radha bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मेरे दिल का शीशा टूट गया (Mere Dil Ka Shisha Tut Gaya) - Radha Krishan Bhajan

मेरे दिल का शीशा टूट गया राधा कृष्ण भजन के बोल, अर्थ और भावार्थ सहित। पढ़ें यह मर्मस्पर्शी वैष्णव भजन केवल Bhaktilok पर।

राधा कृष्ण भजन | Bhaktilok

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "मेरे दिल का शीशा टूट गया (Mere Dil Ka Shisha Tut Gaya)" वैष्णव भक्ति परंपरा का एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और भावुक पद है। यह भजन जीवात्मा और परमात्मा के बीच के उस अटूट संबंध को दर्शाता है जहाँ भक्त का हृदय अपने आराध्य श्री कृष्ण के वियोग में अधीर हो उठता है। राधा और कृष्ण का प्रेम किसी साधारण लौकिक प्रेम की सीमा में बंधा नहीं है, बल्कि यह परब्रह्म के साथ जीवात्मा के एकात्मकता का सर्वोच्च प्रतीक है। वृंदावन की कुंज-गलियों, यमुना के तट और निधिवन की पवित्र भूमि से जुड़ा यह भजन श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर कर देता है। इस भजन के माध्यम से प्रेम, विरह, समर्पण और करुणा के अनूठे भाव को प्रस्तुत किया गया है, जो हर वैष्णव भक्त के अंतःकरण को झकझोर देता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, गहन भावार्थ, रचनाकारों की पृष्ठभूमि, गायन शैली और इसके आध्यात्मिक महत्व का संपूर्ण अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भजन का मूल पाठ एवं शुद्ध उच्चारण के साथ स्मरण

स्थाई (मुखड़ा):
मेरे दिल का शीशा टूट गया, कोई जोड़े तो कैसे जोड़े,
मेरे श्याम से नाता छूट गया, कोई जोड़े तो कैसे जोड़े।
दिल का शीशा टूट गया...

अंतररा 1:
वृंदावन की कुंज गली में, ढूँढ थके मेरे नैन,
बिन दर्शन के सांवरिया रे, व्याकुल होता चैन।
प्रेम की डोरी टूट गई, कोई जोड़े तो कैसे जोड़े,
मेरे श्याम से नाता छूट गया, कोई जोड़े तो कैसे जोड़े।

अंतररा 2:
राधा रानी के चरणों में, मैंने शीश झुकाया है,
साँझ-सवेरे रो-रो मैंने, श्याम को मनाया है।
किस्मत का पासा फूट गया, कोई जोड़े तो कैसे जोड़े,
मेरे दिल का शीशा टूट गया, कोई जोड़े तो कैसे जोड़े।

अंतररा 3:
प्रेम नगर की रीत निराली, दर्द यहाँ पर मिलता है,
बिछड़न की इस पावन आग में, भक्त अकेला जलता है।
अखियों का काजल छूट गया, कोई जोड़े तो कैसे जोड़े,
मेरे श्याम से नाता छूट गया, कोई जोड़े तो कैसे जोड़े।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त की आंतरिक पीड़ा और प्रभु के प्रति उसकी अनन्य निष्ठा को व्यक्त करता है। 'दिल का शीशा टूट गया' पंक्ति रूपक (Metaphor) के माध्यम से उस कोमल हृदय को दर्शाती है जो जरा सी वियोग की चोट से बिखर जाता है। हृदय रूपी शीशा जब भगवान की प्राप्ति के अभाव में टूट जाता है, तो सांसारिक वस्तुएं उसे जोड़ नहीं सकतीं।

