bhakti gana bhojpuri mein मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

विंध्याचल मयरिया ( Vindhyachal Mayariya ) - Ravindra SinghJyoti Bhakti Song

रविंद्र सिंह ज्योति द्वारा गाए गए लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत 'विंध्याचल मयरिया' के बोल और माँ विंध्यवासिनी की महिमा के बारे में विस्तार से जानें।

Ravindra SinghJyoti Bhakti Song - Bhaktilok

विंध्याचल मयरिया (Vindhyachal Mayariya) रविंद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti) द्वारा गाया गया एक अत्यंत ही लोकप्रिय, कर्णप्रिय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण भोजपुरी देवी गीत है। सनातन धर्म में विंध्यवासिनी माता का धाम उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित मां विंध्याचल के रूप में त्रिशूल-गंगा के तट पर सुशोभित है, जहां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों रूपों में आदिशक्ति माँ जगतजननी विराजमान हैं। भोजपुरी भक्ति संगीत की परंपरा में विंध्य क्षेत्र की महिमा, माँ विंध्यवासिनी के शृंगार, चुनरी, लाली और उनके दरबार की अलौकिक छटा का गुणगान करने वाले गीतों का एक विशिष्ट स्थान रहा है। रविंद्र सिंह ज्योति ने अपनी ओजस्वी और सुरीली आवाज से इस भजन के माध्यम से माँ विंध्यवासिनी के चरणों में अनन्य प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण शरणागति का अनूठा भाव प्रस्तुत किया है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के पवित्र अवसरों पर जब विंध्याचल धाम गूंज उठता है, तब ऐसे पारंपरिक और आधुनिक भोजपुरी देवी गीत घर-घर और मंदिरों में भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द में माँ के प्रति वह ममत्व और वात्सल्य झलकता है जो एक संतान अपनी माता के प्रति अनुभव करती है। यह मार्गदर्शक लेख इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, संगीत संयोजन, गायन की परंपरा और मां विंध्यवासिनी की महिमा पर प्रकाश डालता है, जो साधक के अंतर्मन को भक्ति और चेतना से भर देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मखड़ा):

विंध्याचल मयरिया, दर्शन दऽ तू आ के,
निहारे लाS दुअरिया, भक्त जनवा बिला के।
मइया ओहिया मोर मोहे सुरतिया,
झलकत बारे जगमग जगमग नवरतिया!

अंतरा 1:

गंगा के तीरे तीरे बसे मोर धाम हो,
जहाँ जपें सब ऋषि-मुनि माता तोहार नाम हो।
लाल-लाल चुनरिया सोहे अउर सिंदूरिया,
दर्शन पाके पावन भइल सबकर मंदरिया।
विंध्याचल मयरिया, दर्शन दऽ तू आ के...!

अंतरा 2:

काली महालक्ष्मी सरस्वती के बा बास हो,
तोहरे चरनन में कटे जिनगी के रास हो।
रविंद्र सिंह ज्योति गावे महिमा तोहार गाता,
झुकल बाटे माथा तोहरे दर पे ओ माता।
विंध्याचल मयरिया, दर्शन दऽ तू आ के...!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

रविंद्र सिंह ज्योति द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध यह भजन मां विंध्यवासिनी के प्रति एक भक्त की अगाध पुकार है। भजन के मुखड़े में भक्त माँ विंध्याचल वाली से हाथ जोड़कर विनती करता है कि हे मइया! तू अपनी झिलमिलाती हुई दिव्य ज्योति के साथ हमें अपने दर्शन देकर कृतार्थ कर। भक्तगण तुम्हारी पवित्र देहरी पर आंखें बिछाए तुम्हारी रहमत का इंतजार कर रहे हैं। तेरी यह मोहक और करुणा से भरी सूरत हमारे मन को मोह लेती है और विशेषकर नवरात्रि के दिनों में तेरा दरबार जगमग रोशनी से आलोकित हो उठता है।

पहले अंतरे में माँ के धाम की भौगोलिक और आध्यात्मिक स्थिति का सुंदर वर्णन किया गया है। माँ विंध्यवासिनी का धाम पवित्र माँ गंगा के तट के पास सुशोभित है, जहाँ प्राचीन काल से ऋषि-मुनि और साधक ध्यान और जप करते आए हैं। माँ को लाल चुनरिया और सिंदूर अत्यंत प्रिय है, और उनके इस दिव्य शृंगार के दर्शन मात्र से संपूर्ण मंदिर परिसर पवित्र और ऊर्जावान हो उठता है।

