radha bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

शिव शंकर को जिसने पूजा (Shiv Shankar Ko Jisne Pooja) - Anuradha Paudwal Shiv Aaradhana

अनुराधा पौडवाल द्वारा गाए प्रसिद्ध शिव भजन 'शिव शंकर को जिसने पूजा' का आनंद लें। महादेव की महिमा और भक्ति से ओत-प्रोत इस भजन का भावार्थ यहाँ पढ़ें।

भजन (Bhajan)

Anuradha Paudwal Shiv Aaradhana

लेखक: पारंपरिक शिव भजन | स्वर: अनुराधा पौडवाल जी | श्रेणी: शिव आराधना एवं भक्ति संगीत

प्रसिद्ध पार्श्वगायिका अनुराधा पौडवाल की सुमधुर वाणी में गाया गया यह लोकप्रिय भजन "शिव शंकर को जिसने पूजा (Shiv Shankar Ko Jisne Pooja)" देवाधिदेव महादेव भगवान शिव की महिमा, शरणागत वत्सल स्वभाव और उनकी अराधना के अनंत फलों को समर्पित एक अत्यंत पावन और भावपूर्ण रचना है। सनातन संस्कृति में भगवान शिव को 'आशुतोष' कहा जाता है, जिसका अर्थ है जो अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं। इस भजन के माध्यम से साधক के हृदय में महादेव के प्रति अटूट विश्वास, समर्पण और परम भक्ति का भाव जागृत होता है। सावन मास, महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत तथा सोमवार के पावन दिनों में इस भजन का श्रवण और गायन भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और भगवान शिव का सामीप्य प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| स्थायी (मखड़ा) ||

शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका हो गया बेड़ा पार।

बम बम भोले, दम दम डमरू, गाए जा तू बारम्बार॥

|| अंतरा 1 ||

जटा में जिनकी गंगा विराजे, चन्द्रमा भाल सुहाए।

भक्तों के संकट हरने को, डमरੂ बजाते आएं।

चरणों में जो झुक जाए, पावे भवसागर से पार॥
शिव शंकर को जिसने पूजा...

|| अंतरा 2 ||

भस्म रमाने वाले भोले, भूतनाथ कहलाए।

विष को पीकर नीलकंठ प्रभु, जगत को मुक्ति दिलाए।

उनकी महिमा अपरम्पार, गाए जा तू बारम्बार॥
शिव शंकर को जिसने पूजा...

|| अंतरा 3 ||

कैलाश पर्वत पर जिनका, डेरा अमर ठिकाना।

शिव की भक्ति के आगे, ये जग सारा दीवाना।

अनुराधा गाए गुणगान, भोले कर दे बेड़ा पार॥
शिव शंकर को जिसने पूजा...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

प्रस्तुत भजन "शिव शंकर को जिसने पूजा" के माध्यम से रचनाकार और गायिका अनुराधा पौडवाल जी ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि जो मनुष्य सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करता है, उसका जीवन न केवल इस लोक में सफल हो जाता है, बल्कि वह भवसागर से भी पार हो जाता है।

भजन की पंक्तियों में महादेव के विभिन्न स्वरूपों और उनके गुणों का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। भगवान शिव को 'आशुतोष' और 'भोलेनाथ' कहा गया है क्योंकि वे अपने भक्तों की छोटी सी पूजा—एक लोटा जल, बेलपत्र और सच्चे मन से लिए गए नाम मात्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। जब समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष निकला, तो संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया और 'नीलकंठ' कहलाए। इसी प्रकार, उनके माथे पर सुशोभित चंद्र और उनकी जटाओं से बहने वाली मां गंगा यह दर्शाती हैं कि प्रकृति और ब्रह्मांड की समस्त ऊर्जा उन्हीं में समाहित है।