भजन के दूसरे पद में वृंदावन की कुंज गलियों और यमुना तट का स्मरण करते हुए भक्त अपनी विरह व्यथा को प्रकट करता है। कृष्ण के बिना जीवन निस्सार प्रतीत होता है। राधा रानी का स्मरण इस बात का प्रतीक है कि कृष्ण तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग श्री राधारानी की कृपा और उनके चरणों की शरण है। जब तक भक्त को राधारानी की अनुकंपा प्राप्त नहीं होती, तब तक कृष्ण प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता, केवल करुण क्रंदन और प्रभु मिलन की तड़प ही शेष रहती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण की उपासना को प्रेम लक्षणा भक्ति कहा गया है। यह भजन इसी प्रेम लक्षणा भक्ति का जीवंत दस्तावेज है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • विरह भाव की प्रधानता: यह भजन कृष्ण प्रेम में तड़प रहे भक्त के विरह (Viraha) रस को अत्यंत मार्मिक ढंग से चित्रित करता है।
  • राधा-कृपा का महत्व: भजन में स्पष्ट किया गया है कि बिना राधा रानी की कृपा के श्याम सुंदर की प्राप्ति असंभव है।
  • आंतरिक समर्पण: यह भौतिक वस्तुओं की पूजा से ऊपर उठकर आत्मिक और मानसिक समर्पण की प्रेरणा देता है।
  • संगीतबद्धता: इसकी मधुर धुन और लय श्रोताओं को तुरंत ध्यान और भक्ति की स्थिति में ले जाती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस प्रकार के भावुक भजनों को गाने और सुनने का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। इसे निम्नलिखित अवसरों और विधियों से अपनाया जा सकता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्याकाल: प्रातः काल उठकर या संध्या के समय जब मन शांत हो, तब एकांत में इस भजन का श्रवण करने से मानसिक शांति मिलती है।
  • संकीर्तन एवं सत्संग: राधा-कृष्ण के साप्ताहिक सत्संग, एकादशी जागरण और जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान इसका सामूहिक गायन बहुत आनंददायी होता है।
  • मानसिक एकाग्रता: जप या ध्यान से पूर्व मन को प्रभु की ओर मोड़ने के लिए इस भजन की पंक्तियों का मानसिक स्मरण किया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन पूर्णतः भगवान श्री कृष्ण और आद्य शक्ति स्वरूपा श्री राधा रानी को समर्पित है। गौड़ीय वैष्णव और निम्बार्क संप्रदाय में राधा-कृष्ण को एक ही तत्व माना गया है जो प्रेम के आनंद हेतु दो रूपों में प्रकट होते हैं। ब्रज क्षेत्र के संत और महाप्रभु चैतन्य देव, सूरदास, मीराबाई तथा रसखान जैसे संतों की वाणी में भी इसी प्रकार के विरह और प्रेम भाव की प्रधानता देखने को मिलती है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

प्रस्तुत भजन "मेरे दिल का शीशा टूट गया" आधुनिक और पारंपरिक भक्ति संगीत के सुंदर समन्वय का परिणाम है। इसे प्रसिद्ध गायक प्रेम मेहरा ने अपनी soulful आवाज से सजाया है। इसके गीतकार कमल सिंह पुत्थी हैं जिन्होंने ब्रज के प्रेम रस को अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में पिरोया है। अरुण मिश्रा (Diginor Studio) के संगीत संयोजन ने इस रचना को और अधिक गहराई प्रदान की है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी और ब्रजभाषा के लोक-प्रभाव से युक्त खड़ी बोली है। इसमें रूपक अलंकार ('दिल का शीशा'), उपमा और मानवीकरण का सुंदर प्रयोग हुआ है। शब्दावली सुबोध है ताकि आम से आम भक्त भी इसके मर्म को आसानी से समझ सके और भाव-विभोर हो सके।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल मनोरंजन या संगीत का आनंद नहीं देता, बल्कि जीवन के गहरे आध्यात्मिक सत्य से परिचित कराता है:

  • अहंकार का विसर्जन: दिल का टूटना इस बात का प्रतीक है कि जब तक अहंकार का आवरण नहीं टूटेगा, भीतर दिव्यता का प्रकाश प्रवेश नहीं कर सकता।
  • ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम: सुख हो या दुःख, हर परिस्थिति में भगवान से नाता जोड़े रखना ही सच्ची भक्ति है।
  • धैर्य और प्रतीक्षा: विरह की अग्नि में तपकर ही भक्त का चरित्र कुंदन की तरह निखरता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पंक्ति सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक / प्रासंगिक संदर्भ
दिल का शीशा कोमल हृदय भक्त का संवेदनशील अंतःकरण जो प्रेम में पसीजता है
कुंज गली वृंदावन की सँकरी गलियाँ वह पवित्र स्थान जहाँ लीलाएँ संपन्न हुईं
व्याकुल चैन अशांति और बेचैनी भगवान के दर्शन के बिना आत्मा की छटपटाहट
प्रेम की डोरी ईश्वर के साथ संबंध भक्त और भगवान के बीच अटूट विश्वास का बंधन
किस्मत का पासा भाग्य का खेल जीवन के उतार-चढ़ाव और प्रारब्ध के कर्म

