Durga Bhajan Lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तुम कल्याणी हो महामाई (TUM KALYANI HO MAHAMAI) - SHAHNAZ AKHTAR Ajaz Khan Durga Bhajan

शहनाज़ अख्तर द्वारा गाये गए प्रसिद्ध दुर्गा भजन 'तुम कल्याणी हो महामाई' के सम्पूर्ण बोल और विस्तृत भावार्थ पढ़ें। | Bhaktilok

"तुम कल्याणी हो महामाई" (Tum Kalyani Ho Mahamai) एक अत्यंत लोकप्रिय, ऊर्जावान और भावपूर्ण दुर्गा भजन है, जिसे सुप्रसिद्ध भजन गायिका शहनाज़ अख्तर (Shahnaz Akhtar) और संगीतकार एजाज़ खान (Ajaz Khan) द्वारा प्रस्तुत किया गया है। यह भजन आदिशक्ति माँ दुर्गा के ममतामयी, कल्याणकारी और दुष्टनाशिनी स्वरूप को समर्पित है। सनातन धर्म में शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है, और यह भजन साधक के हृदय में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का भाव जाग्रत करता है। इस भजन का मुख्य स्वर देवी माँ की असीम कृपा और उनके सर्वव्यापी स्वरूप के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। नवरात्रि के पावन पर्व पर, मंदिरों और घरों में इस भजन का गायन भक्तों को एक दिव्य और अलौकिक आनंद की अनुभूति कराता है। इस लेख में हम इस भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ तुम कल्याणी हो महामाई ॥

स्थायी (मुखड़ा):
तुम कल्याणी हो महामाई, तुम कल्याणी हो महामाई।
सारे जग की तुम हो माता, तुम हो भाग्य विधाता,
तुम कल्याणी हो महामाई॥

अंतरा 1:
सिंह सवारी साजे मैया, हाथ में खप्पर सोहे।
तेरा रूप अनुपम प्यारा, भक्तों का मन मोहे।
महिषासुर को मारने वाली, दुष्टों को संहारने वाली,
तुम कल्याणी हो महामाई॥

अंतरा 2:
लाल चुनरिया ओढ़े मैया, द्वारे भीड़ लगी है।
तेरे नाम की ज्योति मैया, घट-घट बीच जगी है।
मंगला गौरी, संकट हारी, जगदम्बा त्रिपुरारी,
तुम कल्याणी हो महामाई॥

अंतरा 3:
शहनाज़ गाए महिमा तेरी, एजाज़ शीश झुकाए।
जो भी आए तेरे द्वारे, मुंह मांगा फल पाए।
भवभय हारिणी, मोक्ष प्रदायिनी, आदि शक्ति कल्याणी,
तुम कल्याणी हो महामाई॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन आदिशक्ति जगदम्बा की महिमा का एक अत्यंत सुंदर और काव्यात्मक वर्णन है। भजन का मुख्य संदेश यह है कि माँ दुर्गा ही इस संपूर्ण ब्रह्मांड की आदि कारण हैं। वे ही सृष्टि का सृजन करती हैं, वही इसका पालन करती हैं और संकट आने पर दुष्टों का संहार कर धर्म की स्थापना करती हैं।

भजन के प्रारंभ में माँ को "कल्याणी" और "महामाई" कहकर पुकारा गया है। कल्याणी का अर्थ है जो सबका कल्याण करने वाली हो, और महामाई का अर्थ है जो महामाया यानी इस संसार की नियंत्रक शक्ति हो। भक्त कहता है कि हे माँ, आप ही इस संपूर्ण जगत की माता हैं और आप ही प्रत्येक जीव के भाग्य का निर्धारण करने वाली भाग्य विधाता हैं। आपके बिना इस संसार में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता।

आगे के अंतरे में माँ के दिव्य और तेजस्वी रूप का वर्णन है। सिंह की सवारी करने वाली माँ के हाथों में खप्पर और अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। यह रूप एक ओर जहाँ दुष्टों के लिए अत्यंत भयानक है, वहीं दूसरी ओर अपने अनन्य भक्तों के लिए अत्यंत सौम्य और मनमोहक है। महिषासुर मर्दिनी के रूप में माँ ने देवताओं और मनुष्यों को अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी।

अंतिम भाग में भक्त की अटूट श्रद्धा का वर्णन है। माँ के दरबार में जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा और निष्काम भाव से आता है, माँ उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। वह न केवल सांसारिक सुख प्रदान करती हैं, बल्कि जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अन्य भजनों से अलग और विशेष बनाती हैं:

  • भक्ति और शक्ति का समन्वय: यह भजन केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह देवी की शक्ति का जयघोष है। इसमें शांत रस और वीर रस का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
  • शहनाज़ अख्तर की जादुई आवाज़: इस भजन को अपनी बुलंद और सुरीली आवाज़ से सजाने वाली शहनाज़ अख्तर ने इसमें एक अनूठी ऊर्जा भर दी है, जिससे श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
  • सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: इस भजन के रचनाकार और गायक विभिन्न समुदायों से संबंध रखते हैं, जो भारत की साझी संस्कृति और गंगा-जमुनी तहज़ीब को प्रदर्शित करता है। भक्ति की कोई सीमा नहीं होती, यह भजन इसका जीवंत उदाहरण है।
  • नवरात्रि का विशेष आकर्षण: देवी पंडालों और डांडिया उत्सवों में इस भजन की गूंज भक्तों के उत्साह को दोगुना कर देती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना के लिए कोई भी समय अनुचित नहीं होता, परंतु शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार कुछ विशेष अवसरों पर इस भजन का गायन और श्रवण अत्यंत फलदायी माना गया है:

  • नवरात्रि पर्व: चैत्र और आश्विन नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान सुबह और शाम की आरती के समय इस भजन को गाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • मंगलवार और शुक्रवार: ये दोनों दिन देवी माँ की उपासना के लिए समर्पित हैं। इन दिनों में माँ के समक्ष घी का दीपक जलाकर इस भजन का पाठ करना चाहिए।
  • दुर्गा पूजा और जगराता: किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, माता की चौकी या जगराते में इस भजन को गाकर वातावरण को भक्तिमय बनाया जा सकता है।
  • गायन विधि: इस भजन को गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, शरीर की पवित्रता और एकाग्रता होनी चाहिए। ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम के साथ सामूहिक रूप से गाने पर इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति माँ दुर्गा को समर्पित है। देवीभागवत पुराण के अनुसार, माँ दुर्गा ही परम ब्रह्म की शक्ति हैं। वे ही महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के रूप में प्रकट होकर संसार का कल्याण करती हैं। इस भजन में माँ के विभिन्न स्वरूपों जैसे मंगला गौरी, जगदम्बा और कल्याणी का स्मरण किया गया है।

इस भजन के माध्यम से आधुनिक युग के कलाकारों ने संत-हृदय की भांति निष्काम भक्ति का संदेश दिया है। संगीतकार एजाज़ खान और गायिका शहनाज़ अख्तर ने अपनी कला को माँ के चरणों में समर्पित कर यह सिद्ध किया है कि सच्ची भक्ति किसी जाति या संप्रदाय की मोहताज नहीं होती।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"तुम कल्याणी हो महामाई" भजन का निर्माण आधुनिक भक्ति संगीत के दौर में हुआ है। शहनाज़ अख्तर के प्रसिद्ध एल्बमों में से एक इस भजन ने बहुत ही कम समय में देश-विदेश में अपनी पहचान बना ली। इस भजन की पृष्ठभूमि पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक वाद्य यंत्रों के संयोजन पर आधारित है। एजाज़ खान के संगीत निर्देशन ने इस भजन को एक ऐसी लय दी है जो सीधे सुनने वाले के हृदय को छूती है और उन्हें झूमने पर मजबूर कर देती है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें कुछ शब्द अवधी और लोक भाषाओं से लिए गए हैं। इसकी काव्य शैली अत्यंत प्रवाहमयी है।

  • अलंकार योजना: भजन में अनुप्रास और रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है (जैसे "घट-घट बीच जगी है")।
  • गेयता: इसकी लयबद्धता इतनी सटीक है कि इसे कोई भी साधारण व्यक्ति आसानी से सीख और गा सकता है।
  • बिंब विधान: "सिंह सवारी", "लाल चुनरिया" और "हाथ में खप्पर" जैसे शब्द श्रोता के मन में माँ दुर्गा का एक सजीव और भव्य चित्र अंकित कर देते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि जीवन जीने के महत्वपूर्ण सूत्र भी प्रदान करता है:

  1. समर्पण का भाव: जब हम स्वयं को उस परम शक्ति के चरणों में समर्पित कर देते हैं, तो हमारे जीवन के सभी भय और चिंताएं समाप्त हो जाती हैं।
  2. बुराई पर अच्छाई की जीत: महिषासुर के वध का प्रसंग हमें सिखाता है कि चाहे अंधकार कितना भी घना क्यों न हो, अंततः जीत सत्य और धर्म की ही होती है।
  3. समानता और सेवा: माँ के दरबार में अमीर-गरीब, ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं होता। हमें भी अपने जीवन में सभी के प्रति समभाव रखना चाहिए।
  4. आंतरिक शक्ति का जागरण: माँ दुर्गा हमारे भीतर की शक्ति का प्रतीक हैं। इस भजन के श्रवण से हमारे भीतर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मकता का संचार होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
कल्याणी कल्याण करने वाली जो भक्तों के लौकिक और पारलौकिक जीवन को मंगलमय बनाती हैं।
महामाई महामाया / महान माता सृष्टि की आदि शक्ति जो संपूर्ण ब्रह्मांड को संचालित करती हैं।
खप्पर एक विशेष पात्र / अस्त्र दुष्टों के संहार और असुरक्षा के नाश का प्रतीक।
घट-घट प्रत्येक हृदय / कण-कण ईश्वर की सर्वव्यापकता को दर्शाता है।
भवभय हारिणी संसार के भय को हरने वाली जन्म, मृत्यु और सांसारिक कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली।
त्रिपुरारी भगवान शिव की शक्ति त्रिपुर राक्षस का संहार करने वाले शिव की सहधर्मिणी।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"तुम कल्याणी हो महामाई, तुम कल्याणी हो महामाई..."
हे जगत जननी, आप संपूर्ण संसार का मंगल करने वाली हैं। आप ही वह परम शक्ति हैं जो सभी दुखों को दूर करती हैं।

