Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा (Maa Lakshmi Tu Karde Hampe Kripa) - Mahalakshmi Gatha K.P. SAXENA

माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा भजन के लिरिक्स और भावार्थ पढ़ें। महालक्ष्मी गाथा के माध्यम से धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति हेतु देवी की स्तुति करें।

हिंदू धर्मग्रंथों और वैदिक परंपरा में भगवती महालक्ष्मी को ऐश्वर्य, समृद्धि, सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। के. पी. सक्सेना (K.P. Saxena) द्वारा रचित और स्वरबद्ध 'महा लक्ष्मी गाथा' (Mahalakshmi Gatha) का यह पावन भजन "माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा" (Maa Lakshmi Tu Karde Hampe Kripa) भक्तों के हृदय में श्रद्धा और शरणागति का संचार करता है। यह भजन केवल भौतिक धन की याचना नहीं है, बल्कि यह अंतःकरण की शुद्धि, दरिद्रता के समूल नाश और जीवन में दैवीय कृपा के अवतरण की एक आर्त पुकार है। विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस और वरलक्ष्मी व्रत जैसे पावन अवसरों पर इस भजन का श्रवण और कीर्तन साधक को मानसिक शांति और समृद्धि प्रदान करता है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और शास्त्रीय संदर्भों का सांगोपांग विवेचन प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा ॥

(कोरस / मुखड़ा)
माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा,
तेरे दर पे झुकाया है हमने सर को सदा।
हे विष्णु प्रिया, हे कमल वासिनी,
करदे दूर हमारे जीवन की हर आपदा।
माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा...

(अंतरा - १)
अष्ट रूप में माता तू जग में विराजे,
तेरे माथे पे सोने का मुकुट साजे।
सिंह वाहिनी दुर्गा की तू ही तो शक्ति,
तुझसे ही मिलती है मुक्ति और भक्ति।
दीन-दुखियों के कष्ट निवारण करो,
हे मैया, हमारे भी भंडारे भरो।
माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा...

(अंतरा - २)
जो भी श्रद्धा से तेरा ध्यान लगाए,
उसके घर में कभी कोई संकट न आए।
रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ के दाता,
तेरे चरणों में बहती है अमृत की धारा।
अज्ञान का अंधकार मिटा दो माँ,
ज्ञान का दीप मन में जला दो माँ।
माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा...

(अंतरा - ३)
कनकधारा की वर्षा तूने ही कराई,
शंकराचार्य की भक्ति की लाज बचाई।
हम भी बालक हैं तेरे, शरण में आए,
अपनी दया का आँचल हमपे बिछाए।
भवसागर से पार उतारो माँ,
बिगड़ी हमारी भी आज संवारो माँ।
माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन साधक और आराध्या के बीच के अनन्य संबंध को दर्शाता है। मुखड़े में भक्त माँ लक्ष्मी से प्रार्थना करता है कि हे माँ! हम आपके चरणों में सदैव अपना मस्तक झुकाते हैं, आप हम पर अपनी असीम कृपा बरसाएं। भगवान विष्णु की अर्धांगिनी और कमल के पुष्प पर विराजमान होने वाली माँ लक्ष्मी हमारे जीवन के समस्त दुखों और आपदाओं का हरण करें।

प्रथम अंतरे में माँ के अष्ट रूपों (आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और ऐश्वर्य लक्ष्मी) की महिमा गाई गई है। भक्त कहता है कि माँ के इन रूपों की आराधना से जीवन के सभी अभाव दूर हो जाते हैं। द्वितीय अंतरे में ध्यान और साधना के महत्व को रेखांकित किया गया है। जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर माँ का स्मरण करता है, उसके जीवन में रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का आगमन होता है। तृतीय अंतरे में आदिगुरु शंकराचार्य के प्रसंग का स्मरण करते हुए कनकधारा की अलौकिक घटना का वर्णन है, जो यह सिद्ध करता है कि सच्ची भक्ति से द्रवित होकर माँ स्वर्ण की वर्षा भी कर सकती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि इसमें वैदिक दर्शन और पौराणिक आख्यानों का सुंदर समन्वय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शरणागति का भाव (Surrender): भजन की प्रत्येक पंक्ति भक्त के निरहंकार भाव और पूर्ण समर्पण को प्रदर्शित करती है।
  • अष्टलक्ष्मी का वर्णन: इसमें माँ के आठ रूपों की वंदना की गई है, जो जीवन के आठ विभिन्न आयामों (स्वास्थ्य, धन, ज्ञान, शक्ति आदि) को संतुलित करते हैं।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र की घटना का उल्लेख भक्तों में अटूट विश्वास जगाता है।
  • मानसिक शांति और समृद्धि: इस भजन के नियमित श्रवण से घर का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है और आर्थिक तंगी दूर होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु शास्त्रों के अनुसार कुछ विशेष मुहूर्त और विधियां अत्यधिक फलदायी मानी गई हैं:

विशेष अवसर सर्वोत्तम समय पूजन विधि एवं तैयारी
शुक्रवार (देवी पूजन दिवस) संध्याकाल (गोधूलि बेला) घी का दीपक जलाएं, लाल पुष्प अर्पित करें और भजन का पाठ करें।
दीपावली एवं धनतेरस प्रदोष काल / महानिशीथ काल महालक्ष्मी यंत्र के सम्मुख बैठकर इस गाथा का श्रवण करें।
वरलक्ष्मी व्रत प्रातःकाल कलश स्थापना के पश्चात सपरिवार भजन कीर्तन करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की मुख्य आराध्या भगवती महालक्ष्मी हैं, जो भगवान श्रीहरि विष्णु की शाश्वत शक्ति हैं। इनके साथ ही, इस भजन में आदिगुरु शंकराचार्य की भक्ति का भी परोक्ष रूप से स्मरण किया गया है। मान्यता है कि जब शंकराचार्य ने एक अत्यंत निर्धन महिला की निस्वार्थ भावना को देखा, तो उन्होंने माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कनकधारा स्तोत्र की रचना की थी, जिससे प्रसन्न होकर माँ ने उस गरीब महिला के घर में सोने के आंवलों की वर्षा कर दी थी। यह भजन उसी महान आध्यात्मिक परंपरा की निरंतरता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना सुप्रसिद्ध भजन गायक और संगीतकार के. पी. सक्सेना द्वारा की गई है। उनकी विशिष्ट शैली और सरल शब्दों के चयन ने इस भजन को उत्तर भारत के घरों में अत्यंत लोकप्रिय बना दिया है। 'महा लक्ष्मी गाथा' के अंतर्गत आने वाला यह गीत पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय रागों के मिश्रण पर आधारित है, जिससे यह सुनने वाले के हृदय को सीधे स्पर्श करता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें भक्ति रस की प्रधानता है। काव्य शैली में 'प्रार्थना' और 'स्तुति' का सुंदर सम्मिश्रण है। इसमें प्रयुक्त अलंकार और छंद योजना अत्यंत सहज हैं, जिससे सामान्य जन भी इसे आसानी से कंठस्थ कर गा सकते हैं। "विष्णु प्रिया", "कमल वासिनी" और "भवसागर" जैसे तत्सम शब्दों का प्रयोग इसकी साहित्यिक गरिमा को बढ़ाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भौतिक धन संचय की शिक्षा नहीं देता, बल्कि जीवन के वास्तविक मूल्यों से परिचित कराता है:

  1. संतोष और पुरुषार्थ: माँ लक्ष्मी की कृपा वहीं होती है जहाँ ईमानदारी, स्वच्छता और पुरुषार्थ होता है।
  2. अज्ञानता का नाश: "ज्ञान का दीप मन में जला दो माँ" पंक्ति दर्शाती है कि वास्तविक धन आत्मज्ञान और विवेक है।
  3. परोपकार की भावना: धन का सदुपयोग दूसरों की सेवा और धर्म के कार्यों में होना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
विष्णु प्रिया भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी महालक्ष्मी, जो जगत के पालनहार की शक्ति हैं।
कमल वासिनी कमल के फूल पर बैठने वाली पवित्रता, अनासक्ति और सौंदर्य का प्रतीक।
अष्ट रूप आठ दिव्य स्वरूप जीवन के आठ प्रकार के ऐश्वर्य और सिद्धियां।
कनकधारा सोने की वर्षा / धारा असीम कृपा और दरिद्रता का पूर्ण विनाश।
भवसागर संसार रूपी समुद्र जन्म-मरण का चक्र, जिससे मुक्ति की कामना की जाती है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा, तेरे दर पे झुकाया है हमने सर को सदा।"
हे जगत जननी महालक्ष्मी! हम आपके चरणों में पूर्ण समर्पण के साथ उपस्थित हैं। हमने सदैव आपके प्रति अटूट श्रद्धा रखी है, अतः आप हम पर अपनी करुणा दृष्टि बनाए रखें।