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मेरे दिल का शीशा टूट गया, कोई जोड़े तो कैसे जोड़े..."
यहाँ भक्त कह रहा है कि मेरा हृदय जो प्रभु के प्रेम में पिरोया हुआ था, उनके वियोग के आघात से कांच की भांति टूट चुका है। अब इस टूटे हुए मन को संसार की कोई भी भौतिक वस्तु या व्यक्ति पुनः पूर्ववत नहीं कर सकता। इसे केवल मेरे आराध्य श्याम सुंदर ही अपनी कृपा के स्पर्श से जोड़ सकते हैं।

"वृंदावन की कुंज गली में, ढूँढ थके मेरे नैन..."
भक्त अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहता है कि मैंने वृंदावन के कण-कण, कुंज-गलियों और यमुना के किनारों पर अपने प्रीतम को ढूँढ लिया है, मेरी आँखें थक गई हैं परन्तु प्रभु अभी मेरी दृष्टि में प्रकट नहीं हो रहे हैं। यह स्थिति उस साधक की है जो साधना मार्ग में पराकाष्ठा पर पहुँच चुका है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को और अधिक गहराई से समझने के लिए निम्नलिखित पावन महामंत्र का स्मरण अत्यंत फलदायी माना गया है:

"कृष्णे मतिस्तु मम, राधिके रतिस्तु मम।"

अर्थात: मेरी बुद्धि श्री कृष्ण में और मेरा अनुराग (रति) श्री राधारानी में सदैव बना रहे। इसके अतिरिक्त राधा कृष्ण स्तोत्र का पाठ करने से भी विरह ताप शांत होता है और भक्ति दृढ़ होती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नाम मेरे दिल का शीशा टूट गया (Mere Dil Ka Shisha Tut Gaya)
आराध्य देवता श्री राधा कृष्ण (युगल सरकार)
गायक (Singer) प्रेम मेहरा (Prem Mehara)
गीतकार (Writer) कमल सिंह पुत्थी (Kamal Singh Putthi)
संगीतकार (Music) अरुण मिश्रा (Diginor Studio)
संगीत लेबल प्रभु कृपा (Prabhu Kripa)
मुख्य भाव विरह, प्रेम, समर्पण और करुणा
भाषा हिंदी / ब्रजभाषा मिश्रित

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध राधा-कृष्ण भजन के मुख्य गायक प्रेम मेहरा (Prem Mehara) हैं, जिन्होंने अपनी भावपूर्ण आवाज से इसे जीवंत किया है।

इस भजन के रचयिता कमल सिंह पुत्थी हैं, जिन्होंने ब्रज के प्रेम और विरह रस को बहुत सुंदर शब्दों में पिरोया है।

यह भजन सिखाता है कि भगवान के बिना जीवन अधूरा है और ईश्वर से सच्चा प्रेम ही जीवात्मा की एकमात्र वास्तविक संपत्ति है।

हाँ, इस भजन को जन्माष्टमी, राधाष्टमी, संकीर्तन संध्या, या एकादशी के पावन अवसरों पर विशेष रूप से सुना और गाया जा सकता है।

वैष्णव परंपरा में यह प्रेम लौकिक न होकर जीवात्मा (राधा/गोपी रूप) और परमात्मा (कृष्ण रूप) के शाश्वत मिलन और समर्पण का प्रतीक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार की गई है। इसमें प्रयुक्त सभी बोल, भावार्थ और संदर्भ पारंपरिक वैष्णव साहित्य तथा उपलब्ध ऑडियो-विजुअल साक्ष्यों पर आधारित हैं। लेख का उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भक्ति रस और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक वैष्णव पद संग्रह एवं ब्रज लोकगीत परंपरा।
  • श्रीमद्भागवत महापुराण एवं गौड़ीय वैष्णव दर्शन ग्रंथ।
  • प्रभु कृपा लेबल द्वारा जारी आधिकारिक ऑडियो-विजुअल प्रकाशन।

संबंधित भजन एवं लेख

आप हमारे पोर्टल पर अन्य पावन रचनाओं का भी आनंद ले सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!