"पूजा के समान लाईदs सजनवा (Puja Ke Saaman Laayid Sajanava)" भोजपुरी लोक-संस्कृति और मातृ-शक्ति की आराधना का एक अत्यंत मधुर और भावपूर्ण देवी गीत है। सुप्रसिद्ध गायिका उजाला उपाध्याय की सुरीली आवाज में सजा यह भजन शारदीय और चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर देवी भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इस गीत में एक समर्पित पत्नी अपने पति (सजनवा) से आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए आवश्यक पवित्र पूजन सामग्री लाने का सस्नेह आग्रह करती है। यह गीत केवल एक पारंपरिक लोकगीत नहीं है, बल्कि यह सनातन हिंदू धर्म में गृहस्थ जीवन और आध्यात्मिक कर्तव्यों के सुंदर समन्वय को दर्शाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस गीत के संपूर्ण बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों का रसास्वादन करेंगे।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
पूजा के समान लाईदs सजनवा
(मुखड़ा)
पूजा के समान लाईदs सजनवा, मैया के मंदिरिया हम जाइब ना।
पूजा के समान लाईदs सजनवा, मैया के मंदिरिया हम जाइब ना।
मैया के मंदिरिया हम जाइब ना, मैया के चरनिया शीश नवाइब ना।
पूजा के समान लाईदs सजनवा, मैया के मंदिरिया हम जाइब ना।
(अंतरा 1)
लाल लाल चुनरी अउर नारियल ले अइहा,
मैया जी के सोरहों सिंगारवा ले अइहा।
चुनरी चढ़ाई तोके अरज सुनाईब ना,
मैया के मंदिरिया हम जाइब ना।
पूजा के समान लाईदs सजनवा, मैया के मंदिरिया हम जाइब ना।
(अंतरा 2)
रोरी अउर चंदन संग कपरवा ले अइहा,
मैया जी के भोगवा कइलीं तैयरवा ले अइहा।
आरती उतारि मैया के भजनवा हम गाइबी ना,
मैया के मंदिरिया हम जाइब ना।
पूजा के समान लाईदs सजनवा, मैया के मंदिरिया हम जाइब ना।
(अंतरा 3)
महेश परदेशी संग सिंटू अविनाश हो,
मैया जी के चरन में बाड़े विश्वास हो।
उजाला के संग तोके दरस कराइब ना,
मैया के मंदिरिया हम जाइब ना।
पूजा के समान लाईदs सजनवा, मैया के मंदिरिया हम जाइब ना।
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह देवी गीत भोजपुरी भाषी समाज की धार्मिक आस्था और पारिवारिक ताने-बाने को बहुत ही खूबसूरती से प्रदर्शित करता है। गीत का भावार्थ अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी है:
मुखड़ा का भावार्थ
गीत की शुरुआत में नवविवाहिता या पत्नी अपने पति से अत्यंत आदर और प्रेम के साथ कहती है कि हे प्रियतम (सजनवा)! माता रानी की आराधना का पावन समय आ गया है। आप बाजार जाकर पूजा की सभी आवश्यक सामग्रियां लाकर मुझे दे दीजिए, क्योंकि मुझे माता के मंदिर जाना है। वहां जाकर मैं जगत जननी मां दुर्गा के चरणों में अपना शीश झुकाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहती हूं।
प्रथम अंतरा का भावार्थ
प्रथम अंतरे में पत्नी पूजा सामग्री की सूची बताते हुए कहती है कि आप मेरे लिए लाल रंग की सुंदर चुनरी और नारियल लेकर आइएगा। इसके साथ ही माता रानी के लिए 'सोलह श्रृंगार' की सभी वस्तुएं (जैसे सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, आलता आदि) भी जरूर लाइएगा। मैं माता को यह चुनरी और श्रृंगार अर्पित करूंगी और उनके समक्ष अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करूंगी।
द्वितीय अंतरा का भावार्थ
दूसरे अंतरे में वह कहती है कि पूजा के लिए रोली (कुमकुम), चंदन और कपूर भी लेकर आइएगा। मैंने माता रानी को अर्पित करने के लिए घर पर ही शुद्ध और सात्विक भोग (प्रसाद) तैयार कर लिया है। मंदिर पहुंचकर मैं कपूर से माता की पावन आरती उतारूंगी और भक्ति भाव से सराबोर होकर उनके सुंदर भजनों का गायन करूंगी।
तृतीय अंतरा का भावार्थ