भजन का केंद्रीय भाव यह है कि अहंकार और सांसारिक मोह-माया को त्यागकर जो व्यक्ति कैलाशपति की शरण में जाता है, उसके सारे कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं। यह भजन साधक को यह प्रेरणा देता है कि जीवन की कठिनाइयों से घबराने के बजाय भगवान शिव के चरणों में ध्यान लगाना चाहिए।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति रस से ओतप्रोत: यह भजन साधक के मन में शिवभक्ति और वैराग्य के भाव को प्रबल करता है।
  • दिव्य स्वर: प्रसिद्ध भजन गायिका अनुराधा पौडवाल की समर्पित और शांत आवाज इसे सुनने वाले के लिए एक ध्यान (Meditation) का अनुभव बनाती है।
  • मानसिक शांति: इस भजन का निरंतर श्रवण करने से तनाव, भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • धार्मिक अवसरों पर उपयोग: सावन सोमवार, महाशिवरात्रि और रुद्राभिषेक के दौरान इस भजन को विशेष रूप से बजाया और गाया जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भगवान शिव की आराधना और उनके भजनों का गायन किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष कालखंडों में इसका फल कई गुना बढ़ जाता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातः काल: सुबह स्नान के पश्चात शिव मंदिर में या घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित कर इस भजन को सुनना अत्यंत लाभकारी है।
  • प्रदोष काल: सूर्यास्त के समय (प्रदोष काल) शिव आराधना का विशेष महत्व है। इस समय शिव स्तोत्र या भजनों का पाठ मन को शांति देता है।
  • सोमवार और सावन मास: प्रत्येक सोमवार और विशेषकर पवित्र सावन मास में इस भजन का नियमित श्रवण करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के मुख्य आराध्य भगवान शिव (महादेव, शंकर, भोलेनाथ) हैं, जो सनातन धर्म में संहारक और पुनरुत्थान के देवता माने जाते हैं। उनके साथ ही माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय का परिवार सम्पूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण का प्रतीक है। इस भजन को अपनी अद्वैत और भावपूर्ण शैली में जीवंत करने वाली लोकप्रिय गायिका अनुराधा पौडवाल हैं, जिन्होंने भारतीय भक्ति संगीत को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। उनकी आवाज में माँ दुर्गा, श्री कृष्ण और शिवजी के अनेक भजन देश-विदेश में लोकप्रिय हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भजन परंपरा में लोक धुनों और शास्त्रीय संगीत का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। "शिव शंकर को जिसने पूजा" भजन को पारंपरिक शिव स्तुति और लोकगीत की शैली पर आधारित किया गया है। अनुराधा पौडवाल जी ने अपने भजनों के माध्यम से शास्त्रीय जटिलताओं को दूर कर इसे सामान्य जनमानस के लिए सुलभ और कर्णप्रिय बनाया है। यही कारण है कि यह भजन हर आयु वर्ग के लोगों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और ब्रज-अवधी मिश्रित लोक बोलियों के शब्दों से सजा हुआ है। इसमें प्रयुक्त शब्द जैसे 'बेड़ा पार', 'भवसागर', 'अपरम्पार', और 'भस्म रमाने वाले' जनसामान्य के हृदय को तुरंत स्पर्श करते हैं। भजन की लय तालबद्ध है, जिसे आसानी से गाया जा सकता है। इसमें रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जो इसकी काव्य सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के लिए एक गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है:

  • समर्पण का भाव: जिस प्रकार शिवजी ने विष को पीकर संसार की रक्षा की, उसी प्रकार मनुष्य को जीवन के विषैले अनुभवों (कष्टों और दुखों) को सहन कर धैर्य रखना चाहिए।
  • अहंकार का त्याग: भस्म रमाए रहने वाले भोलेनाथ यह सिखाते हैं कि यह शरीर नश्वर है, अतः भौतिक वस्तुओं का अहंकार नहीं करना चाहिए।
  • नियमित स्मरण: कठिनाइयों में भी ईश्वर का नाम (बम बम भोले) नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि वही संकटों से पार लगाते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल अर्थ संदर्भ / भावार्थ
बेड़ा पार संकटों से मुक्ति / सफलता जीवन रूपी भवसागर से पार होना
भवसागर संसार रूपी समुद्र जन्म-मृत्यु का चक्र
नीलकंठ नीले कंठ वाले विष पान करने के कारण भगवान शिव का नाम
अपरम्पार असीम / जिसकी कोई सीमा न हो भगवान शिव की महिमा और शक्ति की विशालता

