Krishna Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

मेराआपकी कृपा से सब काम हो रहा है (Mera Aapki kripa se sab kaam ho raha hai Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan

इस भजन में श्री कृष्ण की कृपा की महिमा और भक्तों की श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया गया है।

प्रस्तावना एवं परिचय

कृष्ण कृपा: सब कुछ संभव हुआ

इस भजन में श्री कृष्ण की कृपा पर गहरा विश्वास व्यक्त किया गया है। इसे गाकर भक्त अपने हृदय को शांति और समर्पण से भर सकते हैं।

मेराआपकी कृपा से सब काम हो रहा है - मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है।करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है॥पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है।हैरान है ज़माना मंजिल भी मिल रही है।करता नहीं मैं कुछ भी सब काम हो रहा है॥तुम साथ हो जो मेरे किस चीज की कमी है।किसी और चीज की अब दरकार ही नहीं है।तेरे साथ से गुलाम अब गुलफाम हो रहा है॥मैं तो नहीं हूँ काबिल तेरा पार कैसे पाऊं।टूटी हुयी वाणी से गुणगान कैसे गाऊं।तेरी प्रेरणा से ही सब ये कमाल हो रहा हैं॥मुझे हर कदम कदम पर तूने दिया सहारा।मेरी ज़िन्दगी बदल दी तूने करके एक इशारा।एहसान पे तेरा ये एहसान हो रहा है॥तूफ़ान आंधियों में तूने ही मुझको थामा।तुम कृष्ण बन के आए मैं जब बना सुदामा।तेरे करम से अब ये सरेआम हो रहा है॥मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है।करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय भगवान श्री कृष्ण की अनुग्रह का अद्वितीय अनुभव है। पहले बोल से ही, भक्त अपनी स्थिति को दर्शाता है कि 'मेराआपकी कृपा से सब काम हो रहा है', जो यह संकेत करता है कि उसकी सारी सफलताएं और उपलब्धियां केवल और केवल श्री कृष्ण की कृपा के कारण हैं। भक्त अपनी निर्बंधता का अनुभव करते हुए कहता है कि 'पतवार के बिना मेरी नाव चल रही है', जिसका अर्थ यह है कि जब भगवान का आशीर्वाद हो, तो कठिनाइयाँ भी सहज हो जाती हैं। यह भजन दिखाता है कि भक्त को अपने सामर्थ्य का अभाव महसूस होता है, फिर भी वह श्री कृष्ण की कृपा को स्वीकार करता है। 'तेरे साथ से गुलाम अब गुलफाम हो रहा है' से यह स्पष्ट होता है कि कृष्ण की कृपा से भक्त को न केवल साहस मिला है, बल्कि वह अपने जीवन में नई उड़ान भरने लगा है।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन श्रद्धा, प्रेम, और समर्पण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है। जब भक्त कहता है, 'तुम साथ हो जो मेरे किस चीज की कमी है', वह यह अनुभव करता है कि भगवान के साथ होने पर किसी भौतिक वस्तु की आवश्यकता नहीं रह जाती। यह भावना उस स्थिति को दर्शाती है जब आत्मा भगवान से एकाकार होने की कोशिश करती है, और इसी एकता में समस्त सुख और शांति सुनिश्चित होती है। भक्त अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहता है, 'मैं तो नहीं हूँ काबिल, तेरा पार कैसे पाऊं', यहाँ वह स्वयं को अयोग्य मानता है, परंतु फिर भी भगवान की कृपा को स्वीकार करता है। यह कहीं न कहीं सच्चे भक्त के लिए आत्म-दान का प्रतीक है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का महत्वपूर्ण पहलू उकेरा गया है। भक्ति, जो कि प्रेम और समर्पण से उत्पन्न होती है, भक्त को सच्ची तृप्ति और शांति प्रदान करती है। भगवान श्री कृष्ण के प्रति यह अनन्य भक्ति न केवल जीवन में सकारात्मकता लाती है, बल्कि दार्शनिक दृष्टिकोण से भी अज्ञानता को दूर करने का कार्य करती है। भक्ति केवल वेदों और पुराणों में वर्णित अनुष्ठानो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हृदय से संप्रेषित अनुभव है, जैसा कि भजन में बताया गया है। श्रद्धा और प्रेम से परिपूर्ण यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चा भक्त वही है, जो न केवल अपने लिए, बल्कि समाज के लिए भी भगवान की कृपा में विश्वास रखता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय पौराणिक कथाओं में श्री कृष्ण के अनुग्रह और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का महत्त्व प्रस्तुत करता है। श्री कृष्ण ने महाभारत और भगवद गीता में परिभाषित किया है कि जो भक्त सच्चे दिल से प्रार्थना करता है, उसे कभी भी असफलता का सामना नहीं करना पड़ता। यहाँ तक कि सुदामा की कहानी में भी दर्शाया गया है कि कृष्ण ने अपने भक्त की गरीब स्थिति को देखते हुए उसका सम्मान किया और समृद्धि प्रदान की। इस भजन में सहजता और भक्ति का अद्वितीय मेल हमें सिखाता है कि भगवान की कृपा से हर कठिनाई आसान हो जाती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मकता को निर्मित करने में सहायक होता है। जब भक्त इसे गाता है, तो वह अपने हृदय में आस्था और विश्वास का संचार करता है। यह भजन तनाव को कम करने, मन को स्थिर रखने और अभ्युदय की दिशा में एक कदम आगे बढ़ने का माध्यम बनता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या शाम को करना सर्वश्रेष्ठ होता है। पूजा स्थल या स्वच्छ स्थान पर दीया जलाना चाहिए। भक्त को ध्यान केंद्रित करते हुए इस भजन का दोहराव करना चाहिए, जिससे वह कृष्ण के प्रति समर्पण की भावना को अनुभव कर सके। सही मुद्रा में बैठकर मन की एकाग्रता आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

कृष्ण भजन 'मेराआपकी कृपा से सब काम हो रहा है' का महत्त्व क्या है?

यह भजन श्रद्धा और भक्ति की अनुग्रह को दर्शाता है। भक्तों को यह संदेश देता है कि कृष्ण की कृपा से ही उनकी सभी कठिनाइयाँ समाप्त हो सकती हैं, और यह उन्हें जीवन में आंतरिक शांति एवं संतोष प्रदान करता है।

इस भजन के माध्यम से भक्त कौन-सी भावनाएँ व्यक्त करता है?

भक्त अपने सामर्थ्य की कमी का अनुभव करते हुए श्री कृष्ण की अनुग्रह पर निर्भर करता है। वह अपने हृदय में प्रेम, समर्पण और विश्वास की भावना को जगाता है, जो भक्ति मार्ग की मुख्य विशेषता है।

इस भजन का जाप करते समय किन बातों का धयान रखना चाहिए?

भजन का जाप करते समय भक्त को सही मानसिकता में होना चाहिए। स्वच्छ स्थान पर बैठकर ध्यान केंद्रित करते हुए भजन का जाप करना चाहिए। पूजा में दीया जलाना और कृष्ण की तस्वीर के सामने बैठना भी लाभदायक होता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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