bholenath bhajan lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मेरी प्रीत है तुम्ही से (MERI PRIT HAI TUMHI SE) - Bholenath Bhajan

भगवान शिव को समर्पित भावपूर्ण भजन 'मेरी प्रीत है तुम्ही से' के बोल, अर्थ और महिमा पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत है विशेष सामग्री।

Bholenath Bhajan शिव भक्ति भक्ति गीत

Bholenath Bhajan

📅 अद्यतन: 2026 ✍️ संपादकीय टीम भक्ितलोक 📖 पढ़ने में समय: 8 मिनट

"मेरी प्रीत है तुम्ही से" भगवान शिव के प्रति समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण, हृदयस्पर्शी और तल्लीनता से भरा हुआ भजन है। सनातन धर्म और भक्ति परंपरा में देवाधिदेव महादेव को 'आशुतोष' अर्थात अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होने वाले और 'भोले भंडारी' के रूप में पूजा जाता है। यह भजन साधक की उस आंतरिक एवं आध्यात्मिक अवस्था का जीवंत चित्रण करता है जहाँ भक्त का मन संसार की नश्वरता, मोह-माया और भौतिक बंधनों से पूर्णतः विरक्त होकर केवल और केवल त्रिनेत्रधारी शिव के चरणों में लीन हो जाता है।

जब कोई साधक एकाग्रचित्त होकर इस भजन का गायन या श्रवण करता है, तो उसके हृदय में भगवान शिव के प्रति अनन्य प्रेम, समर्पण और विश्वास की त्रिवेणी बहने लगती है। शिव भक्ति का यह अनूठा रूप जीव को परमात्मा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। इस लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, गायन की विधि और शिव आराधना से जुड़े विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। भगवान शिव से जुड़े अन्य पावन स्तोत्रों के लिए आप शिव तांडव स्तोत्र और माता पार्वती की वंदना हेतु पार्वती स्तोत्र का अध्ययन भी कर सकते हैं।


सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मेरी प्रीत है तुम्ही से, मेरे भोलेनाथ बाबा,

मेरी प्रीत है तुम्ही से, मेरे भोलेनाथ बाबा।

तुम ही हो मेरे स्वामी, तुम ही हो मेरे दाता,

मेरी प्रीत है तुम्ही से, मेरे भोलेनाथ बाबा॥

जटाओं में गंगा विराजे, गले में सर्पों की माला,

भस्म रमाए तन पर सोहे, डमरू वाले निराला।

तेरी महिमा अपरम्पार, हे कैलाश के वासी,

मेरी प्रीत है तुम्ही से, मेरे भोलेनाथ बाबा॥

दुनिया की इस भीड़ में बाबा, मैं अकेला रह गया,

तेरी शरण में आया हूँ मैं, अपना दुखड़ा कह गया।

तू ही मेरी नाव का माझी, तू ही है किनारा,

मेरी प्रीत है तुम्ही से, मेरे भोलेनाथ बाबा॥

सुख-दुःख जीवन के पहिये, सब तेरी ही माया हैं,

जो तेरे दर पर आए, उन्होंने मुक्ति को पाया है।

झोली मेरी भी भर दो, हे भोले त्रिपुरारी,

मेरी प्रीत है तुम्ही से, मेरे भोलेनाथ बाबा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की हर पंक्ति में भक्त की आत्मीय पुकार और महादेव के प्रति अगाध प्रेम झलकता है। मुखड़े में भक्त भगवान शिव को अपना एकमात्र स्वामी, दाता और सर्वस्व मानते हुए कहता है कि हे मेरे भोलेनाथ बाबा! मेरी संपूर्ण प्रीत, मेरा अनुराग केवल और केवल आपसे ही है। संसार में रिश्ते-नाते भले ही स्वार्थ पर आधारित हों, किंतु मेरा आपसे संबंध विशुद्ध प्रेम और भक्ति का है।

दूसरे अंतरे में शिव के अलौकिक स्वरूप का वर्णन किया गया है। उनके मस्तक पर बहने वाली पवित्र गंगा जी, गले में नागराज का हार, शरीर पर भस्म और हाथ में डमरू उनके वैरागी और कल्याणकारी स्वरूप को दर्शाते हैं। कैलाश पर्वत पर निवास करने वाले भगवान शिव की महिमा इस सृष्टि में अपरम्पार है।

तीसरे और चौथे अंतरे में साधक अपनी लाचारी और दुनिया की भीड़ में अकेलेपन की भावना को व्यक्त करता है। वह कहता है कि इस स्वार्थी दुनिया में जब वह चारों ओर से निराश हो गया, तब वह बाबा की शरण में आया है। भगवान शिव ही उसके जीवन नैया के खेवनहार (माझी) हैं और वही अंतिम किनारा हैं। सुख-दुःख को ईश्वर की माया मानते हुए भक्त त्रिपुरारी से अपनी झोली भरने की प्रार्थना करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • अनन्य समर्पण: यह भजन जीव और शिव के बीच के अद्वैत और अनन्य प्रेम का प्रतीक है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के निरंतर गायन या श्रवण से मन की चंचलता समाप्त होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
  • शिव महिमा का बखान: भगवान शिव के स्वरूप, उनके आभूषणों और उनकी शरण में जाने के लाभों का सुंदर वर्णन है।
  • भक्ति रस प्रधान: यह भजन साधক के हृदय में वैराग्य, करुणा और भक्ति का अद्भुत संचार करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भगवान शिव के इस पावन भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, किंतु इसके गायन का विशेष महत्व निम्नलिखित अवसरों पर बढ़ जाता है:

  • प्रदोष काल और सोमवार: प्रदोष व्रत तथा प्रत्येक सोमवार की पूजा के समय इसका गायन अत्यंत फलदायी होता है।
  • महाशिवरात्रि पर्व: महाशिवरात्रि की रात्रि के चारों प्रहर की पूजा और जागरण के दौरान यह भजन भक्तों को झूमने पर विवश कर देता है।
  • सावन मास: पवित्र श्रावण मास में जब चारों ओर शिवमय वातावरण होता है, तब कांवड़ यात्रा और शिवालयों में इसका गूंजना आम है।
  • दैनिक साधना: सुबह स्नान के पश्चात पूजा-पाठ करते समय या संध्या वंदन के समय इसे गाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के प्रमुख आराध्य देवाधिदेव महादेव (भगवान शिव) हैं, जिन्हें त्रिदेवों में संहारक, प्रलयकर्ता और परम योगी माना जाता है। शिव परंपरा (शैव मत) में शिव को ही परब्रह्म माना गया है। इसके साथ ही जगत जननी माता पार्वती, भगवान गणेश और स्वामी कार्तिकेय के साथ नंदी और सम्पूर्ण शिव परिवार की आराधना भी इसके अंतर्गत समाहित है। इस प्रकार की रचनाएं सदियों से संतों, भक्तों और लोक गायकों द्वारा मौखिक एवं लिखित परंपरा के माध्यम से आगे बढ़ती रही हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और ब्रज-अवधी मिश्रित लोक बोलियों के शब्दों से सजा हुआ है। इसकी काव्य शैली लयात्मक और सुमधुर है, जिसे आसानी से संगीतबद्ध किया जा सकता है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जैसे 'कैलाश के वासी', 'नाव का माझी' आदि, जो श्रोताओं के हृदय पर सीधा प्रभाव डालते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें यह महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती है कि मनुष्य को भौतिक संसार की नश्वरता में उलझने के बजाय अपने आराध्य परमात्मा पर अटूट विश्वास रखना चाहिए। जब दुनिया का हर दरवाजा बंद हो जाता है, तब भगवान शिव की शरण ही एकमात्र सच्चा आश्रय है। यह भजन अहंकार का त्याग कर विनम्रता और शरणागति का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / भाव
प्रीत प्रेम, स्नेह, अनुराग ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति भाव
आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होने वाले भगवान शिव का एक प्रमुख नाम
भस्म विभूति, राख शिव द्वारा शरीर पर रमाई जाने वाली राख जो नश्वरता का प्रतीक है
माझी खेवनहार, नाविक भवसागर से पार लगाने वाले भगवान शिव
त्रिपुरारी त्रिपुर का नाश करने वाले भगवान शिव का असुरों का संहारक रूप

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मेरी प्रीत है तुम्ही से, मेरे भोलेनाथ बाबा..."
भक्त अपने आराध्य को संबोधित करते हुए कहता है कि हे मेरे भोले बाबा! मेरा मन संसार के विषयों से विरक्त होकर केवल आपसे प्रेम करता है।

"जटाओं में गंगा विराजे, गले में सर्पों की माला..."
शिवजी के अद्वितीय और डरावने तथा सुंदर दोनों रूपों का समन्वय यहाँ दिखाया गया है। उग्र दिखने वाले सर्प और पावन गंगा उनके नियंत्रण में हैं।

"दुनिया की इस भीड़ में बाबा, मैं अकेला रह गया..."
यह मनुष्य के अकेलेपन और सांसारिक दुखों का प्रतीक है, जहाँ केवल भगवान ही सांत्वना देते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ भगवान शिव के निम्नलिखित महामृत्युंजय मंत्र या पंचाक्षर मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

ॐ नमः शिवाय ॥
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मेरी प्रीत है तुम्ही से (Meri Prit Hai Tumhi Se)
आराध्य देवता भगवान शिव (भोलेनाथ / महादेव)
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-अवधी भाव
भक्ति भाव प्रेम, समर्पण, शरणागति और विनय
मुख्य अवसर सोमवार व्रत, प्रदोष, महाशिवरात्रि, सावन मास
श्रेणी Bholenath Bhajan / शिव स्तुति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन देवाधिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित है।

इस भजन का गायन प्रत्येक सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि और सावन के महीने में करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

इसके श्रवण और गायन से मन को शांति मिलती है, भगवान शिव के प्रति भक्ति बढ़ती है और मानसिक तनाव दूर होता है।

हाँ, इसे व्यक्तिगत साधना, ध्यान के समय या परिवार के साथ सत्संग में भी पूरी तन्मयता से गाया जा सकता है।

'आशुतोष' का अर्थ है जो बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाएं। भगवान शिव थोड़े से जल, बेलपत्र और सच्चे भाव से ही अपने भक्तों पर कृपा कर देते हैं।

यह भजन सरल और सुबोध हिंदी भाषा में है, जिसे कोई भी आसानी से समझ और गा सकता है।

भगवान शिव की सबसे प्रसिद्ध आरती "जय शिव ओमकारा" है, जिसे शिव पूजा के अंत में गाया जाता है।

भजन सामान्यतः सरल भाषा में संगीतात्मक पद होते हैं जिनमें व्यक्तिगत भाव और पुकार होती है, जबकि स्तोत्र प्रायः संस्कृत में श्लोकबद्ध ग्रंथ या मंत्र रूपी रचनाएं होती हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्ितलोक की संपादकीय टीम द्वारा सनातन धर्म की पारंपरिक लोकभक्ति और शिव साधना पद्धतियों के अध्ययन पर आधारित है। इसे पाठकों की सुविधा और प्रामाणिक जानकारी हेतु संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ
  • शिव पुराण एवं लिंग पुराण के संकलित प्रसंग
  • सनातन लोक भक्ति गीत परंपरा एवं संकीर्तन संग्रह
  • पारंपरिक भजन संकलन एवं आचार्य व्याख्या

संबंधित भजन एवं लेख

शिव तांडव स्तोत्र

रावण रचित भगवान शिव का अति ओजस्वी और शक्तिशाली स्तोत्र।

पार्वती स्तोत्र

जगत जननी माँ पार्वती की वंदना और स्तुति के पावन श्लोक।

श्री हनुमान चालीसा

संकट मोचन श्री हनुमान जी की महिमा का गुणगान करती चालीसा।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!