अंतिम अंतरे में गीतकार महेश परदेशी और संगीतकार सिंटू-अविनाश माता के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हैं। पत्नी अपने पति से कहती है कि माता के चरणों में हमारा दृढ़ विश्वास है। मैं स्वयं तो माता के दर्शन करूंगी ही, साथ ही आपको भी माता रानी के दिव्य दर्शन कराकर धन्य करूंगी।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस देवी गीत की मुख्य भावना 'दाम्पत्य भक्ति' (Conjugal Devotion) और 'समर्पण' है। भारतीय सनातन परंपरा में पति-पत्नी को 'अर्धांगिनी' और 'सहधर्मी' माना गया है, जिसका अर्थ है कि धर्म के मार्ग पर दोनों को साथ मिलकर चलना चाहिए। यह गीत इसी सुंदर संदेश को प्रसारित करता है:
- पारिवारिक सामंजस्य: गीत में पत्नी अपने पति को पूजा की तैयारी में शामिल करती है, जो यह दर्शाता है कि कोई भी धार्मिक अनुष्ठान परिवार के सहयोग के बिना अधूरा है।
- मातृ-शक्ति के प्रति श्रद्धा: मां दुर्गा को सृष्टि की आदि शक्ति माना गया है। उनके प्रति अटूट विश्वास ही जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है।
- सरल और सात्विक जीवन: लोकगीतों के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि ईश्वर की आराधना के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं है, बल्कि श्रद्धापूर्वक अर्पित की गई चुनरी और नारियल भी मां को प्रसन्न कर देते हैं।
गीत की जानकारी | Song Information
| विवरण (Parameter) | जानकारी (Details) |
|---|---|
| गीत का नाम (Song Name) | पूजा के समान लाईदs सजनवा (Puja Ke Saaman Laayid Sajanava) |
| गायिका (Singer) | उजाला उपाध्याय (Ujala Upadhyay) |
| गीतकार (Lyricist) | महेश परदेशी (Mahesh Pardeshi) |
| संगीतकार (Music Composer) | सिंटू कुमार - अविनाश (Sintu Kumar - Avinash) |
| श्रेणी (Category) | भोजपुरी देवी गीत (Bhojpuri Devi Geet) / भक्ति गीत |
| भाषा (Language) | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| म्यूजिक लेबल (Label) | तरंग म्यूजिक (Tarang Music) |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
इस गीत की सफलता के पीछे इसके कलाकारों का उत्कृष्ट योगदान है:
- उजाला उपाध्याय (Ujala Upadhyay): अपनी सुरीली और खनकती आवाज के लिए जानी जाने वाली उजाला उपाध्याय ने इस भजन को बहुत ही मधुरता से गाया है। उनकी आवाज में जो भक्ति और वात्सल्य का भाव है, वह सीधे श्रोताओं के दिलों को छू लेता है।
- महेश परदेशी (Mahesh Pardeshi): इन्होंने इस गीत के बोल लिखे हैं। इनके शब्द बहुत ही सरल, पारंपरिक और आम बोलचाल की भोजपुरी के हैं, जिससे हर गृहस्थ परिवार इस गीत से जुड़ाव महसूस करता है।
- सिंटू कुमार और अविनाश (Sintu Kumar & Avinash): इन्होंने इस गीत को पारंपरिक लोक वाद्यों और आधुनिक संगीत के सुंदर मिश्रण के साथ संगीतबद्ध किया है, जो इसे सुनने में बेहद कर्णप्रिय बनाता है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| सजनवा (Sajanava) | पति / प्रियतम | पत्नी द्वारा पति को आदरपूर्वक संबोधित करने के लिए प्रयुक्त शब्द। |
| मंदिरिया (Mandiriya) | मंदिर / देवालय | माता रानी का पवित्र मंदिर। |
| सोरहों सिंगारवा (Sorahon Singarwa) | सोलह श्रृंगार | देवी मां को अर्पित की जाने वाली सुहाग की वस्तुएं। |
| नवाइब (Nawaib) | झुकाना / नमन करना | माता के चरणों में सिर झुकाकर प्रणाम करना। |
| कपरवा (Kaparwa) | कपूर | आरती के समय प्रयुक्त होने वाला पवित्र कपूर। |
| भोगवा (Bhogwa) | प्रसाद / नैवेद्य | माता रानी के लिए घर पर तैयार किया गया सात्विक भोजन। |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