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"शिव शंकर को जिसने पूजा, उसका हो गया बेड़ा पार।"
भावार्थ: जो मनुष्य भगवान शिव की सच्ची श्रद्धा से पूजा करता है, उसके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और वह मोक्ष को प्राप्त होता है।

"जटा में जिनकी गंगा विराजे, चन्द्रमा भाल सुहाए।"
भावार्थ: जिनकी जटाओं से मां गंगा प्रवाहित होती हैं और जिनके ललाट पर चंद्रमा सुशोभित होता है, ऐसे शिव जी अलौकिक हैं।

"विष को पीकर नीलकंठ प्रभु, जगत को मुक्ति दिलाए।"
भावार्थ: संसार की भलाई के लिए जिन्होंने हलाहल विष को अपने गले में रोक लिया और नीलकंठ कहलाए, वे ही जगत के उद्धारकर्ता हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

महामृत्युंजय मंत्र - शिव आराधना का सबसे शक्तिशाली मंत्र

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि॥

शिव स्तुति - भगवान शिव के ध्यान का पावन श्लोक

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम शिव शंकर को जिसने पूजा (Shiv Shankar Ko Jisne Pooja)
गायक / कलाकार अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal)
आराध्य देव भगवान शिव (महादेव / भोलेनाथ)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
भक्ति भाव समर्पण, श्रद्धा, शांति और आनंद
उपयुक्त अवसर सावन सोमवार, महाशिवरात्रि, दैनिक पूजा, सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. "शिव शंकर को जिसने पूजा" भजन किसने गाया है?

यह प्रसिद्ध भजन सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका अनुराधा पौडवाल जी द्वारा गाया गया है।

Q2. इस भजन को सुनने का सबसे उत्तम समय कौन सा है?

इस भजन को प्रातः काल, प्रदोष काल, अथवा सोमवार और सावन मास के दौरान सुनना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।

Q3. भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

महामृत्युंजय मंत्र ("ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...") या सरल पंचाक्षर मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जप करना चाहिए।

Q4. क्या यह भजन मानसिक शांति के लिए मददगार है?

हाँ, अनुराधा पौडवाल की शांत आवाज में यह शिव भजन मन को एकाग्र करने और तनाव कम करने में बहुत सहायक है।

Q5. भगवान शिव को 'नीलकंठ' क्यों कहा जाता है?

समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को संसार की रक्षा के लिए जब भगवान शिव ने अपने कंठ में रोक लिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया, तब से उन्हें 'नीलकंठ' कहा गया।

Q6. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

भजन का मुख्य संदेश यह है कि भगवान शिव की शरण में जाने वाले भक्त के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Q7. सावन मास में शिव आराधना का क्या महत्व है?

सावन मास भगवान शिव को अति प्रिय है। इस मास में शिव की पूजा और अभिषेक करने से विशेष मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Q8. इस भजन को कहाँ सुना जा सकता है?

यह भजन विभिन्न धार्मिक ऑडियो प्लेटफॉर्म्स, यूट्यूब और Bhaktilok.in पर लिरिक्स के साथ उपलब्ध है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

प्रस्तुत सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसका उद्देश्य पाठकों को भगवान शिव की महिमा और इस लोकप्रिय भजन के आध्यात्मिक अर्थ से अवगत कराना है। सभी तथ्य पारंपरिक स्रोतों और शिव पुराण के संदर्भों पर आधारित हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण एवं लिंग पुराण के कथा संदर्भ
  • पारंपरिक सनातन भक्ति संगीत एवं लोक साहित्य
  • अनुराधा पौडवाल शिव भजन संग्रह

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!