"पर्वत विशाल है तेरा (Parvat Vishal Hai Tera)" माँ भगवती के चरणों में समर्पित एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी देवी भजन है। सुप्रसिद्ध गायक और संगीतकार राम शंकर की दिव्य आवाज में गाया गया यह भजन भक्तों को माँ दुर्गा और वैष्णो देवी की पावन त्रिकूट पर्वत की चेतना से जोड़ता है। इस भजन में शरणागति, भक्ति, और माँ की महिमा का ऐसा सुंदर समन्वय है जो श्रोताओं के अंतःकरण में श्रद्धा का संचार करता है। जब कोई भक्त सांसारिक चिंताओं से थककर माँ के दरबार की ओर देखता है, तो उसे इस भजन के माध्यम से असीम शांति और संबल प्राप्त होता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, जगराता, और माता की चौकी जैसे पावन अवसरों पर गाया जाता है, जहाँ इसकी गूंज से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
पर्वत विशाल है तेरा (Parvat Vishal Hai Tera)
मुखड़ा:
पर्वत विशाल है तेरा, ऊँचा मुकाम है।
मैया शेरावालिये, तुझको प्रणाम है॥
पर्वत विशाल है तेरा, ऊँचा मुकाम है।
मैया शेरावालिये, तुझको प्रणाम है॥
अंतरा 1:
तेरी गुफा के आगे, बहती है गंगा धारा।
दर्शन को तेरे मैया, आता है जग ये सारा॥
भक्तों की भीड़ भारी, सुबह और शाम है।
मैया शेरावालिये, तुझको प्रणाम है॥
अंतरा 2:
लाल चुनरी चढ़े तुझे, नारियल की भेंट लाए।
सच्चे हृदय से जो भी, तेरे ही दर पे आए॥
उसकी झोली को भरना, मैया तेरा काम है।
मैया शेरावालिये, तुझको प्रणाम है॥
अंतरा 3:
राम शंकर भी मैया, तेरे ही गुण गाए।
राजदेव भी चरणों में, अपना शीश झुकाए॥
तेरी दया से चलता, जग का ये काम है।
मैया शेरावालिये, तुझको प्रणाम है॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल भाव पूर्ण समर्पण और माँ आदिशक्ति की विराटता को स्वीकार करना है। "पर्वत विशाल है तेरा" केवल भौतिक पर्वत की ऊँचाई का वर्णन नहीं है, बल्कि यह माँ की अनंत महिमा, उनके उच्च आध्यात्मिक स्तर और उनकी असीम दया का प्रतीक है। पर्वत की विशालता यह दर्शाती है कि माँ का हृदय कितना बड़ा है, जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड समाया हुआ है।
भजन के माध्यम से भक्त कहता है कि हे माँ, आपका निवास स्थान अत्यंत ऊँचा है, जहाँ तक पहुँचने के लिए मनुष्य को अपने अहंकार को छोड़ना पड़ता है। आपकी पावन गुफा से बहने वाली गंगा धारा हमारे पापों का नाश करती है और हमारे मन को पवित्र करती है। जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक लाल चुनरी और नारियल लेकर आपके दरबार में आता है, आप उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि माँ के दरबार में अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं है; वहाँ केवल सच्चे प्रेम और श्रद्धा की आवश्यकता होती है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन कई दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है:
- आध्यात्मिक ऊँचाई का प्रतीक: पर्वत को हिंदू दर्शन में साधना और स्थिरता का प्रतीक माना गया है। माँ का पर्वत पर निवास करना यह दर्शाता है कि ईश्वर को पाने के लिए हमें अपनी चेतना को ऊँचा उठाना होगा।
- सरलता और सुगमता: भजन के शब्द अत्यंत सरल हैं, जिससे कोई भी सामान्य भक्त इसे आसानी से गा और समझ सकता है।
- सामूहिक गायन के अनुकूल: इसकी लय और ताल ऐसी है कि यह सामूहिक कीर्तन और जगराते में भक्तों को झूमने पर विवश कर देती है।
- मनोवैज्ञानिक शांति: इस भजन के श्रवण से मन का तनाव दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि माँ की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित समय अत्यंत शुभ माने गए हैं:
- नवरात्रि महोत्सव: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में इस भजन का श्रवण विशेष फलदायी होता है।
- प्रातःकाल की पूजा: सुबह के समय माँ की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाकर इस भजन को सुनने से दिन की शुरुआत सकारात्मक होती है।
- मंगलवार और शुक्रवार: ये दोनों दिन देवी साधना के लिए समर्पित हैं, अतः इन दिनों सामूहिक संकीर्तन में इसे अवश्य शामिल करना चाहिए।
- गायन की विधि: शांत चित्त होकर, हाथ जोड़कर या ताली सेवा करते हुए माँ के स्वरूप का ध्यान करते हुए इस भजन का गायन करना चाहिए।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से माँ दुर्गा के पहाड़ों वाले स्वरूप (विशेषकर माँ वैष्णो देवी) को समर्पित है। सनातन धर्म में माँ वैष्णो देवी को महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का एकीकृत स्वरूप माना जाता है। वे त्रिकूट पर्वत पर एक पवित्र गुफा में पिंडियों के रूप में विराजमान हैं। इस भजन में गायक राम शंकर और गीतकार राजदेव ने माँ के इसी कृपालु स्वरूप की वंदना की है, जो अपने भक्तों के कष्टों को हरने वाली हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
इस भजन की रचना आधुनिक भक्ति संगीत के दौर में की गई थी। इसके गायक और संगीतकार राम शंकर हैं, जिन्होंने अपनी अनूठी शैली और बुलंद आवाज से इसे जीवंत बना दिया है। इसके गीतकार राजदेव हैं, जिन्होंने बहुत ही सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों का चयन किया है। यह भजन "पर्वत विशाल है तेरा" एल्बम से है, जो रिलीज होते ही देवी भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गया था। इसकी पृष्ठभूमि उत्तर भारतीय देवी मंदिरों की यात्रा और वहाँ के भक्तिमय वातावरण से प्रेरित है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें लोक भाषा के शब्दों का सुंदर मिश्रण है। इसकी काव्य शैली "प्रार्थना" और "स्तुति" के रूप में है। इसमें प्रयुक्त अलंकार और रूपक जैसे "गंगा धारा", "लाल चुनरी", और "ऊँचा मुकाम" माँ की दिव्यता को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत करते हैं। इसकी लयबद्धता और अंतरे की बनावट ऐसी है कि यह सीधे हृदय को स्पर्श करती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:
- अहंकार का त्याग: ऊँचे पर्वत पर चढ़ने के लिए हमें भारी सामान छोड़ना पड़ता है, उसी प्रकार ईश्वर तक पहुँचने के लिए हमें अपने अहंकार का बोझ छोड़ना होगा।
- धैर्य और दृढ़ता: पर्वत की कठिन चढ़ाई हमें सिखाती है कि जीवन के संघर्षों में धैर्य बनाए रखना चाहिए, क्योंकि अंत में माँ की कृपा का सुंदर फल मिलता है।
- पवित्रता: गंगा धारा का उल्लेख हमें अपने विचारों और कर्मों को पवित्र रखने की प्रेरणा देता है।
- निस्वार्थ समर्पण: माँ के चरणों में शीश झुकाना यह दर्शाता है कि हमें अपनी बुद्धि और कर्मों को ईश्वर को समर्पित कर देना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| विशाल | बहुत बड़ा, अनंत | माँ की असीम दया और ब्रह्मांडीय स्वरूप का प्रतीक। |
| मुकाम | निवास स्थान, लक्ष्य | आध्यात्मिक चेतना का सर्वोच्च शिखर। |
| गंगा धारा | पवित्र नदी गंगा का प्रवाह | मन और अंतःकरण को शुद्ध करने वाली भक्ति। |
| लाल चुनरी | सौभाग्य और शक्ति का प्रतीक वस्त्र | माँ के प्रति सुहाग, सुरक्षा और श्रद्धा का अर्पण। |
| शीश झुकाना | प्रणाम करना, नमन करना | अहंकार का पूर्ण समर्पण। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"पर्वत विशाल है तेरा, ऊँचा मुकाम है। मैया शेरावालिये, तुझको प्रणाम है॥"
हे सिंहवाहिनी माँ! आपका यह पर्वत अत्यंत विशाल है और आपका धाम बहुत ऊँचा है। मैं आपके इस दिव्य और भव्य स्वरूप को बारंबार प्रणाम करता हूँ।