"अष्ट रूप में माता तू जग में विराजे, तेरे माथे पे सोने का मुकुट साजे।"
आप इस सृष्टि में आठ रूपों में व्याप्त होकर समस्त चराचर जगत का कल्याण करती हैं। आपका दिव्य स्वरूप अत्यंत मनोहारी है और आपके मस्तक पर सुशोभित स्वर्ण मुकुट आपकी संप्रभुता का प्रतीक है।

"कनकधारा की वर्षा तूने ही कराई, शंकराचार्य की भक्ति की लाज बचाई।"
जब आदिगुरु शंकराचार्य ने एक दरिद्र ब्राह्मण परिवार की सहायता के लिए आपकी स्तुति की, तो आपने स्वर्ण वर्षा कर उनकी प्रार्थना स्वीकार की। हम भी उसी अटूट विश्वास के साथ आपकी शरण में आए हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन के पूर्व या पश्चात निम्नलिखित महालक्ष्मी मंत्रों का जप करने से भजन का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है:

महालक्ष्मी गायत्री मंत्र:

॥ ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॥

अर्थ: हम महालक्ष्मी को जानते हैं और भगवान विष्णु की पत्नी का ध्यान करते हैं। वह देवी लक्ष्मी हमें सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण महत्वपूर्ण जानकारी
भजन का नाम माँ लक्ष्मी तू करदे हम्पे कृपा (Maa Lakshmi Tu Karde Hampe Kripa)
मुख्य एल्बम / गाथा महालक्ष्मी गाथा (Mahalakshmi Gatha)
रचनाकार / गायक के. पी. सक्सेना (K.P. SAXENA)
मुख्य देवी-देवता भगवती महालक्ष्मी, भगवान श्री हरि विष्णु
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
भक्ति रस / भाव प्रार्थना, शरणागति, वात्सल्य भाव
उपयुक्त अवसर शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस, लक्ष्मी पूजन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय भजन के मूल गायक और रचयिता सुप्रसिद्ध भक्ति संगीतकार के. पी. सक्सेना (K.P. Saxena) हैं।

शास्त्रों के अनुसार शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी को समर्पित है। अतः शुक्रवार को इस भजन का गायन या श्रवण सर्वोत्तम माना जाता है। इसके अतिरिक्त दीपावली और धनतेरस पर भी इसे सुनना अत्यंत शुभ होता है।

यह संदर्भ आदिगुरु शंकराचार्य से जुड़ा है। जब उन्होंने एक अत्यंत निर्धन महिला की सहायता के लिए 'कनकधारा स्तोत्र' का पाठ किया, तो माँ लक्ष्मी ने प्रसन्न होकर सोने के आंवलों की वर्षा की थी।

अष्टलक्ष्मी माँ लक्ष्मी के आठ विशेष स्वरूपों को कहा जाता है, जो जीवन के आठ विभिन्न सुखों (धन, धान्य, धैर्य, शौर्य, संतान, विजय, विद्या और आदि शक्ति) का प्रतिनिधित्व करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त पूर्ण श्रद्धा, पवित्रता और ईमानदारी के साथ माँ लक्ष्मी की आराधना और इस भजन का कीर्तन करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता का नाश होता है और समृद्धि आती है।

यह भजन हमें सिखाता है कि भौतिक धन के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान और मन की शुद्धि भी अत्यंत आवश्यक है। सच्चा धन वही है जो धर्म के मार्ग पर चलकर अर्जित किया जाए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख हिंदू पौराणिक ग्रंथों, विशेष रूप से विष्णु पुराण और श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के सिद्धांतों के आलोक में तैयार किया गया है। भजन के बोल और उनके अर्थों को भक्तों की सुगमता के लिए अत्यंत सरल और प्रामाणिक रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह सामग्री पूर्णतः संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म के भजनों और उनके पीछे छिपे दार्शनिक संदेशों को जन-जन तक पहुंचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: भगवती महालक्ष्मी के स्वरूप और उनकी आराधना पद्धतियों का वर्णन।
  • कनकधारा स्तोत्र प्रसंग: आदिगुरु शंकराचार्य के जीवन चरित्र से संकलित ऐतिहासिक प्रसंग।
  • पारंपरिक भजन संग्रह: के. पी. सक्सेना द्वारा रचित 'महालक्ष्मी गाथा' के मूल ऑडियो संस्करण।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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