Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरा हो जावे दीदार (Tera Ho Jave Deedar) - PT. RAVI SHARMA Devi Bhajan

पंडित रवि शर्मा द्वारा रचित 'तेरा हो जावे दीदार' देवी भजन यहाँ पढ़ें। माँ दुर्गा के दिव्य दर्शन और भक्ति भाव से भरपूर इस पावन भजन का आनंद लें।

PT. RAVI SHARMA Devi Bhajan

प्रकाशित: 2022-09 | श्रेणी: Devi Bhajan, Punjabi Devi Bhajan | स्वर एवं संगीत: Pt. Ravi Sharma

सनातन धर्म और शाक्त परंपरा में आदिशक्ति जगदम्बा माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती की उपासना का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। संगीत और स्वर के माध्यम से माँ भगवती को रिझाने की हमारी प्राचीन परंपरा रही है। प्रसिद्ध गायक, संगीतकार और गीतकार पंडित रवि शर्मा (Pt. Ravi Sharma) द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध यह पावन भजन "तेरा हो जावे दीदार" (Tera Ho Jave Deedar) माँ के दिव्य स्वरूप के दर्शन की अकुलाहट और अनन्य समर्पण को समर्पित है। पंजाबी और हिंदी मिश्रित भक्ति रस से ओतप्रोत यह भजन साधक के अंतःकरण को प्रदीप्त कर देता है। जब एक भक्त सच्चे हृदय से माँ के दीदार की पुकार लगाता है, तो जगत जननी अपने वात्सल्यमयी आंचल की छाया में उसे शरण देती हैं। यह भजन न केवल संगीतिक दृष्टि से मधुर है, बल्कि आध्यात्मिक रूप से साधक को एक उच्च कोटि की मानसिक शांति और भगवद्-भक्ति की ऊर्जा प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ मुखड़ा (Refrain) ॥

तेरा हो जावे दीदार, शेरावालीिये माँ,
साढ़े मन का मिट जावे अंधकार, शेरावालीिये माँ!
तेरे दर ते जो भी आंदा है, खाली मुड़ के ना जांदा है,
झोली भर दे भक्तां दी, शेरावालीिये माँ...

॥ प्रथम अंतरा (First Stanza) ॥

ऊंचे पहाड़ों विच तेरा दरबार सजदा,
झुके शीश आके हर इक यार सजदा।
मेहरां वाली हाथ सिर ते फेर दे तू आके,
चरणों विच बैंठे नूं गले नाल लाके।
सुण लै पुकार, शेरावालीिये माँ,
तेरा हो जावे दीदार, शेरावालीिये माँ...

॥ द्वितीय अंतरा (Second Stanza) ॥

दुःखियाें दे दुःख तू ही हरण वालीए,
कष्ट निवारे सब दे माँ तरण वालीए।
नाम तेरा जपिये ते बेड़ा पार होवे,
जिंदगी दा हर इक सपना साकार होवे।
कर दे बेड़ा पार, शेरावालीिये माँ,
तेरा हो जावे दीदार, शेरावालीिये माँ...

॥ तृतीय अंतरा (Third Stanza) ॥

पंडित रवि शर्मा तेरी महिमा गावे,
तेरे चरणों दी धूल माथे नाल लावे।
कृपा दी कोर साडे उत्ते बरसाई जा तू,
भक्ति दा रंग सानू चढ़ाई जा तू।
सुण लै पुकार, शेरावालीिये माँ,
तेरा हो जावे दीदार, शेरावालीिये माँ...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

पंडित रवि शर्मा द्वारा रचित इस अद्भुत देवी भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और भक्तिमय है। भजन के मुखड़े में भक्त माँ शेरावाली से प्रार्थना करता है कि हे माँ! मुझे आपके दिव्य दर्शन (दीदार) प्राप्त हो जाएं, जिससे मेरे जीवन और मन का सारा अंधकार हमेशा के लिए मिट जाए। सनातन संस्कृति में अंधकार अज्ञान और दुखों का प्रतीक है, और ज्ञान एवं प्रकाश की पुंज माँ दुर्गा के दीदार मात्र से साधक का हृदय आलोकित हो जाता है।

प्रथम अंतरे में माँ के त्रिकूट पर्वत पर स्थित दरबार और उसकी भव्यता का वर्णन है। कवि कहते हैं कि ऊंचे पहाड़ों पर सजा हुआ यह दरबार भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है, जहां हर श्रद्धालु अपना शीश झुकाता है। भक्त माँ से निवेदन करता है कि हे मेहरों वाली माँ! अपना वरद हस्त मेरे सिर पर फेर दें और मुझे अपने चरणों में शरण देकर गले से लगा लें।

द्वितीय और तृतीय अंतरे में माँ को दुःख-हर्ति और संकट-मोचनी के रूप में याद किया गया है। संसार के बंधनों और दुखों से तरने के लिए माँ का नाम ही एकमात्र नौका है। रचनाकार पंडित रवि शर्मा स्वयं को माँ का अकिंचन सेवक बताते हुए उनके चरणों की धूल को अपने माथे का आभूषण बनाते हैं और जीवनभर भक्ति का रंग चढ़ाने की याचना करते हैं। यह भाव शुद्ध शरणागति (Surrender) का परिचायक है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • आदिशक्ति स्वरूप: भजन प्रत्यक्ष रूप से माँ दुर्गा के 'शेरावाली' (सिंह पर विराजमान) स्वरूप को समर्पित है, जो शक्ति, साहस और निर्भयता की प्रतीक हैं।
  • संगीत और शब्द संयोजन: पंडित रवि शर्मा की अनूठी शैली इस भजन को संगीतिक और काव्यात्मक रूप से अत्यंत समृद्ध बनाती है।
  • भक्ति का भाव: यह भजन साधक के भीतर अहंकार को मिटाकर दीनता और विनय का भाव जगाता है।
  • मानसिक शांति: नियमित रूप से इस भजन का श्रवण करने से मन की चंचलता शांत होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी भजनों के गायन और स्मरण के लिए ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल 4:00 से 6:00 बजे) और प्रदोष काल (संध्या समय) को अत्यंत उत्तम माना गया है। नवरात्रि के नौ दिनों में, मंगलवार या शुक्रवार को विशेष रूप से इस भजन का पाठ और गायन करना अत्यंत फलदायी होता है।

