Matarani Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

गुरूजी को अपने घर बुलाना है तो यहं (Guru Ji Pyare @taranhar)

गुरूजी को अपने घर बुलाने के लिए यह भावपूर्ण भजन और प्रार्थना विधि जानें। गुरु कृपा और शांति प्राप्ति हेतु इस भक्तिमय लेख को संदर्भ सहित पढ़ें।

सनातन धर्म और वैदिक संस्कृति में गुरु को साक्षात परब्रह्म का स्वरूप माना गया है। 'गुरूजी को अपने घर बुलाना है तो यह भजन जरूर सुनें' केवल एक मधुर भजन नहीं है, बल्कि यह एक साधक के हृदय की व्याकुल पुकार और पूर्ण शरणागति का जीवंत दस्तावेज है। जब कोई भक्त अपने जीवन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान और शांति का प्रकाश चाहता है, तब वह अपने गुरुदेव को अपने गृह और हृदय में आमंत्रित करता है। यह भजन 'जय गुरु जी' के पावन संकीर्तन के माध्यम से साधक को यह बोध कराता है कि गुरु की उपस्थिति किसी भौतिक सीमा में बंधी नहीं है, बल्कि यह मन की शुद्धता, श्रद्धा और अनन्य भक्ति का विषय है। इस भजन का नियमित श्रवण और कीर्तन करने से साधक के अंतःकरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मानसिक क्लेशों का शमन होता है और गुरु कृपा की प्रत्यक्ष अनुभूति होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:

गुरूजी को अपने घर बुलाना है,
तो यह भजन जरूर सुनना है।
जय गुरु जी, जय गुरु जी,
मेरे प्यारे गुरु जी, जय गुरु जी।

अंतरा 1:

मन की आँखों से जब देखोगे,
गुरु को अपने पास पाओगे।
सच्चे मन से जो पुकारेगा,
गुरु जी को अपने घर बुलाएगा।
जय गुरु जी, जय गुरु जी...

अंतरा 2:

दुख-दर्द सब मिट जाएंगे,
जब गुरु जी घर में आएंगे।
खुशियों की बहार आएगी,
जीवन में नई चमक लाएगी।
जय गुरु जी, जय गुरु जी,
मेरे प्यारे गुरु जी, जय गुरु जी।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन अत्यंत सरल शब्दों में अध्यात्म के सबसे गूढ़ रहस्य को प्रकट करता है। भजन का मुख्य भाव 'गुरु-आह्वान' और 'आत्म-शुद्धि' है। यहाँ 'घर' शब्द के दो अर्थ हैं—पहला हमारा भौतिक निवास स्थान जहाँ हम रहते हैं, और दूसरा हमारा 'हृदय-रूपी मंदिर' जिसमें आत्मा निवास करती है।

भजन की शुरुआत में ही साधक को यह निर्देश दिया गया है कि यदि वह अपने जीवन में गुरु की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करना चाहता है, तो उसे इस भजन के माध्यम से अपने भीतर भक्ति का भाव जाग्रत करना होगा। 'जय गुरु जी' का संकीर्तन केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है, बल्कि यह अहंकार को मिटाकर गुरु चरणों में स्वयं को समर्पित करने की प्रक्रिया है।

प्रथम अंतरे में 'मन की आँखों' का उल्लेख किया गया है। हमारी भौतिक आँखें केवल नश्वर संसार को देख सकती हैं, लेकिन गुरु तत्व को देखने के लिए विवेक, वैराग्य और श्रद्धा की आंतरिक दृष्टि की आवश्यकता होती है। जब साधक निष्कपट और सच्चे मन से पुकारता है, तो गुरुदेव की असीम अनुकंपा से उसका अंतःकरण आलोकित हो उठता है। द्वितीय अंतरे में गुरु के आगमन से होने वाले आध्यात्मिक और व्यावहारिक परिवर्तनों का वर्णन है। गुरु के आने से अज्ञान जनित सभी दुख-दर्द समाप्त हो जाते हैं और जीवन में आनंद की शाश्वत बहार आ जाती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • अनन्य शरणागति का भाव: यह भजन साधक को सिखाता है कि गुरु की शरण में जाने के बाद किसी अन्य सहारे की आवश्यकता नहीं रह जाती।
  • आंतरिक दृष्टि का जागरण: 'मन की आँखों से देखना' इस भजन का केंद्रीय दर्शन है, जो बाह्य आडंबरों को छोड़कर अंतर्मुखी होने की प्रेरणा देता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह: 'जय गुरु जी' महामंत्र का बार-बार दोहराव वातावरण को शुद्ध करता है और मानसिक तनाव को दूर करता है।
  • सरलता और सुगमता: इस भजन की भाषा इतनी सरल है कि कोई भी सामान्य भक्त इसे आसानी से गा सकता है और इसके गहरे अर्थ को समझ सकता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि गुरु की आराधना के लिए प्रत्येक क्षण शुभ माना गया है, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित विधि अत्यंत फलदायी मानी जाती है:

  • ब्रह्ममुहूर्त या संध्याकाल: सुबह 4:00 से 6:00 बजे के बीच या शाम को सूर्यास्त के समय शांत चित्त होकर इस भजन को सुनना सबसे उत्तम है।
  • गुरुवार और पूर्णिमा: गुरुवार का दिन गुरु आराधना के लिए विशेष रूप से समर्पित है। इस दिन गुरुजी के चित्र के समक्ष धूप-दीप जलाकर इस भजन का संकीर्तन करें।
  • सत्संग और सामूहिक कीर्तन: जब कई भक्त मिलकर एक साथ इस भजन को गाते हैं, तो सामूहिक ऊर्जा का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जिससे ध्यान लगाना सहज हो जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन सार्वभौमिक 'गुरु तत्व' को समर्पित है। सनातन परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का संयुक्त स्वरूप माना गया है। आधुनिक काल में यह भजन पूज्य 'गुरुजी' (बड़े मंदिर वाले) के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है, जो उन्हें शिव का अवतार मानते हैं। इसके अतिरिक्त, यह भजन किसी भी उस सद्गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम है जो साधक को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस भजन की रचना समकालीन भक्ति संगीत की परंपरा में हुई है। इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक जीवन की भागदौड़ और मानसिक अशांति से घिरे मनुष्यों को गुरु की शरण में लाना है। पारंपरिक रूप से भारत में कबीरदास, तुलसीदास और गुरु नानक देव जी ने गुरु महिमा के अनेक पदों की रचना की है। यह भजन उसी समृद्ध परंपरा का एक आधुनिक और सुगम रूप है, जो आज की पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा सरल खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें लोक-संवेदना और भक्ति रस का सुंदर मिश्रण है। इसकी काव्य शैली 'प्रार्थना गीत' की है। इसमें प्रयुक्त रूपक जैसे 'मन की आँखें' और 'खुशियों की बहार' सीधे हृदय को स्पर्श करते हैं। इसकी लयबद्धता और सरल तुकबंदी इसे अत्यंत गेय (गाने योग्य) बनाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

  1. सच्ची पुकार की शक्ति: ईश्वर या गुरु केवल भौतिक उपहारों से प्रसन्न नहीं होते, वे भक्त के सच्चे और निष्कपट भाव के भूखे होते हैं।
  2. दुखों का अंत ज्ञान से: जीवन के दुख केवल भौतिक सुखों से दूर नहीं हो सकते; उनके स्थायी निवारण के लिए गुरु द्वारा प्रदत्त ज्ञान की आवश्यकता होती है।
  3. धैर्य और विश्वास: गुरु पर पूर्ण विश्वास रखने से कठिन से कठिन समय भी आसानी से कट जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मन की आँखें आंतरिक विवेक दृष्टि ज्ञान चक्षु जो अज्ञानता का नाश करते हैं।
पुकारना सच्चे हृदय से प्रार्थना करना अहंकार रहित होकर गुरु को याद करना।
खुशियों की बहार असीम आनंद की प्राप्ति सांसारिक सुखों से परे मिलने वाला आत्मिक संतोष।
जय गुरु जी गुरु की विजय हो गुरु तत्व के प्रति पूर्ण समर्पण का उद्घोष।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"गुरूजी को अपने घर बुलाना है, तो यह भजन जरूर सुनना है।"
यदि आप चाहते हैं कि आपके जीवन और घर में गुरु की दिव्य ऊर्जा का प्रवेश हो, तो आपको अपने भीतर श्रद्धा का भाव जगाना होगा। यह भजन उस भाव को जगाने का साधन है।