दूसरे और अंतिम अंतरे में इस बात का स्मरण कराया गया है कि विंध्याचल क्षेत्र में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों शक्तियों का त्रिवेणी संगम रूप में वास है। साधक कहता है कि मेरा जीवन और इसका प्रत्येक क्षण आपके ही चरणों में समर्पित हो। गायक रविंद्र सिंह ज्योति अपना नाम लेते हुए कहते हैं कि हे माता! मैं अपनी तुच्छ बुद्धि से आपकी महिमा का गान कर रहा हूँ और मेरा मस्तक हमेशा आपके दरबार में श्रद्धा से झुका रहेगा।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक सामान्य मनोरंजन का गीत नहीं, बल्कि शक्ति उपासना और भोजपुरी लोक संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है। विंध्याचल शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है जहाँ माता सती का दाहिना भाग गिरा था। इस भजन के माध्यम से विंध्य क्षेत्र की महिमा, माँ की दिव्यता और लोक संस्कृति का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है। यह भजन सुनने वाले के मन से भय, अज्ञान और निराशा को दूर कर उसमें सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति भाव का संचार करता है। नवरात्रि के नौ दिनों में इस प्रकार के देवी गीतों का स्मरण करने से मानसिक शांति और माँ की कृपा प्राप्त होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन देवी गीत को विशेष रूप से शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में प्रातःकाल या संध्याकालीन बेला में मां की आरती और पूजा के समय सुना या गाया जा सकता है। इसके अलावा सोमवार, शुक्रवार या पूर्णिमा-अमावस्या के विशेष अवसरों पर जब भक्त मां विंध्यवासिनी का स्मरण करते हैं, तब यह गीत आंतरिक प्रेरणा देता है। इसे घर में दीप प्रज्वलित कर, धूप-धूप जलाकर और मां को लाल पुष्प अर्पित करते हुए पूरे परिवार के साथ सुना जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी मां विंध्यवासिनी (अष्टभुजी और काली खोह के साथ त्रिकोणीय परिक्रमा की मुख्य अधिष्ठात्री) हैं। साथ ही इस गीत के रचनाकार और गायक प्रसिद्ध भोजपुरी लोक एवं भक्ति गायक रविंद्र सिंह ज्योति हैं, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी से विंध्य क्षेत्र की महिमा को जन-जन तक पहुँचाने का स्तुत्य कार्य किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भोजपुरी संगीत जगत में विंध्याचल धाम और मां दुर्गा पर आधारित गीतों की एक लंबी और समृद्ध परंपरा रही है। लोक धुनों और आधुनिक संगीत उपकरणों का संलयन करके ऐसे भजनों की रचना की जाती है जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के श्रोताओं को समान रूप से आकर्षित करते हैं। यह गीत विंध्याचल की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों और घर पर बैठकर मां की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं के बीच समान रूप से लोकप्रिय है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी और हिंदी के मिश्रित लोक शैली में रचित है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे "जगमग जगमग", "तीरे तीरे", और "लाल-लाल चुनरिया"। भाषा की सरलता और शब्दों का चयन ऐसा है कि कोई भी साधारण ग्रामीण या शहरी व्यक्ति इसे आसानी से समझ और गुनगुना सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में मनुष्य को ईश्वर या अपनी इष्ट देवी का स्मरण करना चाहिए। माता केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि ममता और करुणा की भी मूरत हैं जो अपनी हर संतान की पुकार सुनती हैं। पूर्ण शरणागति और अहंकार का त्याग ही सच्ची भक्ति का मार्ग है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ
मयरिया माता / मइया माँ विंध्यवासिनी के लिए प्रेमपूर्ण संबोधन
निहारे लाS बाट जोहना / देखना भक्तों द्वारा माँ के दर्शन की प्रतीक्षा
मंदरिया मंदिर पवित्र शक्तिपीठ या देवालय
रास जीवन का प्रवाह / पल जीवन का समय

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"विंध्याचल मयरिया, दर्शन दऽ तू आ के..." - हे विंध्याचल धाम में निवास करने वाली माता! आप अपने भक्तों को अपनी अलौकिक छवि के दर्शन दें।
"गंगा के तीरे तीरे बसे मोर धाम हो..." - आपका यह पवित्र धाम माँ गंगा के पावन तट के समीप बसा हुआ है, जहाँ का कण-कण पवित्र है।
"रविंद्र सिंह ज्योति गावे महिमा तोहार गाता..." - गायक रविंद्र सिंह ज्योति आपकी महिमा का गुणगान करते हुए आपके चरणों में नतमस्तक हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

यह श्लोक माँ दुर्गा के सभी रूपों का आह्वान करता है और उनके स्मरण मात्र से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं। आप दुर्गा सप्तशती के पाठ से इस भजन के आध्यात्मिक प्रभाव को और बढ़ा सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य
भजन का नाम विंध्याचल मयरिया (Vindhyachal Mayariya)
गायक / कलाकार रविंद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti)
संगीत शैली भोजपुरी देवी गीत / लोक भक्ति संगीत
आराध्य देवी माँ विंध्यवासिनी (दुर्गा जी)
भाषा भोजपुरी एवं हिंदी
मुख्य अवसर नवरात्रि, मंगलवार, शुक्रवार एवं देवी पूजन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भोजपुरी देवी गीत के गायक रविंद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti) हैं।

माँ विंध्यवासिनी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में विंध्याचल नामक स्थान पर गंगा नदी के तट पर स्थित है।

यह भजन शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण और किसी भी देवी पूजन के अवसर पर विशेष रूप से गाया और सुना जाता है।

विंध्याचल को प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है जहाँ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों रूपों की एक ही स्थान पर त्रिकोण रूप में पूजा होती है।

हाँ, नवरात्रि के नौ दिनों में माँ की आराधना करते समय इस प्रकार के भक्ति गीत सुनना अत्यंत शुभ और आनंददायक होता है।

इस भजन की मुख्य भाषा भोजपुरी है, जो उत्तर प्रदेश और बिहार के लोक संगीत का एक अभिन्न अंग है।

भोजपुरी देवी गीत जन-मानस को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और लोक परंपरा के माध्यम से भक्ति का प्रसार करते हैं।

विंध्याचल में माँ विंध्यवासिनी, अष्टभुजा मंदिर और काली खोह मंदिर की त्रिकोणीय परिक्रमा और दर्शन करने का विशेष धार्मिक विधान है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख और भजन विवरण माँ विंध्यवासिनी की महिमा, लोक संगीत परंपरा और पारंपरिक मान्यताओं के आधार पर तैयार किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पाठकों की धार्मिक और सांस्कृतिक जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए पूरी तरह प्रामाणिक और समर्पित है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण एवं पौरणिक शक्तिपीठ संदर्भ ग्रंथ
  • विंध्याचल क्षेत्र की लोकगाथाएं एवं पारंपरिक देवी गीत संग्रह
  • भोजपुरी लोक संगीत एवं भक्ति साहित्य परंपरा

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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