लोक आस्था के महान पर्व महापर्व छठ की पावन बेला पर भोजपुरी संगीत जगत की प्रसिद्ध गायिका सोनम राज और अंजलि गौरव द्वारा प्रस्तुत "बिहारी छठ पूजा गीत" (Bihari Chhath Puja Geet) सूर्य देव और छठी मईया के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण का अत्यंत जीवंत एवं मनमोहक उदाहरण है। लोकगीतों की यह अनमोल परंपरा बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ संपूर्ण विश्व में फैले सनातन धर्मावलंबियों के हृदय में विशेष स्थान रखती है। इस पावन गीत में व्रती माताओं के कठिन तप, बांस की टोकरी में सजे सूप-दौरा, ठेकुआ के प्रसाद की महक, अंचल पसार कर सूर्य भगवान को अर्घ्य देने की परंपरा और लोक संस्कृति के अनुपम दृश्यों का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया है। तरंग म्यूजिक के बैनर तले रिकॉर्ड हुआ यह भजन छठ व्रतियों के मन में ऊर्जा और भक्ति का संचार करता है।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
स्थाई (مukhda):
उगा हो सुरुज देव भइले बिहान, अरघिया के बेर भइल हो!
सुना छठी मईया हमार अरदजिया, दिअहें सुफल बरतिया हो!
सोनम राज, अंजलि गौरव के सुर में गावल, छठी मईया के महिमा अपार बा,
बिहार के हर एगो घर में आज गूंजे इहे बहार बा!
अंतरा 1:
सूपवा सजइली सुरुज देव के लागी, दौरा भरिउअउलियन केरा अरघा के लागी,
घाटिए पर जागे ला भोर भोर राती, छठी माई दर्शन दीहे आके साक्षात साती!
कबहुँ ना डोले आस्था के इ विश्वास, पूरा क दिहे माई सबके मन के आस!
अंतरा 2:
केरिए के पात पर उगेलन सुरुजमल, घाटवा पर उमड़ल भक्तन के जलसल,
कार्तिक मास के इ पावन इजोरिया, धन्य हो गइलS छठी माई तोहर नगरिया!
अंजुरी भरि जल गिरवले बाड़ी भक्त, चरन में लागल बा सगरो अनन्य रक्त!
अंतिम चरण (Refrain):
जय छठी मईया! जय सुरुज भगवान!
तोहरे कृपा से चले सगरो संसार!
बिहारी माटी के इ पावन गीत, गावे हर भक्त धरि मन में प्रीत!
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह लोकगीत छठ महापर्व के चार दिवसीय अनुष्ठान के दौरान व्रतियों की मानसिक स्थिति, समर्पण और लोक-संस्कृति को अत्यंत गहराई से व्यक्त करता है। गीत के मुखड़े में सूर्य भगवान से विनती की जा रही है कि हे सूरज देव! सुबह हो चुकी है और अब अर्घ्य देने का समय आ गया है। छठी मईया से प्रार्थना की जाती है कि वे सभी व्रतियों के कठिन उपवास और व्रतों को सफल बनाएं।
आगे के चरणों में बांस के सूप और दौरे में रखे गए पवित्र प्रसाद, फलों और ठेकुए का वर्णन है। घाट पर रात भर जागने और प्रात:काल जल में खड़े होकर भगवान भास्कर की प्रतीक्षा करने का दृश्य भोजपुरी संस्कृति की मूल आत्मा को दर्शाता है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से चली आ रही लोक-आस्था, अनुशासन और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता का जीवंत दस्तावेज है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत का मूल भाव विसर्जन, कृतज्ञता, शारीरिक व मानसिक शुद्धि और प्रकृति पूजा है। सनातन संस्कृति में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जो जीवन, स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्रोत हैं। छठी मईया प्रकृति की अधिष्ठात्री देवी (माता प्रकृति) हैं। यह गीत हमें यह संदेश देता है कि समस्त सुख-दुख में ईश्वर और प्रकृति के प्रति अटूट विश्वास रखना चाहिए तथा कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने सांस्कृतिक मूल्यों और पर्वों को सहेज कर रखना चाहिए।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम (Song Name) | बिहारी छठ पूजा गीत (Bihari Chhath Puja Geet) |
|---|---|
| गायिकाएं (Singers) | सोनम राज (Sonam Raj), अंजलि गौरव (Anjali Gaurav) |
| संगीत कंपनी (Music Label) | तरंग म्यूजिक (Tarang Music) |
| रिकॉर्डिंग स्टूडियो (Recording) | तरंग स्टूडियो, पटना (Tarang Studio, Patna) |
| वीडियो निर्देशक (Video Director) | रामबाबू यादव (Rambabu Yadav) |
| निर्माता एवं निर्देशक (Producer & Director) | उमेश कुमार (Umesh Kumar) |
| भाषा (Language) | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| विषय (Theme) | छठ महापर्व, लोक आस्था, सूर्य उपासना |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
सोनम राज और अंजलि गौरव ने अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज़ से इस लोकगीत में जान फूंक दी है। ग्रामीण अंचल की सोंधी खुशबू को अपनी आवाज़ के माध्यम से श्रोताओं तक पहुँचाने में इन कलाकारों का विशेष योगदान रहा है। तरंग म्यूजिक के बैनर तले और उमेश कुमार के निर्देशन में बनी यह प्रस्तुति भोजपुरी संगीत जगत की पारंपरिक धरोहर को आधुनिक मंच प्रदान करती है। वीडियो निर्देशन रामबाबू यादव और संपादन मीट जी द्वारा किया गया है, जो इस गीत को दृश्यात्मक रूप से भी अत्यंत मनमोहक बनाता है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| अरघिया / अर्घा | सूर्य देव को जल अर्पित करना | छठ पूजा का मुख्य अनुष्ठान |
| सूपवा / दौरा | बांस से बने पारंपरिक बर्तन | पूजा सामग्री रखने हेतु |
| इजोरिया | चांदनी या प्रकाश से युक्त रात/पक्ष | कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष |
| सुरुजमल | भगवान सूर्य | प्रत्यक्ष देवता |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ पर्व बिहार और उत्तर प्रदेश की लोक-संस्कृति का प्राण है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते और उगते दोनों सूर्यों को अर्घ्य दिया जाता है, जिसका अर्थ है कि जो उदय हुआ है उसका अस्त होना तय है और जो अस्त हुआ है उसका पुनः उदय होना भी निश्चित है—यह प्रकृति का शाश्वत नियम है। यह गीत समाज को समानता, भाईचारा और पर्यावरण प्रेम का पाठ पढ़ाता है। इसमें जाति, ऊंच-नीच के भेद से परे सभी लोग एक घाट पर एकत्र होकर लोक कल्याण की कामना करते हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
1. अनुशासन और संयम: छठ व्रत का अनुशासन कठिन होता है; यह गीत हमें जीवन में संयम और नियमबद्धता की सीख देता है।
2. प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: सूर्य और जल के बिना जीवन असंभव है, और यह पर्व हमें उनकी पूजा कर आभार व्यक्त करना सिखाता है।
3. सामूहिक सद्भाव: घाट पर सभी का एक साथ मिलकर पूजन करना सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाए जाने वाले छठ महापर्व के दौरान—विशेषकर खरना, नहाय-खाय, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के समय—घरों, गलियों और छठी मईया के घाटों पर अत्यधिक उत्साह के साथ सुना और गाया जाता है। इसके अलावा, लोक पर्वों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और यूट्यूब तथा अन्य डिजिटल माध्यमों पर भी लोग इस भक्ति गीत का आनंद लेते हैं।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| गीत शीर्षक | बिहारी छठ पूजा गीत |
| मुख्य कलाकार | सोनम राज, अंजलि गौरव |
| संगीत शैली | भोजपुरी लोक भजन / छठ गीत |
| आराध्य देवी/देवता | छठी मईया एवं सूर्य देव |
| उपयुक्त अवसर | छठ पूजा महापर्व (कार्तिक शुक्ल पक्ष) |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस आलेख में प्रस्तुत जानकारी पारंपरिक लोकगीतों, सांस्कृतिक परंपराओं और उपलब्ध मीडिया विवरणों पर आधारित है। इसका उद्देश्य सनातन संस्कृति और लोक संगीत के इस सुंदर प्रसंग को पाठकों तक प्रामाणिक रूप से पहुंचाना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत संग्रह एवं सांस्कृतिक धरोहर विवरण
- तरंग म्यूजिक ऑफिशियल रिलीज़ आर्काइव
- छठ महापर्व लोक-संस्कृति शोध एवं संदर्भ ग्रंथ
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