"मन की आँखों से जब देखोगे, गुरु को अपने पास पाओगे।"
गुरु कहीं दूर नहीं हैं, वे हमारे भीतर ही विराजमान हैं। जब हम ध्यान और भक्ति के माध्यम से अपने अंतःकरण में झांकते हैं, तो हमें उनकी उपस्थिति का साक्षात अनुभव होता है।

"दुख-दर्द सब मिट जाएंगे, जब गुरु जी घर में आएंगे।"
जैसे सूर्य के उदय होते ही अंधकार स्वतः समाप्त हो जाता है, वैसे ही गुरु के ज्ञान रूपी प्रकाश के जीवन में आते ही सारे मानसिक और शारीरिक कष्ट समाप्त हो जाते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

गुरु महिमा को दर्शाने वाला यह प्रसिद्ध श्लोक इस भजन के मूल भाव को और अधिक सुदृढ़ करता है:

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु, गुरुर देवो महेश्वरः।
गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः॥

अर्थ: गुरु ही ब्रह्मा हैं, गुरु ही विष्णु हैं और गुरु ही भगवान शंकर हैं। गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं, ऐसे पूज्य गुरुदेव को मैं बारंबार नमस्कार करता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम गुरूजी को अपने घर बुलाना है (जय गुरु जी)
मुख्य विषय गुरु भक्ति, गुरु आह्वान, आत्म-समर्पण
भाषा सरल हिंदी
गायन शैली भक्ति रस, सुगम संगीत
उपयुक्त अवसर गुरुवार पूजा, सत्संग, गुरु पूर्णिमा, दैनिक प्रार्थना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के मन में गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास जगाना है, ताकि वह अपने अंतःकरण में गुरु की दिव्य उपस्थिति का अनुभव कर सके।

इसका अर्थ है अपनी आंतरिक चेतना, विवेक और श्रद्धा को जाग्रत करना। जब हम बाहरी दुनिया के आकर्षणों से हटकर भीतर ध्यान लगाते हैं, तो हमें गुरु तत्व का साक्षात्कार होता है।

हाँ, इस भजन को रोज सुनने से मन शांत होता है, घर का वातावरण शुद्ध होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

यह भजन सार्वभौमिक गुरु तत्व को समर्पित है। भक्त इसे अपने दीक्षा गुरु, सद्गुरु या पूज्य गुरुजी (बड़े मंदिर वाले) के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए गाते हैं।

सुबह ब्रह्ममुहूर्त में या शाम की आरती के समय इस भजन को गाना या सुनना सबसे अधिक फलदायी और शांतिदायक माना जाता है।

गुरु भक्ति से हमारे भीतर विनम्रता, धैर्य, करुणा और सही निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है, जिससे हमारा पारिवारिक और व्यावसायिक जीवन सुखमय बनता है।

हाँ, बच्चों को यह भजन सुनाने से उनके मन में अच्छे संस्कार विकसित होते हैं और उनकी एकाग्रता तथा मानसिक शांति में वृद्धि होती है।

इसका मुख्य संदेश यह है कि गुरु की कृपा पाने के लिए किसी बाहरी आडंबर की नहीं, बल्कि केवल एक सच्चे और निष्कपट हृदय की आवश्यकता होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक के विद्वान संपादकों द्वारा सनातन धर्म की गुरु-शिष्य परंपरा और वैदिक दर्शन के आलोक में तैयार किया गया है। इस भजन की व्याख्या में श्रीमद्भगवद्गीता और गुरु गीता के सिद्धांतों का समावेश किया गया है ताकि पाठकों को न केवल भजन के शब्द बल्कि उसका गहरा आध्यात्मिक मर्म भी समझ में आ सके। यह "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" पाठकों के कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता: गुरु-शिष्य संवाद और शरणागति का सिद्धांत।
  • स्कंद पुराण (गुरु गीता): गुरु की महिमा और उनके ध्यान की विधि।
  • पारंपरिक सत्संग संग्रह: गुरु भजनों की मौखिक और लिखित परंपरा।

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संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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