"सारे जग की तुम हो माता, तुम हो भाग्य विधाता..."
आप केवल मेरी ही नहीं, बल्कि इस चराचर जगत की माता हैं। प्रत्येक जीव का प्रारब्ध और भविष्य आपके ही हाथों में सुरक्षित है।

"सिंह सवारी साजे मैया, हाथ में खप्पर सोहे..."
माँ का वाहन सिंह उनकी अदम्य शक्ति और साहस का प्रतीक है। उनके हाथों में सुशोभित खप्पर अधर्मियों के काल का सूचक है।

"लाल चुनरिया ओढ़े मैया, द्वारे भीड़ लगी है..."
लाल रंग सुहाग, शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है। माँ के इस भव्य रूप के दर्शन के लिए उनके मंदिर के द्वार पर भक्तों का तांता लगा रहता है।

"शहनाज़ गाए महिमा तेरी, एजाज़ शीश झुकाए..."
कलाकार स्वयं को माँ के चरणों का दास मानते हुए कहते हैं कि हमारी कला और हमारा जीवन केवल आपकी स्तुति के लिए ही समर्पित है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ माँ दुर्गा के इन सिद्ध मंत्रों का जाप करने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है:

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: जो शरण में आए हुए लोगों का कल्याण करने वाली हैं, जो अत्यंत पवित्र हैं, पुरुषार्थ को सिद्ध करने वाली हैं, उन तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणी को हमारा बारंबार प्रणाम है।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥

यह नवार्ण मंत्र माँ दुर्गा की तीनों शक्तियों (महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती) को जाग्रत करने वाला अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तुम कल्याणी हो महामाई (Tum Kalyani Ho Mahamai)
मुख्य देवी/देवता माँ दुर्गा / आदिशक्ति
मुख्य गायिका शहनाज़ अख्तर (Shahnaz Akhtar)
संगीतकार एजाज़ खान (Ajaz Khan)
भाषा हिंदी (खड़ी बोली)
भक्ति भाव समर्पण, श्रद्धा, वीर और शांत रस
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जगराता, मंगलवार/शुक्रवार पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन सुप्रसिद्ध भजन गायिका शहनाज़ अख्तर द्वारा गाया गया है, और इसका संगीत एजाज़ खान द्वारा तैयार किया गया है।

यह भजन माँ दुर्गा की महिमा, उनके कल्याणकारी रूप, दुष्टों के संहारक रूप और भक्तों के प्रति उनकी असीम करुणा को समर्पित है।

इस भजन के श्रवण से मन को शांति मिलती है, भय का नाश होता है, और साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा एवं आत्मविश्वास का संचार होता है।

हाँ, नवरात्रि के पावन दिनों में इस भजन का गायन और श्रवण अत्यंत लोकप्रिय और फलदायी माना जाता है।

"कल्याणी" का अर्थ है सबका मंगल और कल्याण करने वाली। माँ दुर्गा अपने शरण में आए भक्तों के सभी कष्टों को दूर कर उनका कल्याण करती हैं, इसलिए उन्हें कल्याणी कहा गया है।

इस भजन की भाषा सरल और सुबोध खड़ी बोली हिंदी है, जिससे आम जनमानस इसे आसानी से समझ और गा सकता है।

इस भजन में माँ के कई कल्याणकारी नामों जैसे कल्याणी, महामाई, मंगला गौरी और जगदम्बा का उल्लेख है, जो माँ के दिव्य स्वरूपों को दर्शाते हैं।

यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और निष्काम भक्ति ही जीवन के सभी संकटों से मुक्ति पाने का एकमात्र मार्ग है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की समीक्षा करते हुए हमारे विद्वानों ने इसके काव्यात्मक सौंदर्य, संगीत की लयबद्धता और इसके आध्यात्मिक प्रभाव को रेखांकित किया है। यह भजन न केवल एक कलात्मक कृति है, बल्कि यह करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र भी है। इसकी प्रस्तुति में जो भक्ति भाव है, वह आधुनिक युग में भी पारंपरिक मूल्यों को जीवंत बनाए रखने का कार्य करता है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों और उनकी महिमा का वर्णन।
  • सनातन भजन परंपरा: पारंपरिक लोक संगीत और आधुनिक भक्ति गीतों का संग्रह।
  • शहनाज़ अख्तर आधिकारिक डिस्कोग्राफी: भजन के मूल बोल और संगीत का संदर्भ।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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