Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जगराता मेरी मैया दा (Jagrata Meri Maiya Da) - Devi Bhajan MASTER SALEEM

पढ़ें जगराता मेरी मैया दा (Jagrata Meri Maiya Da) - Devi Bhajan MASTER SALEEM - Bhaktilok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात

‘जगराता मेरी मैया दा’ मास्टर सलीम द्वारा स्वरबद्ध एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी देवी भजन है। यह भजन माँ दुर्गा की आराधना, उनके प्रति अटूट विश्वास और जगराता (जागरण) की महिमा को समर्पित है। पंजाबी लोक संगीत की मिठास और भक्ति के गहरे भावों का मिश्रण इस भजन को भक्तों के बीच विशेष स्थान दिलाता है। जगराता का अर्थ केवल रात भर जागना नहीं, बल्कि अपनी आत्मा को अज्ञान के अंधकार से निकालकर भक्ति के प्रकाश में जागृत करना है। मास्टर सलीम की ओजस्वी आवाज में यह भजन माँ की करुणा, उनकी शक्ति और भक्तों की पुकार को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, अष्टमी, नवमी और देवी जागरण के कार्यक्रमों में गाया जाता है, जो वातावरण को भक्तिमय और ऊर्जावान बना देता है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, शास्त्रीय संदर्भ और इसके गायन की महिमा का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जगराता मेरी मैया दा,
मैं तां रल-मिल ज्योतां जगावांगी,
मेरी मैया दा जगराता...

लाल चुनरियाँ ओढ़ के मैया, द्वारे तेरे आई,
खुशियाँ ले के आई मैया, झोलियाँ भर लाई,
मैं तां चरणों में शीश झुकावांगी,
मेरी मैया दा जगराता...

शेरों वाली मैया मेरी, कष्ट मिटाती है,
भटके हुए राही को, राह दिखाती है,
मैं तां गुण तेरे मैया गावांगी,
मेरी मैया दा जगराता...

ऊंचे पहाड़ों वाली मैया, मेहरां बरसाती है,
जो भी दर पे आता है, मुंहमांगा फल पाती है,
मैं तां द्वारे पे अलख जगावांगी,
मेरी मैया दा जगराता...

भक्तों की टोली आई, जयकारे लगाती है,
मैया की पावन ज्योत, अंधकार मिटाती है,
मैं तां नच-नच के मैया नू मनावांगी,
मेरी मैया दा जगराता...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन मूल रूप से पंजाबी और हिंदी मिश्रित भाषा में रचित है, जो उत्तर भारत की जीवंत जागरण संस्कृति को दर्शाता है। भजन का मुख्य भाव पूर्ण समर्पण और उत्सव का है। यहाँ भक्त अपनी आराध्या देवी माँ के जागरण की तैयारी कर रहा है।

प्रथम अंतरा: भक्त कहता है कि "जगराता मेरी मैया दा, मैं तां रल-मिल ज्योतां जगावांगी।" इसका अर्थ है कि मेरी माँ का जागरण है और हम सब मिलकर श्रद्धा और विश्वास की ज्योत जलाएंगे। यहाँ 'ज्योत' केवल भौतिक दीपक नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, भक्ति और आंतरिक चेतना का प्रतीक है।

द्वितीय अंतरा: "लाल चुनरियाँ ओढ़ के मैया, द्वारे तेरे आई..." भक्त माँ के दिव्य रूप की कल्पना करता है कि माँ लाल चुनरी ओढ़कर अपने भक्तों के द्वार पर आई हैं। वे अपने साथ असीम खुशियाँ लेकर आई हैं और सबकी खाली झोलियाँ भर रही हैं। इस कृपा के बदले भक्त माँ के चरणों में अपना शीश झुकाकर कृतज्ञता व्यक्त करता है।

तृतीय अंतरा: "शेरों वाली मैया मेरी, कष्ट मिटाती है..." यह पंक्ति माँ के संकटमोचन रूप को दर्शाती है। सिंहवाहिनी माँ अपने भक्तों के सभी सांसारिक और आध्यात्मिक कष्टों का निवारण करती हैं। जो राही जीवन के मार्ग में भटक गए हैं, उन्हें सही दिशा और सन्मार्ग दिखाती हैं। भक्त प्रतिज्ञा करता है कि वह जीवन भर माँ के ही गुणगान गाएगा।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह देवी साधना का एक सुगम माध्यम है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सामूहिक भक्ति का संदेश: भजन में "रल-मिल" (मिलजुलकर) शब्द का प्रयोग सामाजिक समरसता और सामूहिक प्रार्थना की शक्ति को रेखांकित करता है।
  • ऊर्जा और उत्साह: मास्टर सलीम की गायन शैली और पंजाबी ढोल की थाप इस भजन में एक अनूठी ऊर्जा भर देती है, जिससे श्रोताओं का मन नृत्य करने को आतुर हो जाता है।
  • शरणगति का भाव: भजन की प्रत्येक पंक्ति में माँ के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास झलकता है।
  • सांस्कृतिक धरोहर: यह भजन पंजाब और हिमाचल प्रदेश की समृद्ध 'माता के जागरण' की परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि माँ की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, लेकिन इस भजन का वास्तविक आनंद और प्रभाव विशेष अवसरों पर दोगुना हो जाता है:

सर्वोत्तम समय: इस भजन को गाने और सुनने का सबसे उपयुक्त समय रात्रि काल का जागरण, संध्या आरती के बाद का समय या सुबह की पूजा है। विशेष रूप से नवरात्रि व्रत विधि के दौरान नौ दिनों तक इस भजन का गायन घरों और मंदिरों में किया जाता है।

गायन की विधि: इस भजन को गाते समय हाथ में ताली बजाना, ढोलक या मंजीरे का प्रयोग करना और सामूहिक रूप से कोरस में गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। भजन गाते समय मन में माँ की छवि का ध्यान करना चाहिए और अंत में माँ दुर्गा की आरती अवश्य करनी चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन आदि शक्ति माँ दुर्गा (शेरावाली माता, पहाड़ों वाली माता) को समर्पित है। सनातन धर्म में माँ दुर्गा को शक्ति, करुणा, और ममता की प्रतिमूर्ति माना गया है।

मास्टर सलीम का योगदान: मास्टर सलीम सूफी और लोक संगीत के एक प्रतिष्ठित गायक हैं। उन्होंने अपनी बुलंद और सुरीली आवाज से देवी भजनों को एक नया आयाम दिया है। उनके भजनों में सूफी संतों जैसी तड़प और माँ के प्रति एक अबोध बालक जैसा प्रेम दिखाई देता है। इस भजन के माध्यम से उन्होंने माँ के ममतामयी और कष्टनिवारक स्वरूप की वंदना की है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन उत्तर भारतीय लोक संस्कृति, विशेषकर पंजाब की 'चौकी' और 'जागरण' परंपरा से प्रेरित है। सदियों से पंजाब और जम्मू-कश्मीर के क्षेत्रों में माता वैष्णो देवी और ज्वाला जी के सम्मान में जागरण आयोजित करने की प्रथा रही है। इस भजन की रचना इसी पृष्ठभूमि में की गई है ताकि आम जनमानस अपनी सरल लोकभाषा में माँ से जुड़ सके। इसमें प्रयुक्त शब्द अत्यंत सरल हैं जो सीधे हृदय को छूते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा पंजाबी मिश्रित हिंदी (खड़ी बोली) है। यह भाषा शैली उत्तर भारत के विशाल क्षेत्र में आसानी से समझी और गाई जाती है।

काव्य सौंदर्य:

  • अनुप्रास अलंकार: "रल-मिल", "नच-नच" जैसे शब्दों के प्रयोग से काव्य में संगीतमय प्रवाह उत्पन्न होता है।
  • बिंब योजना: "लाल चुनरियाँ", "शेरों वाली", "ऊंचे पहाड़" जैसे शब्द श्रोता के मन में माँ के दिव्य स्वरूप का एक सजीव चित्र अंकित कर देते हैं।
  • लय और ताल: भजन की गति द्रुत (तेज) है, जो भक्ति रस के साथ-साथ वीर और अद्भुत रस का संचार करती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक और आध्यात्मिक सीख देता है:

1. अंधकार से प्रकाश की ओर: जगराता का वास्तविक अर्थ है अज्ञानता की नींद से जागना। जब हम माँ की ज्योत जलाते हैं, तो हमें अपने भीतर के क्रोध, लोभ और मोह के अंधकार को मिटाने का संकल्प लेना चाहिए।

2. निस्वार्थ समर्पण: माँ के चरणों में शीश झुकाना अहंकार के विसर्जन का प्रतीक है। जब तक मनुष्य का अहंकार शांत नहीं होता, तब तक उसे वास्तविक शांति और ईश्वरीय कृपा प्राप्त नहीं हो सकती।

3. भटके हुए को मार्ग दिखाना: "भटके हुए राही को राह दिखाती है" - यह पंक्ति हमें सिखाती है कि जब भी हम जीवन के चौराहे पर असमंजस में हों, हमें ईश्वर की शरण लेनी चाहिए। वे किसी न किसी रूप में हमारा मार्गदर्शन अवश्य करते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
जगराता रात भर जागकर की जाने वाली पूजा आत्मा की जागृति और अज्ञान का नाश
रल-मिल मिलजुलकर / सामूहिक रूप से एकता और सामाजिक समरसता का भाव
ज्योतां दीपक / पावन ज्योत ज्ञान और दिव्य प्रकाश का प्रतीक
मेहरां कृपा / दया माँ की असीम करुणा और आशीर्वाद
अलख जगाना ईश्वर के नाम की पुकार लगाना अंतःकरण को जागृत करने की प्रक्रिया