भोजपुरी भाषी क्षेत्रों (जैसे बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड) में लोकगीतों का धार्मिक अनुष्ठानों में बहुत बड़ा स्थान है। "पूजा के समान लाईदs सजनवा" जैसे गीत केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि ये हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं:
१. लोक-परंपरा का संरक्षण: इस गीत में जिन सामग्रियों (चुनरी, नारियल, रोली, चंदन, कपूर) का उल्लेख है, वे सदियों से हिंदू पूजा पद्धति का मुख्य हिस्सा रही हैं। लोकगीतों के माध्यम से युवा पीढ़ी को इन परंपराओं की जानकारी मिलती है।
२. नारी शक्ति का सम्मान: सनातन धर्म में स्त्री को 'गृहलक्ष्मी' कहा गया है। इस गीत में पत्नी का अपने पति को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना यह दर्शाता है कि भारतीय समाज में महिलाएं ही धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की मुख्य संरक्षिका हैं।
३. सामूहिक उत्सव की भावना: नवरात्रि और छठ पूजा जैसे त्योहारों के दौरान जब यह गीत बजता है, तो पूरे वातावरण में एक सकारात्मक ऊर्जा और भक्तिमय माहौल का संचार होता है।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
यह गीत हमें कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक और आध्यात्मिक सीख देता है:
- सहयोग की भावना: सुखी वैवाहिक जीवन की नींव आपसी सहयोग पर टिकी है। चाहे वह घर के कार्य हों या ईश्वर की आराधना, दोनों की भागीदारी आवश्यक है।
- श्रद्धा और विश्वास: ईश्वर के प्रति हमारा विश्वास अडिग होना चाहिए। जब हम सच्चे मन से माता के चरणों में जाते हैं, तो हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- शुद्धता और सात्विकता: पूजा के लिए शुद्ध सामग्री और सात्विक भोग तैयार करना यह सिखाता है कि हमें अपने विचारों और कर्मों में भी शुद्धता रखनी चाहिए।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यद्यपि माता रानी के भजनों को किसी भी समय सुना जा सकता है, लेकिन इस विशिष्ट गीत को सुनने और गाने के कुछ विशेष अवसर हैं:
- शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान सुबह और शाम के समय घरों और पूजा पंडालों में यह गीत अत्यंत श्रद्धा के साथ बजाया जाता है।
- छठ पूजा एवं देवी जागरण: बिहार और यूपी में आयोजित होने वाले माता के जगराते और चौकियों में इस गीत की प्रस्तुति भक्तों को झूमने पर मजबूर कर देती है।
- नित्य सुबह की प्रार्थना: गृहणियां अपने दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ करने के लिए सुबह के समय इस मधुर भजन को सुनना पसंद करती हैं।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| मुख्य बिंदु | संक्षिप्त विवरण |
|---|---|
| मुख्य विषय | पति से पूजा सामग्री लाने का अनुरोध और माता की महिमा |
| मुख्य देवी | आदिशक्ति मां दुर्गा / देवी भगवती |
| संगीत शैली | पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत (Devotional Folk) |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण और दांपत्य प्रेम |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, मंगलवार, शुक्रवार, देवी पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस भोजपुरी देवी गीत के बोलों की शुद्धता, इसके सांस्कृतिक संदर्भों और व्याकरणिक शुद्धता की गहन जांच की है। यह गीत भोजपुरी लोक-संस्कृति में रचे-बसे दांपत्य जीवन और ईश्वरीय भक्ति के अनूठे संगम को बहुत ही सादगी के साथ प्रस्तुत करता है। उजाला उपाध्याय की गायकी ने इस पारंपरिक भाव को जीवंत कर दिया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- तरंग म्यूजिक (Tarang Music) आधिकारिक भोजपुरी भक्ति एल्बम।
- भोजपुरी लोक साहित्य एवं पारंपरिक देवी गीत संग्रह।
- सनातन धर्म की गृहस्थ आश्रम नियमावली एवं पूजन पद्धति।
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