  1. स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. माता के मंदिर या घर के पूजा स्थल पर घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
  3. माँ दुर्गा के चित्र या मूर्ति के समक्ष पुष्प अर्पित करें।
  4. सच्चे भाव और एकाग्रता के साथ इस भजन का उच्चारण या श्रवण करें।

आप माता की अन्य स्तुतियों जैसे श्री दुर्गा चालीसा और अम्बे तू है जगदंबे काली आरती के साथ भी इस भजन को अपनी पूजा पद्धति में शामिल कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की मुख्य आराध्य देवी माँ दुर्गा (शेरावाली) हैं, जिन्हें आदिशक्ति, भवानी और जगदम्बा भी कहा जाता है। सनातन धर्म में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। इस भजन के रचयिता, संगीतकार और गायक पंडित रवि शर्मा हैं, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी और भक्तिपूर्ण रचनाओं से माँ के दरबार में अपनी अनन्य हाजिरी लगाई है। उनकी यह रचना पंजाब और उत्तर भारत के लोक-भक्ति संगीत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन हिंदी और पंजाबी की सुमधुर लोक-बोली (साझा ग्रामीण एवं शहरी परिवेश की भाषा) में रचा गया है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'दीदार', 'मेहरां', 'दर ते', 'आंदा है', और 'मुड़ के' पंजाबी भक्ति संगीत की लोक-सुभग शैली को दर्शाते हैं। काव्य शैली अत्यंत सरल, सहज और हृदयस्पर्शी है, जिसे सामान्य से सामान्य भक्त भी सरलता से गा सकता है। अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग इस भजन की सुंदरता को और बढ़ा देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अनन्य शरणागति: जीवन की सभी कठिनाइयों के बीच ईश्वर और माता के चरणों में पूर्ण समर्पण ही दुखों का एकमात्र निवारण है।
  • अहंकार का त्याग: शीश झुकाने और चरणों की धूल को माथे से लगाने का भाव व्यक्ति के भीतर से अहंकार को समाप्त करता है।
  • आशा और विश्वास: विपरीत परिस्थितियों में भी माँ की कृपा पर अटूट विश्वास रखना ही सच्चे भक्त का लक्षण है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
दीदार दर्शन माता के दिव्य स्वरूप को प्रत्यक्ष देखने की लालसा
शेरावालीिये शेर पर सवारी करने वाली माँ दुर्गा का प्रसिद्ध संबोधन
मेहरां वाली कृपा करने वाली माता का वात्सल्य और करुणापूर्ण स्वभाव
दर ते दरबार में / द्वार पर शरणार्थी बनकर माता के पास पहुँचना
चरणों की धूल पादपद्म की रज परम पवित्रता और पूर्ण विनम्रता का प्रतीक

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरा हो जावे दीदार (Tera Ho Jave Deedar)
आराध्य देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा (शेरावाली)
गायक एवं संगीतकार पंडित रवि शर्मा (Pt. Ravi Sharma)
गीतकार पंडित रवि शर्मा
भाषा हिंदी / पंजाबी मिश्रित लोक-भक्ति भाषा
संगीत लेबुल टी-सीरीज़ (T-Series)
मुख्य भाव समर्पण, दर्शन की लालसा और करुणा की प्रार्थना
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी और दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध देवी भजन के गायक, संगीतकार और गीतकार पंडित रवि शर्मा (Pt. Ravi Sharma) हैं। इसे टी-सीरीज़ (T-Series) संगीत लेबल के तहत जारी किया गया है।

इस भजन में आदिशक्ति जगदम्बा माँ दुर्गा, जिन्हें 'शेरावाली' और 'मेहरां वाली' भी कहा जाता है, की महिमा और उनके दरबार का वर्णन किया गया है।

यह भजन शारदीय और चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, मंगलवार/शुक्रवार की पूजा तथा दैनिक संध्या वंदन के समय सुनने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

यह भजन हिंदी और पंजाबी के लोक-शब्दों के सुंदर मिश्रण से तैयार किया गया है, जो सीधे श्रोता के हृदय को स्पर्श करता है।

हाँ, इसकी लय और धुन बहुत सरल एवं कर्णप्रिय है, जिससे संगीत सीखने वाले या कीर्तन करने वाले इसे आसानी से गा सकते हैं।

माता की सच्ची आराधना से भक्तों के समस्त कष्ट दूर होते हैं, जीवन में साहस, शक्ति, सुख-शांति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख भगवती दुर्गा की महिमा और पंडित रवि शर्मा द्वारा रचित भजन के आध्यात्मिक एवं साहित्यिक मूल्यांकन हेतु तैयार किया गया है। इसमें प्रयुक्त सभी बोल, भावार्थ और सांस्कृतिक संदर्भ पारंपरिक और प्रामाणिक मान्यताओं पर आधारित हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ

  • सनातन शाक्त परंपरा एवं देवी भागवत पुराण
  • T-Series Devi Bhajan Archives & Original Album Release (Tera Ho Jave Deedar)
  • लोक-भक्ति संगीत एवं पंजाबी देवी गीत संग्रह

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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