहाँ सुना जा सकता है?
उत्तर: इस गीत के बोल और इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी आप भक्तिलोक (Bhaktilok) वेबसाइट पर पढ़ और सुन सकते हैं।
प्रश्न 6: छठ पूजा कितने दिनों की होती है?
उत्तर: छठ पूजा कुल चार दिनों की होती है, जो नहाय-खाय से शुरू होकर सुबह के अर्घ्य के साथ संपन्न होती है।
प्रश्न 7: छठ पर्व में अर्घ्य किसे दिया जाता है?
उत्तर: इसमें अस्ताचलगामी (डूबते) और उदयगामी (उगते) सूर्य को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाता है।
प्रश्न 8: छठ गीतों का सनातन संस्कृति में क्या स्थान है?
उत्तर: छठ गीत लोक संस्कृति की आत्मा हैं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारी परंपराओं, संस्कारों और पौराणिक कथाओं को जीवित रखते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह पृष्ठ लोक आस्था के महापर्व छठ और उससे जुड़े लोकप्रिय गीतों के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व को पाठकों तक पहुँचाने के लिए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है। इसमें पारंपरिक लोकसाहित्य और आधुनिक भक्ति संगीत का सुंदर समन्वय किया गया है ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक भोजपुरी लोकगायन एवं लोकसंस्कृति परंपरा
- छठ पूजा अनुष्ठान एवं सूर्य उपासना ग्रंथ
- ऋतिका पांडे एवं उजाला उपाध्याय के संगीत एल्बम और डिजिटल रिलीज
- सनातन संस्कृति एवं लोकगीत संकलन, Bhaktilok Archives
संबंधित भजन एवं लेख
आप हमारी वेबसाइट पर अन्य पावन व्रत, कथाओं और भजनों को भी पढ़ सकते हैं:
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें