Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

नवरात्री स्पेशल गाने (NavaratriSpecial) - Chandan Yadav Anirudh Singh Devi Pachara

चंदन यादव और अनिरुद्ध सिंह के नवरात्रि स्पेशल देवी पचरा और भक्ति गीतों का आनंद लें। माँ दुर्गा की आराधना के लिए सुंदर भोजपुरी देवी गीत, संदर्भ सहित।

देवी भजन एवं गीत

Chandan Yadav Anirudh Singh Devi Pachara - Bhaktilok

अपडेटेड: अप्रैल 2026 श्रेणी: देवी भजन, भोजपुरी भक्ति गीत पढ़ने का समय: 10 मिनट

भारतीय सनातन संस्कृति में आदिशक्ति माँ दुर्गा की उपासना का पर्व 'नवरात्र' अत्यंत उल्लास, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। वर्ष में आने वाले चार नवरात्रों (चैत्र और शारदीय मुख्य, तथा दो गुप्त नवरात्र) के दौरान संपूर्ण भारतवर्ष में देवी मंदिरों और घर-घर में माँ जगदम्बा के भजनों, पचरों और लोकगीतों की गूंज सुनाई देती है। इसी भक्तिमय परंपरा को समर्पित लोकप्रिय रचना "नवरात्री स्पेशल गाने (NavaratriSpecial) - Chandan Yadav Anirudh Singh Devi Pachara" जगत जननी माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के त्रिगुणात्मिका स्वरूप का गुणगान करती है। लोकगायिका और लोकगायक चंदन यादव तथा अनिरुद्ध सिंह द्वारा प्रस्तुत यह देवी पचरा (Devi Pachara) और भजन न केवल ग्रामीण और शहरी अंचलों में बल्कि वैश्विक स्तर पर बैठे भोजपुरी भाषियों और देवी भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के बोल, उसका गहन आध्यात्मिक अर्थ, भोजपुरी लोक संस्कृति में 'पचरा' परंपरा का महत्व तथा नवरात्र के दिनों में इसके श्रवण से मिलने वाले अलौकिक लाभों का संपूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

पवित्र देवी पचरा एवं भजन

॥ मुखड़ा ॥
निम्बवासिनी माँ अंबे भवानी, दर्शन देहि तू आई के,
चंदन अनिरुद्ध धियावत बाड़न, अरघिया लेहि तू पहुंचाई के।
जय माँ दुर्गे, जय माँ भवानी!

॥ प्रथम अंतरा ॥
भोरहि उठि के धियावत बानी, तोहार चरणवा में अरजिया लगानी,
अड़हुल के फूलवा सजवले बानी, चुनरिया लाल चढ़वले बानी।
मैया मोर पतोहू अउर बेटा, सबेरे-सबेरे तोहरे दरसवा ला तरसे,
कृपा के बरसिया तू बरसा दs, दुःखवा हर लs हे मैया आके।

॥ द्वितीय अंतरा ॥
ए माई चन्दनवा चंदन कइले, अनिरुद्ध सिंह गुण गाइलें,
भोजपुरी सुरन में मैया के महिमा, घर-घर अलख जगाइलें।
पचरा गावेली पुरबिया गंवइया, झूमे ले सारा नगरिया-डगइया,
मैया के सिंहवा जब डगमगावे, पापी के सीना दहल जावे।

॥ तृतीय अंतरा ॥
नव दिन व्रत हम राखब ए मैया, नौ रूप के ध्याएब हम खइया,
शैलपुत्री से सिद्धिदात्री ले, पूजन करब हम अति मन लाई के।
घटस्थापना अउर जोवारा जवाले, अखंड ज्योति हम बारे बानी,
मैया मोर झोली भर दs आके, बन्धन काट दs सब पापी के।

॥ समापन / टेक ॥
बोलs सांच दरबार की जय!
शारदीय नवरात्र की जय!
चंदन-अनिरुद्ध के स्वर में मैया सदा विराजे!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक समर्पित भक्त की करुण पुकार और माँ के प्रति अनन्य प्रेम का जीवंत दस्तावेज है। पचरा शैली में रचे गए इस गीत का मर्म अत्यंत गहरा है:

मुखड़ा और भाव

भजन के आरंभ में गायक 'निम्बवासिनी' (नीम के वृक्षों के पास या नीम के पत्तों से वास करने वाली) माँ अंबे भवानी का आह्वान करता है। चंदन यादव और अनिरुद्ध सिंह यह निवेदन करते हैं कि हे माँ! हम तुम्हारे द्वार पर अर्घ्य लेकर खड़े हैं, कृपया हमारे अनुष्ठान को स्वीकार करें और अपने अलौकिक दर्शन से हमें कृतार्थ करें।

अंतरा और आंतरिक भावना

भक्त प्रातःकाल उठकर माता के चरणों में अपनी अर्जी लगाता है। वह लाल चुनरी और अड़हुल (गुड़हल) का लाल फूल माता को अतिप्रिय होने के कारण समर्पित करता है। पचरा गायन की यह परंपरा भोजपुरी संस्कृति की प्राण है, जहाँ आम जनमानस अपनी ठेठ भाषा में अपनी माँ से संवाद स्थापित करता है। यहाँ कलाकार यह संदेश देते हैं कि अहंकार और पाप का नाश करने के लिए मैया का सिंह जब गर्जना करता है, तो दुष्टों का नाश निश्चित हो जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में व्रत, घटस्थापना, अखंड ज्योति और नौ रूपों (शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री) की उपासना से साधक का अंतःकरण पवित्र हो जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भोजपुरी लोक संस्कृति

यह भजन भोजपुरी क्षेत्र के पारंपरिक 'पचरा' और 'देवी गीत' विधा का उत्कृष्ट नमूना है, जो लोकमानस को सीधे माता के आध्यात्मिक संसार से जोड़ता है।

शक्ति की उपासना

नवरात्र के पावन पर्व पर माँ दुर्गा के नौ रूपों की शक्ति का आह्वान कर नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और सकारात्मकता बढ़ाने में यह भजन अत्यंत प्रभावशाली है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी गीतों और पचरों के गायन का विशेष महत्व शारदीय और चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में होता है। इसे प्रातःकाल स्नान के पश्चात शुद्ध वस्त्र धारण करके, माँ दुर्गा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित कर सुनना या गाना चाहिए। संध्या आरती के समय इस प्रकार के सुमधुर भजन घर के वातावरण को पूरी तरह से सात्विक और ऊर्जावान बना देते हैं। इसे पारिवारिक पूजन, मंदिर के अनुष्ठानों और सार्वजनिक पंडालों में भी बड़ी श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

कलाकार एवं रचना पृष्ठभूमि | Artists & Background

भोजपुरी संगीत जगत में चंदन यादव और अनिरुद्ध सिंह ने अपनी मधुर और ओजस्वी आवाज़ से पारंपरिक लोकगीतों और देवी पचरों को आधुनिक मंच प्रदान किया है। 'देवी पचरा' उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के ग्रामीण अंचलों में महिलाओं द्वारा नवरात्रि के दिनों में गाया जाने वाला एक पारंपरिक गीत रूप है, जिसमें माता के आगमन, उनके श्रृंगार और उनके पराक्रम का वर्णन होता है। इन कलाकारों ने इसी पारंपरिक थाती को सहेजते हुए आज की पीढ़ी तक पहुँचाने का सराहनीय कार्य किया है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ
पचरा (Pachara) देवी गीत / स्तुति नवरात्र के दौरान गाया जाने वाला पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत जिसमें माँ का आह्वान होता है।
निम्बवासिनी नीम में वास करने वाली माता दुर्गा का एक रूप, जिन्हें नीम और पीपल के वृक्षों में पवित्र माना जाता है।
अड़हुल गुड़हल का लाल फूल माता महाकाली और दुर्गा को अत्यंत प्रिय फूल जो ऊर्जा और समर्पण का प्रतीक है।
जोवारा (Jowara) जौ के खेत / हरियाली नवरात्र के पहले दिन बोए जाने वाले जौ, जो समृद्धि और उपजाऊपन के प्रतीक हैं।
अर्घ्य जल या पूजन सामग्री श्रद्धापूर्वक देवी चरणों में अर्पित जल, पुष्प और अक्षत।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें यह सिखाता है कि जब मनुष्य पूर्ण आत्मसमर्पण के साथ ईश्वर की शरण में जाता है, तो उसके सारे संकट स्वतः समाप्त हो जाते हैं। माता दुर्गा शक्ति, संयम और करुणा की अधिष्ठात्री हैं। जिस प्रकार एक बच्चा अपनी माता के सामने अपनी हर बात निसंकोच कहता है, उसी प्रकार साधक को भी अपनी कमियों और इच्छाओं को माता के चरणों में रखकर शुद्ध हृदय से प्रार्थना करनी चाहिए। नवरात्र का व्रत और पचरा गायन हमें अंतःशुद्धि, अनुशासन और समाज में धर्म की स्थापना का मार्ग दिखाता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन / गीत का नाम नवरात्री स्पेशल गाने - चंदन यादव & अनिरुद्ध सिंह देवी पचरा
समर्पित देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा (नवदुर्गा)
मुख्य कलाकार चंदन यादव, अनिरुद्ध सिंह
भाषा / शैली भोजपुरी (लोकगीत / पचरा शैली)
मुख्य पर्व शारदीय नवरात्र एवं चैत्र नवरात्र
प्रमुख भाव भक्ति, समर्पण, विनय और उत्सव
संबंधित पावन पाठ दुर्गा चालीसा, श्री दुर्गा सप्तशती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

देवी पचरा उत्तर भारत (विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश) का एक पारंपरिक लोकगीत रूप है जिसे मुख्य रूप से नवरात्र के दिनों में माँ दुर्गा के स्वागत, उनकी महिमा के बखान और उनकी स्तुति में गाया जाता है।

यह गीत विशेष रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्र के पावन अवसरों के लिए है, जब भक्त माता की आराधना में लीन रहते हैं और घरों में माता के आगमन का उत्सव मनाया जाता है।

माता दुर्गा को लाल रंग के फूल जैसे गुड़हल (अड़हुल) और कमल का फूल अत्यंत प्रिय हैं। लाल रंग ऊर्जा और साहस का प्रतीक माना जाता है।

इस भजन के श्रवण से मन को शांति मिलती है, घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माता रानी की असीम कृपा व आशीर्वाद प्राप्त होता है।

हाँ, नवरात्र के दिनों में सुबह और शाम की आरती या पूजा के समय इस प्रकार के सुमधुर देवी भजन और पचरा बजाने से घर का माहौल पूर्णतः पवित्र और भक्तिमय हो जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख लोक संस्कृति, पारंपरिक देवी गीतों और सनातन धर्म की नवरात्रि परंपराओं के अध्ययन पर आधारित है। सभी सामग्री पाठकों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक जानकारी को समृद्ध करने के उद्देश्य से संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत की गई है।


स्रोत एवं संदर्भ (Sources & References):

  • देवीभागवत पुराण - महर्षि वेद व्यास रचित शक्ति उपासना ग्रंथ
  • भोजपुरी लोकसंस्कृति और पचरा परंपरा - लोक साहित्य अध्ययन
  • पारंपरिक व्रत एवं उत्सव निर्देशिका

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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