"तेरी गुफा के आगे, बहती है गंगा धारा। दर्शन को तेरे मैया, आता है जग ये सारा॥"
आपकी पवित्र गुफा के समीप से बहने वाली जलधारा गंगा के समान पवित्र है। आपके दर्शन की अभिलाषा लेकर संपूर्ण संसार के लोग आपके द्वार पर खिंचे चले आते हैं।
"लाल चुनरी चढ़े तुझे, नारियल की भेंट लाए। सच्चे हृदय से जो भी, तेरे ही दर पे आए॥"
भक्त आपके लिए श्रद्धापूर्वक लाल चुनरी और नारियल की भेंट लाते हैं। जो भी निष्कपट और सच्चे मन से आपके चरणों में आता है, आप उसकी पुकार अवश्य सुनती हैं।
"उसकी झोली को भरना, मैया तेरा काम है। मैया शेरावालिये, तुझको प्रणाम है॥"
हे माँ! अपने शरण में आए भक्तों की खाली झोली को अपनी कृपा से भरना आपका सहज स्वभाव है। मैं आपके इस कृपालु रूप को नमन करता हूँ।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के गायन के पूर्व या पश्चात निम्नलिखित देवी मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं। आपको नमस्कार है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | पर्वत विशाल है तेरा (Parvat Vishal Hai Tera) |
| आराध्य देवी | माँ दुर्गा / माँ वैष्णो देवी |
| गायक | राम शंकर (Ram Shankar) |
| गीतकार | राजदेव (Rajdev) |
| संगीतकार | राम शंकर |
| भाषा | हिंदी (Devotional Hindi) |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, शरणागति |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, माता का जगराता, मंगलवार, शुक्रवार |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"पर्वत विशाल है तेरा" भजन के मुख्य गायक कौन हैं?
इस भजन के मुख्य गायक सुप्रसिद्ध सूफी और भक्ति गायक राम शंकर हैं।
यह भजन किस देवी को समर्पित है?
यह भजन मुख्य रूप से पहाड़ों वाली माता, माँ शेरावाली और माँ वैष्णो देवी को समर्पित है।
इस भजन के गीतकार कौन हैं?
इस भजन के सुंदर और भावपूर्ण शब्द गीतकार राजदेव द्वारा लिखे गए हैं।
इस भजन को किस अवसर पर सुनना सबसे उत्तम माना जाता है?
इसे नवरात्रि के पावन दिनों में, माता के जगराते में, या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।
भजन में "गंगा धारा" का क्या महत्व है?
गंगा धारा पवित्रता और पापों के नाश का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि माँ के धाम के पास का वातावरण अत्यंत पवित्र और दिव्य है।
माँ वैष्णो देवी का पर्वत किस नाम से जाना जाता है?
माँ वैष्णो देवी का पावन मंदिर जम्मू के कटरा में स्थित "त्रिकूट पर्वत" पर है।
इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
इसका मुख्य संदेश यह है कि यदि हम सच्चे हृदय से माँ की शरण में जाएं, तो वे हमारी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और हमें भवसागर से पार उतारती हैं।
क्या इस भजन का उपयोग दैनिक पूजा में किया जा सकता है?
हाँ, दैनिक सुबह या शाम की आरती के समय इस भजन का श्रवण या गायन करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की समीक्षा करते हुए हमारे विद्वानों ने पाया कि इसके शब्द और संगीत का संयोजन अद्भुत है। यह न केवल एक पारंपरिक देवी गीत है, बल्कि यह भक्त के मन में ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास जगाने का एक सशक्त माध्यम है। राम शंकर की शास्त्रीय और सुगम संगीत की समझ ने इस भजन को कालजयी बना दिया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - माँ दुर्गा की महिमा और उनके विभिन्न स्वरूपों का वर्णन।
- पारंपरिक उत्तर भारतीय भजन संग्रह और लोक संगीत परंपराएं।
- भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा सत्यापित भजन पाठ।
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