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जगराता मेरी मैया दा, मैं तां रल-मिल ज्योतां जगावांगी..."
मेरी प्यारी माँ का दिव्य जागरण है, और मैं अपने सभी भाई-बहनों और भक्तों के साथ मिलकर श्रद्धा की ज्योत प्रज्वलित करूँगी।

"लाल चुनरियाँ ओढ़ के मैया, द्वारे तेरे आई..."
हे माँ! आप लाल रंग की अत्यंत सुंदर चुनरी धारण करके अपने भक्तों के कल्याण के लिए उनके द्वार पर पधारी हैं।

"खुशियाँ ले के आई मैया, झोलियाँ भर लाई..."
आप अपने साथ सुख, समृद्धि और आनंद का खजाना लेकर आई हैं और हर याचक की खाली झोली को अपनी दया से भर रही हैं।

"शेरों वाली मैया मेरी, कष्ट मिटाती है..."
सिंह पर सवार होकर दुष्टों का संहार करने वाली मेरी माँ अपने शरणागत भक्तों के सभी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों को पल भर में दूर कर देती हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के गायन से पूर्व या पश्चात माँ दुर्गा के इस सिद्ध मंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: जो सभी मंगलों में मंगल रूप हैं, कल्याणमयी हैं, पुरुषार्थ को सिद्ध करने वाली हैं, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं, उन नारायणी देवी को बारंबार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जगराता मेरी मैया दा (Jagrata Meri Maiya Da)
मुख्य गायक मास्टर सलीम (Master Saleem)
समर्पित देवता माँ दुर्गा / शेरावाली माता
भाषा पंजाबी और हिंदी (मिश्रित)
भक्ति का भाव उत्सव भाव, समर्पण, आनंद और करुणा
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता का जागरण, चौकी, अष्टमी-नवमी पूजन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'जगराता मेरी मैया दा' भजन के मुख्य गायक कौन हैं?

इस भजन के मुख्य गायक प्रसिद्ध सूफी और पार्श्व गायक मास्टर सलीम हैं। उनकी ओजस्वी आवाज ने इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

इस भजन को किस अवसर पर गाना सबसे उत्तम माना जाता है?

यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि के पावन दिनों, माता की चौकी, जगराता और पारिवारिक धार्मिक उत्सवों के दौरान गाया जाता है।

जगराता का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

जगराता का अर्थ केवल शारीरिक रूप से रात भर जागना नहीं है, बल्कि इसका आध्यात्मिक अर्थ अपनी सोई हुई चेतना को जगाना और अज्ञानता के अंधकार को दूर करना है।

इस भजन में 'ज्योत' किसका प्रतीक है?

भजन में 'ज्योत' ज्ञान, पवित्रता, और ईश्वर की जीवंत उपस्थिति का प्रतीक है। यह हमारे मन के भीतर भक्ति की लौ को प्रज्वलित करने का संकेत देती है।

क्या इस भजन को दैनिक पूजा में गाया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को आप अपनी दैनिक संध्या आरती या सुबह की पूजा के समय भी गा सकते हैं। यह मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

इस भजन की भाषा शैली कैसी है?

इस भजन की भाषा पंजाबी और हिंदी का एक सुंदर मिश्रण है, जो इसे अत्यंत सरल, सुमधुर और आम लोगों के लिए सुलभ बनाती है।

माँ दुर्गा को 'शेरों वाली' क्यों कहा जाता है?

सिंह (शेर) शक्ति, साहस और निर्भयता का प्रतीक है। माँ दुर्गा का वाहन सिंह होने के कारण उन्हें आदरपूर्वक 'शेरों वाली माता' कहा जाता है।

इस भजन को सुनते समय किस प्रकार की भावना मन में होनी चाहिए?

इस भजन को सुनते या गाते समय मन में पूर्ण समर्पण, हर्षोल्लास और माँ के प्रति एक अबोध बालक जैसी श्रद्धा होनी चाहिए।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की समीक्षा करते हुए हमारे विद्वानों ने पाया कि यह भजन न केवल संगीत की दृष्टि से उत्कृष्ट है, बल्कि यह भक्तों को सामूहिक रूप से ईश्वर से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है। मास्टर सलीम की अनूठी गायन शैली ने पारंपरिक पंजाबी लोक धुनों को आधुनिक भक्ति संगीत के साथ बहुत ही खूबसूरती से पिरोया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - माँ दुर्गा की महिमा और चरित्र।
  • पारंपरिक उत्तर भारतीय जागरण एवं माता की चौकी लोक परंपराएं।
  • मास्टर सलीम के आधिकारिक भक्ति एल्बम और प्रस्तुतियां।

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन पसंद आया है, तो आप हमारी वेबसाइट पर निम्नलिखित लेख और भजन भी पढ़ सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 08 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!